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कामुक लघु कहानियाँ
#4
तो दोस्तो जैसा कि हम सबको पता है कि होली में रंग लगाने के लिए सामने वाले को टच तो करना ही पड़ता है और उसको रंग लगने से बचना होता है इसलिए ही इसको होली खेलना बोलते है तो सिरु करते है इस रंग के खेल को चुदाई के खेल तक कैसे पहुँचाया।


मेरी उम्र 25 साल , चार गर्लफ्रैंड को चोदने का अनुभव रुको रुको गर्लफ्रैंड का मतलब ये बिल्कुल नही है कि सिर्फ लड़की ही चोदी हो , लड़की थी तब सिर्फ मसला मसली हुई पर चुदाई हुई उनकी शादी के बाद पर एक शादी से पहले ही अपना कौमार्य भंग मुझ से करा चुकी थी।।।और शादी के बाद उसका एक भी छेद ऐसा नहीं रह जहां उसने मुझ से मेरा  लंड ना लिया हो ।

 तो ये तो रहा मेरा चुदाई का अनुभव।

अब थोड़ा दोस्त व उसके परिवार के बारे में जान लेते है जिस से आपको सभी दृश्य क्लियर हो जाये।

दोस्त का घर मेरे घर 5 मिनट की दूरी पर है पर उसके गजर के आप पास के कम ही घर है मतलब उसके बगल के दोनों प्लाट खाली है उसका घर 2 मंजिला है और छत पर एक रूम भी है  दोस्त की फैमिली में अभी उसका बुड्ढा बाप ( सौतेला)  जवान मां और मेरा दोस्त जो कि 21 साल का है इसके अलावा उसकी बहन जो कि उस से 3 साल बड़ी और मेरी सहपाठी और साथ साथ गर्लफ्रैंड जिसकी शादी 1 साल पहले ही हो चुकी है,

 इस दोस्त का बाप ज्यादातर अपने गांव में ही रहता है और मेरा दोस्त व उसकी माँ दोनों ही मेरी कॉलोनी में रहते है ।।।

तो अब आते है मुद्दे की बात पर।

होली के दिन मैंने हल्की सी भांग पी ली और कुछ भाभियों को अपने जिस्म को मसलवाते देख कर मेरे भी लंड में मरोड़ उठने लगी ,

मैंने दोस्त को फ़ोन किया क्योंकि उसकी छत वाले रूम में हम दोनों कई बार पोर्न देख चुके थे उस में उसमें स्टडी रूम बनाया हुआ था। मैंने बोला तैयार रहना आ रहा हूँ होली खेलने।। वो बोला कि मैं घर पर हूँ ही नही इतने में पीछे से उसकी मां की आवाज आ गयी , मैं बोला साले घर ही तो है रुक में आया ( असल में ये मेरा साला भी था क्योंकि इसकी बहन मेरी gf थी और इस चक्कर में ही मैंने इसको मेरा दोस्त बनाया था )

थोड़ी देर बाद घर पहुँचा तो देखा बाहर हॉल में मेरे दोस्त का बुड्ढा बाप एक हाफ लेके बैठा हुआ था जो कि लगभग खत्म हो गया था।

मैंने जाते ही उनको प्रणाम किया और उनके रंग लगा कर पैर छुए।।।

उन्होंने मुझे वाइन आफर की । मैंने कहा आप लो अंकल मैं नहीं लेता,

उसने बताया कि वो फुल हो चुका है , मैंने उसके बेटे के बारे में पूछा तो वो बोला अभी तो यही था,

उसने अपनी धर्मपत्नी को आवाज लगाई - सुनो , कामिनी , रोहित आया है, इसको कुछ खाने को ले आओ ये पी तो रहा नहीं है होली खेलने आया है मयंक किधर गया।

