11-07-2022, 04:24 PM
खैर … ये तो तय हो ही गया था कि मैं अब अनलॉक होने पर ही वापस जा सकूँगा.
मैं सोनल से छत पर मिला और उसके साथ मस्ती करना शुरू कर दी.
मैंने सोनल के मम्मों पर हाथ फेरते हुए कहा- सब घर पर ही हैं, कैसे क्या होगा. मेरी तो कुछ समझ ही नहीं आ रहा है.
सोनल बोली- क्यों न हम सबको इस खेल में मिला लें!
मैंने कहा- तुम पागल हो गई हो क्या?
वो बोली- मुझे तुम्हारे साथ सेक्स करना है बस … ट्राई करते हैं. मैं अपने पति हितेश को और बहन अमृता से बात करके सैटिंग कर लूंगी. तुम अपनी नैना को पटा लो बस.
मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि सोनल कैसे अपनी बहन से बात करेगी, क्या इन दोनों में सब कुछ खुला है!
फिर भी मुझे कुछ मजा आया कि नई चूत का स्वाद मिल सकता है तो मैं सोनल की बात से सहमत हो गया.
ये बात खत्म हुई तो हम दोनों छत पर ही लग गए.
मैंने सोनल की टांग उठा कर लंड पेलना चाहा मगर तभी कुछ आवाज से हुई और सोनल मुझसे अलग हो गई.
अब हम दोनों अपने मिशन पर लग गए.
मैंने अपनी पत्नी नैना से उस रात बात की तो वो बोली- तुम पागल हो गए हो क्या?
जब मैंने उसे सैट किया तो उसने ज्यादा विरोध नहीं किया.
मैंने उससे कहा- जरा सोच, तू, हितेश और भारत, सब एक साथ में होंगे और एक साथ में सेक्स का मजा होगा.
ये बात सुनकर नैना एकदम खामोश हो गई और गुम सी हो गई.
उसकी आंखों में मैंने सेक्स की तड़फ भांप ली थी और समझ गया था कि मेरी बीवी रांड बनने को तैयार है.
वो गर्म हो गई और मेरे साथ सेक्स करने लगी, चूत को मेरे लंड पर पटकती हुई बोली- ठीक है, तुम्हें जो करना है, करो. मैं तुम्हारे साथ हूं.
उसका ये जवाब मेरे लिए कुछ अलग सा था क्योंकि मैं नैना को पिछले कई साल से प्यार कर रहा था और आज तक मैं उसकी लंड बदलने की चाहत को नहीं समझ सका था.
खैर … अब हम दोनों को यहां भटिंडा में ग्रुप सेक्स का मौका रहा था.
अगले दिन सुबह मैंने सोनल को मोबाइल दिखाते हुए इशारा किया और उसके मोबाइल पर मैसेज किया कि दस बजे मिलो.
उसने जवाब दिया- 10:30 पर मेरे कमरे में आ जाओ.
उसके इस मैसेज का मतलब साफ़ समझौता हो गया, इसकी ओर इशारा कर रहा था.
नाश्ता करने के बाद मैं ऊपर उसके कमरे में चला गया.
मेरे मामाजी का घर 2 मंजिल का है, जिसमें 3 कमरे नीचे और 2 कमरे ऊपर बने थे.
मैंने देखा कि हितेश भाई तो अभी ऊपर ही है.
फिर भी मैं चला गया.
जैसे ही मैं रूम में गया, सोनल, हितेश और उनकी बेटी किशी रूम में थे.
मैं जाकर सोफे बैठ गया और टीवी देखने लगा.
टीवी पर न्यूज चल रही थी, मैं वो देखने लगा.
तभी एकदम से हितेश ने टीवी बंद किया और बोला- और सुना क्या चल रहा है?
मैंने जवाब दिया- कुछ नहीं भाई, लॉकडाउन में क्या चलेगा. अब जब तक यह चल रहा है, बस आराम ही करेंगे.
सोनल एकदम से उठी और अपनी बेटी से बोली- किशी चलो नीचे जाओ और ये बर्तन दादी मां को देकर आओ.
