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Adultery पड़ोस की भाभी
#14
आह गर्म गर्म सा लगा. उस टाइम तो मुझे जन्नत का मज़ा आ रहा था. हम दोनों आंखें बंद करके एक दूसरे के शरीर का मज़ा ले रहे थे.

भाभी मेरे लंड की मोटाई को अपनी चुत में फील कर रही थीं और मैं उनकी चूत की गहराई को माप रहा था. हम दोनों आंखें बंद करके एक दूसरे का मज़ा ले रहे थे.
मैं धीरे धीरे लंड को आगे पीछे कर रहा था, दोनों को बहुत मज़ा आ रहा था.
भाभी- आह संजय, तुम तो गजब हो यार, इतना मस्त मज़ा तो मैंने दो साल की शादी में कभी फील नहीं किया … आह सच में सेक्स का अपना मज़ा है यार … बस साथी मस्त होना चाहिए. तुम्हारा लंड भी गजब का है संजय … मेरे अन्दर तक जा रहा है … आह गर्म गर्म और बड़ा मजेदार लग रहा है यार. संजय तुम तो गजब का चोदते हो यार … मैं तो तुम्हारी दीवानी हो गयी हूँ. मुझे तो ऐसा लग रहा है कि असली मज़ा तो आज ही आया है संजय. तुम्हारा बदन भी बड़ा जोरदार है यार … मजबूत बांहें हैं, मस्त छाती है. उस पर ये मखमली बाल और लंड को तो पूछो मत … मैं तो जन्नत में चली गयी हूँ यार.
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी  हम अकेले हैं.



thanks
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RE: पड़ोस की भाभी - by neerathemall - 15-06-2022, 02:41 PM



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