उसने मेरी तरफ घूम कर अपना सीधा पैर मेरी कमर पर रख दिया। मैंने भी अपना हाथ आगे उसकी फ़ुद्दी से हटा कर उसके मांसल चूतड़ों पर रख उसको अपने से चिपका लिया। इस अवस्था में उसकी रसीली चूत मेरे लण्ड से चिपक गई। शाम से हो रहे घटनाक्रम से मधु सच में सेक्स लिए पागल हो रही थी।
वो अपनी चूत को मेरे लण्ड से सटा खुद ही अपनी कमर हिला रही थी। उसकी रस छोड़ रही चूत मेरे लण्ड को और भी ज्यादा भड़का रही थी।
मैंने एक बात और भी गौर की कि मधु शुरू शुरू में बार बार सलोनी की ओर घूमकर देख रही थी, उसको भी कुछ डर सलोनी का था मगर अब बहुत देर से वो मेरे से हर प्रकार से खेल रही थी, उसने एक बार भी सलोनी की ओर ध्यान नहीं दिया था। या तो वासना उस पर इस कदर हावी हो चुकी थी कि वो सब कुछ भूल चुकी थी या अब वो सलोनी के प्रति निश्चिंत हो चुकी थी।
हाँ, मैं उसी की ओर करवट से लेटा था तो मेरी नजर बार बार सलोनी पर जा रही थी। कमाल है, उसने एक बार भी ना तो गर्दन घुमाई थी और ना उसका बदन जरा भी हिला था। सलोनी पूरी तरह से मधु का उद्घाटन करवाने को तैयार थी।
मेरा लण्ड इस तरह की मस्ती से और भी लम्बा, मोटा हो गया था। मैं अपने हाथ से उसके चूतड़ों को मसलते हुए अपनी ओर दबा रहा था और मधु अपने कमर को हिलाते हुए मखमली चूत को मेरे लण्ड पर मसल रही थी।
मेरे मुँह में उसकी चूची थी। हम दोनों बिल्कुल नहीं बोल रहे थे मगर फिर भी मेरे द्वारा चूची चूसने की ‘पुच पिच’ जैसी आवाजे हो ही रही थीं। मधु की बेकरारी मुझे उसके साथ और भी ज्यादा खेलने को मजबूर कर रही थी। मैंने उसको सीधा करके बिस्तर पर लिटा दिया मगर इस बार अब मैं उसके ऊपर आ गया, एक बार उसके कंपकंपाते होठो को चूमा, फिर उसकी गर्दन को चूमते हुए जरा सा उठकर नजर भर मधु की मस्त उठानों को देखा।
दोनों चूचियाँ आम की तरह उठी हुई जबरदस्त टाइट और उन पर पूरे गुलाबी छोटे से निप्पल,जानलेवा नजारा था। मैंने दोनों निप्पल को बारी बारी से अपने होंटों से सहलाया फिर नीचे सरकते हुए उसके पतले पेट तक पहुँचा, अब मैंने उसके पेट को चूमते हुए अपनी जीभ उसकी प्यारी सी नाभि पर रख दी। मैं जीभ को नाभि के चारों ओर घुमाने लगा।
मधु मचल रही थी, उसके मुख से अब हल्की हल्की आहें निकलने लगी- “अह्ह्हाआ… ह्ह्ह्ह… आ…”
मैं थोड़ा और नीचे हुआ, मैंने मधु के पैरों को फैलाया और उसकी कोमल कच्ची कली फ़ुद्दी को पहली बार इतनी नजदीक से देखा। उसकी दोनों पत्तियाँ कस कर एक दूसरे से चिपकी थी।
सलोनी की चूत भी गजब की है बिल्कुल छोटी बच्ची जैसी, मगर उस पर बाल तो आ चुके ही थी भले ही वो कीमती हेयर रेमूवर से उनको साफ़ कर अपनी चूत को चिकना बनाये रखती थी और फिर लण्ड खाने से उसकी चूत कुछ तो अलग हो गई थी।
