05-04-2022, 04:49 PM
(This post was last modified: 07-04-2022, 11:32 PM by Hot_Guy. Edited 3 times in total. Edited 3 times in total.)
PART-27
होली का त्यौहार दो दिन बाद ही था और सब जगह होली की तैयारियां जोरो शोर से चल रही थीं.
गाँव में होली कुछ ख़ास ढंग से ही मनाई जाती थी- रवीना की यह पहली होली थी
होली से एक दिन पहले ही जब गौरव गाँव में किसी काम से बाजार गया था तो उसके दोस्तों ने उससे कहा भी था : भाई इस बार तो भाभी के साथ होली खेली जाएगी
गौरव ने अमित,मोहित और रोहित की और देखकर कह दिया : हाँ भाई, इस बार तो रवीना के साथ मेरी पहली होली है
अमित, रोहित और मोहित : कल सुबह हम सब भी अपनी रवीना भाभी के साथ पहली होली खेलने आएंगे
गौरव उन लोगों के चेहरे की शरारती मुस्कान को देखकर ही समझ गया कि उन सबके इरादे नेक नहीं हैं और वे सब जरूर कुछ बदमाशी करने के मूड में हैं
गौरव ने उन सबको टालने के लिए कह दिया : देखो यार आजकल बड़े भैया भी घर पर ही होते हैं-उनका कमरा छत पर मेरे कमरे के पास ही होने की वजह से हम लोग बहुत ज्यादा खुलकर कुछ भी नहीं कर पाते हैं -ऐसा करते हैं-कल तुम सब दोपहर का लंच हमारे साथ करने आ जाओ
अमित,रोहित और मोहित को लंच वगैरा में कोई दिलचस्पी नहीं थी -उन्होंने कहा : यार लंच तो हम कभी भी कर लेंगे -कल तो होली खेलने आएंगे- और तेरे भैया को तो कल सुबह पंचायत सभा में भाग लेने के लिए जाना है-इसका मतलब सुबह आठ बजे से ग्यारह बजे तक तो तुम और रवीना भाभी घर पर अकेले ही होंगे
गौरव को यह याद ही नहीं था कि हर होली को ग्राम पंचायत के होली मिलान समारोह और सभा में भैया को जाना होता था
गौरव ने कुछ हाँ या ना नहीं कहा और बाज़ार से वापस घर आ गया और कल होने वाली होली के बारे से सोचता हुआ रवीना से बोला : कल होली है, कल सुबह मेरे कुछ दोस्त वगैरा भी होली खेलने के लिए घर पर आ सकते हैं
रवीना बिना कुछ बोले गौरव की बात सुनती रही-इतनी देर में शिवानी भी अचानक गौरव के कमरे में आ गयी और रवीना से बोली : आज रात को होलिका दहन के समय की जाने वाली पूजा की तैयारी करनी है-तुम भी नीचे मेरे साथ ही आ जाओ
गौरव : भैया कहाँ हैं भाभी ?
शिवानी : वह होली के लिए सामान लेने बाज़ार गए हैं
शिवानी रवीना को नीचे लेकर चली गयी तो गौरव पुनीत के बारे में सोचने लगा-जब से शिवानी के मौसेरे भाई से पुनीत की बहन की शादी हुई है, पुनीत उससे कुछ दूर दूर ही रहने लगा है-कल भी अमित,रोहित और मोहित के साथ वह मौजूद नहीं था जबकि यह चारों अक्सर एक साथ ही घूमते फिरते रहते थे.
गौरव को फिलहाल इस बात की चिंता हो रही थी कि कल कहीं यह तीनों आकर कुछ ज्यादा बखेड़ा न खड़ा कर दें
यह सोचते सोचते उसने देखा कि शिवानी और रवीना दुबारा से ऊपर आ रही हैं
दोनों जैसे ही उसके पास कमरे में आईं, गौरव ने शिवानी से भी बोल दिया : कल सुबह मेरे दोस्त अमित,रोहित और मोहित यहां होली खेलने आ रहे हैं
शिवानी को मानो करंट लगा. वह जोर से बोली : क्या..... ?? वे सब अव्वल दर्ज़े के बदमाश यहां क्या करने आ रहे हैं ?
