19-05-2022, 04:34 PM
मेरा नाम उषा है। मेरी उम्र 39 साल है। मेरे पति विवेक एक मल्टीनेशनल कंपनी में बडे़ अधिकरी हैं। मेरा बेटा मानव अभी 18 साल का है और बंगलौर में इंजीनियरिंग कर रहा है। मैं अपने पति के साथ मुंबई में रहती हुँ। हमारे साथ मेरे भाई का बेटा रवि भी रहता है जो कोई कंप्यूटर कोर्स कर रहा है। उसकी उम्र तेईस साल है।
एक दिन टीवी पर योग का कोई प्रोग्राम दिखाया जा रहा था जिसमें गोमुत्र के बारे में बताया जा रहा था। चूँकि मेरे पति औफिस गये हुए थे इसीलिए मैं और रवि घर पर समय बिताने के लिए टीवी देख रहे थे।
उस प्रोग्राम को देखते हुए मैंने कहा "कोई कैसे गोमुत्र पी सकता है। यह तो बहुत ही गंदा होता है।"
तभी रवि ने कहा"बुआ उसे मशीन से साफ करके पीने लायक बनाया जाता है। तब उसे पीते हैं।"
मेरा भतीजा कभी कभी मुझसे चुहलबाजी भी करता है और मैं उसका मजा लेती हुँ।
मैंने बात बढा़ते हुए कहा"तभी तो कोई किसी का मुत्र ऐसे कैसे कोई पीये।"
तभी रवि ने कहा"कोई किसी का क्या मतलब । युँ तो दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं। आपने लोगो को लोगों का न पीने का तो सुना ही होगा तो मूत पीना कौन सी बडी़ बात है।"
एक दिन टीवी पर योग का कोई प्रोग्राम दिखाया जा रहा था जिसमें गोमुत्र के बारे में बताया जा रहा था। चूँकि मेरे पति औफिस गये हुए थे इसीलिए मैं और रवि घर पर समय बिताने के लिए टीवी देख रहे थे।
उस प्रोग्राम को देखते हुए मैंने कहा "कोई कैसे गोमुत्र पी सकता है। यह तो बहुत ही गंदा होता है।"
तभी रवि ने कहा"बुआ उसे मशीन से साफ करके पीने लायक बनाया जाता है। तब उसे पीते हैं।"
मेरा भतीजा कभी कभी मुझसे चुहलबाजी भी करता है और मैं उसका मजा लेती हुँ।
मैंने बात बढा़ते हुए कहा"तभी तो कोई किसी का मुत्र ऐसे कैसे कोई पीये।"
तभी रवि ने कहा"कोई किसी का क्या मतलब । युँ तो दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं। आपने लोगो को लोगों का न पीने का तो सुना ही होगा तो मूत पीना कौन सी बडी़ बात है।"
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.