31-12-2021, 12:55 PM
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फिर एक के बाद एक मेने मेरे वीर्य की पिच'कारीया उसकी चूत में छोड़ दी. पह'ले की दो तीन ज़ोर की पिच'कारीया उस'को चिपक'कर छोड़'ने के बाद मेने बाद की हल'की पिच'कारीया उसकी चूत में धीरे से धक्के देकर छोड़ दी. मेरा वीर्य स्त'खलन इतना पावरफुल था के में थक गया औरसंगीता दीदी के बदन'पर गिर गया. में उसके बदन पर गिरा तो था लेकिन फिर भी मेरा ज़्यादा तर भार मेरे हाथों पर ही था.
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
