30-01-2023, 04:02 PM
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वो उस्के थोड़ा और करीब जाती है और अपने नंगे जिस्म को निहारने लगती है। अपने नंगे जिस्म को देखते हुए कभी तो वो शर्मा जाती और कभी गौरव और अहंकार से उसका मन भर जाता कि मेंरे इसी जिस्म को पाने के लिये तुषार इतना ललायित रहता है। उसे इस बात के लिये खुद पर बेहद घमंड़ हो रहा था कि तुषार मेंरे इस जिस्म के लिये पागल है। लेकिन ये अहंकार तो दुनिया की हर स्त्री को होता है कि पुरुष उसके जिस्म का दिवाना है और उसके पिछे पागल है।
अपने जिस्म पर घमंड़ करना हर स्त्री का स्वभाव होता है,और उसे भोगना हर पुरुष का। वो इस बात से शायद अन्जान होती है कि पुरुष का अंतिम लक्ष्य तो उसके जिस्म में बसी उसकी चूत होती है फ़िर शरीर चाहे किसी रश्मी का हो या किसी सुनीता,अनिता या अंजली का हो।
कुछ देर तक इसी तरह अपने जिस्म को आईने में निहारने के बाद वो मंद मंद मुस्कुराते हुए एक निगाह पलंग पर पड़े नंगे सोये पड़े तुषार पर ड़ालती है और बाथरुम में चली जाती है।
बाथरुम में पहुंच कर रश्मी ने शावर चालू किया और अपने शरीर की सफ़ाई करने लगी । दोनों जिस्मों के गुत्थम गुत्था होने से पैदा होने वाला पसीना और तुशार के वीर्य ने उसके शरीर को चिपचिपा बना दिया था और चुदाई के दौरान हुई कसरत ने उसको काफ़ी थका दिया था। लेकिन पानी के बौछार के शरीर में लगने से उसे काफ़ी राहत महसूस हो रही थी और ताजगी का अह्सास उसके शरीर में नवीन उर्जा का संचार करने लगा।
लगभग १० मीनट तक नहाने के बाद रश्मी पूरी तरह ताजगी महसूस करने लगी और अब उसने शावर बंद किया अपने बदन को पोंछने के बाद वो बिना तौलिया लपेटे नंगी ही वापस कमरे में आ गई । अब उसे तुषार से शर्म जैसी कोई बात नहीं थी ।
इधर तुषार भी लगभग ३० मीनट की नींद पूरी करने के बाद जाग चुका था और काफ़ी तरोतजा मह्सूस कर रहा था । उसने अपनी आंखे खोली और पलंग पर ही पड़ा रहा।
पलंग पर लेटे हुए ही उसने एक नजर रश्मी पर ड़ाली लेकिन वो बिस्तर पर नहीं थी , उसे बिस्तर पर ना पा कर उस्की निगाहें रश्मी को खोजने लगी। नहाने के कारण रश्मी के बदन में एक अलग ही चमक दिखाई दे रही थी और उसका गोरा बदन नंगा होने के वजह से और भी मादक लग रहा था ।रश्मी नहा कर कमरे में नग्न खड़ी थी उसका एक पैर स्टूल पर था और दूसरा पैर जमीन था और वो अब अपने पैरों को पोछ रही थी । उसके बाल खुले हुए थे और उसकी कमर तक लटक रहे थे।
अपनी खूबसूरत हसीना के चिकने नंगे बदन को देख कर तुशार के लंड़ में फ़िर हरकत होने लगी । उसकी बड़ी बड़ी नग्न गांड़े ,मोटी जांघ और सुमेरु पर्वत की तरह विशाल लटकते हुए स्तन को देख तुषार का लंड फ़िर अपने अकार में आने लगा और फ़िर से रश्मी की चूत में जाने के लिये मचलने लगा। वो तुरंत हरकत में आता है और पलंग से खड़ा हो जाता है। उसका लंड़ अब फ़िर से बूरी तरह से कड़क हो चुका था और वो उसी अवस्था में रश्मी के पीछे जा कर खड़ा हो जाता है और उसके बदन को पीछे से कामुक नजरों से घूरने लगता है।
रश्मी इस बात से बेखबर थी की तुशार जाग चुका है और उसके एकदम पिछे आ कर खड़ा हो चुका है, वो अपनी ही धुन में थी और पूरी तन्मयता से अपने नंगे बदन को पोछे जा रही थी । वो ये सोच रही थी की अब कपड़े पहनने के बाद तो नीचे पहुंचेगी और घर के बाकी सदस्यों के साथ बाजार जा कर तुषार और सुधा की सगाई का समान खरिदेगी । उसे पता था कि इस काम काफ़ी वक्त लगने वाला है।लेकिन तुषार को इस बात की कोई भी जल्दी नहीं थी। और उसे तो कुछ और ही मंजूर था।