आयी , और आप नहा लो अब अगर आपकी दारू खत्म हो गयी हो तो शाम होने को आई है।।

थोड़ी देर बाद व्व आंटी हॉल में आई उसको देख कर मेरा मुँह खुला का खुला रह गया क्या लग रही थी बाल खुले हुए आगे को हो रखे थे गीले बालों की वजह से उसका उसका ब्लाउज गीला हो कर उसकी ब्रा का कलर दिखा रहा था, साडी कमर से काफी नीचे थी , आंखों में हवस दिख रही थी।। मैं उसके ब्लाउज में कैद स्तनों को ही देख रहा था।।

जब वो मेरे नजदीक आयी तो मैंने उस से भी पूछा कि मयंक कहाँ है तो वो बोली व्व तो तुम्हारा फ़ोन आते ही मुझे बोल कर घर से बाहर चला गया।।

अब वो बिल्कुल मेरे नजदीक आ गयी तो मैंने झुक कर उसके पैर छू लिए ,

उसने बोला अरे अरे ये क्या कर रहे हो इतनी बुड्ढी भी नही हुई हूँ मैं की तुम मेरे पैर छुओ।।।

पहली बात तो तुम आंटी बोल रहे हो ये भी मुझे पसंद नहीं है पर मेरे बेटे के दोस्त हो तो चलो ये तो चल गया ,

अब मैं भी कहाँ पीछे हटने वाला था मैं भी मौके का फायदा उठाते हुए बोला हां पर आपको भाभी जी तो बोल नहीं सकता पर हो आप देखने में  भाभी जैसी ही लगती है ।

अंकल की वजह से आपको आंटी बोलता हूं वरना मैं तो भी ही बोल लूं अगर आप बोले तो

ये सब बात तब हो रही थी जब दोस्त का बुड्ढा बाप रूम में चल गया था।

आंटी - तो बोल लिया करो किसने मना किया है ।।।

मैं - अच्छा तो फिर आज से ही सिरुआत करता हूँ।

ये बोलते ही मैंने अपने हाथों में गुलाल ले लिया और उसको लगाने के लिए आगे बढ़ा वो बोली-

नहीं नहीं अभी तो नह कर निकली हूँ अब मत लगाओ प्लीज ।

ये बोलते हुए वो अपने पति वाले रूम में भाग गई ।

मेरे अरमान जो 2 मिनट पहले उसके बदन को देख कर जागे थे वो अब ठंडे हो गए क्योकि उसके पति की उपस्थिति में , मैं कुछ नही कर सकता था,

पर हुआ कुछ अलग ही अंकल ने उसको पीछे से पकड़ लिया और बोले - आ रोहित लगा रंग ,

मैं झट से आगे बढ़ा और उसके स्लीवेलेस ब्लाउज से झांकते हुए उसके हाथों पर रंग लगाया।

अंकल - गालों पर लगा इसके रोहित,

आंटी- नहीं नहीं प्लीज गालों पर नहीं ।।। रुको रुको में लगवा रही हूं।

आप तो छोड़ो खुद से तो कुछ होता नहीं है दूसरों से लगवा रहे हो।।।

अंकल ने आंटी को थोड़ा था ढीला छोड़ा तो वो उन से छुड़ा कर ओर उनको बेड पर धक्का दे कर दूसरी तरफ से निकल कर बाहर चली गयी।।

मैंने अंकल को उठाया , अंकल लगी तो नहीं ,

नहीं बेटा नहीं लगी इस को छोड़ना मत आज लगा कर ही जाना , मुझे थोड़ी ज्यादा हो गयी है ।।।वरना मैं तेरी हेल्प करता।।

मैं बोला कोई नहीं अंकल आज आंटी को रंग लगा कर जरूर जाऊंगा।।

मैं बाहर आया तो मुझ पर एक बाल्टी पानी बाथरूम की तरफ से आया , मुझे समझते देर ना लगी क्योंकि जो अंदर हुआ कि कैसे उस भाभी ने अपने पति को धक्का दे दिया उसके जिस्म की गर्मी को अंकल शांत नहीं कर पाते है तभी तो बोली कि खुद से तो कुछ होता नही है और आज इसको जरूर कुछ करवाना है। तभी तो मुझ पर पानी फेंक कर बताया है कि वो बाथरूम में है।

