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Adultery शादी
#20
"वाह चाचीजी जी, आप तो बहुत ही प्यारी बहु लेकर आई हैं, बहुत बहुत बधाई हो आपको।" आद्विक की एक पड़ोस में रहने वाली आंटीजी नीतिका को देख कर बोल पड़ीं।

"अरे आद्विक, तुम तो कहते थे कि जब भी शादी करोगे अपनी पसंद से करोगे और वो भी पूरे ढोल नगाड़े के साथ, फिर ये अचानक, चुपचाप वाली बात तो समझ नहीं आई बेटा.... और वो भी सुना है कि शादी भी तुमने अपनी पसंद नहीं बल्कि दादी की पसंद की लड़की से की है, अचानक इतना बदलाव....??" वो आंटी नीतू दीदी के हाथ से शरबत का ग्लास उठाती हुई फिर से बोल पड़ीं।

"अरे आंटी जी इसे ही तो प्यार कहते हैं ना कि जबसे दादी के कहने पर इन्हें देखा, देखते ही रह गया फिर किसी और चीज का इंतजार कर ही नहीं पाया.....!!! और देखिए ना आपको भी नहीं बुला पाया...!!" उर्मिला जी या कोई और कुछ बोलती कि पहले ही आद्विक ने तड़ाक से जवाब दे डाला और वो चुप हो गईं।

आद्विक के इस जवाब से जहां पड़ोसन आंटी जी थोड़ा चिढ़ गईं वहीं घर के बांकी लोग आद्विक के इस अंदाज पर मन ही मन में हंस रहे थे। दूसरी ओर नीतिका आद्विक के इस अंदाज को बिलकुल भी समझ नहीं पा रही थी। जहां उसे अपने जीवनसाथी के रूप में एक शांत और समझदार इंसान की उम्मीद थी आद्विक उसके बिलकुल विपरीत था।

थोड़ी देर में ही वहां की सारी रस्मों को निभाने के बाद उर्मिला जी ने उन दोनों को नीतिका के मायके भेज दिया जहां से उन्हें तैयार हो कर एक साथ रिसेप्शन हॉल में जाना था। आद्विक चिढ़ा हुआ तो बहुत था लेकिन सामने बैठे ड्राइवर की वजह से नीतिका को कुछ खुल कर कह नहीं पा रहा था। वहीं नीतिका की आंखों में भले ही कुछ पलों के लिए लेकिन ये एक सुकून था कि वो अपने घर जा रही थी, अपने मां बाप के पास।

अचानक थोड़े ही आगे पेट्रोल पंप के पास जा कर ड्राइवर ने आद्विक को इशारा किया और उसकी हामी देख उसने पेट्रोल पंप के अंदर की ओर गाड़ी कर ली। वहां थोड़ी भीड़ थी तो गाड़ी से निकल कर वो अपनी बारी की प्रतीक्षा करने लगा।

आद्विक (मौका देख कर गुस्से में)- तुम मिडिल क्लास वाले लोगों को सिर्फ एक बात आती है ना, वो है बस दिखावा करना, फिर चाहे सामने वाले को पसंद हो या फिर नहीं हो।

नीतिका को आद्विक की बात बहुत बुरे तरीके से चुभी और वो कुछ कहती कि आद्विक फिर से बोल पड़ा।

आद्विक - सही है, इतने बड़े घर में रिश्ता हो गया बैठे -बैठे तो दिखाना तो बनता है ना......

नीतिका (आद्विक की बात काटते हुए गुस्से में)- बस कीजिए, आपको नहीं जाना है ना घर, नहीं जाना है ना रिसेप्शन में..... तो बस मत जाइए लेकिन बेफिजूल की ये कड़वी बातें अपने पास रखिए।

आद्विक नीतिका की बात सुन और गुस्सा हो गया।

आद्विक (मुंह बना कर गुस्से में)- ओह, तो महारानी जी को सचमुच में ये लगता है कि मुझे इन लोगों की चाल समझ नहीं आती है... (थोड़ा रुक कर)...... तुम बस शुकर करो कि मैंने ना नहीं की तुम लोगों के इन फिजूल के दिखावे के लिए वरना....... वरना सबका होश एक साथ ठिकाने लग जाता।

नीतिका बिल्कुल रुआंसी हो चुकी थी और उसकी आंखें फिर से भर आईं।

आद्विक (चिढ़ कर) - बस...... फिर से वही ड्रामा, थकती नहीं हो, इतना आंसू तो ग्लिसरीन लगा कर भी ना आएं किसी के जितना तुम्हें ऐसे ही हर बात में निकालने का शौक है।