कुछ क्षणों तक रश्मी के नंगे बदन को घूरने के बाद तुषार ने रश्मी को पिछे से पकड़ लिया और अपना लंड़ रश्मी की नंगी गांड़ो की दरारों मे जोर से दबा दिया और उसने अपने दोनों हाथों को आगे कर के उसके दोनों विशाल स्तनों को पकड़ लिया।
अचानक इस तरह पकड़ने से रश्मी चौंक जाती है,वो पिछे मुड़ने कर देखने का प्रयास करती है लेकिन तुषार ने उसे इतनी जोर से पिछे से भींच कर रखा था कि वो पलट नहीं पाती वो केवल अपनी गर्दन थोड़ी उपर उठा कर पिछे खड़े तुषार की तरफ़ देखने का प्रयास करती है और कहती है " अरे ये क्या! छोड़ो मुझे, नीचे मम्मी,पापा इंतजार कर रहे होंगे बजार जाना है, अभी सगाई का सामान खरिदना और पूरी तैयारी करनी है और तुम हो कि फ़िर शुरु हो गये। अभी मन नहीं भरा क्या? छोड़ो मुझे प्लीज।
तुषार पर रश्मी की इन बातों का कोई असर नहीं होता वो और भी जोर से रश्मी को पकड़ लेता है और उसकी गांड पर अपने लंड़ का दबाव और भी बढ़ा देता है और उसके दोनों स्तनों को और भी ज्यादा जोरों से पकड़ लेता है और अपना लंड़ धीरे धीरे रश्मी गांड़ मे उपर निचे रगड़ने लगता है। रश्मी की नरम नरम विशाल गद्देदार गांड़ में अपना लंड़ रगड़ने से उसे एक अलग ही सुख का अहसास हो रहा था और उसकी उत्तेजना भी अपने चरम में पहुंच जाती है।
वो उसी तरह से उसकी गांड मे अपने लंड़ को रगड़ते हुए ही रश्मी के गालों को चूमता है और कहता है " अभी क्या जल्दी है जान? अभी तो १० ही बजा है, और तुम्हें तो मम्मी ने ११:३० तक नीचे आने को कहा है। अभी नीचे जाओगी तो भी वो अपने समय से ही निकलेंगे और बेकार में तुम्हें किचन का काम बता देंगे। इसलिये ११:३० तक उपर ही रहॊ फ़िर दोनों देवर भाभी साथ ही नीचे उतरेंगे। रश्मी प्रत्युत्तर में कुछ कहने के लिये मुंह खोलने का प्रयास करती है लेकिन तुषार अपने होंठ रश्मी के होठों से लगा देता है और उसकी मदमस्त जवानी का रस पीने लगता है।
तुषार अब अपना लंड़ रश्मी की गांड मे रगड़ रहा था , उसके दोनों हाथ रश्मी के स्तनों को मसल रहे थे और उसके होठों से जवानी का रस चूम रहा था । रश्मी चाह कर भी कुच बोल नहीं बोल पा रही थी और लगातार अपने बदन को मसले जाने के कारण वो भी धीरे धीरे गरम होने लगी और उसकी दमित वासना फ़िर उछाल मारने लगी।
अब तुशार अपने दांये हाथ को रश्मी के स्तन से हटाता है और धीरे धीरे उसके पेट को स्पर्श करते हुए वो अपना दांया हाथ रश्मी की उभरी हुई जवान चूत पर रख देता है।
अपनी जवान चूत पर तुषार का हाथ लगते ही रश्मी पर मदहोशी छाने लगती है और वो तुषार का लंड़ अपनी चूत में लेने के लिये मचलने लगती है।
तुषार के हाथ अब रश्मी की चूत की दरारों के उपर घूम रहे थे और इधर रस्मी का बदन फ़िर से उत्तेजना के मारे थरथराने लगता है। कुछ देर तक रश्मी की चूत को सहलाने के बाद त्षार अपनी एक उंगली रश्मी की चूत के अंदर ड़ाल देता है और उसे हौले हौले अंदर बाहर करने लगता है।रश्मी मारे उत्तेजना के गरम हो जाती और उसकी चूत से पानी निकलने लगता है। उसके पैरों की शक्ति अब जवाब देने लगती है और अब खड़े रह पाना उसके लिये काफ़ी कठिन था।
