26-12-2023, 12:01 PM
इतना कहकर राज मेरे ऊपर से हट गया और फिर रूपेश ने सारिका की आंखोंमे देखा. वो भी जैसे कामरस में डूब गयी थी और उसने रूपेश को मेरी चुत की तरफ हलके से धकेल दिया.
इशारा पाकर रूपेश मेरी टांगो के बीच आ गया और एक ही झटके में वो चूत चाटने लगा. उसी क्षण राज ने भी सारिका को बाहोंमे लिया और उसके होंठ चूमने लगा. राज बारी बारी से उसके वक्ष चूसने और चूमने लगा.
रूपेश ने जैसे ही गर्दन उठाकर राज और सारिका का पोज देखा फिर वो भी बिना कुछ सोचे समझे मेरे ऊपर चढ़ गया.
"सुनीता दीदी, कबसे आप को चोदना चाहता था. आह. कितनी सेक्सी और माल है आप, क्या मम्मे हैं आप के," कहकर रूपेश मेरे कठोर वक्ष चूसने लगा.
फिर मेरी आँखों में आँखें डाल कर बोला, "दीदी, जब से तुम को देखा था, तभी से मैं तुम्हारा आशिक हो गया था, पर हिम्मत नहीं कर पा रहा था."
मैंने भी उसे चूम कर कहा, "रूपेश, मुझे भी तुम पहली नजर में भा गए थे और कबसे मेरा मन कर गया था तुम्हारे साथ सेक्स करने का. आज जाकर मौका मिला हैं!"
रूपेश जोर जोर से मेरी चूचियाँ मसलने लगा तब मैं बोली, "रूपेश डार्लिंग, इतनी बेताबी मत दिखाओ, मैं कहीं भागी नहीं जा रही हूँ, आज पूरी रात मस्ती करेंगे, पहले मुझे तुम्हारा यह कड़क लंड तो चूसने दो."
इतना कहकर रूपेश का खड़ा हुआ तगड़ा लंड मैंने मुह में ले लिया। आह, कितना मजा आ रहा था एक नया लंड मुँह में लेकर.
मैं उसका पूरा लंड मुँह में लेकर धीरे धीरे चूस रही थी और रूपेश मेरे बालों में हाथ फिरा रहा था। मैं कभी पूरा मुँह में ले लेती फिर कभी चूसते चूसते बाहर निकाल देती। उसके लंड का सुपारा मैंने पूरा खोल लिया था और अपनी हथेलियों से भी उसकी गोटिया मसल देती थी। लंडपर एकाद वीर्य की बूँद आयी तो उसे चाटकर मैं बड़े प्यार से रूपेश की आँखों में देख रही थी. वो तो ख़ुशी के सांतवे आसमान में था. मुझे वीर्य चाटते हुए देखकर शायद सारिका भी उसके बारे में सोचने लगी.
अब थोड़ा ऊपर उठकर मैंने उसके लंड को अपने मम्मों के बीच में रख कर अपने हाथों से दोनों मम्मों को दबाया और लंड की मसाज करने लग जिसे अंग्रेजी में टिट फ़किंग कहते हैं. रूपेश को लगा वो तो यहीं मेरे मम्मोंपर ही छूट जायेगा।
इशारा पाकर रूपेश मेरी टांगो के बीच आ गया और एक ही झटके में वो चूत चाटने लगा. उसी क्षण राज ने भी सारिका को बाहोंमे लिया और उसके होंठ चूमने लगा. राज बारी बारी से उसके वक्ष चूसने और चूमने लगा.
रूपेश ने जैसे ही गर्दन उठाकर राज और सारिका का पोज देखा फिर वो भी बिना कुछ सोचे समझे मेरे ऊपर चढ़ गया.
"सुनीता दीदी, कबसे आप को चोदना चाहता था. आह. कितनी सेक्सी और माल है आप, क्या मम्मे हैं आप के," कहकर रूपेश मेरे कठोर वक्ष चूसने लगा.
फिर मेरी आँखों में आँखें डाल कर बोला, "दीदी, जब से तुम को देखा था, तभी से मैं तुम्हारा आशिक हो गया था, पर हिम्मत नहीं कर पा रहा था."
मैंने भी उसे चूम कर कहा, "रूपेश, मुझे भी तुम पहली नजर में भा गए थे और कबसे मेरा मन कर गया था तुम्हारे साथ सेक्स करने का. आज जाकर मौका मिला हैं!"
रूपेश जोर जोर से मेरी चूचियाँ मसलने लगा तब मैं बोली, "रूपेश डार्लिंग, इतनी बेताबी मत दिखाओ, मैं कहीं भागी नहीं जा रही हूँ, आज पूरी रात मस्ती करेंगे, पहले मुझे तुम्हारा यह कड़क लंड तो चूसने दो."
इतना कहकर रूपेश का खड़ा हुआ तगड़ा लंड मैंने मुह में ले लिया। आह, कितना मजा आ रहा था एक नया लंड मुँह में लेकर.
मैं उसका पूरा लंड मुँह में लेकर धीरे धीरे चूस रही थी और रूपेश मेरे बालों में हाथ फिरा रहा था। मैं कभी पूरा मुँह में ले लेती फिर कभी चूसते चूसते बाहर निकाल देती। उसके लंड का सुपारा मैंने पूरा खोल लिया था और अपनी हथेलियों से भी उसकी गोटिया मसल देती थी। लंडपर एकाद वीर्य की बूँद आयी तो उसे चाटकर मैं बड़े प्यार से रूपेश की आँखों में देख रही थी. वो तो ख़ुशी के सांतवे आसमान में था. मुझे वीर्य चाटते हुए देखकर शायद सारिका भी उसके बारे में सोचने लगी.
अब थोड़ा ऊपर उठकर मैंने उसके लंड को अपने मम्मों के बीच में रख कर अपने हाथों से दोनों मम्मों को दबाया और लंड की मसाज करने लग जिसे अंग्रेजी में टिट फ़किंग कहते हैं. रूपेश को लगा वो तो यहीं मेरे मम्मोंपर ही छूट जायेगा।
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