गौरव शिवानी की इस बात पर एकदम सकते में आ गया और उसके गालों पर जोरदार थप्पड़ लगाते हुए बोला : लगता है तू अपनी औकात भूल गयी है-मेरे दोस्तों को अव्वल दर्ज़े का बदमाश बता रही है साली , कहते हुए उसने एक थप्पड़ शिवानी के और जड़ दिया
रवीना को काटो तो खून नहीं -वह यह क्या देख रही थी ?
उसकी बड़ी बहन और उसके पति की बड़ी भाभी शिवानी को उसका छोटा देवर गाली गलौज करते हुए थप्पड़ लगा रहा था
रवीना ने गौरव को रोकने की कोशिश करते हुए कहा : यह आप क्या कर रहे हैं-यह आपकी बड़ी भाभी हैं -आपने इन पर हाथ उठा दिया ?
गौरव : तुम चुप रहो और एक तरफ खड़ी रहो-अब मैं इसे इसकी औकात याद दिलाता हूँ
यह कहकर गौरव ने अपनी जींस में से लेदर की बेल्ट खींचकर बाहर निकाली और उसे जोर से शिवानी के बदन पर मारता हुआ बोला : चल रंडी अपने सारे कपडे उतार -तुझे तेरी औकात दिखाता हूँ
शिवानी को यह उम्मीद नहीं थी कि गौरव उसे उसकी छोटी बहन के सामने ही इस तरह ज़लील करना शुरू कर देगा
वह गौरव के हाथ जोड़ते हुए कहने लगी : यह तुम क्या कर रहे हो-कम से कम रवीना का तो ख्याल करो-वह मेरी छोटी बहन है -वह क्या सोचेगी
गौरव (हँसता हुआ) : रवीना को दिखाने के लिए ही यह सब कर रहा हूँ-आखिर मेरी वाइफ को भी तो मालूम पड़े कि तेरी मेरे आगे क्या औकात है-चल जल्दी से नंगी होकर दिखा
शिवानी वैसे तो गौरव के सामने कई बार नंगी हो चुकी थी -लेकिन उसे ज्यादा ज़लालत और शर्म इस बात को लेकर हो रही थी कि उसी छोटी बहन भी वहीं खड़ी थी और उसके सामने उसे नंगा होना पड़ रहा है
गौरव ने एक बेल्ट शिवानी के बदन पर और मारी तो शिवानी ने फटाफट अपने कपडे उतारने शुरू कर दिए
गौरव जिस तरह से शिवानी से कपडे उतरवा रहा था, उसे देखकर रवीना को बहुत बुरा लग रहा था और शर्म भी आ रही थी लेकिन वह तो खुद ही गौरव से काफी डरी सहमी हुई थी-उसने शर्म और ज़लालत से अपनी ऑंखें बंद करनी चाहीं तो गौरव उससे बोला : अपनी ऑंखें खोलकर अपनी बहन को नंगा होते देख मेरी जान-तेरी बहन का बदन भी काफी मस्त और सेक्सी है
शिवानी अपनी साड़ी उतार चुकी थी और अब वह अपना ब्लाउज़ उतार रही थी-इस बीच गौरव ने रवीना से कहा : दरवाज़े को अंदर से बंद कर दो रवीना
रवीना ने कमरे के दरवाज़े को अंदर से बंद कर दिया
अब तक शिवानी अपने सारे कपडे उतार चुकी थी
गौरव अपने हाथ से अपने जींस में कैद खड़े लण्ड को सहलाता हुआ शिवानी से बोला : चल अब कान पकड़कर 100 उठक बैठक लगा
शिवानी ने कान पकड़कर गिनती बोलते हुए उठक बैठक लगानी शुरू कर दी
गौरव ने अपनी बेल्ट रवीना को पकड़ाते हुए कहा : अगर यह चिकनी बीच में कहीं रुक जाए, गिनती न बोले या तुम्हे लगे कि यह ठीक से उठक बैठक नहीं लगा रही है तो तुम इसके नितम्बों पर एक जोरदार बेल्ट का स्ट्रोक मारकर इसे सजा दोगी -अगर तुमने इसकी हर गलती पर इसके बेल्ट नहीं लगाईं तो मैं उसकी डबल बेल्ट इसे बाद में इकट्ठी मारूंगा -इसलिए इसकी उठक बैठक को ध्यान से देखो और जहां यह गलती करे, बेल्ट का स्ट्रोक इसके मस्त नितम्बों पर लगाओ
रवीना ने डरते हुए बेल्ट गौरव के हाथ से ले ली और अपनी बड़ी बहन को कान पकड़कर उठक बैठक लगाते हुए देखने लगी
शेष अगले भाग में
होली का त्यौहार दो दिन बाद ही था और सब जगह होली की तैयारियां जोरो शोर से चल रही थीं.
