11-07-2022, 04:25 PM
अब मैंने उसकी नाइटी को उतारना शुरू कर दिया.
अगले ही पल वो मेरे सामने सिर्फ पैंटी में थी.
उसका गोरा और शानदार जिस्म मुझे और भी ज्यादा पागल बना रहा था.
वो भी मेरे कपड़े उतारने लगी. मैं भी सिर्फ कच्छे में रह गया था.
उसने मुझे धक्का देकर बिस्तर पर गिरा दिया और मेरे जिस्म को चूमने चाटने लगी.
वो मुझे मेरी गर्दन से लेकर मेरी जांघों तक चाट रही थी.
उसके ऐसा करते समय उसकी चूचियां मेरे जिस्म को रगड़ रही थीं जिससे मेरा लंड और भी ज्यादा खूंखार होता जा रहा था.
मुझसे रहा न गया और मैंने उसे खींच कर लिटा दिया और उसके जिस्म के हर हिस्से को अपनी जीभ से चाटने लगा.
कुछ ही देर में मैंने उसकी पैंटी को उतार दिया.
हाय … उसका वो नंगा बदन और वो करीने से कटे हुए बालों से सजी हुई चूत मेरे सामने थी.
वो सीन सोच कर आज भी मेरा लंड खड़ा हो जाता है.
फिर मैंने अपने होंठ उसकी रसीली चूत पर रख दिए और चूत को चाटने चूमने लगा.
कुछ ही सेकंड बाद वो वासना से लबरेज आवाजें निकालने लगी.
मैंने उसे काफी गर्म कर दिया था. उससे रहा नहीं जा रहा था. वो एकदम से उठी और मेरे लंड को चूसने लगी.
कुछ ही समय बाद वो मुझे गिरा कर मेरे लौड़े पर अपनी चूत सैट करके बैठ गई.
आह … सोनल की गर्म चूत किसी भट्टी की मानिंद तप रही थी.
अगले कुछ पल बाद वो मेरे लंड पर दौड़ने लगी. उसकी भरी हुई चूचियां मेरे सामने डिस्को कर रही थीं.
मैंने उसे अपनी तरफ खींचा, तो वो समझ गई और उसने अपनी एक चूची मेरे मुँह में लगा दी.
आह … मस्त मजा आ रहा था.
मैं अपने भाई की बीवी की धकापेल चुदाई कर रहा था और उधर भाई, मेरे कमरे में मेरी बीवी को रगड़ रहा होगा.
ये अहसास मुझे और भी ज्यादा गर्म कर रहा था.
कोई दस मिनट बाद सोनल मेरे सीने पर गिर कर हांफने लगी.
अब मैंने अपने होंठ सोनल की रसीली चूत पर रख दिए थे और उसकी चूत को चाटने चूसने लगा था.
कुछ सेकंड बाद सोनल कसमसाती हुई मादक आवाज निकालने लगी- आंह आंह विकु मर गई … आह साले चाट ले आह!
सोनल की सांसें बढ़ने लगी थीं.
मैं समझ गया कि इसका काम तमाम होने वाला है. मैं उसकी चूत में और अन्दर तक जीभ डाल कर चूसने लगा.
‘आह्ह्स्स्स् … आह्ह … जान मैं गई आह विकु … मेरा पानी उम्मन आआह …’
वो झड़ने को हो गई थी, मगर उसी समय मैं उसकी चूत से हट गया.
अब वो पगला गई थी.
वो बोली- आंह क्यों हट गए … मुझे और चूसो न विक्रांत … प्लीज़ … और तेज!
मैंने उससे कहा- आवाज धीरे निकाल सोनू … किशी उठ जाएगी.
अगले ही पल वो मेरे सामने सिर्फ पैंटी में थी.
उसका गोरा और शानदार जिस्म मुझे और भी ज्यादा पागल बना रहा था.
वो भी मेरे कपड़े उतारने लगी. मैं भी सिर्फ कच्छे में रह गया था.
उसने मुझे धक्का देकर बिस्तर पर गिरा दिया और मेरे जिस्म को चूमने चाटने लगी.
वो मुझे मेरी गर्दन से लेकर मेरी जांघों तक चाट रही थी.
उसके ऐसा करते समय उसकी चूचियां मेरे जिस्म को रगड़ रही थीं जिससे मेरा लंड और भी ज्यादा खूंखार होता जा रहा था.
मुझसे रहा न गया और मैंने उसे खींच कर लिटा दिया और उसके जिस्म के हर हिस्से को अपनी जीभ से चाटने लगा.
कुछ ही देर में मैंने उसकी पैंटी को उतार दिया.
हाय … उसका वो नंगा बदन और वो करीने से कटे हुए बालों से सजी हुई चूत मेरे सामने थी.
वो सीन सोच कर आज भी मेरा लंड खड़ा हो जाता है.
फिर मैंने अपने होंठ उसकी रसीली चूत पर रख दिए और चूत को चाटने चूमने लगा.
कुछ ही सेकंड बाद वो वासना से लबरेज आवाजें निकालने लगी.
मैंने उसे काफी गर्म कर दिया था. उससे रहा नहीं जा रहा था. वो एकदम से उठी और मेरे लंड को चूसने लगी.
कुछ ही समय बाद वो मुझे गिरा कर मेरे लौड़े पर अपनी चूत सैट करके बैठ गई.
आह … सोनल की गर्म चूत किसी भट्टी की मानिंद तप रही थी.
अगले कुछ पल बाद वो मेरे लंड पर दौड़ने लगी. उसकी भरी हुई चूचियां मेरे सामने डिस्को कर रही थीं.
मैंने उसे अपनी तरफ खींचा, तो वो समझ गई और उसने अपनी एक चूची मेरे मुँह में लगा दी.
आह … मस्त मजा आ रहा था.
मैं अपने भाई की बीवी की धकापेल चुदाई कर रहा था और उधर भाई, मेरे कमरे में मेरी बीवी को रगड़ रहा होगा.
ये अहसास मुझे और भी ज्यादा गर्म कर रहा था.
कोई दस मिनट बाद सोनल मेरे सीने पर गिर कर हांफने लगी.
अब मैंने अपने होंठ सोनल की रसीली चूत पर रख दिए थे और उसकी चूत को चाटने चूसने लगा था.
कुछ सेकंड बाद सोनल कसमसाती हुई मादक आवाज निकालने लगी- आंह आंह विकु मर गई … आह साले चाट ले आह!
सोनल की सांसें बढ़ने लगी थीं.
मैं समझ गया कि इसका काम तमाम होने वाला है. मैं उसकी चूत में और अन्दर तक जीभ डाल कर चूसने लगा.
‘आह्ह्स्स्स् … आह्ह … जान मैं गई आह विकु … मेरा पानी उम्मन आआह …’
वो झड़ने को हो गई थी, मगर उसी समय मैं उसकी चूत से हट गया.
अब वो पगला गई थी.
वो बोली- आंह क्यों हट गए … मुझे और चूसो न विक्रांत … प्लीज़ … और तेज!
मैंने उससे कहा- आवाज धीरे निकाल सोनू … किशी उठ जाएगी.
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
