25-07-2022, 02:34 PM
"राज और सुनीता, यह देखो मेरी पत्नी की फोटो," कहते हुए उसने अपने बटवे में से निकिता की दो-तीन फोटो हमें दिखाई.
निकिता तो बहुत ही सुन्दर गोरी और प्यारी लग रही थी. उसके भरे हुए स्तनों का आकार भी फोटो में साफ़ दिखाई दे रहा था.
उसके फोटो देखते ही मैं और सुनीता ने आँखों आँखों में कह दिया की अब किसी भी हाल पर इस दम्पति को पटाकर अदलाबदली की चुदाई का मजा लेना ही चाहिए . रेस्टारेंट से वापिस आने के समय मैंने जान बूझ के नीरज को सुनीता के और करीब लाने की तरकीब चलाई.
मैंने कहा, "नीरज, इतना अच्छा खाना खानेके बाद हम तीनों एक मोटरसाइकिल पर घर तक वापिस नहीं जा सकते. आप को तो घर का रास्ता मालूम नहीं इसलिए आप और सुनीता ऑटो रिक्शा में बैठ कर घर आ जाओ. मैं अकेला ही मोटरसाइकिल पर निकलता हूँ."
कोई भी मर्द मेरी सुन्दर और सेक्सी बीवी के साथ का मजा कैसे छोड़ देता?
उसने फट से कहा, "हाँ, राज बात तो आप की सच हैं."
हम दोनोने सुनीता की तरफ देखा. उसके तो मन ही मन लड्डू फूट रहे थे. मैं उन दोनोको एक ऑटो रिक्शा में बिठाकर घर चला आया.
जब तीनों भी घर पर मिले तब नीरज बोला, "राज, आप दोनोने मेरी इतनी सहायता पूरे अपनेपन से की हैं, जैसे की हम आज नहीं, कई सालोंके मित्र हैं.
मैं एक छोटे शहर से मुंबई आया हूँ, मुझे थोड़ा डर लग रहा था. अब ऐसा लगता हैं की मैं और निकिता आप दोनों के सबसे अच्छे दोस्त बन कर रहेंगे. आप कितने अच्छे हो और ख़ास कर सुनीता जी ने तो मेरा बहुत अच्छा ख़याल रखा हैं. आज से आप लोग हमारे लिए सिर्फ पडोसी नहीं बल्कि एकदम अपने घरवाले है।"
इसके बाद वह अपने घर चला गया.
मैंने सुनीता को बाहों में भरते हुए पूंछा, "सुनीता रानी, ऑटो रिक्शा का सफर कैसा रहा?"
उसने कहा, " बस हम दोनों चिपक चिपक कर बैठे थे और निकिता के बारे में बाते कर रहे थे."
मुझे लगा चलो अच्छा हैं, नीरज अच्छा सभ्यतापूर्वक और समझदार इंसान हैं. हम दोनों ने साथ में शावर किया और बैडरूम में घुस गए.
रात में मैं जब सुनीता के मम्मे चूस रहा था तब सुनीता ने कहा, "राज, लगता हैं की अपनी सेक्सुअल फैंटसी पूरी होने की उम्मीद हैं. नीरज तो बहुत ही हैंडसम हैं और फोटो देख कर ऐसा लगता हैं की उसकी पत्नी निकिता बिलकुल तुम्हारी ड्रीम गर्ल हैं, गोरी, सुन्दर और एकदम सेक्सी।"
मैंने कहा, "हाँ मेरी जान, मुझे भी ऐसा ही लग रहा हैं. तुम नीरज को अच्छे से अपनी सुंदरता से लुभा दो. फिर वह दोनों भी हम दोनों के साथ वासना का खेल खेलने के लिए तैयार हो जाएंगे।"
उस रात को मैं सुनीता को निकिता के नाम से पुकारता रहा और वह मुझे नीरज के नाम से! हमने पूरी रात में चार बार चुदाई का लुत्फ़ उठाया. सुनीता इतनी ज्यादा एक्साइट हो गयी की जब मैं उसे डॉगी पोज़ में चोद रहा था तब उसने खुद अपने मुंहसे कहा, "नीरज डार्लिंग, चुदाई के साथ साथ तुम्हारी ऊँगली भी मेरी गांड में अंदर बाहर करो."
