12-03-2024, 04:20 PM
(This post was last modified: 12-03-2024, 04:30 PM by neerathemall. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
mहै.
‘तेरे अंकल भी अपने करियर को ही देखते रह गए बेटा और देर उम्र में शादी की … और आज तुझे तो पता ही है कि हमारी कोई सन्तान नहीं है.’
‘आंटी आप बुरा ना माने तो एक बात पूछूं?’
‘हां हां बेटा पूछो. तुमसे क्या बुरा मानना, तू तो मेरे बेटे जैसा है.’
‘आप दोनों ने अपने सारे टेस्ट वगैरह तो करवाए ही होंगे ना, तो टेस्ट के मुताबिक दिक्कत क्या आ रही है, जो बेबी नहीं हो रहा है?’
आंटी थोड़ी मायूस होती हुई बोलीं कि बेटा तेरे अंकल में ही कुछ दिक्कत है, तभी तो मैंने बोला कि शादी करने में देर मत कर वर्ना आगे और सारी दिक्कतें आने लगती हैं.
ये सुनकर मैं थोड़ा सोच में पड़ गया और आंटी की तरफ देखने लगा.
मेरी नज़रें आंटी की गोल मोटी चूचियों और तने हुए निप्पल्स की तरफ हो गईं. मुझे इस बात का अहसास नहीं हुआ कि आंटी इस बात को नोटिस कर रही हैं.
मैं बस उन्हें देखता रह गया.
तभी आंटी ने एकदम से मुझे उनके दूध देखते हुए देखा और उन्होंने ये भी देखा कि बिना ब्रा के उनके निप्पल ऊपर से ही दिख रहे हैं.
ये जानते ही उनको थोड़ी सी शर्म आयी और उन्होंने मुझे टोकते हुए कहा कि निखिल क्या देख रहे हो?
‘मैं..मैं … ककुछ नहीं आंटी, मैं वो ऐसे ही कुछ सोचने लगा था. आइ एम सॉरी आंटी.’
ये कहकर मैंने नज़रें हटा लीं.
थोड़ा अजीब सा माहौल बन गया था मेरे और आंटी के बीच.
और मुझे अपने ऊपर थोड़ी गुस्सा भी आया कि इतनी बड़ी औरत के लिए मेरे मन में क्या क्या ख्याल आ रहे हैं.
हालांकि उनका गदराया बदन देखकर कोई भी जवान मर्द पिघल उठता, उनकी आंखों में भी एक अजीब सी कशिश थी जो थोड़ा आमंत्रित जैसा कर रही थी.
आज मुझे इस बात का अहसास हो रहा था कि अकेले में अगर एक बन्द कमरे में आपके साथ एक सुन्दर सी विवाहित औरत सिर्फ टी-शर्ट और बाक्सर में आपके बेड पर बैठी हो … और चाहे वो आपकी मम्मी की फ्रेंड ही क्यूं ना हो, आप उसको बहुत अच्छे से चोदना चाहेंगे. वो भी तब तक, जब तक आप थक कर चूर ना हो जाएं.
दिमाग में ये सब बातें चल ही रही थीं कि एकदम से शज़िया आंटी ने कहा- कोई बात नहीं निखिल. तुमको ज्यादा परेशान होने की कोई ज़रूरत नहीं है. ये नैचुरल है.
‘क्या नैचुरल है आंटी?’
‘यू नो वाट आइ मीन.’
‘नहीं आंटी. मैं नहीं समझा कि आप क्या कह रही हैं?’
‘जैसे तुम मुझे देख रहे थे अभी वो … वैसे किसी मर्द का किसी औरत को देखना नैचुरल है.’
‘लेकिन आप मेरी आंटी हैं.’
‘आंटी जरूर हूं लेकिन एक औरत भी तो हूं … और शायद थोड़ी सुन्दर औरत भी.’
ये कहकर आंटी थोड़ा खिलखिलायीं और फिर से पूछने लगीं- क्यूं निखिल हूं ना मैं थोड़ी सुन्दर?
शायद ये घर में हम दोनों का अकेला होना आंटी को भी मेरे प्रति थोड़ा बिंदास बना रहा था. शायद वो भी इस मौके का मज़ा लेना चाह रही थीं.
तभी तो अपने से आठ नौ साल छोटे आदमी से ये सब बातें करना शुरू कर रही थीं.
लेकिन मेरे मन में हिचकिचाहट अभी भी थी, जिसकी वजह से मैं खुद को रोक रहा था.
पर मन में आया कि बात ही तो कर रहे हैं, बात करने में क्या बुराई है. मॉम फ्रेंड सेक्स के लिए लालायित दिख रही थी.
फिर मैंने थोड़ा साहस दिखाते हुए और मुस्कुराते हुए जवाब दिया- थोड़ी? अरे आंटी आप तो बहुत सुन्दर हो.
‘ओ हो तो मेरे बेटे को मैं बहुत सुन्दर लगती हूं. तो बोलो बेटा क्या सुन्दर है मुझमें?’
‘सब कुछ आंटी.’