किशी बर्तन उठा कर चली गई.
मैं सोनल से छत पर मिला और उसके साथ मस्ती करना शुरू कर दी.
मैंने सोनल के मम्मों पर हाथ फेरते हुए कहा- सब घर पर ही हैं, कैसे क्या होगा. मेरी तो कुछ समझ ही नहीं आ रहा है.
सोनल बोली- क्यों न हम सबको इस खेल में मिला लें!
मैंने कहा- तुम पागल हो गई हो क्या?
वो बोली- मुझे तुम्हारे साथ सेक्स करना है बस … ट्राई करते हैं. मैं अपने पति हितेश को और बहन अमृता से बात करके सैटिंग कर लूंगी. तुम अपनी नैना को पटा लो बस.
मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि सोनल कैसे अपनी बहन से बात करेगी, क्या इन दोनों में सब कुछ खुला है!
फिर भी मुझे कुछ मजा आया कि नई चूत का स्वाद मिल सकता है तो मैं सोनल की बात से सहमत हो गया.
ये बात खत्म हुई तो हम दोनों छत पर ही लग गए.
मैंने सोनल की टांग उठा कर लंड पेलना चाहा मगर तभी कुछ आवाज से हुई और सोनल मुझसे अलग हो गई.
अब हम दोनों अपने मिशन पर लग गए.
मैंने अपनी पत्नी नैना से उस रात बात की तो वो बोली- तुम पागल हो गए हो क्या?
जब मैंने उसे सैट किया तो उसने ज्यादा विरोध नहीं किया.
मैंने उससे कहा- जरा सोच, तू, हितेश और भारत, सब एक साथ में होंगे और एक साथ में सेक्स का मजा होगा.
ये बात सुनकर नैना एकदम खामोश हो गई और गुम सी हो गई.
उसकी आंखों में मैंने सेक्स की तड़फ भांप ली थी और समझ गया था कि मेरी बीवी रांड बनने को तैयार है.
वो गर्म हो गई और मेरे साथ सेक्स करने लगी, चूत को मेरे लंड पर पटकती हुई बोली- ठीक है, तुम्हें जो करना है, करो. मैं तुम्हारे साथ हूं.
उसका ये जवाब मेरे लिए कुछ अलग सा था क्योंकि मैं नैना को पिछले कई साल से प्यार कर रहा था और आज तक मैं उसकी लंड बदलने की चाहत को नहीं समझ सका था.
खैर … अब हम दोनों को यहां भटिंडा में ग्रुप सेक्स का मौका रहा था.
अगले दिन सुबह मैंने सोनल को मोबाइल दिखाते हुए इशारा किया और उसके मोबाइल पर मैसेज किया कि दस बजे मिलो.
उसने जवाब दिया- 10:30 पर मेरे कमरे में आ जाओ.
उसके इस मैसेज का मतलब साफ़ समझौता हो गया, इसकी ओर इशारा कर रहा था.
नाश्ता करने के बाद मैं ऊपर उसके कमरे में चला गया.
मेरे मामाजी का घर 2 मंजिल का है, जिसमें 3 कमरे नीचे और 2 कमरे ऊपर बने थे.
मैंने देखा कि हितेश भाई तो अभी ऊपर ही है.
फिर भी मैं चला गया.
जैसे ही मैं रूम में गया, सोनल, हितेश और उनकी बेटी किशी रूम में थे.
मैं जाकर सोफे बैठ गया और टीवी देखने लगा.
टीवी पर न्यूज चल रही थी, मैं वो देखने लगा.
तभी एकदम से हितेश ने टीवी बंद किया और बोला- और सुना क्या चल रहा है?
मैंने जवाब दिया- कुछ नहीं भाई, लॉकडाउन में क्या चलेगा. अब जब तक यह चल रहा है, बस आराम ही करेंगे.
सोनल एकदम से उठी और अपनी बेटी से बोली- किशी चलो नीचे जाओ और ये बर्तन दादी मां को देकर आओ.
किशी बर्तन उठा कर चली गई.
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
