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Adultery भाभी की बहन की बुर
#8
अब वो जोश में होने के कारण मेरे लंड को तेज-तेज ऊपर नीचे करने लगी. मुझे बहुत मजा आ रहा था. तभी मैंने उसकी जीन्स के बटन को खोला और उसे उसकी कमर से थोड़ा नीचे कर दिया. मेरा हाथ पेंटी के अन्दर चला गया. मैंने उसकी नंगी चुत पे जैसे ही हाथ लगाया, वो बिल्कुल पगला सी गई. उसने मुझे कसके पकड़ लिया. मैं उसकी चुत को सहलाने लगा. मेरा मन उसकी चुत को चूसने का था, पर मैं थिएटर में था, तो नहीं चूस सका. मेरे हाथों की रगड़ से कुछ ही देर में वो झड़ने लगी.

झड़ने के बाद वो बोली- चलो होटल में चलते हैं.

मेरा भी यही मन था. क्योंकि थिएटर में हम दोनों गर्म तो हो गए थे, वो झड़ भी चुकी थी. पर ऐसे ना वो संतुष्ट हुई, ना मैं संतुष्ट हुआ.

अब हम मूवी को बीच में छोड़कर होटल के रूम में आ गए. कमरे में आते ही मैंने दरवाजा बंद कर दिया और दीक्षा को पीछे से अपने बांहों में ले लिया. दीक्षा की पीठ मेरी छाती से पूरी तरह सटी हुई थी. उसकी मस्त सी गांड मेरे लंड से दबी हुई थी. उसकी जांघ मेरी जांघ से मिली हुई थी. अब मैंने पीछे से उसकी गर्दन पे अपने होंठ रखे और उसे चूमना शुरू कर दिया. मैं उसकी गांड को लंड से रगड़ रहा था और अपने हाथों से उसके पेट तथा कमर को सहला रहा था.

अब मैं अपने हाथों को ऊपर करके उसकी कमीज के ऊपर से उसके मम्मों को दबाने लगा. दीक्षा बहुत ही मादक सिसकारियां ले रही थी, जो मुझे और मदहोश कर रही थीं. अब स्थिति ये थी कि दीक्षा की गर्दन तथा कानों को अपने होंठों से चूस रहा था. उसकी गांड को अपने बड़े लंड से रगड़ रहा था तथा मम्मों को हाथों से तेज-तेज दबाए जा रहा था.

फिर मैंने झट से दीक्षा को आगे से घुमाकर उसके होंठों को पूरा अपने होंठों में भर लिया. दीक्षा तेज तेज होंठ को चूस रही थी. हम दोनों एक दूसरे की जीभ को चूसने लगे. दीक्षा इस तरह मेरे बांहों में थी कि उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां मेरी छाती से बिल्कुल चिपक गयी थीं. मैं उसके होंठों को चूसते हुए उसके गांड को हाथ में लेकर दबाने लगा.

अब मैंने दीक्षा की शर्ट को निकाल दिया और अपनी टी-शर्ट को भी हटा दिया. दीक्षा मेरी छाती और बांहों के पहलवानी कटावों को बड़े ध्यान से देख रही थी. मैं दीक्षा की गर्दन को चूमने लगा और ऐसे ही चूमते हुए उसके कंधों को पूरी तरह से अपने होंठों में लेकर चूमने लगा. मैं ऐसे ही चूसते हुए उसके एक मम्मे को ब्रा के ऊपर से ही मुँह में लेने लगा. ब्रा के ऊपर से ही उसके दोनों मम्मों को एक-एक करके मुँह में लेकर दांत से काटने लगा. वो मेरे सर को अपने मम्मे पे दबाए जा रही थी. कुछ पल बाद मैंने उसकी ब्रा को भी निकाल दिया.

आह क्या हसीन नजारा था. उसके चूचे एकदम सुन्दर सुडौल तराशे हुए थे.
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी  हम अकेले हैं.



thanks
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RE: भाभी की बहन की बुर - by neerathemall - 07-07-2022, 02:00 PM



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