‘सब कुछ क्या बेटा?’
‘तेरे अंकल भी अपने करियर को ही देखते रह गए बेटा और देर उम्र में शादी की … और आज तुझे तो पता ही है कि हमारी कोई सन्तान नहीं है.’
‘आंटी आप बुरा ना माने तो एक बात पूछूं?’
‘हां हां बेटा पूछो. तुमसे क्या बुरा मानना, तू तो मेरे बेटे जैसा है.’
‘आप दोनों ने अपने सारे टेस्ट वगैरह तो करवाए ही होंगे ना, तो टेस्ट के मुताबिक दिक्कत क्या आ रही है, जो बेबी नहीं हो रहा है?’
आंटी थोड़ी मायूस होती हुई बोलीं कि बेटा तेरे अंकल में ही कुछ दिक्कत है, तभी तो मैंने बोला कि शादी करने में देर मत कर वर्ना आगे और सारी दिक्कतें आने लगती हैं.
ये सुनकर मैं थोड़ा सोच में पड़ गया और आंटी की तरफ देखने लगा.
मेरी नज़रें आंटी की गोल मोटी चूचियों और तने हुए निप्पल्स की तरफ हो गईं. मुझे इस बात का अहसास नहीं हुआ कि आंटी इस बात को नोटिस कर रही हैं.
मैं बस उन्हें देखता रह गया.
तभी आंटी ने एकदम से मुझे उनके दूध देखते हुए देखा और उन्होंने ये भी देखा कि बिना ब्रा के उनके निप्पल ऊपर से ही दिख रहे हैं.
ये जानते ही उनको थोड़ी सी शर्म आयी और उन्होंने मुझे टोकते हुए कहा कि निखिल क्या देख रहे हो?
‘मैं..मैं … ककुछ नहीं आंटी, मैं वो ऐसे ही कुछ सोचने लगा था. आइ एम सॉरी आंटी.’
ये कहकर मैंने नज़रें हटा लीं.
थोड़ा अजीब सा माहौल बन गया था मेरे और आंटी के बीच.
और मुझे अपने ऊपर थोड़ी गुस्सा भी आया कि इतनी बड़ी औरत के लिए मेरे मन में क्या क्या ख्याल आ रहे हैं.
हालांकि उनका गदराया बदन देखकर कोई भी जवान मर्द पिघल उठता, उनकी आंखों में भी एक अजीब सी कशिश थी जो थोड़ा आमंत्रित जैसा कर रही थी.
आज मुझे इस बात का अहसास हो रहा था कि अकेले में अगर एक बन्द कमरे में आपके साथ एक सुन्दर सी विवाहित औरत सिर्फ टी-शर्ट और बाक्सर में आपके बेड पर बैठी हो … और चाहे वो आपकी मम्मी की फ्रेंड ही क्यूं ना हो, आप उसको बहुत अच्छे से चोदना चाहेंगे. वो भी तब तक, जब तक आप थक कर चूर ना हो जाएं.
दिमाग में ये सब बातें चल ही रही थीं कि एकदम से शज़िया आंटी ने कहा- कोई बात नहीं निखिल. तुमको ज्यादा परेशान होने की कोई ज़रूरत नहीं है. ये नैचुरल है.
‘क्या नैचुरल है आंटी?’
‘यू नो वाट आइ मीन.’
‘नहीं आंटी. मैं नहीं समझा कि आप क्या कह रही हैं?’
‘जैसे तुम मुझे देख रहे थे अभी वो … वैसे किसी मर्द का किसी औरत को देखना नैचुरल है.’
‘लेकिन आप मेरी आंटी हैं.’
‘आंटी जरूर हूं लेकिन एक औरत भी तो हूं … और शायद थोड़ी सुन्दर औरत भी.’
ये कहकर आंटी थोड़ा खिलखिलायीं और फिर से पूछने लगीं- क्यूं निखिल हूं ना मैं थोड़ी सुन्दर?
शायद ये घर में हम दोनों का अकेला होना आंटी को भी मेरे प्रति थोड़ा बिंदास बना रहा था. शायद वो भी इस मौके का मज़ा लेना चाह रही थीं.
तभी तो अपने से आठ नौ साल छोटे आदमी से ये सब बातें करना शुरू कर रही थीं.
लेकिन मेरे मन में हिचकिचाहट अभी भी थी, जिसकी वजह से मैं खुद को रोक रहा था.
पर मन में आया कि बात ही तो कर रहे हैं, बात करने में क्या बुराई है. मॉम फ्रेंड सेक्स के लिए लालायित दिख रही थी.
फिर मैंने थोड़ा साहस दिखाते हुए और मुस्कुराते हुए जवाब दिया- थोड़ी? अरे आंटी आप तो बहुत सुन्दर हो.
‘ओ हो तो मेरे बेटे को मैं बहुत सुन्दर लगती हूं. तो बोलो बेटा क्या सुन्दर है मुझमें?’
‘सब कुछ आंटी.’
‘सब कुछ क्या बेटा?’
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