मैं भी निकिता का नाम लेकर उसको चोदता रहा और उसकी गांड में ऊँगली करता रहा. नीरज के नामसे सुनीता काफी उत्तेजित हुई थी. आज पहली बार हम दोनों किसी कपल के लेकर जबरदस्त फैंटसी सेक्स कर रहे थे.
अचानक सुनीता चढ़ गई मेरे लंड के ऊपर और जोर जोर से चिल्लाने लगी, "उम्म्ह... अहह... हय... याह..." और जोर जोर से चुदाई करने लगी.
मैं भी नीचे से धक्के लगा रहा था और फिर आवेश में आकर मैंने सुनीता को पागलपने की हद जैसा नीचे पलटा और लगा चोदने!
"हाय मेरी निकिता रानी तेरी गोरी गोरी जवानी चोदने में क्या मजा आ रहा हैं. आह आह," मैं पागलोंकी तरह उसके वक्ष मसलते हुए कहता गया.
जैसे की नए पार्टनर के साथ चुदने के स्वप्न का वहशीपन सा छा रहा था हम दोनों पर. अब मैंने सुनीता की गांड के नीचे एक तकिया लगा दिया और उसकी चूत ऊपर उठ गई. ऐसी भरपूर चुदाई हो रही थी.
सुनीता बोल रही थी, "मेरे हैंडसम नीरज डार्लिंग, आ मेरी इस साफ़ और मुलायम चूत को अपने मोटे लौड़े से चोद कर पूरा खोल डाल."
इस घमासान लंड - चुत की लड़ाई में न सुनीता थक रही थी और मैं भी अपनी लंड की पिचकारी छोड़ने को तैयार न था.
"निकिता डार्लिंग तेरी चुत, गोरी जाँघे, भरी हुई गांड और बड़े बड़े बूब्स को सारा खा जानेवाला हूँ," मैं उसे चोदते हुए कह रहा था.
पांच मिनट के बाद अब मेरे लंड से वीर्य छुटने को तैयार था. मैंने सुनीता को नीचे लिटाया और उसकी मांसल टांग ऊपर अपने कंधे पर रखी और पूरा लौड़ा अंदर करके आखरी के चार जोरदार धक्के लगाये और सारा वीर्य उसके मुँह में डाल दिया.
उस रात को मदहोशी की तरह हम दोनों एक दुसरे को नीरज और निकिता के बारे सोचकर प्यार करते रहे. कई महीनोंके बाद ऐसी धुआंधार चुदाई हुई थी.
जबतक निकिता उसके मैके से नहीं आयी तबतक रोज शाम का भोजन नीरज ने हमारे साथ ही किया. सुनीता रानी ने नीरज को उसकी पसंद के अनेक व्यंजन बनाकर खिलाये. भोजन परोसते समय सुनीता कई बार अपना पल्लू गिराकर ध्यान से अपने सुडौल मम्मोंका उसे दर्शन कराती रही. इन दो हफ़्तों में हम तीनो एकदम ख़ास दोस्त बन गए. मेरा हंसी मजाक करना और एकदम साफ़ दिल से रहना उसे भी अच्छा लगा होगा. अगर मुझे उसकी बीवी को पटाना हैं तो मुझे पहले नीरज को भी तो इम्प्रेस करना था ना!
सुनीता के भरे हुए वक्ष ज्यादा समय तक देखने के लिए वो कुछ न कुछ बहाना रहता और मैं भी उसे हमारे घर पर देर रात तक रुकने के लिए बार बार मजबूर करता था. रोज रात को वो जब हमारे दरवाजे से निकलता तब मैं उससे हाथ मिलाता और सुनीता उसे बड़े प्यारसे गले लगाकर अपने बूब्स उसकी चौड़ी छाती पर दबाकर बाय बाय करती रहती. मुझे लगता हैं हर रात को उसने सुनीता रानी के नाम की मूंठ जरूर मारी होगी.
