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Misc. Erotica भोली भाली शीला और पंडित जी
#3




पंडित & शीला पार्ट--2

गतांक से आगे...........................

पंडित: वेदों के अनुसार.....तुम्हे यह कहना होगा कि तुम अपने पति से बहुत

प्रेम करती हो.....जो मैं कहूँ मेरे पीछे पीछे बोलना

शीला: जी पंडितजी

शीला के हाथ पंडित के हाथ में थे

पंडित: मैं अपने पति से बहुत प्रेम करती हूँ

शीला: मैं अपने पति से बहुत प्रेम करती हूँ

पंडित: मैं उन पर अपना तन और मन न्योछावर करती हूँ

शीला: मैं उन पर अपना तन और मन न्योछावर करती हूँ

पंडित: अब पान का पता मेरे साथ अग्नि में डाल दो

दोनो ने हाथ में हाथ लेके पान का पता आग में डाल दिया

पंडित: वेदों के अनुसार...अब मैं तुम्हारे चरण धौँगा...अपने चरण यहाँ

साइड में करो..

शीला ने अपने पेर साइड में किए...पंडित ने एक गिलास मैं से थोड़ा पानी हाथ

में भरा और शीला के पेरो को अपने हाथों से धोने लगा.....

पंडित: तुम अपने पति का ध्यान करो..

पंडित मन्त्र पड़ने लगा...शीला आँखें बंद करके पति का ध्यान करने

लगी.....

शीला इस वक़्त टाँगें ऊपर की तरफ मोड़ के बैठी थी..

पंडित ने उसके पेर थोड़े से उठाए और हाथों में लेकर पेर धोने लगा.. ?

टाँग उठनेः से शीला की सारी के अंदर का नज़ारा दिखनेः लगा?.उसकी थाइस

दिख रही थी?.और सारी के अंदर के अंधेरे में हल्की हल्की उसकी वाइट

कछि भी दिख रही थी?..लेकिन शीला की आँखें बंद थी?.वो तो अपने

पति का ध्यान कर रही थी?.और पंडित का ध्यान उसकी सारी के अंदर के

नज़ारे पे था?.पंडित के मूह में पानी आ रहा था..लेकिन वो इसका रेप करने

से डरता था....सो उसने सोचा लड़की को गरम किया जाए...


पेर धोने के बाद कुछ देर उसने मन्तर पड़े..

पंडित: पुत्री....आज इतना ही काफ़ी है...असली पूजा कल से शुरू होगी....तुम्हें

भगवान शिव को प्रसन्न करना है.....वो प्रसन्न होंगे तभी तुम्हारे पति की

आत्मा को शांति मिलेगी....अब तुम कल आना..

शीला: जो आग्या पंडितजी..

अग्लेः दिन..

पंडित: आओ पुत्री.....तुम्हें किसी ने देखा तो नहीं...अगर कोई देख लेगा तो

तुम्हारी पूजा का कोई लाभ नहीं..

शीला: नहीं पंडितजी...किसी ने नहीं देखा...आप मुझे आग्या दे..

पंडित: वेदों के अनुसार.....तुम्हें भगवान *** को प्रसन्न करना है..

शीला: पंडितजी...वैसे तो सभी भगवान बराबर हैं...लेकिन पता नहीं

क्यूँ..भगवान के प्रति मेरी श्रधा ज़्यादा है..

पंडित: अच्छी बात है.....पुत्री..*** को प्रसन्न करने के लिए तुम्हें पूरी

तरह शूध होना होगा....सबसे पहले तुम्हें कच्चे दूध का स्नान करना

होगा......शूध वस्त्रा पहेनेः होंगे...और थोड़ा शृंगार करना होगा..

शीला: शृंगार पंडितजी..

पंडित: हाँ..... स्त्री- प्रिय (वुमन लविंग) हैं...सुंदर स्त्रियाँ उन्हे

भाती हैं...यूँ तो हर स्त्री उनके लिए सुंदर है...लेकिन शृंगार करने से

उसकी सुंदरता बढ़ जाती है....जब भी देवी ने *** को मनाना होता


है...तो वह भी शृंगार करके उनके सामने आती हैं..