नीतिका बस चुपचाप बिना कुछ बोले अपने आंसू पोंछ रही थी। आगे कुछ बात होती कि उसके पहले ही ड्राइवर वापस आ गया और ये लोग दोनों ही सामान्य होने की कोशिश करने लगे। आद्विक की एक एक बात शब्दशः नीतिका के कानों में हथौड़े की तरह पड़े थे जिसे वो बहुत मुश्किल से अपने आप को सामान्य कर रही थी ताकि किसी को भी उसके घर में उसके अंदर की असल तकलीफ का अंदाजा न हो पाए।

थोड़ी ही देर में दोनों घर पहुंच गए। सामने अखिल जी को बाहर देखते ही नीतिका दौड़ कर उनके गले लग गई जैसे एक दिन बाद नहीं बल्कि सालों बाद मिल रही हो अपने पापा से..! अखिल जी ने भी प्यार से बिटिया को गले लगा लिया। आद्विक को ये चीजें देख कर अजीब लग रही थी या शायद वो इन पलों और इन रिश्तों की खूबसूरती को समझ नहीं पा रहा था। उसके और सुबोध जी के बीच का रिश्ता एक बाप -बेटे से ज्यादा एक जिम्मेदारी के निर्वाह का था सो उसमें भावनाओं की गर्माहट ना के ही बराबर थी।

नीतिका से मिलते ही अखिल जी आद्विक के पास आए और प्यार से उसके सिर पर भी हाथ फेरा। जहां एक ओर वो इन नए रिश्तों से चिढ़ कर दूर भाग रहा था वहीं ये रिश्ते उसे और अपनी जिंदगी के खालीपन का याद दिला रहे थे। अखिल जी को देख एक पल के लिए उसका मन आया कि वो झिड़क दे लेकिन फिर अगले ही पल उसके अंदर के संस्कारों ने उसका हाथ थाम लिया।

अब तक विभा जी भी आ चुकी थीं बाहर, नीतिका उनके भी गले लग गई और उन्होंने भी प्यार से उसका सिर चूम लिया फिर आद्विक के पास जाकर उसे भी आशीर्वाद दिया। उन दोनों की आरती उतार कर उन्हें प्यार से घर के अंदर लाया। अब तक शुभम भी आ चुका था तो वो भी आद्विक की जीजू...... जीजू करके आगे पीछे कर रहा था।

सबसे मिलने के बाद विभा जी ने ही नीतिका को आद्विक को ले कर कमरे में जाने को कहा ताकि वे दोनों थोड़ा रिलैक्स और फ्रेश हो सकें। आद्विक की उस घर में आज पहले बार आने की असहजता अखिल जी और विभा जी अच्छे से समझ रहे थे इसीलिए वे सभी उसे प्यार से उस माहौल को समझने का वक्त दे रहे थे।

नीतिका ने आद्विक को कमरा दिखा दिया और उसके जरूरत की लगभग सारी चीज़ें दिखा दी जो विभा जी ने पहले से ही इंतजाम कर रखा था और नीतिका को भी बता दिया था। आद्विक चारों ओर नजरें घुमा कर उस कमरे को देख रहा था जहां नीतिका के पलंग के सिरहाने में एक बड़ी सी फैमिली पिक्चर लगी थी। वहीं एक ओर उसके स्टडी टेबल पर एक प्यारा सा वुडेन फ्रेम रखा था जिसमें उसकी और भव्या की एक बहुत ही प्यारी सी फोटो लगी थी। ना चाह कर भी आद्विक की नज़र उस तस्वीर में नीतिका की मुस्कुराहट से हट ही नहीं रही थी।

"और कुछ चाहिए हो तो प्लीज मुझे एक मैसेज डाल दीजिएगा, मैं आ जाऊंगी...तब तक आप आराम कर लीजिए..!!" नीतिका चुपचाप बोल कर वापस जाने लगी।

आद्विक (खोया सा)- क्यों, तुम कहां जा रही हो ??