मैं झट से बाथरूम मैं घुस गया ,

वो फिर से वही बोलने लगी प्लीज मुँह पर मत लगाना

और मेरी तरंग पीठ कर के झुक गयी , आ  उसकी गाँड़ पर उसकी साड़ी इतनी कस गयी कि उसकी पैंटी का शेप भी दिखने लगा।।। मैं उसके पीछे गए और उसको मुँह पर रंग लगाने के बहाने उसको पीछे से दबोच लिया अब मेरा लंड उसकी गाँड़ पर रगड़ खाने लगा,

वो बच तो रंग से रही थी पर लंड उसकी गाँड़ पर लग चुका था , मेरा लंड उसकी गाँड़ पर मुँह उसकी नंगी पीठ पर था।।

जब उसको लगा कि ये लंड मेरा गाँड़ पर ही रगड़ रहा है तो उसके हिलते हुए नल चला दिया जिस से वो पूरी भीग गयी और साथ ही साथ मैं  भी ।
अब उसके अन्तः वस्त्र भी दिख रहे थे।


[Image: 661636a8e73b0.jpg]


वो मेरी तरफ देखी तो उसकी आँखों में मुझे निमंत्रण दिखाई दिया, शॉवर का हल्का हल्का पानी उसके सिर से गिर कर उसके गुलाबी होठों को और ज्यादा कामुक औऱ उत्तेजक बना रहा था ।।मेरा सब्र का  बांध टूट गया और उसको बाहों में भर लिया, उस ने भी कोई विरोध ना करते हुए चिपक गयी, मेरे हाथ उसकी भारी भरकम गाँड़ पर थे और उस  को कस कर दबोच रहे थे

उसके बड़े बड़े बूब्स जो कि उसके भीगे ब्लाउज से पूरे के पूरे दिख रहे थे पर उसका ब्लाउज उनको रोक भी नहीं पा रहा था।

मैंने उन पर अपना मुँह रख दिया और उन पर बह रहे पानी को चाटने लगा, उत्तेजना से वो सिसकी लेने लगी, कोई विरोध नहीं था,

मैं उसके गीले जिस्म को चाटता हुआ नीचे की तरफ गया और उसकी गहरी नाभि में मेरी जीभ घुसा दी , वो आंखे बंद कर अपने गुलाबी होंठ अपने दांतों में दबा कर व एक हाथ मेरे सिर पर और एक हाथ से अपना स्तन दबा रही थी,

मैंने भी उसकी नाभि चाटते हुए उसके पेटीकोट से उसकी साड़ी निकाल दी अब वो सिर्फ पेटीकोट में थी जो कि उसकी केले के तने जैसे चिकनी जांघो पर चिपका हुआ था।

 फिर मैं खड़ा हुआ और उसके होठों को चूसने के लिए जैसे ही मुँह बढ़ाया तो शर्म कर पलट गई अब उसकी पीठ जो कि उसके कसे ब्लाउज से बाहर निकलने को हो रही थी उस पर ब्लाउज की डोरियों से कैद थी।

मैंने मेरा एक हाथ उसकी योनि की तरफ ले गया और दूसरा उसकी गर्दन पर था लंड उसकी गाड़ पर दस्तक दे रहा था और मैंने मेरे मुंह से उसकी ब्लाउज की डोरियां खोल दी।।। अब वो सिर्फ ब्रा में मेरे सामने थी ,

खुद उसने अपने आप का खुला ब्लाउज उतार दिया और ब्रा के हुक मैंने खोल दिये ,

उसके दोनों बूब्स मैंने अब दबोच लिये ओर जोर जोर से मसलने लगा।। उसके मुंह से कामुक सिसकारियां निकलने लगी।

उसकी इन सिसकियों से मैं अपने ऊपर कंट्रोल नहीं कर पा रहा था तो मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया और उसकी गाँड़ पर साड़ी के ऊपर से ही रगड़ने लगा।।

