14-10-2021, 05:21 PM
फिर हम एक झर'ने के दर्श'नीय स्थान पर आए. बहुत लोग झर'ने के नीचे खड़े रह'कर मज़ा कर रहे थे और झर'ने के पानी का आनंद ले रहे थे. उन में लड़के - लड़किया थी, आदमी थे, औरते थी और बूढ़े लोग भी थे. जैसे हम दोनो झर'ने के नज़दीक पहुँचे वैसे ही में झट से झर'ने के नीचे गया. मेने संगीता दीदी को कहा के वो भी झर'ने के नीचे आए लेकिन वस्त्र गीला होगा ये कह के उस'ने टाल दिया.
मेने हंस'कर उसे कहा अब और कौन सा लिबास गीला होना बाकी है. पह'ले उसकी समझ में नही आया के में क्या कह रहा हूँ लेकिन जब उस'ने झुक के अप'ने लिबास को देखा तो उसके ध्यान में आया में क्या कह रहा था. झर'ने के पानी के छींटे जो हवा में उड़ रहे थे उस'से संगीता दीदी का लिबास थोडा गीला हो गया था. मेने उसे कहा के उस'का लिबास और भी गीला हो गया तो कोई बात नही बाद में होटेल वापस जा के वो लिबास चेंज कर सक'ती है.
फिर मेरे ध्यान में आया के वहाँ की भीड़ देख'कर संगीता दीदी थोड़ी शरमा रही थी. लेकिन में उसे बार बार पुछता रहा और फिर आखीर वो तैयार हो गयी और झर'ने के नीचे आई. उस'ने सुझाव दिया के हम दोनो भीड़ से थोड़ा दूर एक बाजू में जाएँ. जैसे ही हम दोनो एक बाजू में आए वैसे ही संगीता दीदी खुल गयी. और फिर क्या!!!. झर'ने के पानी के ज़ोर का मज़ा लेते, एक दूसरे के उप्पर पानी उड़ाते, हँसते- खेलते हम दोनो ने काफ़ी मज़ा किया. थोड़ी देर बाद हम दोनो झर'ने के एक बाजू में पऱे बड़े बड़े पत्थर पर बैठ गये.
हम दोनो पूरे भीग गये थे. गीला होने की वजह से संगीता दीदी का टाइट लिबास उसके बदन से चिपक गया था. और उस में भी वो लाइट कलर का लिबास था इस'लिए अंदर पह'नी हुई ब्रेसीयर और पैंटी उस में से नज़र आ रही थी. बहुत लोग मेरी बहेन की भीगी जवानी की झल'कीयों का नयनसुख ले रहे थे, और में भी उन में से एक था. खैर! मेरी नज़र का उसे कुच्छ ऐतराज नही था लेकिन बाकी लोगो की नज़र से परेशान होकर वो शरम से लाल हो रही थी. पह'ले मुझे इस बात में कुच्छ अजीब ना लगा लेकिन बाद में मेरे ध्यान में आया के वहाँ पर ज़्यादा देर रुकना ठीक नही है. हम लोग फिर वहाँ से निकले. आगे आकर हम एक रिक्शा में बैठे और जल्दी ही होटेल में वापस आए.
हँसी मज़ाक कर'ते कर'ते हम होटेल के रूम में आ गये. अंदर आने के बाद संगीता दीदी ने बॅग में से दूसरे कपड़े निकाले और वो सीधा बाथरूम में चली गयी. मेने भी मेरा दूसरा लिबास मेरे बॅग में से निकाला. थोड़ी देर बाद संगीता दीदी पेटीकोट और ब्लॉज पहन'कर बाहर आई. मेरे लिए उसे इस तरह देख'ना यानी आँखे सेक'ने का मन था लेकिन में भी पूरा भीग गया था सो अप'ने कपड़े बदल'ने के लिए में तुरंत बाथरूम में गया.
मेने हंस'कर उसे कहा अब और कौन सा लिबास गीला होना बाकी है. पह'ले उसकी समझ में नही आया के में क्या कह रहा हूँ लेकिन जब उस'ने झुक के अप'ने लिबास को देखा तो उसके ध्यान में आया में क्या कह रहा था. झर'ने के पानी के छींटे जो हवा में उड़ रहे थे उस'से संगीता दीदी का लिबास थोडा गीला हो गया था. मेने उसे कहा के उस'का लिबास और भी गीला हो गया तो कोई बात नही बाद में होटेल वापस जा के वो लिबास चेंज कर सक'ती है.
फिर मेरे ध्यान में आया के वहाँ की भीड़ देख'कर संगीता दीदी थोड़ी शरमा रही थी. लेकिन में उसे बार बार पुछता रहा और फिर आखीर वो तैयार हो गयी और झर'ने के नीचे आई. उस'ने सुझाव दिया के हम दोनो भीड़ से थोड़ा दूर एक बाजू में जाएँ. जैसे ही हम दोनो एक बाजू में आए वैसे ही संगीता दीदी खुल गयी. और फिर क्या!!!. झर'ने के पानी के ज़ोर का मज़ा लेते, एक दूसरे के उप्पर पानी उड़ाते, हँसते- खेलते हम दोनो ने काफ़ी मज़ा किया. थोड़ी देर बाद हम दोनो झर'ने के एक बाजू में पऱे बड़े बड़े पत्थर पर बैठ गये.
हम दोनो पूरे भीग गये थे. गीला होने की वजह से संगीता दीदी का टाइट लिबास उसके बदन से चिपक गया था. और उस में भी वो लाइट कलर का लिबास था इस'लिए अंदर पह'नी हुई ब्रेसीयर और पैंटी उस में से नज़र आ रही थी. बहुत लोग मेरी बहेन की भीगी जवानी की झल'कीयों का नयनसुख ले रहे थे, और में भी उन में से एक था. खैर! मेरी नज़र का उसे कुच्छ ऐतराज नही था लेकिन बाकी लोगो की नज़र से परेशान होकर वो शरम से लाल हो रही थी. पह'ले मुझे इस बात में कुच्छ अजीब ना लगा लेकिन बाद में मेरे ध्यान में आया के वहाँ पर ज़्यादा देर रुकना ठीक नही है. हम लोग फिर वहाँ से निकले. आगे आकर हम एक रिक्शा में बैठे और जल्दी ही होटेल में वापस आए.
हँसी मज़ाक कर'ते कर'ते हम होटेल के रूम में आ गये. अंदर आने के बाद संगीता दीदी ने बॅग में से दूसरे कपड़े निकाले और वो सीधा बाथरूम में चली गयी. मेने भी मेरा दूसरा लिबास मेरे बॅग में से निकाला. थोड़ी देर बाद संगीता दीदी पेटीकोट और ब्लॉज पहन'कर बाहर आई. मेरे लिए उसे इस तरह देख'ना यानी आँखे सेक'ने का मन था लेकिन में भी पूरा भीग गया था सो अप'ने कपड़े बदल'ने के लिए में तुरंत बाथरूम में गया.
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