जिस दिन निकिता आने वाली थी उस दिन हम तीनो भी उसे लेने बोरीबन्दर स्टेशन पर गए. पिछले दिनोंमे निकिता को नीरज ने हम दोनोके बारेमें काफी कुछ बताया होगा।
जब निकिता प्लेटफार्म पर उतरी तो जन्नत की हूर लग रही थी. सचमुच नीरज बड़ा ही किस्मतवाला था की उसे इतनी सुन्दर और मादक पत्नी मिली थी. उसने नीरज को गले लगाया और दोनों एकदम जबरदस्त आलिंगन में जुड़ गए. नीरज ने एक हल्का सा चुम्बन भी उसके गाल पर भी जुड़ दिया.
फिर निकिता मेरी सुनीता रानी के गले मिली.
"पिछले दो हफ्तोंसे नीरज के मुँह से तुम्हारी बहुत तारीफे सुन रही हूँ," निकिता ने कहा.
"अरे, मैं तो बस एकदम सीधी साधी लड़की हूँ, नीरज ही इतने अच्छे हैं की उन्हें हर कोई अच्छा लगता हैं. अब तुम आ गयी हो तो हम दोनों एकदम प्यारी सहेलिया बनकर रहेंगे," सुनीता हंसकर बोली.
लग रहा था की निकिता सचमुच बहुत खुश थी की उसे सुनीता जैसी अच्छी सहेली एकदम पड़ोस में ही मिल गयी नहीं तो पूरा दिन वह कैसे बिताती. जब दोनों सेक्सी लड़किया एक दुसरे से अलग हुई तब आखिर में निकिता ने मुझसे हाथ मिलाया. वह, क्या मस्त और मुलायम हाथ था उसका!
"चलो, आखिर आप से भी मुलाक़ात हो ही गयी राज। नीरज ने आप के बारे में भी बहुत सारी बाते कही हैं," निकिता ने कहा.
मैंने हँसते हँसते कहा, "अच्छा! उम्मीद हैं की कमसे काम थोड़ी तो अच्छी बाते कही होंगी। और एक बात, आज से मेरा कैमरे के ऊपर से विश्वास पूरी तरह से उठ गया हैं."
निकिता तो बहुत ही सुन्दर गोरी और प्यारी लग रही थी. उसके भरे हुए स्तनों का आकार भी फोटो में साफ़ दिखाई दे रहा था.
उसके फोटो देखते ही मैं और सुनीता ने आँखों आँखों में कह दिया की अब किसी भी हाल पर इस दम्पति को पटाकर अदलाबदली की चुदाई का मजा लेना ही चाहिए . रेस्टारेंट से वापिस आने के समय मैंने जान बूझ के नीरज को सुनीता के और करीब लाने की तरकीब चलाई.
मैंने कहा, "नीरज, इतना अच्छा खाना खानेके बाद हम तीनों एक मोटरसाइकिल पर घर तक वापिस नहीं जा सकते. आप को तो घर का रास्ता मालूम नहीं इसलिए आप और सुनीता ऑटो रिक्शा में बैठ कर घर आ जाओ. मैं अकेला ही मोटरसाइकिल पर निकलता हूँ."
कोई भी मर्द मेरी सुन्दर और सेक्सी बीवी के साथ का मजा कैसे छोड़ देता?
उसने फट से कहा, "हाँ, राज बात तो आप की सच हैं."
हम दोनोने सुनीता की तरफ देखा. उसके तो मन ही मन लड्डू फूट रहे थे. मैं उन दोनोको एक ऑटो रिक्शा में बिठाकर घर चला आया.
जब तीनों भी घर पर मिले तब नीरज बोला, "राज, आप दोनोने मेरी इतनी सहायता पूरे अपनेपन से की हैं, जैसे की हम आज नहीं, कई सालोंके मित्र हैं.
मैं एक छोटे शहर से मुंबई आया हूँ, मुझे थोड़ा डर लग रहा था. अब ऐसा लगता हैं की मैं और निकिता आप दोनों के सबसे अच्छे दोस्त बन कर रहेंगे. आप कितने अच्छे हो और ख़ास कर सुनीता जी ने तो मेरा बहुत अच्छा ख़याल रखा हैं. आज से आप लोग हमारे लिए सिर्फ पडोसी नहीं बल्कि एकदम अपने घरवाले है।"
इसके बाद वह अपने घर चला गया.
