16-03-2022, 01:09 PM
जेठानी बोली :- यार सफी देख मेरी एक देवरानी है शमा, वह भी बड़ी मस्त जवान है. मुझसे ५ साल छोटी है लेकिन मुझसे ज्यादा खूबसूरत है और उसकी चूंची मुझसे बड़ी है. उसकी गांड सेक्सी है और उसके चूतड़ तो बड़े मजेदार है. वह बोलती भी मीठा है और सबको प्यार करती है. मैं अगर मर्द होती तो उसे पटक पटक कर चोदती? उसकी चूंचियाँ नोच डालती?
सफी बोला :- अरे भाभी मतलब की बात बताओ न मुझे?
जेठानी बोली :- यार वह भी बिचारी लण्ड के लिए तरस रही है. उसका मियां विदेश में है. ६ महीने से उसे कोई लौड़ा नहीं मिला है. मैं चाहती हूँ की तुम दोनों मेरी देवरानी को लौड़ा पकडाओ, उसकी बुर चोदो, उसकी गांड मारो, उसकी चूंची चोदो. मैं चाहती हूँ की वो भी मेरी तरह चुदा चुदा कर खुश रहे?
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रफ़ी बोला :- कहो तो अभी चोद दूं उसे?
जेठानी बोली :- नहीं अभी तो वह बाज़ार गयी है , कल आना तुम लोग. कल मैं उसे एक सरप्राईज दूँगी. कल उसके हाथ में रख दूँगी तुम दोनो के लण्ड? तब देखती हूँ वो क्या कहती है. मैं चाहती हूँ की मैं खुद उसकी चूत में लण्ड पेलूँ?
सफी बोला :- हां भ भी आईडिया तो बहुत बढ़िया है. पर अब मैं खलास होने वाला हूँ भाभी जल्दी से मुंह खोलो. जेठानी ने मुंह फैलाया और दू लण्ड वहीँ झड गए.
अब मैं सोंचने लगी :- वाओ, कितनी अच्छी है मेरी जेठानी? मैं पछताने लगी. मैं बेकार में ही उसे गालियाँ दे रही थी. उसको तो मेरी चूत का बहुत ख्याल है? मेरी चूंचियों की तारीफ की मेरी खूबसूरती की तारीफ की. मेरा मन हुआ की मैं अभी कूद पडूँ पर मैं रुक गयी. मैं अपनी जेठानी की मुरीद हो गयी.
दूसरे दिन मैंने जल्दी से चाय बनाई और जेठानी जी को दिया. वह खुश हो गयी. मैं बड़े प्यार और सम्मान से बातें करने लगी. मैंने कहा :-
शीबा दीदी आप कितनी अच्छी है? आप मेरा बहुत क्याल रखती है?
नहीं मैं रखती नहीं हँ, पर अब जरुर रखूंगी?
शीबा दीदी और बोलो मैं क्या करूँ आपके लिए?
देखो मैं तुम्हारी दीदी नहीं हूँ. मैं तुम्हारी दोस्त हूँ और तुम मेरी दोस्त हो बस? मुझे दीदी न कहा करो?
अरे ऐसे कैसे आप बड़ी है मुझसे?
सफी बोला :- अरे भाभी मतलब की बात बताओ न मुझे?
जेठानी बोली :- यार वह भी बिचारी लण्ड के लिए तरस रही है. उसका मियां विदेश में है. ६ महीने से उसे कोई लौड़ा नहीं मिला है. मैं चाहती हूँ की तुम दोनों मेरी देवरानी को लौड़ा पकडाओ, उसकी बुर चोदो, उसकी गांड मारो, उसकी चूंची चोदो. मैं चाहती हूँ की वो भी मेरी तरह चुदा चुदा कर खुश रहे?
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रफ़ी बोला :- कहो तो अभी चोद दूं उसे?
जेठानी बोली :- नहीं अभी तो वह बाज़ार गयी है , कल आना तुम लोग. कल मैं उसे एक सरप्राईज दूँगी. कल उसके हाथ में रख दूँगी तुम दोनो के लण्ड? तब देखती हूँ वो क्या कहती है. मैं चाहती हूँ की मैं खुद उसकी चूत में लण्ड पेलूँ?
सफी बोला :- हां भ भी आईडिया तो बहुत बढ़िया है. पर अब मैं खलास होने वाला हूँ भाभी जल्दी से मुंह खोलो. जेठानी ने मुंह फैलाया और दू लण्ड वहीँ झड गए.
अब मैं सोंचने लगी :- वाओ, कितनी अच्छी है मेरी जेठानी? मैं पछताने लगी. मैं बेकार में ही उसे गालियाँ दे रही थी. उसको तो मेरी चूत का बहुत ख्याल है? मेरी चूंचियों की तारीफ की मेरी खूबसूरती की तारीफ की. मेरा मन हुआ की मैं अभी कूद पडूँ पर मैं रुक गयी. मैं अपनी जेठानी की मुरीद हो गयी.
दूसरे दिन मैंने जल्दी से चाय बनाई और जेठानी जी को दिया. वह खुश हो गयी. मैं बड़े प्यार और सम्मान से बातें करने लगी. मैंने कहा :-
शीबा दीदी आप कितनी अच्छी है? आप मेरा बहुत क्याल रखती है?
नहीं मैं रखती नहीं हँ, पर अब जरुर रखूंगी?
शीबा दीदी और बोलो मैं क्या करूँ आपके लिए?
देखो मैं तुम्हारी दीदी नहीं हूँ. मैं तुम्हारी दोस्त हूँ और तुम मेरी दोस्त हो बस? मुझे दीदी न कहा करो?
अरे ऐसे कैसे आप बड़ी है मुझसे?
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जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