चूत से निकलने वाले पानी के अपने हाथों से लगते ही तुशर समझ जाता है कि भाभी अब फ़िर से गरम हो चुकी है।अब वो और भी तेजी से उसकी चूत से खेलने लगता है और अपनी उंगली उसकी चूत से और भी तेजी से रगड़ने लगता है।
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रश्मी अब बेकाबू हो जाती है और उसके मुंह से आह्ह्ह आह्ह्ह्ह ओफ़्फ़्फ़ सीऽऽऽऽऽ सीऽऽऽऽऽऽऽऽ की अवाजें निकलने लगती है। उसके लिये अब उस पोजीशन में खड़े रहना अब संभव नहीं था तुषार का लंड़ बुरी तरह से उसकी गांड़ से चिपका हुआ था और उसका एक हाथ रश्मी के दोनों स्तनों को भीच रहे थे और उसे मसल रहे थे और दूसरा हाथ उसकी चूत से खिल्वाड़ कर रहा था। रश्मी को बेहद आनंद आ रहा था लेकिन कुछ ही देर पहले वो तुषार के लंड के स्वाद चख चुकी थी इसलिये अपनी चूत में केवल
एक छोटी सी उंगली से उसे वो सुख और संतुष्टी नहीं प्राप्त हो रही थी जो उसे कुछ देर पहले तुशार के लंड़ से मिली थी।
वो बदहवास हो जाती है और अपना पूरा जोर लगा कर गोल घुम जाती है और तुषार से लिपट जाती है । तुशार भी उसे उसे अपनी बाहों में भीच लेता है और उसके चेहरे को बेतहशा चूमने लगता है। रश्मी के विशाल स्तन अब तुशार की छातियों से चिपके हुए थे और वो उसकी बाहों में । तुशार उसे चूमे जा रहा था और अपने हाथों से उसकी दोनों बड़ी बड़ी गांड़ो को मसलते जा रहा था।
कमरे का वतावरण अत्यंत ही कामुक हो चुका था कमरे में दो नंगे जवान स्त्री पुरुष एक दूसरे से गुत्थम गुत्था खड़े थे और उनके शरीरों की गर्मी भी बढती जा रही थी और कमरे मे उन दोनों के मुंह से निकलने वाली आंहे और कामुक अवाजें गूंज रही थी।थोडी थोडी देर में रश्मी की चूड़ियों की खनक और पैर की पायल की छन छन की अवाज से माहौल और भी उत्तेजनापूर्ण होते जा रहा था।
तुषार कुछ देर तक और रश्मी को अपनी बाहों में थामे खड़ा रहा और उसके बदन की गर्मी का सुख लेते रहा तथा उसके नंगे जिस्म को सहलाते रहा लेकिन जब उसकी शक्ती जवाब दे जाती है तो वो अपने पैरों को ढीला छोड़ देता है और घुटनों के बल नीचे बैठ जाता है और अपने दोनों हाथों से उसकी गांड़ो को पकड़ लेता है और अपना मुंह उसकी चूत में लगा देता है।रश्मी खड़ी थी और तुषार उसकी बुर चूस रहा था,रश्मी के हाथ तुषार के सर पर तेजी से घुम रहे थे,उसकी आंखे बंद थी और मुंह से सिसकियां निकल रही थी।रश्मी के आचरण से ऐसा लग रहा था कि उसे तुषार का अपने जिस्म से खिलवाड़ मंजूर था और वो चाहती थी कि तुशार उसके नंगे जिस्म से जी भर कर खेले।
कुछ देर तक खड़ी रह कर अपनी बुर चूसवाने के बाद रश्मी का हौसला पस्त हो जाता है उसके पैरों में शकि नहीं बची थी कि वो उसके शरीर का भार उठा सके। उसके पांव ढीले पड़ जाते है और वो नीचे बैठ जाती है । उसके नीचे बैठते ही तुषार उसे हौले से धक्का दे कर वहीं सुला देता है चूंकी जमीन पर कालीन बिछी थी जो कि अब बिस्तर का काम कर रही थी। तुषार और रश्मी दोनों में अब वो हिम्मत और धैर्य नहीं बचा था कि वो पलंग तक जाये लिहाजा रश्मी भी बिना किसी विरोध के कालीन पर पीठ के बल सो जाती है। ये कालीन "राज" ने अपनी खास पसंद पर कमरे में लगवाया था और वो उस बेहद पसंद था लेकिन इसे लगवाते हुए उसने कभी ये गुमान भी ना हुआ होगा कि इसी कालीन पर सो कर कभी मेंरी ही औरत पतिता बन कर मेंरे ही भाई का लंड़ अपनी चूत में ड़्लवायेगी।
