13-05-2022, 05:07 PM
मैंने जिन्दगी के १६ वसंत पार कर लिया और +२ में दाखिला लिया। मेरे अंदर छुपे आक्रोश नें मुझे सदा मेहनत करने और आगे बढ़ने को प्रोत्साहित किया। इसी दौरान मेरे साथ एक ऐसी घटना घटी जिसने मेरे जीवन को एक नया मोड़ दिया। एक नये निहायत ही नये और अभूतपूर्व अनुभव से रूबरू कराया। उस घटना नें मेरी जिन्दगी का एक नया अध्याय खोल दिया। अपनी उपेक्षा का दंश झेलते झेलते मैं तंग आ गई थी, मगर उस घटना के बाद मैंने जिल्लत भरी जिन्दगी में खुशी पाने की राह ढूंढ़ ली, भले ही समाज उसे गलत नजर से देखे मेरे ठेंगे से। आज तक मैंने जो उपेक्षा का दंश झेला है उससे तो कई गुना खुशी और संतोष की प्राप्ति तो होती साथ ही मेरे अंदर के आक्रोश को काफी हद तक शांत होता।
पड़ोस में हमारे एक रिश्तेदार के यहां मेरी एक रिश्ते में चचेरी बहन का विवाह था। गांव से काफी सारे रिश्तेदार उसमें शरीक होने के लिए आए हुए थे। उनमें से कुछ लोग हमारे यहां भी ठहरे हुए थे। विवाह के दिन सारे घरवाले मुझे घर में अकेली छोड़ शादी वाले घर चले गए। वैसे भी मुझे इन सब समारोहों में जाने में कोई रुचि नहीं थी, क्योंकि लोगों के सामने घर वालों की उपेक्षा का पात्र बनना अब मुझे बहुत बुरा लगता था। संध्या का समय था करीब ६:३० बज रहे थे। सड़क के किनारे की बत्तियां जल चुकी थीं। मैं अपने घर के छत पे अकेली खड़ी सड़क की ओर देख रही थी तभी मेरी नजर सड़क किनारे झाड़ी के पास एक कुतिया और ४ – ५ कुत्तों पर पड़ी। एक कुत्ता जो उनमें अधिक बड़ा और ताकतवर लग रहा था, कुतिया के पास आया और उसके पीछे सूंघने लगा। बाकी कुत्ते चुपचाप देख रहे थे। एक दो मिनट सूंघने के पश्चात वह कुत्ता उस कुतिया के पीछे से उसपर सवार हो गया। मेरी उत्सुकता बढ़ गई और मैं फौरन कमरे से दूरबीन ले आई और पूरी क्रिया को बिल्कुल सामने से पूरी तन्मयता के साथ अपने आस पास से बेखबर देख रही थी। मैं देख रही थी कि कुत्ते नें कुतिया के कमर को अपने अगले दोनों पैरों से जकड़ लिया था और अपने कमर को जुम्बिश देना शुरु किया। कुत्ते का लाल लाल लपलपाता नुकीला लिंग कुछ देर कुतिया के योनी छिद्र के प्रवेश द्वार के आसपास डोलता रह। फिर कुछ ही पलों में मैने कुत्ते के लिंग को कुतिया की योनी में प्रवेश होते देखा। अब कुत्ता पूरे जोश के साथ अपने कमर को मशीनी अंदाज में आगे पीछे कर रहा था। धक्कों की रफ्तार इतना तेज थी कि मैं अवाक हो कर देखती रह गई। इन सब क्रियाओं में मैंने देखा कि कुतिया नें बिल्कुल भी विरोध नहीं किया, ऐसा लग रहा था मानों यह सब कुतिया की रजामंदी से हो रहा है और अपने साथ हो रहे इस क्रिया से काफी आनन्दित हो। करीब ५ – ६ मिनट के इस धुआंधार क्रिया के पश्चात वह कुत्ता कुतिया के पीछे से उतरा लेकिन यह क्या! कुत्ते का लिंग कुतिया की योनी में फंस चुका था। दोनों एक दूसरे से जुड़े हुए खड़े हुए थे और अपनी पूरी लंबी जीभ बाहर निकाले हांफ रहे थे। यह सब देखते हुए मेरे अंदर अजीब सी खलबली शुरु हो चुकी थी। मेरी पैंटी में मैंने गीलापन महसूस किया और सलवार का नाड़ा खोलकर हाथ लगा कर देखा तो यह सचमुच भीग चुकी थी। मैंने पैंटी के अंदर हाथ लगाया तो पाया कि मेरी योनी से लसीला चिकना तरल द्रव्य निकल कर पैंटी को गीला कर चुका था। छत के मुंडेर से