मगर मधु की चूत बिलकुल अनछुई थी, जिस चूत में अंगुली भी अंदर नहीं जा रही थी उसका तो कहना ही क्या, इतनी प्यारी कोमल मधु की चूत इस समय मेरी नाक के नीचे थी। उसकी चूत से निकल रहे कामरस की खुशबू मुझे मदहोश कर रही थी। मैंने अपनी नाक उसकी चूत के ऊपर रख दी।
मधु- “अह्ह्हा… आआआ… स्श…”
वो जोर से तड़फी उसने अपनी कमर उठा बेकरारी का सबूत दिया। मैं उस खुशबू से बैचेन हो गया और मैंने अपनी जीभ उसके चूत के मुँह पर रख दी। बहुत मजेदार स्वाद था। मैं पूरी जीभ निकाल चाटने लगा, मुझे चूत चाटने में वैसे भी बहुत मजा आता था और मधु जैसी कमसिन चूत तो मक्खन से भी ज्यादा मजेदार थी। मैं उसकी दोनों टाँगें पकड़ पूरी तरह से खोलकर उसकी चूत को चाट रहा था। मेरी जीभ मधु के चूत के छेद को कुरेदती हुई अब अंदर भी जा रही थी।
उसकी चूत के पानी का नमकीन स्वाद मुझे मदहोश किये जा रहा था। मैं इतना मदहोश हो गया कि मैंने मधु की टाँगें ऊपर को उठाकर उसके चूतड़ तक चाटने लगा। कई बार मेरी जीभ ने उसके चूतड़ के छेद को भी चाटा। मधु बार बार सिसकारियाँ लिए जा रही थी। हम दोनों को ही अब सलोनी की कोई परवाह नहीं थी। मैंने चाट चाट कर उसका निचला हिस्सा पूरा गीला कर दिया था। मधु की चूत और गांड दोनों ही मेरे थूक से सने थे। मेरा लण्ड बुरी तरह फुफकार रहा था।
मैंने एक कोशिश करने की सोची, मैंने मधु को ठीक पोजीशन में कर उसके पैरों को फैला लिया और अपना लण्ड का अग्रमुण्ड उसकी लपलपाती चूत के मुख पर टिका दिया। यह मेरी ज़िंदगी का सबसे हसीं पल था। एक अनछुई कली, पूरी नग्न मेरे नीचे दबी थी। उसके चिकने कोमल बदन पर एक चिंदी वस्त्र नहीं था। मैंने उसके दोनों पैरों को मोड़कर फैलाकर चौड़ा कर दिया।
उसकी चूत एकदम से खिलकर सामने आ गई। मैंने अपनी कमर को आगे कर अपना तनतनाते लण्ड को उन कलियों से चिपका दिया। मेरे गर्म सुपारे का स्पर्श अपने चूत के महाने पर होते ही मधु सिसकार उठी। मैं धीरे धीरे उसी अवस्था में लण्ड को घिसने लगा।
दिल कर रहा था कि एक ही झटके में पूरा लण्ड अंदर डाल दूँ। मगर यही एक शादीशुदा मर्द का अनुभव होता है कि वो जल्दबाजी नहीं करता। मैंने बाएं हाथ को नीचे ले जाकर लण्ड को पकड़ लिया, फिर कुछ पीछे को होकर लण्ड को चूत के मुख को खोलते हुए अंदर सरकाने की कोशिश करने लगा।
मधु बार-बार कमर उचकाकर अपनी बेचैनी जाहिर कर रही थी। शायद दस मिनट तक मैं लण्ड को चोदने वाले स्टाइल में ही चूत के ऊपर घिसता रहा। 1-2 बार सुपारा जरा जरा सा ही चूत को खोल अंदर जाने का प्रयास भी कर रहा था मगर मधु का जिस्म अभी बिल्कुल दर्द सहने का आदि नहीं था वो खुद उसे हटा देती थी। शायद उसको हल्के सी भी दर्द का अंदाजा नहीं था। उसको केवल आनन्द चाहिए था इसलिए हल्का सा भी दर्द होते ही वो पीछे हट जाती थी।