नंगी रश्मी नीचे सॊई पड़ी थी और अपने दोनों पैरों को उपर नीचे कर रही थी और अपने दोनों स्तनों को अपने ही हाथों से मसल रही थी थोड़ी थोड़ी देर में वो अपने होठों को अपने ही दातों से काट लेती और मुंह से सिसकारियां निकाल रही थी।रश्मी का मौन निमंत्रण पा कर पहले से ही उत्तेजित तुषार और भी कामांध हो जाता है और वो उसकी दोनों जांघो को को फ़ैला कर उसके बीच में बैठ जाता है और अपने लंड़ में मुंह से थुक निकाल कर उसमें लगाता है और उससे अपने लंड़ को चिकना करता है और उसे रश्मी की चूत में लगा कर एक हल्का सा धक्का देता है तो वो आधा रश्मी की चूत मे घुस जाता है।
रश्मी भी अपनी बुर में होने वाली वासना की खुजली से बचैन थी और इस बात का इंतजार कर रही थी तुषार अब उसके जिस्म से खेलना छोड़ कर अपना लंड़ उसकी बुर में ड़ाले और उसकी बुर चोदना शुरु करे। तुशार का लंड़ अपनी चूत में पा कर वो बेहद आनंद का अनुभव करने लगी और अपनी चूत को उपर उछाल उछाल कर वो तुषार का पूरा लंड़ अपनी चूत मे लेने की कोशीश करने लगी।
तुषार उसकी मंशा समझ जाता है और एक जोर के झटके के साथ अपना पूरा का पूरा लंड़ रश्मी की चूत में ड़ाल देता है।
लंड़ के झटके के साथ अंदर जाने के साथ ही रश्मी के मूह से एक जोर की आह्ह्ह्ह्ह निकल जाती है । उसकी आंखे बंद थी लेकिन मुंह खुला हुआ था और वो बार बार अपनी जीभ अपने होठों पर फ़ेर रही थी । कामवासना के अतिरेक के कारण उसका सर कभी दाएं तो कभी बायें घूम रहा था। पूर्णत: उन्मुक्त और नंगी रश्मी ने अपने जिस्म को पूरी तरह से ढ़ीला करके तुषार को समर्पित कर दिया था और तुषार के लंड़ के लिये अपनी चूत में प्रवेश को और भी असान बना दिया था। वो तुषार के लंड़ को को अपनी चूत की गहराईयों तक महसूस करना चाहती थी। नंगी रश्मी नागीन की तरह कमरे के कालीन में बलखा रही थी और उसके ऐसे बलखाने से वो और भी मादक लग रही थी और तुषार को और तेजी से अपनी चूत में प्रहार करने के लिये उकसा रही थी।
तुषार ने रश्मी के जिस्म पर ऐसा अधिकार जमा लिया था कि उसे पाने और भोगने के लिये उसे रश्मी की सहमति की भी जरुरत नहीं रह गई थी । आठ महीनों से अपनी कामवासना को लगातार दबाने और अपने मनोभावों को दबाने के कारण जो कुंठा उसके भीतर पैदा हो गई थी उसमें वो ये भी भूल चुकी थी वो एक जवान स्त्री है। शादी का मतलब उसके लिये केवल दो वक्त का खाना बनाना और अपने सास ससुर की सेवा करना भर रह गया था । पति से दूर संभोग विहीन स्त्री के लिये शादी एक बोझ बन गई थी और उसकी भावनाएं मुरझा गई थी और वो भी खुद को अपनी सास की तरह बूढी औरत समझने लगी थी और उसी तरह व्यवहार करने लगी थी। लेकिन तुषार ने जबरन ही सही लेकिन जब उसे मजबूर करके नंगी किया और उसकी बूर को चोदा तब उसे अपने जवान होने का अहसास हुआ और उसे ये भी अहसास हुआ कि उसके जवान शरीर की भी कुछ जरुरत ऐसी हैं जिसे केवल एक मर्द ही पूरा कर सकता है।
रश्मी की हालत ऐसी हो गई थी कि तुषार का लंड़ पाने के लिये एक ही चीज की जरुरत थी और वो थी एकांत । दुनिया की नजरों से दूर किसी बंद कमरे में वो किसी भी रुप में तुषार का लंड़ अपनी चूत में लेने के लिये तैयार थी।और इसके लिये न तो उसे किसी मखमली बिस्तर की जरुरत और ना ही पलंग की और इसीलिये तुषार ने जब उसे कमरे के कालीन में चोदने के लिये सुलाया तो वो बिना किसी विरोध के उसी जगह चुदने के लिये तैयार हो गई।
