05-03-2024, 01:59 PM
(05-03-2024, 01:59 PM)neerathemall Wrote:भाई बहन फिर से
!
पहले मैं आप लोगों को अपनी फ़ैमिली के बारे में बताता हूँ.
हमारे घर में चार लोग हैं.
पापा, मां, मैं (उम्र 25 साल) और मेरी एक बहन, जो कि अभी 20 साल की है. उसका नाम रिया है.
मेरी बहन रिया देखने में बहुत ही खूबसूरत है. उसका फ़िगर 34-28-36 का है.
उसका गोरा रंग और ऐसा क़ातिलाना फ़िगर देख कर अब तक ना जाने कितने मर्दों की नली से रस निकल चुका है.
वह ज़्यादातर जींस और टॉप पहन कर बाहर निकलती है और जब लोग उसे देखते हैं तो पक्का उसे मन ही मन चोदने लगाते हैं.
आख़िर ऐसी खूबसूरत लड़की को देख कर किसका लंड खड़ा नहीं होगा.
यह वर्जिन सिस्टर चुदाई कहानी 2 साल पहले की है.
दीपावली का त्योहार आने वाला था तो मां ने हम लोगों को साफ़ सफ़ाई के काम में लगाया था.
साफ़ सफ़ाई करते वक्त मेरी बहन को एक किताब मिली जो उसने मुझे दिखायी.
जब हमने उस किताब को खोला तो देखा कि उसमें सेक्स कहानियां और सेक्स आसनों के बारे में लिखा था.
ये देखकर मेरी बहन पूछने लगी- ये क्या है?
तब मैंने उससे कहा- कुछ नहीं है.
ये कह कर मैंने वह किताब बंद करके अपने पास रख ली.
वह गुस्सा होकर वहां से चली गयी.
शाम को साफ़ सफ़ाई करने के बाद हम सब लोगों ने मिल कर खाना खाया और फिर सोने के लिए अपने कमरे में चले गए.
मेरी बहन और मैं एक ही कमरे में सोते थे तो मैंने कमरे की लाइट बंद करके नाइट बल्ब जला दिया और उसके सोने का इंतज़ार करने लगा ताकि सुबह मिली किताब को पूरा पढ़ सकूँ.
जब बहन सो गयी तो मैंने धीरे से फ़ोन की लाइट जलायी और वह किताब पढ़ने लगा.
नाइट बल्ब में इतनी रोशनी नहीं होती है कि किताब आसानी से पढ़ी जा सके.
इसलिए मैंने मोबाइल की टॉर्च जला ली थी.
उसमें एक कहानी बहन और भाई के सेक्स की भी थी.
जिसको पढ़ कर मैं बहुत उत्तेजित हो गया और अपने हाथ से अपने लंड को सहलाने लगा.
जैसे जैसे कहानी आगे बढ़ती गई, मेरा लंड भी पूरी तरह खड़ा होकर चड्डी से बाहर निकलने को होने लगा.
मैंने अपने लंड को अपनी चड्डी से निकाल दिया और मुट्ठ मारने लगा.
मगर दिक़्क़त तब हुई, जब कहानी तो ख़त्म हो गयी मगर मेरी वासना अभी तक शांत नहीं हुई.
तभी मेरी नजर मेरी सोती हुई बहन की नंगी गोरी और चिकनी टांगों पर पड़ी.
उसकी टांगों को देख कर मैं और ज़ोर ज़ोर से मुट्ठ मारने लगा.
मेरी बहन घर पर ज़्यादातर शॉर्ट्स पर ही रहती है पर मैंने पहले कभी भी उसको ऐसी नजरों से नहीं देखा था.
पर पता नहीं आज क्यों मैं अपने आप को रोक नहीं पाया और देखते ही देखते मेरे लंड ने पानी छोड़ दिया.
सच में आज लंड से पानी भी काफ़ी मात्रा में निकला था.
उसके बाद बहन की गोरी टांगों को देखते देखते पता नहीं कब नींद लग गयी, पता ही नहीं चला.
सुबह जब बहन ने मुझे जगाया, तब मेरी नींद खुली.
वैसे तो रोज मुझे जगाने का काम मेरी बहन ही करती थी, पर पता नहीं आज क्यों उसके जगाने का तरीक़ा कुछ उखड़ा हुआ था.
शायद वह कल की बात को लेकर अब तक गुस्सा थी.
पर अब मेरा मन तो उसकी जवानी के मज़े लेने का होने लगा था, तो मुझे अब कुछ भी करके उसके गुस्से को प्यार में बदलना था.
जब मैं उठकर कमरे से बाहर निकला, तब तक घर से पापा काम पर जा चुके थे और मां किचन में खाने की तैयारी में लगी हुई थीं.
तभी बहन मां को आवाज लगाती हुई बोली- मां, मैं नहाने जा रही हूँ. तब तक आप खाना बना दीजिए. फिर मुझे कॉलेज भी जाना है.
अब मैं हॉल पर बैठ कर फ़ोन चलाने लगा. कुछ देर में जब बहन नहा कर निकली तो मैं उसको देखता ही रह गया.
गीले बाल, सफ़ेद तौलिया उसने बूब्स के ऊपर से बांधी हुई थी जकि मुश्किल से उसकी गोरी जांघों तक पहुंच रही थी.
उसके गोरे शरीर पर पानी की वे चमकती बूँदें उफ्फ … क्या मस्त माल लग रही थी.
उसको ऐसे देखते थोड़ी देर में मैंने महसूस किया कि मेरी तोप ने भी पोजीशन लेनी शुरू कर दी थी.
उसके कमरे में जाते ही में सीधा बाथरूम में घुस गया और मुट्ठ मारने लगा.
तभी मेरी नजर उसकी नीले रंग की ब्रा पर पड़ी.
फिर मैं उसकी ब्रा को अपने लंड में लपेट कर मुट्ठ मारने लगा और पूरा माल उसकी ब्रा पर ही गिरा दिया.
थोड़ी देर में मैं फ़्रेश होकर बाहर निकल आया और खाने के लिए बैठ गया.
बहन भी बैठ कर खाना खा ही रही थी.
तभी मैंने उससे पूछा- तू गुस्सा क्यों है?
उसने कुछ जवाब नहीं दिया.
मैंने दुबारा उससे पूछा तो उसने कहा- नहीं, ऐसा कुछ नहीं है.
मैंने धीरे से उससे कहा- तू कल की बात को लेकर अब तक गुस्सा है ना! चल तेरा गुस्सा ख़त्म करता हूँ. आज रात को मैं तुझे वह दूँगा, जिसके लिए तू गुस्सा है.
यह सुनते ही उसके चेहरे पर ख़ुशी झलक उठी.
वह बोली- सच भाई?
मैंने कहा- हां एकदम सच.
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.


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