नीतिका आद्विक के इस सवाल से एक पल के लिए बिलकुल चुप हो गई वहीं आद्विक पलट कर नीतिका की ओर देखने लगा। तस्वीर वाली नीतिका एक ओर जितनी ही प्यारी और खुश लग रही थी वहीं आज ये सामने खड़ी नीतिका मुरझाई और उदास सी थी। जहां उस तस्वीर में उसकी आंखें चमक रही थीं वहीं आज असल की जिंदगी में वही आंखें बिल्कुल सूनी थीं। आद्विक का नीतिका को यूं इतने गौर से देखना उसे बहुत अजीब महसूस करा रहा था तो बस वो बिना कुछ बोले कमरे से निकल गई।

अब तक आद्विक को भी होश आया तो उसने भी वापस से सिर झटक लिया और सामने लगे बेड पर जाकर बैठ गया। कलाई से अपनी घड़ी खोल कर बेड के साथ लगे टेबल पर रखने लगा तो उसे एक छोटी और प्यारी सी डायरी दिखी। ना जाने क्या सोच कर वो उस डायरी को उठा कर पलट कर देखने लगा।

"???? तुम मेरे हो ना..!!❤️?" डायरी के पहले पन्ने पर ही उसे एक खूबसूरत सी लिखावट में ये लिखा मिला और उसे अजीब लगा...!!

"अच्छा तो इन महारानी का भी अपना पास्ट है, बन कर तो ऐसी सीधी -साधी दिखती है जैसे कितनी सच्ची है...!! मैं भी तो देखूं इसकी असलियत....!!" आद्विक खुद में बड़बड़ाता हुआ सा बोल रहा था और उत्सुकता से डायरी को आगे पलट रहा था।

"क्या है ये सब, आपको इतनी सी बात पता होनी चाहिए कि किसी की पर्सनल चीज़ें इस तरीके से छुप कर झांकना कितना गलत है...!!" नीतिका जो हाथ में कॉफी लिए खड़ी थी गुस्से में आद्विक की ओर देख कर बोल पड़ी।

आद्विक (गौर से देख कर)- कोई बड़ा राज छुपा रखा है जो इतना डर रही हो??

नीतिका (गुस्से में)- जो इंसान खुद जैसा होता है उसे पूरी दुनिया भी वैसी ही लगती है।

इतना कह कर नीतिका ने आद्विक के हाथ से अपनी डायरी ले ली। लेकिन आद्विक की सनक और उसका दिमाग तो एक अलग ही दिशा में दौड़ रहा था जिससे उस पल उसका बाहर निकलना मुश्किल था।

आद्विक (गुस्से में)- अब तक मुझे लगा था कि शायद मैं ही तुम्हें नहीं समझ पा रहा हूं, बदतमीज ही सही लेकिन सच्ची हो....!! लेकिन भूल कैसे गया मैं कि तुम जैसी लड़कियां तो होश आते ही सबसे पहली पढ़ाई इस चीज की करती हो कि कैसे लड़कों.........(थोड़ा रुक कर)........सॉरी अमीर लड़कों को अपनी उंगलियों पर नचा सको फिर इसके लिए चाहे कुछ भी करना पड़े...!! बस पूरी दुनिया के आगे ढोंग सती सावित्री होने का करना है....!!

आद्विक (फिर से)- ........फिर तुम्हारा कोई पास्ट कैसे नहीं होगा?? जरूर होगा।

नीतिका आद्विक के मुंह से इतनी बड़ी बात सुन कर आवाक रह गई। शादी से पहले भी आद्विक की कई ऐसी हरकतें और बातें थीं जिसने उसे बहुत तकलीफ पहुंचाई थीं लेकिन आज एक पति के रूप में उसके मुंह से ऐसी बातें सुनना उसके लिए बहुत ही कठिन था, वो वहीं फफक कर रो पड़ी जिसमें उसका आसूं नहीं उसका दर्द था जो रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।

आद्विक (और गुस्से में)- बंद करो यार ये ड्रामा, वरना सच कहता हूं दो दिन में मेरे सामने तुम्हारे इन आंसुओं की कीमत दो कौड़ी की भी नहीं बचेगी....!! क्या प्रूव करना चाहती हो, हर बात पर रो कर.....?? यही ना कि कितनी सच्ची हो...... हुंह......... अगर सच में तुम सच्ची होती ना, तो अभी इस पल तुम्हारी आंखों में ये दिखावे के आंसू नहीं बल्कि होंठों पर इन सबका जवाब होता।

नीतिका कुछ कहती कि उसके पहले ही उसके दरवाजे पर किसी ने नॉक किया और दोनों चुप हो गए। बहुत मुश्किल से उसने खुद को संभालते हुए "हां, अभी आई" का जवाब दिया। आद्विक अब भी बस उसे ही घूर रहा था।