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वो उस्के थोड़ा और करीब जाती है और अपने नंगे जिस्म को निहारने लगती है। अपने नंगे जिस्म को देखते हुए कभी तो वो शर्मा जाती और कभी गौरव और अहंकार से उसका मन भर जाता कि मेंरे इसी जिस्म को पाने के लिये तुषार इतना ललायित रहता है। उसे इस बात के लिये खुद पर बेहद घमंड़ हो रहा था कि तुषार मेंरे इस जिस्म के लिये पागल है। लेकिन ये अहंकार तो दुनिया की हर स्त्री को होता है कि पुरुष उसके जिस्म का दिवाना है और उसके पिछे पागल है।
अपने जिस्म पर घमंड़ करना हर स्त्री का स्वभाव होता है,और उसे भोगना हर पुरुष का। वो इस बात से शायद अन्जान होती है कि पुरुष का अंतिम लक्ष्य तो उसके जिस्म में बसी उसकी चूत होती है फ़िर शरीर चाहे किसी रश्मी का हो या किसी सुनीता,अनिता या अंजली का हो।
कुछ देर तक इसी तरह अपने जिस्म को आईने में निहारने के बाद वो मंद मंद मुस्कुराते हुए एक निगाह पलंग पर पड़े नंगे सोये पड़े तुषार पर ड़ालती है और बाथरुम में चली जाती है।
बाथरुम में पहुंच कर रश्मी ने शावर चालू किया और अपने शरीर की सफ़ाई करने लगी । दोनों जिस्मों के गुत्थम गुत्था होने से पैदा होने वाला पसीना और तुशार के वीर्य ने उसके शरीर को चिपचिपा बना दिया था और चुदाई के दौरान हुई कसरत ने उसको काफ़ी थका दिया था। लेकिन पानी के बौछार के शरीर में लगने से उसे काफ़ी राहत महसूस हो रही थी और ताजगी का अह्सास उसके शरीर में नवीन उर्जा का संचार करने लगा।
लगभग १० मीनट तक नहाने के बाद रश्मी पूरी तरह ताजगी महसूस करने लगी और अब उसने शावर बंद किया अपने बदन को पोंछने के बाद वो बिना तौलिया लपेटे नंगी ही वापस कमरे में आ गई । अब उसे तुषार से शर्म जैसी कोई बात नहीं थी ।
इधर तुषार भी लगभग ३० मीनट की नींद पूरी करने के बाद जाग चुका था और काफ़ी तरोतजा मह्सूस कर रहा था । उसने अपनी आंखे खोली और पलंग पर ही पड़ा रहा।
पलंग पर लेटे हुए ही उसने एक नजर रश्मी पर ड़ाली लेकिन वो बिस्तर पर नहीं थी , उसे बिस्तर पर ना पा कर उस्की निगाहें रश्मी को खोजने लगी। नहाने के कारण रश्मी के बदन में एक अलग ही चमक दिखाई दे रही थी और उसका गोरा बदन नंगा होने के वजह से और भी मादक लग रहा था ।रश्मी नहा कर कमरे में नग्न खड़ी थी उसका एक पैर स्टूल पर था और दूसरा पैर जमीन था और वो अब अपने पैरों को पोछ रही थी । उसके बाल खुले हुए थे और उसकी कमर तक लटक रहे थे।
अपनी खूबसूरत हसीना के चिकने नंगे बदन को देख कर तुशार के लंड़ में फ़िर हरकत होने लगी । उसकी बड़ी बड़ी नग्न गांड़े ,मोटी जांघ और सुमेरु पर्वत की तरह विशाल लटकते हुए स्तन को देख तुषार का लंड फ़िर अपने अकार में आने लगा और फ़िर से रश्मी की चूत में जाने के लिये मचलने लगा। वो तुरंत हरकत में आता है और पलंग से खड़ा हो जाता है। उसका लंड़ अब फ़िर से बूरी तरह से कड़क हो चुका था और वो उसी अवस्था में रश्मी के पीछे जा कर खड़ा हो जाता है और उसके बदन को पीछे से कामुक नजरों से घूरने लगता है।
रश्मी इस बात से बेखबर थी की तुशार जाग चुका है और उसके एकदम पिछे आ कर खड़ा हो चुका है, वो अपनी ही धुन में थी और पूरी तन्मयता से अपने नंगे बदन को पोछे जा रही थी । वो ये सोच रही थी की अब कपड़े पहनने के बाद तो नीचे पहुंचेगी और घर के बाकी सदस्यों के साथ बाजार जा कर तुषार और सुधा की सगाई का समान खरिदेगी । उसे पता था कि इस काम काफ़ी वक्त लगने वाला है।लेकिन तुषार को इस बात की कोई भी जल्दी नहीं थी। और उसे तो कुछ और ही मंजूर था।