मेरे गरदन से नीचे का हिस्सा छुपा हुआ था, अत: मैंने हौले से अपनी सलवार उतारी फिर पैंटी भी उतार डाली। अब मेरा निचला हिस्सा पूर्णतय: नग्न था। मैं उत्तेजित हो चुकी थी, उत्तेजना के मारे मेरे शरीर पर चींटियां सी रेंगने लगी और मेरा पूरा शरीर में तपने लगा। मेरे सीने के अर्धविकसित उभार बिल्कुल तन गये, मेरा दायां हाथ स्वत: ही मेरे उभारों को सहलाने लगे, मर्दन करने लगे और अनायास ही मेरा बांया हाथ मेरी योनी को स्वचालित रूप से स्पर्ष करने लगा, सहलाने लगा और शनै: शनै: उंगली से मेरे भगांकुर को रगड़ने लगा। मैं पूरी तरह कामाग्नी की ज्वाला के वशीभूत थी, अपने आस पास के स्थिति से बेखबर दूसरी ही दुनिया में। करीब ५ मिनट के योनी घर्षण से मेरी आंखों के आगे अंधेरा छा गया और मेरा सारा शरीर थरथराने लगा, मेरी उंगली लसदार द्रव्य से सन गई और पूरे शरीर में एक तनाव पैदा हुआ और एक चरम आनंद की अनुभूति के साथ निढाल हो गई। मैं छतपर ही बैठ गई। मुझे बाद में पता चला कि यह मेरा प्रथम स्खलन था। कुछ देर मैं उसी अवस्था में पड़ी रहा और फिर खड़ी हो कर दूरबीन संभाला और उन्हीं कुत्तों की ओर देखने लगी। करीब १५ मिनट बाद कुत्ते का लिंग कुतिया की योनी से बाहर आया, बाप रे बाप ! करीब ८” लंबा और ४” मोटा लाल लाल लपलपाता लिंग नीचे झूल रहा था और उससे टप टप रस टपक रहा था। इतना विशाल लिंग कुतिया नें पड़े आराम से अपनी छोटी सी योनी में संभाल लिया था। अब दूसरा कुत्ता उस पर चढ़ रहा था, उफ क्या दृश्य था, यह सब इतना उत्तेजक था कि मैं बयां नहीं कर पा रही हूं। दूसरे के बाद जब तीसरा चढ़ने लगा, कुतिया भागना चाहती थी किंतु तीसरे कुत्ते नें भी सफलता पूर्वक अपनी इच्छा पूर्ण की और फिर चौथे नें भी फटाफट अपने लिंग के धुआंधार प्रहार से कुतिया को अपने लिंगपाश में बांध कर अपनी कामेच्छा शांत की। मैं बुत बनी उस काम क्रीड़ा का दीदार कर रही थी और उस दौरान मैं हस्तमैथुन द्वारा तीन बार स्खलित हुई। उस समय करीब ८ बज रह था।
पड़ोस में हमारे एक रिश्तेदार के यहां मेरी एक रिश्ते में चचेरी बहन का विवाह था। गांव से काफी सारे रिश्तेदार उसमें शरीक होने के लिए आए हुए थे। उनमें से कुछ लोग हमारे यहां भी ठहरे हुए थे। विवाह के दिन सारे घरवाले मुझे घर में अकेली छोड़ शादी वाले घर चले गए। वैसे भी मुझे इन सब समारोहों में जाने में कोई रुचि नहीं थी, क्योंकि लोगों के सामने घर वालों की उपेक्षा का पात्र बनना अब मुझे बहुत बुरा लगता था। संध्या का समय था करीब ६:३० बज रहे थे। सड़क के किनारे की बत्तियां जल चुकी थीं। मैं अपने घर के छत पे अकेली खड़ी सड़क की ओर देख रही थी तभी मेरी नजर सड़क किनारे झाड़ी के पास एक कुतिया और ४ – ५ कुत्तों पर पड़ी। एक कुत्ता जो उनमें अधिक बड़ा और ताकतवर लग रहा था, कुतिया के पास आया और उसके पीछे सूंघने लगा। बाकी कुत्ते चुपचाप देख रहे थे। एक दो मिनट सूंघने के पश्चात वह कुत्ता उस कुतिया के पीछे से उसपर सवार हो गया। मेरी उत्सुकता बढ़ गई और मैं फौरन कमरे से दूरबीन ले आई और पूरी क्रिया को बिल्कुल सामने से पूरी तन्मयता के साथ अपने आस पास से बेखबर देख रही थी। मैं देख रही थी कि कुत्ते नें कुतिया के कमर को अपने अगले दोनों पैरों से जकड़ लिया था और अपने कमर को जुम्बिश देना शुरु