29-10-2023, 05:53 PM
बाप रे, मुझे जब बाद में पता लगा तो मेरे लण्ड से जैसे पानी झरने लगा। नीना के बगलों में हाथ डालके उसे ऊपर उठाने से अनिल का क्या हाल हुआ होगा यह समझना मुश्किल नहीं था। जरूर उसने कुछ तो शरारत की होगी।
मैं आज भी उस दृश्य की कल्पना करता हूँ। मेरी बीबी के पीछे उससे सटकर कैसे अनिल खड़ा होगा और उस समय उसका लण्ड कितना सख्त होगा और मेरी बीबी की खूबसूरत गाँड़ में पिछेसे कैसे धक्का दे रहा होगा यह तो मेरे लिए बड़ा उत्तेजना भरा सोचने का विषय था। वैसे भी इस बहाने उसने नीना के स्तनों को तो जरूर दबाया होगा। अनिल नीना के स्तनों पर फ़िदा था और जब भी उसे देखो तो उसकी नजर वहीं टिकी रहती थी।
नीना प्लेटफार्म पर तो चढ़ गयी पर लड़खड़ाने लगी। अनिल ने कस कर नीना के पाँव पकडे और कहा, “नीना भाभी संभल कर। गिरना मत।"
परन्तु नीना डिब्बा निचे उतारते लड़खड़ाई और सीधी अनिल पर जा गिरी। अनिल और नीना दोनों धड़ाम से निचे गिरे। निचे अनिल और उसके ऊपर नीना। जब मैंने धमाके की आवाज़ सुनी तो भागता हुआ रसोई में गया और देखा की बड़ा रोमांटिक सीन चल रहा था। नीना अनिल के उपर लेटी हुयी थी और अनिल नीना को अपनी बाहों में लिए हुए नीना के निचे दबा था। दोनों के होठ एक दूसरे को जैसे चुम्बन करने वाले थे। अनिल का एक हाथ नीना के एक स्तन पर था। मैं ठीकसे देख तो नहीं पाया पर अनिल और नीना के हावभाव से ऐसे लग रहा था जैसे शायद वह उस स्तन को जोर से दबा रहा था।
iloveall
मैं आज भी उस दृश्य की कल्पना करता हूँ। मेरी बीबी के पीछे उससे सटकर कैसे अनिल खड़ा होगा और उस समय उसका लण्ड कितना सख्त होगा और मेरी बीबी की खूबसूरत गाँड़ में पिछेसे कैसे धक्का दे रहा होगा यह तो मेरे लिए बड़ा उत्तेजना भरा सोचने का विषय था। वैसे भी इस बहाने उसने नीना के स्तनों को तो जरूर दबाया होगा। अनिल नीना के स्तनों पर फ़िदा था और जब भी उसे देखो तो उसकी नजर वहीं टिकी रहती थी।
नीना प्लेटफार्म पर तो चढ़ गयी पर लड़खड़ाने लगी। अनिल ने कस कर नीना के पाँव पकडे और कहा, “नीना भाभी संभल कर। गिरना मत।"
परन्तु नीना डिब्बा निचे उतारते लड़खड़ाई और सीधी अनिल पर जा गिरी। अनिल और नीना दोनों धड़ाम से निचे गिरे। निचे अनिल और उसके ऊपर नीना। जब मैंने धमाके की आवाज़ सुनी तो भागता हुआ रसोई में गया और देखा की बड़ा रोमांटिक सीन चल रहा था। नीना अनिल के उपर लेटी हुयी थी और अनिल नीना को अपनी बाहों में लिए हुए नीना के निचे दबा था। दोनों के होठ एक दूसरे को जैसे चुम्बन करने वाले थे। अनिल का एक हाथ नीना के एक स्तन पर था। मैं ठीकसे देख तो नहीं पाया पर अनिल और नीना के हावभाव से ऐसे लग रहा था जैसे शायद वह उस स्तन को जोर से दबा रहा था।
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जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