कुछ क्षणों तक रश्मी के नंगे बदन को घूरने के बाद तुषार ने रश्मी को पिछे से पकड़ लिया और अपना लंड़ रश्मी की नंगी गांड़ो की दरारों मे जोर से दबा दिया और उसने अपने दोनों हाथों को आगे कर के उसके दोनों विशाल स्तनों को पकड़ लिया।
अचानक इस तरह पकड़ने से रश्मी चौंक जाती है,वो पिछे मुड़ने कर देखने का प्रयास करती है लेकिन तुषार ने उसे इतनी जोर से पिछे से भींच कर रखा था कि वो पलट नहीं पाती वो केवल अपनी गर्दन थोड़ी उपर उठा कर पिछे खड़े तुषार की तरफ़ देखने का प्रयास करती है और कहती है " अरे ये क्या! छोड़ो मुझे, नीचे मम्मी,पापा इंतजार कर रहे होंगे बजार जाना है, अभी सगाई का सामान खरिदना और पूरी तैयारी करनी है और तुम हो कि फ़िर शुरु हो गये। अभी मन नहीं भरा क्या? छोड़ो मुझे प्लीज।
तुषार पर रश्मी की इन बातों का कोई असर नहीं होता वो और भी जोर से रश्मी को पकड़ लेता है और उसकी गांड पर अपने लंड़ का दबाव और भी बढ़ा देता है और उसके दोनों स्तनों को और भी ज्यादा जोरों से पकड़ लेता है और अपना लंड़ धीरे धीरे रश्मी गांड़ मे उपर निचे रगड़ने लगता है। रश्मी की नरम नरम विशाल गद्देदार गांड़ में अपना लंड़ रगड़ने से उसे एक अलग ही सुख का अहसास हो रहा था और उसकी उत्तेजना भी अपने चरम में पहुंच जाती है।
वो उसी तरह से उसकी गांड मे अपने लंड़ को रगड़ते हुए ही रश्मी के गालों को चूमता है और कहता है " अभी क्या जल्दी है जान? अभी तो १० ही बजा है, और तुम्हें तो मम्मी ने ११:३० तक नीचे आने को कहा है। अभी नीचे जाओगी तो भी वो अपने समय से ही निकलेंगे और बेकार में तुम्हें किचन का काम बता देंगे। इसलिये ११:३० तक उपर ही रहॊ फ़िर दोनों देवर भाभी साथ ही नीचे उतरेंगे। रश्मी प्रत्युत्तर में कुछ कहने के लिये मुंह खोलने का प्रयास करती है लेकिन तुषार अपने होंठ रश्मी के होठों से लगा देता है और उसकी मदमस्त जवानी का रस पीने लगता है।
तुषार अब अपना लंड़ रश्मी की गांड मे रगड़ रहा था , उसके दोनों हाथ रश्मी के स्तनों को मसल रहे थे और उसके होठों से जवानी का रस चूम रहा था । रश्मी चाह कर भी कुच बोल नहीं बोल पा रही थी और लगातार अपने बदन को मसले जाने के कारण वो भी धीरे धीरे गरम होने लगी और उसकी दमित वासना फ़िर उछाल मारने लगी।
अब तुशार अपने दांये हाथ को रश्मी के स्तन से हटाता है और धीरे धीरे उसके पेट को स्पर्श करते हुए वो अपना दांया हाथ रश्मी की उभरी हुई जवान चूत पर रख देता है।
अपनी जवान चूत पर तुषार का हाथ लगते ही रश्मी पर मदहोशी छाने लगती है और वो तुषार का लंड़ अपनी चूत में लेने के लिये मचलने लगती है।
तुषार के हाथ अब रश्मी की चूत की दरारों के उपर घूम रहे थे और इधर रस्मी का बदन फ़िर से उत्तेजना के मारे थरथराने लगता है। कुछ देर तक रश्मी की चूत को सहलाने के बाद त्षार अपनी एक उंगली रश्मी की चूत के अंदर ड़ाल देता है और उसे हौले हौले अंदर बाहर करने लगता है।रश्मी मारे उत्तेजना के गरम हो जाती और उसकी चूत से पानी निकलने लगता है। उसके पैरों की शक्ति अब जवाब देने लगती है और अब खड़े रह पाना उसके लिये काफ़ी कठिन था।
चूत से निकलने वाले पानी के अपने हाथों से लगते ही तुशर समझ जाता है कि भाभी अब फ़िर से गरम हो चुकी है।अब वो और भी तेजी से उसकी चूत से खेलने लगता है और अपनी उंगली उसकी चूत से और भी तेजी से रगड़ने लगता है।
