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Adultery पड़ोस की भाभी
#12
मेरे साथ भाभी ने विश्वास करने में 6 महीने लगा दिए थे. मुझे पूरा आईडिया लग चुका था कि अगर मैं भाभी के साथ अच्छे से रहूँगा, इनका और फैमिली का ध्यान रखूंगा, तो ये मुझे जिंदगी का मज़ा देती रहेंगी और खुद भी मज़ा लेती रहेंगी.

भाभी मुझे पेट पर मदहोशी से चूम रही थीं. फिर धीरे से उन्होंने अपने होंठों को नीचे की तरफ सरकाया. मैं कंपकंपाने लगा था क्योंकि इससे नीचे तो मेरा पज़ामा था. मैंने धीरे से आंखें खोलकर भाभी को देखा. वो मस्ती से आंखें बंद करके बस मुझे चूमे जा रही थीं, असली मज़ा ले रही थीं.
तभी भाभी ने मुझे देखा, तो मुस्कुराने लगीं- प्लीज़ यार संजय … तुम अपनी आंखें बंद रखो … ऐसे मत देखो, मुझे शर्म आती है. बस मुझे फील करने दो.
मैं- हाईईईई ठीक है जानेमन … जो मान चाहे, वो करो … तुम बस खुश रहा करो.
भाभी ने धीरे से मेरे पज़ामे और अंडरवियर को एक साथ नीचे सरका दिया. मेरे लंड पर हल्के हल्के बाल थे.
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी  हम अकेले हैं.



thanks
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RE: पड़ोस की भाभी - by neerathemall - 15-06-2022, 02:40 PM



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