"क्या कर रही है तू, अब तक तैयार नहीं हुई??? देर हो जायेगी, मैंने बोला था ना कि plz देर मत करना....!! और .......(इधर उधर देखते हुए)..... और ये क्या तूने तो अभी तक अपने कपड़े भी नहीं निकाले हैं नीकू.... क्या कर रही है यार, जल्दी कर ना.....!! लगातार बोलती हुई भव्या कमरे में आ गई।

भव्या (मुस्कुराते हुए)- सॉरी जीजू.... ऐसे धावा बोल डाला आपकी प्राइवेसी पर लेकिन सच में बहुत काम था और फिर अगर अच्छे से तैयार नहीं किया आपकी मैडम को तो फिर नाराज भी तो आप ही होंगे ना....??

आद्विक यूं अचानक से भव्या को सामने देख बिलकुल चुप हो गया क्योंकि क्या जवाब दे उसे समझ नहीं आ रहा था।

भव्या (फिर से)- और जीजू..... ये क्या आप भी तो अब तक तैयार नहीं हुए हैं, आप भी हो जाइए, सबको टाइम से हॉल पहुंचना है ना।

नीतिका (हिम्मत करके)- भावी, एक कप कॉफी ला देगी, थोड़ा सिर दुख रहा है, फिर तैयार होती हूं।

भव्या (उसकी और देख कर कुछ सोचते हुए)- हां.... हां.. अभी लाती हूं।

भव्या (अचानक से रुक कर)- जीजू, आपके लिए भी ना....???

आद्विक (शांति से)- नहीं, मुझे नहीं चाहिए....

भव्या (मजाक में)- क्यों, एक ही कप में दोनों काम चला लोगे....?? अच्छा है, प्यार बढ़ाओ, प्यार....!!

इतना बोल कर भव्या हंसती हुई बाहर चली गई।

आद्विक (वापस से गुस्से में)- अगर हमारे बीच की कोई भी बात इस तक और फिर इससे दर्श तक पहुंची तो देखना मुझसे ज्यादा बुरा कोई भी नहीं होगा, मेरी जिंदगी का तमाशा बनाना मुझे हरगिज पसंद नहीं है, समझी..??

नीतिका के आंखों ने फिर से आंसुओं को जगह दे ही दी।

आद्विक (फिर से)- और हां, ये जो तुम और तुम्हारे परिवार वाले ये नाटक कर रहे हो ना, सबको दिखाने का, इसका हिस्सा मैं जिंदगी में पहली और आखिरी बार बन रहा हूं, दुबारा इसकी उम्मीद मुझसे कभी भी मत रखना। ये आज तुम्हें समझा रहा हूं अगली बार तुम्हारे घरवालों को भी समझाने में मुझे देर नहीं लगेगी।

इतना कह कर आद्विक कपड़े ले कर बाथरूम की ओर चेंज करने चला गया और नीतिका बुत सी वहीं बैठी रोती रही। थोड़ी ही देर में भव्या भी कॉफी ले कर आ गई तो आद्विक भी जरूरी फोन का बहाना कर रूम से निकल गया।

भव्या (कुछ सोच कर)- कोई बात हुई है ना तुम दोनों के बीच में..???

नीतिका (खुद को सामान्य करते हुए)- नहीं तो.....

भव्या - तू ठीक है ना, खुश है ना...??

नीतिका (बहुत हिम्मत से अपनी तकलीफ छुपाते हुए)- हां. .हां...

भव्या (प्यार से)- नीकू, मैं जानती हूं मेरे लाख बार पूछने पर भी तू मुझे अपनी बात नहीं बताएगी, लेकिन plz अपना ध्यान रखो, देखना सब ठीक हो जायेगा जल्दी ही।

नीतिका (उदास मन से)- हम्मम......

थोड़ी देर बाद निश्चित समय पर सभी परिवार वाले नए जोड़े को साथ ले कर रिसेप्शन हॉल के लिए निकल गए। नीतिका और आद्विक साथ हो कर भी बिलकुल भी साथ नहीं थे बस अपने परिवार की इज्जत के नाम पर इस वक्त साथ खड़े थे।
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी  हम अकेले हैं.



thanks
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शादी - by neerathemall - 21-10-2022, 05:07 PM
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RE: शादी - by Jainsantosh - 21-10-2022, 05:29 PM
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RE: शादी - by Teeniv - 28-10-2022, 12:56 AM
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