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रश्मी अब बेकाबू हो जाती है और उसके मुंह से आह्ह्ह आह्ह्ह्ह ओफ़्फ़्फ़ सीऽऽऽऽऽ सीऽऽऽऽऽऽऽऽ की अवाजें निकलने लगती है। उसके लिये अब उस पोजीशन में खड़े रहना अब संभव नहीं था तुषार का लंड़ बुरी तरह से उसकी गांड़ से चिपका हुआ था और उसका एक हाथ रश्मी के दोनों स्तनों को भीच रहे थे और उसे मसल रहे थे और दूसरा हाथ उसकी चूत से खिल्वाड़ कर रहा था। रश्मी को बेहद आनंद आ रहा था लेकिन कुछ ही देर पहले वो तुषार के लंड के स्वाद चख चुकी थी इसलिये अपनी चूत में केवल
एक छोटी सी उंगली से उसे वो सुख और संतुष्टी नहीं प्राप्त हो रही थी जो उसे कुछ देर पहले तुशार के लंड़ से मिली थी।
वो बदहवास हो जाती है और अपना पूरा जोर लगा कर गोल घुम जाती है और तुषार से लिपट जाती है । तुशार भी उसे उसे अपनी बाहों में भीच लेता है और उसके चेहरे को बेतहशा चूमने लगता है। रश्मी के विशाल स्तन अब तुशार की छातियों से चिपके हुए थे और वो उसकी बाहों में । तुशार उसे चूमे जा रहा था और अपने हाथों से उसकी दोनों बड़ी बड़ी गांड़ो को मसलते जा रहा था।
कमरे का वतावरण अत्यंत ही कामुक हो चुका था कमरे में दो नंगे जवान स्त्री पुरुष एक दूसरे से गुत्थम गुत्था खड़े थे और उनके शरीरों की गर्मी भी बढती जा रही थी और कमरे मे उन दोनों के मुंह से निकलने वाली आंहे और कामुक अवाजें गूंज रही थी।थोडी थोडी देर में रश्मी की चूड़ियों की खनक और पैर की पायल की छन छन की अवाज से माहौल और भी उत्तेजनापूर्ण होते जा रहा था।
तुषार कुछ देर तक और रश्मी को अपनी बाहों में थामे खड़ा रहा और उसके बदन की गर्मी का सुख लेते रहा तथा उसके नंगे जिस्म को सहलाते रहा लेकिन जब उसकी शक्ती जवाब दे जाती है तो वो अपने पैरों को ढीला छोड़ देता है और घुटनों के बल नीचे बैठ जाता है और अपने दोनों हाथों से उसकी गांड़ो को पकड़ लेता है और अपना मुंह उसकी चूत में लगा देता है।रश्मी खड़ी थी और तुषार उसकी बुर चूस रहा था,रश्मी के हाथ तुषार के सर पर तेजी से घुम रहे थे,उसकी आंखे बंद थी और मुंह से सिसकियां निकल रही थी।रश्मी के आचरण से ऐसा लग रहा था कि उसे तुषार का अपने जिस्म से खिलवाड़ मंजूर था और वो चाहती थी कि तुशार उसके नंगे जिस्म से जी भर कर खेले।
कुछ देर तक खड़ी रह कर अपनी बुर चूसवाने के बाद रश्मी का हौसला पस्त हो जाता है उसके पैरों में शकि नहीं बची थी कि वो उसके शरीर का भार उठा सके। उसके पांव ढीले पड़ जाते है और वो नीचे बैठ जाती है । उसके नीचे बैठते ही तुषार उसे हौले से धक्का दे कर वहीं सुला देता है चूंकी जमीन पर कालीन बिछी थी जो कि अब बिस्तर का काम कर रही थी। तुषार और रश्मी दोनों में अब वो हिम्मत और धैर्य नहीं बचा था कि वो पलंग तक जाये लिहाजा रश्मी भी बिना किसी विरोध के कालीन पर पीठ के बल सो जाती है। ये कालीन "राज" ने अपनी खास पसंद पर कमरे में लगवाया था और वो उस बेहद पसंद था लेकिन इसे लगवाते हुए उसने कभी ये गुमान भी ना हुआ होगा कि इसी कालीन पर सो कर कभी मेंरी ही औरत पतिता बन कर मेंरे ही भाई का लंड़ अपनी चूत में ड़्लवायेगी।
