22-08-2022, 02:49 PM
मेरी वासना जाग गयी. जो लड़की मुझे अपना सब कुछ अपना खुदा मानती है, जो चोदना खाना तो मेरा हक भी बनता है और मेरा फर्ज भी. मैंने भी मस्ती से मनोरम को चूमने चाटने लगा. उसकी साड़ी के अंडर उनकी लचीली पतली कमर पर मेरा हाथ चला गया. मनोरमा के जिस्म की खुशबू मेरी नाक में उतर गयी. ‘इस नई चूत का भोग लगाओ आज!!’ मैंने खुद से कहा.
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