शीला: लेकिन पंडितजी...क्या एक विधवा का शृंगार करना सही रहेगा....?

पंडित: पुत्री...*** के लिए कोई भी काम किया जा सकता है....विधवा तो तुम

इस समाज के लिए हो...

शीला: जो आग्या पंडितजी...

पंडित: अब तुम स्नान-ग्रे (बाथरूम) में जा के कच्चे दूध का स्नान

करो...मैने वहाँ पर कच्चा दूध रख दिया है क्यूंकी तुम्हारे लिए कच्चा

दूध घर से लाना मुश्किल है.......और हाँ...तुम्हारे वस्त्रा भी स्नान-ग्रेह

में ही रखें हैं..

पंडित ने ऑरेंज कलर का ब्लाउस और पेटिकोट बाथरूम में रखा था...पंडित

ने ब्लाउस के हुक निकाल दिए थे..हुक्स पीठ की साइड पे थे...(आस कंपेर्ड

टू दा हुक्स राइट इन फ्रंट ऑफ बूब्स)

शीला दूध से नहा कर आई.....सिर्फ़ ब्लाउस और पेटिकोट में उसे पंडित के

सामने शरम आ रही थी..

शीला: पंडितजी.....

पंडित: आ गयी..

शीला: पंडितजी....मुझे इन वस्त्रों में शरम आ रही है...

पंडित: नहीं पुत्री...ऐसा ना बोलो....*** नाराज़ हो जाएगा....यह जोगिया

वस्त्रा शूध हैं....यदि तुम शूध नहीं होगी तो शिव प्रसन्न कदापि नहीं

होंगे...

शीला: लेकिन पंडितजी..इस...स....ब..ब्लाउस के हुक्स नहीं हैं...

पंडित: ओह!...मैने देखा ही नहीं...वैसे तो पूजा केवल दो घंटे की ही

है...लेकिन यदि तुम ब्लाउस के कारण पूजा नहीं कर सकती को हम कल से पूजा

कर लेंगे....लेकिन शायद *** को यह विलंभ (डिले) अच्छा ना लगे..

शीला: नहीं पंडितजी....पूजा शुरू कीजिए..

पंडित: पहले तुम उस शीशे पे जाकर शृंगार कर लो...शृंगार की सामग्री

वहीं है..

शीला ने लाल लिपस्टिक लगाई....थोड़ा रूज़....और थोड़ा पर्फ्यूम...

शृंगार करके वो पंडित के पास आई..

पंडित: अति सुंदर.....पुत्री...तुम बहुत सुंदर लग रही हो...

शीला शरमाने लगी....यह फीलिंग्स उसने पहली बार एक्सपीरियेन्स की थी...

पंडित: आओ पूजा शुरू करें...

वो दोनो अग्नि के पास बैठ गये....पंडित ने मन्त्र पड़नेः शुरू किए....

थोड़ी गर्मी हो गयी थी इसलिए पंडित ने अपना कुर्ता उतार दिया.......उनसे

शीला को अट्रॅक्ट करने के लिए अपनी चेस्ट पूरी शेव कर ली थी....उसकी बॉडी

मस्क्युलर थी.....अब वो केवल लूँगी में था...

शीला थोड़ा और शरमाने लगी..

दोनो चौकड़ी मार के बैठे थे..

पंडित: पुत्री....यह नारियल अपनी झोली में रखलो...इसे तुम प्रसाद

समझो......तुम दोनो हाथ सिर के ऊपर से जोड़ के शिव का ध्यान करो....

शीला सिर के ऊपर से हाथ जोड़ के बैठी थी....पंडित उसकी झोली में फल

(फ्रूट्स) डालता रहा...

शीला की इस पोज़िशन में उसके बूब्स और नंगा पेट पंडित के लंड को सख़्त कर

रहे थे...