नंगी रश्मी नीचे सॊई पड़ी थी और अपने दोनों पैरों को उपर नीचे कर रही थी और अपने दोनों स्तनों को अपने ही हाथों से मसल रही थी थोड़ी थोड़ी देर में वो अपने होठों को अपने ही दातों से काट लेती और मुंह से सिसकारियां निकाल रही थी।रश्मी का मौन निमंत्रण पा कर पहले से ही उत्तेजित तुषार और भी कामांध हो जाता है और वो उसकी दोनों जांघो को को फ़ैला कर उसके बीच में बैठ जाता है और अपने लंड़ में मुंह से थुक निकाल कर उसमें लगाता है और उससे अपने लंड़ को चिकना करता है और उसे रश्मी की चूत में लगा कर एक हल्का सा धक्का देता है तो वो आधा रश्मी की चूत मे घुस जाता है।
रश्मी भी अपनी बुर में होने वाली वासना की खुजली से बचैन थी और इस बात का इंतजार कर रही थी तुषार अब उसके जिस्म से खेलना छोड़ कर अपना लंड़ उसकी बुर में ड़ाले और उसकी बुर चोदना शुरु करे। तुशार का लंड़ अपनी चूत में पा कर वो बेहद आनंद का अनुभव करने लगी और अपनी चूत को उपर उछाल उछाल कर वो तुषार का पूरा लंड़ अपनी चूत मे लेने की कोशीश करने लगी।
तुषार उसकी मंशा समझ जाता है और एक जोर के झटके के साथ अपना पूरा का पूरा लंड़ रश्मी की चूत में ड़ाल देता है।
लंड़ के झटके के साथ अंदर जाने के साथ ही रश्मी के मूह से एक जोर की आह्ह्ह्ह्ह निकल जाती है । उसकी आंखे बंद थी लेकिन मुंह खुला हुआ था और वो बार बार अपनी जीभ अपने होठों पर फ़ेर रही थी । कामवासना के अतिरेक के कारण उसका सर कभी दाएं तो कभी बायें घूम रहा था। पूर्णत: उन्मुक्त और नंगी रश्मी ने अपने जिस्म को पूरी तरह से ढ़ीला करके तुषार को समर्पित कर दिया था और तुषार के लंड़ के लिये अपनी चूत में प्रवेश को और भी असान बना दिया था। वो तुषार के लंड़ को को अपनी चूत की गहराईयों तक महसूस करना चाहती थी। नंगी रश्मी नागीन की तरह कमरे के कालीन में बलखा रही थी और उसके ऐसे बलखाने से वो और भी मादक लग रही थी और तुषार को और तेजी से अपनी चूत में प्रहार करने के लिये उकसा रही थी।
तुषार ने रश्मी के जिस्म पर ऐसा अधिकार जमा लिया था कि उसे पाने और भोगने के लिये उसे रश्मी की सहमति की भी जरुरत नहीं रह गई थी । आठ महीनों से अपनी कामवासना को लगातार दबाने और अपने मनोभावों को दबाने के कारण जो कुंठा उसके भीतर पैदा हो गई थी उसमें वो ये भी भूल चुकी थी वो एक जवान स्त्री है। शादी का मतलब उसके लिये केवल दो वक्त का खाना बनाना और अपने सास ससुर की सेवा करना भर रह गया था । पति से दूर संभोग विहीन स्त्री के लिये शादी एक बोझ बन गई थी और उसकी भावनाएं मुरझा गई थी और वो भी खुद को अपनी सास की तरह बूढी औरत समझने लगी थी और उसी तरह व्यवहार करने लगी थी। लेकिन तुषार ने जबरन ही सही लेकिन जब उसे मजबूर करके नंगी किया और उसकी बूर को चोदा तब उसे अपने जवान होने का अहसास हुआ और उसे ये भी अहसास हुआ कि उसके जवान शरीर की भी कुछ जरुरत ऐसी हैं जिसे केवल एक मर्द ही पूरा कर सकता है।
रश्मी की हालत ऐसी हो गई थी कि तुषार का लंड़ पाने के लिये एक ही चीज की जरुरत थी और वो थी एकांत । दुनिया की नजरों से दूर किसी बंद कमरे में वो किसी भी रुप में तुषार का लंड़ अपनी चूत में लेने के लिये तैयार थी।और इसके लिये न तो उसे किसी मखमली बिस्तर की जरुरत और ना ही पलंग की और इसीलिये तुषार ने जब उसे कमरे के कालीन में चोदने के लिये सुलाया तो वो बिना किसी विरोध के उसी जगह चुदने के लिये तैयार हो गई।
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जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