किया। कुत्ते का लाल लाल लपलपाता नुकीला लिंग कुछ देर कुतिया के योनी छिद्र के प्रवेश द्वार के आसपास डोलता रह। फिर कुछ ही पलों में मैने कुत्ते के लिंग को कुतिया की योनी में प्रवेश होते देखा। अब कुत्ता पूरे जोश के साथ अपने कमर को मशीनी अंदाज में आगे पीछे कर रहा था। धक्कों की रफ्तार इतना तेज थी कि मैं अवाक हो कर देखती रह गई। इन सब क्रियाओं में मैंने देखा कि कुतिया नें बिल्कुल भी विरोध नहीं किया, ऐसा लग रहा था मानों यह सब कुतिया की रजामंदी से हो रहा है और अपने साथ हो रहे इस क्रिया से काफी आनन्दित हो। करीब ५ – ६ मिनट के इस धुआंधार क्रिया के पश्चात वह कुत्ता कुतिया के पीछे से उतरा लेकिन यह क्या! कुत्ते का लिंग कुतिया की योनी में फंस चुका था। दोनों एक दूसरे से जुड़े हुए खड़े हुए थे और अपनी पूरी लंबी जीभ बाहर निकाले हांफ रहे थे। यह सब देखते हुए मेरे अंदर अजीब सी खलबली शुरु हो चुकी थी। मेरी पैंटी में मैंने गीलापन महसूस किया और सलवार का नाड़ा खोलकर हाथ लगा कर देखा तो यह सचमुच भीग चुकी थी। मैंने पैंटी के अंदर हाथ लगाया तो पाया कि मेरी योनी से लसीला चिकना तरल द्रव्य निकल कर पैंटी को गीला कर चुका था। छत के मुंडेर से मेरे गरदन से नीचे का हिस्सा छुपा हुआ था, अत: मैंने हौले से अपनी सलवार उतारी फिर पैंटी भी उतार डाली। अब मेरा निचला हिस्सा पूर्णतय: नग्न था। मैं उत्तेजित हो चुकी थी, उत्तेजना के मारे मेरे शरीर पर चींटियां सी रेंगने लगी और मेरा पूरा शरीर में तपने लगा। मेरे सीने के अर्धविकसित उभार बिल्कुल तन गये, मेरा दायां हाथ स्वत: ही मेरे उभारों को सहलाने लगे, मर्दन करने लगे और अनायास ही मेरा बांया हाथ मेरी योनी को स्वचालित रूप से स्पर्ष करने लगा, सहलाने लगा और शनै: शनै: उंगली से मेरे भगांकुर को रगड़ने लगा। मैं पूरी तरह कामाग्नी की ज्वाला के वशीभूत थी, अपने आस पास के स्थिति से बेखबर दूसरी ही दुनिया में। करीब ५ मिनट के योनी घर्षण से मेरी आंखों के आगे अंधेरा छा गया और मेरा सारा शरीर थरथराने लगा, मेरी उंगली लसदार द्रव्य से सन गई और पूरे शरीर में एक तनाव पैदा हुआ और एक चरम आनंद की अनुभूति के साथ निढाल हो गई। मैं छतपर ही बैठ गई। मुझे बाद में पता चला कि यह मेरा प्रथम स्खलन था। कुछ देर मैं उसी अवस्था में पड़ी रहा और फिर खड़ी हो कर दूरबीन संभाला और उन्हीं कुत्तों की ओर देखने लगी। करीब १५ मिनट बाद कुत्ते का लिंग कुतिया की योनी से बाहर आया, बाप रे बाप ! करीब ८” लंबा और ४” मोटा लाल लाल लपलपाता लिंग नीचे झूल रहा था और उससे टप टप रस टपक रहा था। इतना विशाल लिंग कुतिया नें पड़े आराम से अपनी छोटी सी योनी में संभाल लिया था। अब दूसरा कुत्ता उस पर चढ़ रहा था, उफ क्या दृश्य था, यह सब इतना उत्तेजक था कि मैं बयां नहीं कर पा रही हूं। दूसरे के बाद जब तीसरा चढ़ने लगा, कुतिया भागना चाहती थी किंतु तीसरे कुत्ते नें भी सफलता पूर्वक अपनी इच्छा पूर्ण की और फिर चौथे नें भी फटाफट अपने लिंग के धुआंधार प्रहार से कुतिया को अपने लिंगपाश में बांध कर अपनी कामेच्छा शांत की। मैं बुत बनी उस काम क्रीड़ा का दीदार कर रही थी और उस दौरान मैं हस्तमैथुन द्वारा तीन बार स्खलित हुई। उस समय करीब ८ बज रह था।
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
