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Adultery पड़ोस की भाभी
#4
भी- अच्छा … हा हा हा … चलो अब चलते हैं बहुत देर हो गई है. आठ भी बजने वाले हैं. रजत का भी फोन आने वाला है … उनको बुरा लगेगा.

मैं- ठीक है भाभी, चलते हैं.
मैंने समझ लिया था कि भाभी ने मेरी बात को घुमा दिया और कोई रिप्लाई नहीं किया. इस विषय पर मेरी दुबारा बात करने की हिम्मत नहीं हुई.
इसी तरह करीब एक महीना और बीत गया, लेकिन मैंने फील किया कि भाभी अब कुछ ज्यादा ही बिंदास रहने लगी थीं. मैं बहुत बार उनके घर चाय पीने चला जाता था और वो भी ऊपर आ जाती थीं.
उस समय रजत भैया एक हफ्ते से बाहर गए हुए थे, फ्राइडे का दिन था. रजत भैया को अगले हफ्ते वापस आना था. मैं घर पहुंचा, भाभी का दरवाजा खटखटाया. भाभी किचन में कुछ काम कर रही थीं. उन्होंने साड़ी पहनी हुई थी … गजब माल लग रही थीं.
मैं- भाभी आज तो गजब ढा रही हो आप!
भाभी- अच्छा, ऐसा क्या है आज?
मैं- साड़ी में आप गजब लगती हो.
भाभी- हर कोई गजब लगती है.
मैं- आप कुछ ज़्यादा ही लगती हो, भगवान ने आपको फुर्सत में बनाया है, लिमिटेशन है वरना …
भाभी- वरना क्या … हा हा हा हा!
मैं- वरना, मैं आपको बांहों में ले लेता, आपको किस करता और बहुत प्यार करता … हा हा हा हा.
भाभी ने इस पर कुछ नहीं कहा और मुस्कुराते हुए किचन में काम करने लगीं. मैं सोफे पर बैठकर उन्हें पीछे से देख रहा था, उनके चूतड़ मस्त हिल रहे थे और वो काम किए जा रही थीं.
मैंने सोचा कि बेटा आज मौका है, हिम्मत करके चौका मार दे, देखा जाएगा. भाभी नहीं मानी, तो सॉरी बोल देना.
ये सोचकर मैं उठा और भाभी के पीछे खड़ा हो गया. मैंने उनको कंधे पर हाथ लगाया. उन्होंने कुछ नहीं कहा, तो मैं समझ गया. मैंने उनको अपनी तरफ घुमाया, वो आराम से घूम गईं और सर नीचे करके खड़ी हो गईं.
मैने झटके से उनको गले लगा लिया, उन्होंने कुछ नहीं कहा. मेरी तो लॉटरी लग गई कि भाभी सेक्स के लिए तैयार हैं.

.................................................... Big Grin Tongue
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी  हम अकेले हैं.



thanks
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RE: पड़ोस की भाभी - by neerathemall - 15-06-2022, 02:34 PM



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