इससे पहले भी मैंने 4-5 लड़कियों की कुंवारी झिल्ली को भंग किया था और उस हर अवस्था का अच्छा अनुभव रखता था। जिन 4-5 लड़कियों की मैंने झिल्ली तोड़ी थी उनमें एक तो बहुत चिल्लाई थी, उसने पूरा घर सर पर उठा लिया था। मुझे यकीन था कि मधु अभी तक कुंवारी है। उस सबको याद करके एवं सलोनी के इतना निकट होने से मैं यह काम आसानी से नहीं कर पा रहा था। मुझे पता था कि मधु आसानी से मेरे लण्ड को नहीं ले पायेगी और अगर ज़ोर से झटके से अंदर घुसाता हूँ तो बहुत बवाल हो सकता है।
खून-खराबा, चीख चिल्लाहट और ना जाने कितनी परेशानी आ सकती है। हो सकता है सलोनी भी इसी सबका इन्तजार कर रही हो,
फिर वो मेरे ऊपर हावी होकर अपनी रंगरलियों के साथ-साथ दबाव भी बना सकती है। मेरा ज़मीर खुद उसके सामने कभी नीचे दिखने को राजी नहीं था। वो भी एक चुदाई के लिए, क्या मुझे अपने लण्ड पर काबू नहीं है..??
मुझे खुद पर पूरा भरोसा है, मैं अपने लण्ड को अपने हिसाब से ही चुदाई के लिए इस्तेमाल करता हूँ ज़बरदस्ती कभी करता नहीं मैं और जो तैयार हो उसको छोड़ता नहीं।
मधु के साथ भी मैं वैसे ही मजे ले रहा था। मुझे पता था कि लौंडिया घर की ही है और बहुत से मौके आएँगे। जब कभी अकेला मिला तब ठोक दूँगा और अगर प्यार से ले गई तो ठीक वरना खून खराबा तो होगा ही।
मधु की नाचती कमर बता रही थी कि उसको इस सब में भी चुदाई का मजा आ रहा है।खुद को मजा देने के लिए मैंने अपने लण्ड को उसकी चूत के पूरा लेटी अवस्था में चिपका दिया और मैं ऊपर-नीचे होकर मजा लेने लगा। लण्ड पूरा मधु की चूत से चिपककर उसके पेट तक जा रहा था। उसकी चूत की गर्मी से मेरा लण्ड लावा छोड़ने को तैयार था पर लगता है कि मधु की चूत के छेद पर अब लण्ड छू नहीं पा रहा था या उसको पहले टॉप के धक्कों से ज्यादा आनन्द आ रहा था।
उसने कसमसाकर मुझे ऊपर को कर दिया, फिर खुद अपने पैरों को मेरी कमर से बांधकर अपना हाथ नीचे कर मेरे लण्ड को पकड़ लिया। उसके पसीने से भीगे नरम हाथों में आकर लण्ड और मेरी हालत ख़राब होने लगी। उसने लण्ड के सुपारे को फिर अपनी चूत के छेद से चिपकाया और कमर हिलाने लगी।
अब मैं भी कमर को थोड़ा कसकर आगे पीछे करने लगा। उसके कसे हुए हाथों में मुझे ऐसा ही लग रहा था कि मेरा लण्ड चूत के अंदर ही है। मैं जोर जोर से कमर हिलाने लगा जैसे चुदाई ही कर रहा हूँ।
मधु लण्ड को छोड़ ही नहीं रही थी कि कहीं मैं फिर से लण्ड को वहाँ से हटा न लूँ।
TO BE CONTINUED ......
चूम लूं तेरे गालों को, दिल की यही ख्वाहिश है ....
ये मैं नहीं कहता, मेरे दिल की फरमाइश है !!!!
Love You All
ये मैं नहीं कहता, मेरे दिल की फरमाइश है !!!!
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