फिर उसका एक हाथ मैंने दीवार से हटा कर मेरे लंड पर रखवाया , जैसे ही उसने मेरा लंड अपने हाथ में लिया व्व एक दम से पलट गई और बोली -  इतना मोटा और लंबा , और अपनी जीभ अपने होंठों पर फिराने लगी,

मैं - जी भाभी जी आपके लिए ही है,

अच्छा रंग लगाने आया था तो आंटी और अब लंड लगाने के बाद भाभी, ये बोलते हुए वो मेरा लंड अपने हाथ से मुठियाने लगी, जिसकी वजह से उसकी चूडियों की खनक से बाथरूम गूंज रहा था,

मैं बोला-  अब आंटी बनो या भाभी , एक बार इस को ले कर देखो , पति बना लोगी,

पति सुनते ही आंटी को याद आया कि गेट खुला हुआ है और पति घर में ही है,

ये सब कुछ सिर्फ 15 मिनट में ही हुआ था।।

वो बोली -  रुको अभी आती हूँ , वो भी घर में है याद नहीं रहा तुमने मुझे इतना गर्म कर दिया कि एक शादीसुदा दो बच्चों की मां भी बहक गयी,


इतना बोल कर वो भीगी  हुई  ही और बिना ब्लाउज के ही अपनी साड़ी को अपने वक्षस्थल पर ढक कर पति के पास गई।

उधर वो अपनी बीबी को इस रूप में देख कर बोला- लगवा लिया रंग, साली इतनी देर से बाथरूम में जवान लड़के के साथ है अब तक तो लंड लगवा लेती,

दोस्तों यहां बता दूं , उस अंकल ने कई बार अपनी बीबी को अपने फायदे के लिए अपने दोस्तों से होटल में चुदाई करवाई हुई थी, क्योकि उसको पता था कि वो जवान औरत है और उसकी उम्र ढल चुकी थी , उसकी चूत की आग को शांत करने की उस अंकल के बस की बात नही थी और व्व नहीं चाहता था कि उसकी बीबी एक रंडी बन कर किसी से भी चुदती रहे, तो उसने अपने सामने ही ओर अपने फायदे के लिए ही उसको चुदाना ठीक समझा, उधर ये आंटी भी अपने जिस्म की आग सांत करने के लिए राजी हो गयी थी ।। व्व एक अलग कहानी है व्व कभी ओर। अभी आते है इस स्टोरी पर।

आंटी- ये देखो क्या क्या किया है उसने , मसल डाला मेरे जिस्म को ,  बहुत दिनों बाद कोई मिला है इतना जवान, तुम बैडरूम में हो वरना उसको यहीं खींच लाती और अगर ज्यादा देर रुकती तो अब तक वो अपना हथियार मेरी इस वर्षों वसे प्याशी चूत में घुसेड़ देता।।

अपनी बीबी की चुदाई कराते कराते ये अंकल अब cuckold बन चुका था, इसको अपनी बीबी की चुदते देख कर मज़ा आता था और इसका सिथिल हुआ लंड भी हरकत में आ जाता था,

अंकल- तो चुद ले ना इस बेड पर ही , मैं तो नसे में हूँ उसको लगेगा कि बेहोश हुन सो रहा हूँ,

आंटी - वो नया लड़का है , वो हिम्मत नहीं दिखा पायेगा एक पति के सामने उसकी पत्नी की चुदाई करने की।

कोई नहीं तू ऊपर वाले रूम में चली जा और अपनी चुदाई वहां पर करवा लें पर गेट खुला रखना । मैं तुम दोनों को रंगे हाथ पकड़ने का नाटक करूँगा, फिर उसको बोलूंगा अब चोद मेरे सामने,

फिर वो तेरी चुदाई मेरे सामने ही करेगा।।।


To  be  continued
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RE: कामुक लघु कहानियाँ - by Singhrohit - 31-03-2024, 01:41 PM



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