11-01-2022, 12:34 PM
भरपूर आनंद उठाने लगा था. यह पहली बार था कि भाभी मेरे इतने करीब थी. भाभी की सुन्दरता, भाभी का स्पर्श और भाभी की साँसों से आती वो खुशबू मुझे मदहोश कर रही थी. उस महोशी के आलम में, मैंने भाभी के कंधे पर हाथ रख दिया और भाभी के कानो को सहलाना शुरू कर दिया. अब मुझे भाभी के जवाब का इंतज़ार था. मैं जनता था कि भाभी मुझे यहाँ पर रोक भी सकती है, या फिर मुझे आगे बड़ने की अनुमति भी दे सकती है. तभी भाभी ने धीमे से, अपने गले से मेरे हाथ को दबाते हुए कहा , "अभी नहि, कोई देख लेगा तो".
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