गाँव में होली कुछ ख़ास ढंग से ही मनाई जाती थी- रवीना की यह पहली होली थी
होली से एक दिन पहले ही जब गौरव गाँव में किसी काम से बाजार गया था तो उसके दोस्तों ने उससे कहा भी था : भाई इस बार तो भाभी के साथ होली खेली जाएगी
गौरव ने अमित,मोहित और रोहित की और देखकर कह दिया : हाँ भाई, इस बार तो रवीना के साथ मेरी पहली होली है
अमित, रोहित और मोहित : कल सुबह हम सब भी अपनी रवीना भाभी के साथ पहली होली खेलने आएंगे
गौरव उन लोगों के चेहरे की शरारती मुस्कान को देखकर ही समझ गया कि उन सबके इरादे नेक नहीं हैं और वे सब जरूर कुछ बदमाशी करने के मूड में हैं
गौरव ने उन सबको टालने के लिए कह दिया : देखो यार आजकल बड़े भैया भी घर पर ही होते हैं-उनका कमरा छत पर मेरे कमरे के पास ही होने की वजह से हम लोग बहुत ज्यादा खुलकर कुछ भी नहीं कर पाते हैं -ऐसा करते हैं-कल तुम सब दोपहर का लंच हमारे साथ करने आ जाओ
अमित,रोहित और मोहित को लंच वगैरा में कोई दिलचस्पी नहीं थी -उन्होंने कहा : यार लंच तो हम कभी भी कर लेंगे -कल तो होली खेलने आएंगे- और तेरे भैया को तो कल सुबह पंचायत सभा में भाग लेने के लिए जाना है-इसका मतलब सुबह आठ बजे से ग्यारह बजे तक तो तुम और रवीना भाभी घर पर अकेले ही होंगे
गौरव को यह याद ही नहीं था कि हर होली को ग्राम पंचायत के होली मिलान समारोह और सभा में भैया को जाना होता था
गौरव ने कुछ हाँ या ना नहीं कहा और बाज़ार से वापस घर आ गया और कल होने वाली होली के बारे से सोचता हुआ रवीना से बोला : कल होली है, कल सुबह मेरे कुछ दोस्त वगैरा भी होली खेलने के लिए घर पर आ सकते हैं
रवीना बिना कुछ बोले गौरव की बात सुनती रही-इतनी देर में शिवानी भी अचानक गौरव के कमरे में आ गयी और रवीना से बोली : आज रात को होलिका दहन के समय की जाने वाली पूजा की तैयारी करनी है-तुम भी नीचे मेरे साथ ही आ जाओ
गौरव : भैया कहाँ हैं भाभी ?
शिवानी : वह होली के लिए सामान लेने बाज़ार गए हैं
शिवानी रवीना को नीचे लेकर चली गयी तो गौरव पुनीत के बारे में सोचने लगा-जब से शिवानी के मौसेरे भाई से पुनीत की बहन की शादी हुई है, पुनीत उससे कुछ दूर दूर ही रहने लगा है-कल भी अमित,रोहित और मोहित के साथ वह मौजूद नहीं था जबकि यह चारों अक्सर एक साथ ही घूमते फिरते रहते थे.
गौरव को फिलहाल इस बात की चिंता हो रही थी कि कल कहीं यह तीनों आकर कुछ ज्यादा बखेड़ा न खड़ा कर दें
यह सोचते सोचते उसने देखा कि शिवानी और रवीना दुबारा से ऊपर आ रही हैं
दोनों जैसे ही उसके पास कमरे में आईं, गौरव ने शिवानी से भी बोल दिया : कल सुबह मेरे दोस्त अमित,रोहित और मोहित यहां होली खेलने आ रहे हैं
शिवानी को मानो करंट लगा. वह जोर से बोली : क्या..... ?? वे सब अव्वल दर्ज़े के बदमाश यहां क्या करने आ रहे हैं ?
गौरव शिवानी की इस बात पर एकदम सकते में आ गया और उसके गालों पर जोरदार थप्पड़ लगाते हुए बोला : लगता है तू अपनी औकात भूल गयी है-मेरे दोस्तों को अव्वल दर्ज़े का बदमाश बता रही है साली , कहते हुए उसने एक थप्पड़ शिवानी के और जड़ दिया
रवीना को काटो तो खून नहीं -वह यह क्या देख रही थी ?