मैंने सुनीता को बाहों में भरते हुए पूंछा, "सुनीता रानी, ऑटो रिक्शा का सफर कैसा रहा?"
उसने कहा, " बस हम दोनों चिपक चिपक कर बैठे थे और निकिता के बारे में बाते कर रहे थे."
मुझे लगा चलो अच्छा हैं, नीरज अच्छा सभ्यतापूर्वक और समझदार इंसान हैं. हम दोनों ने साथ में शावर किया और बैडरूम में घुस गए.
रात में मैं जब सुनीता के मम्मे चूस रहा था तब सुनीता ने कहा, "राज, लगता हैं की अपनी सेक्सुअल फैंटसी पूरी होने की उम्मीद हैं. नीरज तो बहुत ही हैंडसम हैं और फोटो देख कर ऐसा लगता हैं की उसकी पत्नी निकिता बिलकुल तुम्हारी ड्रीम गर्ल हैं, गोरी, सुन्दर और एकदम सेक्सी।"
मैंने कहा, "हाँ मेरी जान, मुझे भी ऐसा ही लग रहा हैं. तुम नीरज को अच्छे से अपनी सुंदरता से लुभा दो. फिर वह दोनों भी हम दोनों के साथ वासना का खेल खेलने के लिए तैयार हो जाएंगे।"
उस रात को मैं सुनीता को निकिता के नाम से पुकारता रहा और वह मुझे नीरज के नाम से! हमने पूरी रात में चार बार चुदाई का लुत्फ़ उठाया. सुनीता इतनी ज्यादा एक्साइट हो गयी की जब मैं उसे डॉगी पोज़ में चोद रहा था तब उसने खुद अपने मुंहसे कहा, "नीरज डार्लिंग, चुदाई के साथ साथ तुम्हारी ऊँगली भी मेरी गांड में अंदर बाहर करो."
मैं भी निकिता का नाम लेकर उसको चोदता रहा और उसकी गांड में ऊँगली करता रहा. नीरज के नामसे सुनीता काफी उत्तेजित हुई थी. आज पहली बार हम दोनों किसी कपल के लेकर जबरदस्त फैंटसी सेक्स कर रहे थे.
अचानक सुनीता चढ़ गई मेरे लंड के ऊपर और जोर जोर से चिल्लाने लगी, "उम्म्ह... अहह... हय... याह..." और जोर जोर से चुदाई करने लगी.
मैं भी नीचे से धक्के लगा रहा था और फिर आवेश में आकर मैंने सुनीता को पागलपने की हद जैसा नीचे पलटा और लगा चोदने!
"हाय मेरी निकिता रानी तेरी गोरी गोरी जवानी चोदने में क्या मजा आ रहा हैं. आह आह," मैं पागलोंकी तरह उसके वक्ष मसलते हुए कहता गया.
जैसे की नए पार्टनर के साथ चुदने के स्वप्न का वहशीपन सा छा रहा था हम दोनों पर. अब मैंने सुनीता की गांड के नीचे एक तकिया लगा दिया और उसकी चूत ऊपर उठ गई. ऐसी भरपूर चुदाई हो रही थी.
सुनीता बोल रही थी, "मेरे हैंडसम नीरज डार्लिंग, आ मेरी इस साफ़ और मुलायम चूत को अपने मोटे लौड़े से चोद कर पूरा खोल डाल."
इस घमासान लंड - चुत की लड़ाई में न सुनीता थक रही थी और मैं भी अपनी लंड की पिचकारी छोड़ने को तैयार न था.
"निकिता डार्लिंग तेरी चुत, गोरी जाँघे, भरी हुई गांड और बड़े बड़े बूब्स को सारा खा जानेवाला हूँ," मैं उसे चोदते हुए कह रहा था.
