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Adultery पड़ोस की भाभी
#13
भाभी- साफ़ नहीं किया तुमने?

मैं- अरे, मुझे उम्मीद थोड़ी ही थी कि आज ही मेरी किस्मत खुल जाएगी. आगे से ध्यान रखूंगा.
भाभी- हां, मुझे एकदम साफ़ पसंद है.
फिर भाभी ने धीरे से मेरे पज़ामे और अंडरवियर को नीचे सरका दिया. मेरा लंड पूरा टाइट था और चड्डी में अटक रहा था. भाभी ने अपने कोमल हाथों से लंड को पकड़ा और बाहर निकाल लिया. आह उसके हाथों का स्पर्श पाकर लंड और टाइट हो गया.
भाभी- हाईई … संजय, तुम्हारा तो बहुत मस्त है यार … रजत का भी अच्छा है पर तुम्हारा ज़्यादा अच्छा है.
बस इतना कहा भाभी ने और लंड को हाथों में लेकर ऊपर-नीचे करने लगीं. फिर भाभी ने धीरे से लंड को अपने मुँह में ले लिया और प्यार से चूसने लगीं.
मैं तो उस टाइम बिल्कुल पागल हो गया था.
थोड़ी देर लंड चूसने के बाद भाभी ने कहा- संजय, अब रहा नहीं जा रहा … प्लीज़ ऊपर आ जाओ ना.
मैं भाभी के ऊपर चढ़ गया और धीरे से उनकी मस्त चूत में अपने लंड का टोपा लगा दिया. भाभी की चुत एकदम चिकनी हो गयी थी. मेरा लंड आराम से अन्दर जाने लगा.
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी  हम अकेले हैं.



thanks
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RE: पड़ोस की भाभी - by neerathemall - 15-06-2022, 02:41 PM



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