उसकी बड़ी बहन और उसके पति की बड़ी भाभी शिवानी को उसका छोटा देवर गाली गलौज करते हुए थप्पड़ लगा रहा था
रवीना ने गौरव को रोकने की कोशिश करते हुए कहा : यह आप क्या कर रहे हैं-यह आपकी बड़ी भाभी हैं -आपने इन पर हाथ उठा दिया ?
गौरव : तुम चुप रहो और एक तरफ खड़ी रहो-अब मैं इसे इसकी औकात याद दिलाता हूँ
यह कहकर गौरव ने अपनी जींस में से लेदर की बेल्ट खींचकर बाहर निकाली और उसे जोर से शिवानी के बदन पर मारता हुआ बोला : चल रंडी अपने सारे कपडे उतार -तुझे तेरी औकात दिखाता हूँ
शिवानी को यह उम्मीद नहीं थी कि गौरव उसे उसकी छोटी बहन के सामने ही इस तरह ज़लील करना शुरू कर देगा
वह गौरव के हाथ जोड़ते हुए कहने लगी : यह तुम क्या कर रहे हो-कम से कम रवीना का तो ख्याल करो-वह मेरी छोटी बहन है -वह क्या सोचेगी
गौरव (हँसता हुआ) : रवीना को दिखाने के लिए ही यह सब कर रहा हूँ-आखिर मेरी वाइफ को भी तो मालूम पड़े कि तेरी मेरे आगे क्या औकात है-चल जल्दी से नंगी होकर दिखा
शिवानी वैसे तो गौरव के सामने कई बार नंगी हो चुकी थी -लेकिन उसे ज्यादा ज़लालत और शर्म इस बात को लेकर हो रही थी कि उसी छोटी बहन भी वहीं खड़ी थी और उसके सामने उसे नंगा होना पड़ रहा है
गौरव ने एक बेल्ट शिवानी के बदन पर और मारी तो शिवानी ने फटाफट अपने कपडे उतारने शुरू कर दिए
गौरव जिस तरह से शिवानी से कपडे उतरवा रहा था, उसे देखकर रवीना को बहुत बुरा लग रहा था और शर्म भी आ रही थी लेकिन वह तो खुद ही गौरव से काफी डरी सहमी हुई थी-उसने शर्म और ज़लालत से अपनी ऑंखें बंद करनी चाहीं तो गौरव उससे बोला : अपनी ऑंखें खोलकर अपनी बहन को नंगा होते देख मेरी जान-तेरी बहन का बदन भी काफी मस्त और सेक्सी है
शिवानी अपनी साड़ी उतार चुकी थी और अब वह अपना ब्लाउज़ उतार रही थी-इस बीच गौरव ने रवीना से कहा : दरवाज़े को अंदर से बंद कर दो रवीना
रवीना ने कमरे के दरवाज़े को अंदर से बंद कर दिया
अब तक शिवानी अपने सारे कपडे उतार चुकी थी
गौरव अपने हाथ से अपने जींस में कैद खड़े लण्ड को सहलाता हुआ शिवानी से बोला : चल अब कान पकड़कर 100 उठक बैठक लगा
शिवानी ने कान पकड़कर गिनती बोलते हुए उठक बैठक लगानी शुरू कर दी
गौरव ने अपनी बेल्ट रवीना को पकड़ाते हुए कहा : अगर यह चिकनी बीच में कहीं रुक जाए, गिनती न बोले या तुम्हे लगे कि यह ठीक से उठक बैठक नहीं लगा रही है तो तुम इसके नितम्बों पर एक जोरदार बेल्ट का स्ट्रोक मारकर इसे सजा दोगी -अगर तुमने इसकी हर गलती पर इसके बेल्ट नहीं लगाईं तो मैं उसकी डबल बेल्ट इसे बाद में इकट्ठी मारूंगा -इसलिए इसकी उठक बैठक को ध्यान से देखो और जहां यह गलती करे, बेल्ट का स्ट्रोक इसके मस्त नितम्बों पर लगाओ
रवीना ने डरते हुए बेल्ट गौरव के हाथ से ले ली और अपनी बड़ी बहन को कान पकड़कर उठक बैठक लगाते हुए देखने लगी
शेष अगले भाग में


हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है
जिस तरफ जाएंगे खुद रास्ता बन जाएगा