पांच मिनट के बाद अब मेरे लंड से वीर्य छुटने को तैयार था. मैंने सुनीता को नीचे लिटाया और उसकी मांसल टांग ऊपर अपने कंधे पर रखी और पूरा लौड़ा अंदर करके आखरी के चार जोरदार धक्के लगाये और सारा वीर्य उसके मुँह में डाल दिया.
उस रात को मदहोशी की तरह हम दोनों एक दुसरे को नीरज और निकिता के बारे सोचकर प्यार करते रहे. कई महीनोंके बाद ऐसी धुआंधार चुदाई हुई थी.
जबतक निकिता उसके मैके से नहीं आयी तबतक रोज शाम का भोजन नीरज ने हमारे साथ ही किया. सुनीता रानी ने नीरज को उसकी पसंद के अनेक व्यंजन बनाकर खिलाये. भोजन परोसते समय सुनीता कई बार अपना पल्लू गिराकर ध्यान से अपने सुडौल मम्मोंका उसे दर्शन कराती रही. इन दो हफ़्तों में हम तीनो एकदम ख़ास दोस्त बन गए. मेरा हंसी मजाक करना और एकदम साफ़ दिल से रहना उसे भी अच्छा लगा होगा. अगर मुझे उसकी बीवी को पटाना हैं तो मुझे पहले नीरज को भी तो इम्प्रेस करना था ना!
सुनीता के भरे हुए वक्ष ज्यादा समय तक देखने के लिए वो कुछ न कुछ बहाना रहता और मैं भी उसे हमारे घर पर देर रात तक रुकने के लिए बार बार मजबूर करता था. रोज रात को वो जब हमारे दरवाजे से निकलता तब मैं उससे हाथ मिलाता और सुनीता उसे बड़े प्यारसे गले लगाकर अपने बूब्स उसकी चौड़ी छाती पर दबाकर बाय बाय करती रहती. मुझे लगता हैं हर रात को उसने सुनीता रानी के नाम की मूंठ जरूर मारी होगी.
जिस दिन निकिता आने वाली थी उस दिन हम तीनो भी उसे लेने बोरीबन्दर स्टेशन पर गए. पिछले दिनोंमे निकिता को नीरज ने हम दोनोके बारेमें काफी कुछ बताया होगा।
जब निकिता प्लेटफार्म पर उतरी तो जन्नत की हूर लग रही थी. सचमुच नीरज बड़ा ही किस्मतवाला था की उसे इतनी सुन्दर और मादक पत्नी मिली थी. उसने नीरज को गले लगाया और दोनों एकदम जबरदस्त आलिंगन में जुड़ गए. नीरज ने एक हल्का सा चुम्बन भी उसके गाल पर भी जुड़ दिया.
फिर निकिता मेरी सुनीता रानी के गले मिली.
"पिछले दो हफ्तोंसे नीरज के मुँह से तुम्हारी बहुत तारीफे सुन रही हूँ," निकिता ने कहा.
"अरे, मैं तो बस एकदम सीधी साधी लड़की हूँ, नीरज ही इतने अच्छे हैं की उन्हें हर कोई अच्छा लगता हैं. अब तुम आ गयी हो तो हम दोनों एकदम प्यारी सहेलिया बनकर रहेंगे," सुनीता हंसकर बोली.
लग रहा था की निकिता सचमुच बहुत खुश थी की उसे सुनीता जैसी अच्छी सहेली एकदम पड़ोस में ही मिल गयी नहीं तो पूरा दिन वह कैसे बिताती. जब दोनों सेक्सी लड़किया एक दुसरे से अलग हुई तब आखिर में निकिता ने मुझसे हाथ मिलाया. वह, क्या मस्त और मुलायम हाथ था उसका!
"चलो, आखिर आप से भी मुलाक़ात हो ही गयी राज। नीरज ने आप के बारे में भी बहुत सारी बाते कही हैं," निकिता ने कहा.
मैंने हँसते हँसते कहा, "अच्छा! उम्मीद हैं की कमसे काम थोड़ी तो अच्छी बाते कही होंगी। और एक बात, आज से मेरा कैमरे के ऊपर से विश्वास पूरी तरह से उठ गया हैं."
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
