10-12-2023, 03:53 PM
खैर इस सब के बाद भी मैं अपने भाई विकी को नहीं भुला सकी. अब तो मैं कुँवारी भी नहीं थी. सोच लिया था कि इस बार मायके गयी तो विकी से चुदवाने की तमन्ना ज़रूर पूरी करूँगी. आख़िर वो दिन भी आ गया. मायके से बुलावा आ गया. मम्मी ने होली पे एक महीने के लिए बुलाया था.
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जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
