08-07-2022, 11:30 AM
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उसकी चूत एकदम से साफ थी. उसके बाल शायद आजकल में ही शेव किये गये थे. उसकी चूचियां और चूत देख कर मेरे मुंह में पानी आने लगा. अधेड़ उम्र में भी उसने अपने जिस्म को ऐसे मेंटेन करके रखा हुआ था जैसे कि किसी जवान लड़की का जिस्म हो.
रजिया आपा पूरी नंगी हो चुकी थी और उसकी नज़र मेरी फ्रेंची पर थी. मेरा लौड़ा मेरी फ्रेंची को उठाये हुए था. शायद रजिया लंड की बहुत प्यासी थी. उसकी चूत को लंड चाहिए था.
उसने जल्दी से मेरी टीशर्ट और बनियान को निकलवा दिया. अब मैं केवल फ्रेंची में था. उसने मुझे बेड पर धकेल कर नीचे लिटाया और मेरे पूरे जिस्म पर किस करने लगी. मैं भी मदहोश होने लगा.
किस करते हुए वो नीचे पहुंच गयी और मेरी फ्रेंची के ऊपर से मेरे तने हुए लौड़े को चूम लिया. फिर उसने अपने हाथों से मेरी फ्रेंची को नीचे खींचा और मेरा लंड उछल कर बाहर आ गया.
उसने मेरी फ्रेंची को मेरी टांगों से बिल्कुल ही निकाल दिया और मुझे भी पूरा का पूरा नंगा कर लिया. उसने फिर मेरे लंड को हाथ में लेकर देखा और उस पर एक दो बार ऊपर नीचे हाथ चलाया.
वो बोली- काफी सख्त है ये … तेरे जीजू से तो डेढ़ गुना बड़ा है!
इतना बोलकर वो मेरे लंड पर झुकती चली गयी और अगले ही पल मेरा लंड मेरी आपा के मुंह में था. वो मेरे लंड को आंखें बंद करके मस्ती में चूसने लगी और उस मदहोशी में मेरी आंखें भी बंद होने लगीं. मैं आह्ह … आह्ह … करके अपने लंड को चुसवाने लगा.
जब मुझसे रहा न गया तो मैंने उसको बेड पर गिरा लिया और उसकी चूचियों पर टूट पड़ा. जोर जोर से उसकी चूचियों को दबाते हुए उसके निप्पलों को चूसने काटने लगा.
वो भी जोर जोर से सिसकारने लगी- आह्ह … इमरान … उफ्फ … आराम से … बहुत दिनों के बाद चुसवा रही हूं.
फिर मैंने उसको 69 की पोजीशन में कर लिया. मैं उसकी चूत को चूसने लगा और वो मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी. एक हाथ से मैं उसकी चूचियों को भी दबा रहा था.
रजिया मेरे लंड को ऐसे चूस रही थी जैसे वो बरसों की प्यासी है. मैं उसकी चूत में जीभ देकर अंदर तक चूस रहा था. उसकी चूत से कामरस निकल रहा था जिसका स्वाद मुझे उसकी चूत को और जोर से काटने के मजबूर कर रहा था.
कभी मैं उसकी चूत में उंगली से चोदने लगता तो कभी फिर से जीभ डालकर चूसने लगता. उत्तेजना में पता नहीं कब मैं स्खलन के करीब पहुंच गया और मेरा वीर्य उसके मुंह में ही निकल गया. वो मेरे लंड के माल को पूरा का पूरा अंदर ही पी गयी.
मैं अभी उसकी चूत को चाट रहा था. हैरानी की बात थी कि मेरा वीर्य छूटने के बाद भी रजिया ने मेरे लंड को मुंह से नहीं निकाला. वो लगातार मेरे सिकुड़े हुए लंड को भी चूसती रही. उसने पांच मिनट में फिर से मेरे लंड में तनाव पैदा कर दिया.
मेरा लौड़ा एक बार फिर से खडा़ हो गया था. अब बहन की चुदाई की बारी थी. मैंने उसकी कमर के नीचे एक तकिया लगाया और अपना लंड उसकी चूत पर रखकर उसकी चूत के दाने को सहलाने लगा.
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