शीला की नेवेल भी पंडित को सॉफ दिख रही थी....

पंडित: शीला....पुत्री...यह मौलि (थ्रेड) तुम्हें पेट पे बाँधनी

है....वेदों के अनुसार इसे पंडित को बाँधना चाहिए....लेकिन यदि तुम्हें

इसमें लज्जा की वजह से कोई आपत्ति हो तो तुम खुद बाँध लो...परंतु विधि

तो यही है की इसे पंडित बाँधे...क्यूंकी पंडित के हाथ शूध होते

हैं..जैसे तुम्हारी इच्छा..

शीला: पंडितजी.....वेदों का पालन करना मेरा धर्म है....जैसा वेदों में

लिखा है आप वैसा ही कीजिए...

पंडित: मौलि बाँधने से पहले गंगाजल से वो जगह सॉफ करनी होती है....

पंडित ने शीला के पेट पे गंगाजल छिड़-का...और उसका नंगा पेट गंगाजल से

धोने लगा....शीला की पेट की स्किन (लाइक मोस्ट विमन) बहुत स्मूद

थी....पंडित उसके पेट को रगड़ रहा था...फिर उसने तौलिए (टवल) से शीला



का पेट सुखाया...

शीला के हाथ सिर के ऊपर थे.....पंडित शीला के सामने बैठ कर उसके

पेट पे मौलि बाँधने लगा...पहली बार पंडित ने शीला के नंगे पेट को

छुआ....

नाट बाँधते समय पंडित ने अपनी उंगली शीला के नेवेल पे रखी.....

अब पंडित ने उंगली पे तिक्का (रेड विस्कस लिक्विड विच इस सपोज़्ड सेक्रेड)

लगाया...

पंडित: शीला....*** को देह (बॉडी) पे चित्रकारी करने में आनंद

आता है....

यह कह कर पंडित शीला के पेट पे तिक्का लगाने लगा...उसने शीला के पेट पर

त्रिशूल बनाया.....


शीला की नेवेल पर आ कर पंडित रुक गया...अब अपनी उंगली उसकी नेवेल में

घुमाने लगा...वह शीला की नेवेल में तिक्का लगा रहा था..शीला के दोनो

हाथ ऊपर थे....वह भोली थी.......वह इन सब चीज़ों को धरम समझ

रही थी.....लेकिन यह सब उसे भी कुछ कुछ अच्छा लग रहा था....

फिर पंडित घूम कर शीला के पीछे आया.....उसने शीला की पीठ पर

गंगाजल छिड़-का और हाथ से उसकी पीठ पे गंगाजल लगाने लगा..

पंडित: गंगाजल से तुम्हारी देह और शूध हो जाएगी, क्यूंकी गंगा शिव की जटा

से निकल रही है इसलिए गंगाजल लगाने से शिव प्रसन्न होते हैं..

शीला के ब्लाउस के हुक्स नहीं थे....पंडित ने खुले हुए हुक्स को और साइड

में कर दिया....शीला की ऑलमोस्ट सारी पीठ नंगी होगआई...पंडित उसकी नंगी

पीठ पर गंगाजल डाल के रगड़ रहा था..वो उसकी नंगी पीठ अपने हाथों से

धो रहा र्था.....शीला की नंगी पीठ को छूकर पंडित का बंटी ( लंड ) टाइट हो गया

था...

पंडित: तुम्हारी राशी क्या है..?

शीला: कुंभ..

पंडित: मैं टिक्के से तुम्हारी पीठ पर तुम्हारी राशी लिख रहा

हूँ...गंगाजल से शूध हुई तुम्हारी पीठ पे तुम्हारी राशी लिखनेः से

तुम्हारे ग्रेहों की दिशा लाभदायक हो जाएगी..

पंडित ने शीला की नंगी पीठ पे टिक्के से कुंभ लिखा...

क्रमशः........................




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RE: भोली भाली शीला और पंडित जी - by RangilaRaaj - 22-07-2023, 11:02 AM



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