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मनमोहक गंदी कहानियाँ... RoccoSam
प्रारम्भ में तो विजयवर्मन अपनी बात पर अडिग रहें, परन्तु फिर अवंतिका के समझाने मनाने के भरसक प्रयासों के पश्चात् उन्हें समझ आया कि, राजा ऋषभनंदन तो असल में उनसे कुछ मांग ही नहीं रहें थें, उल्टे अपनी पुत्री को उन्हें सौंप रहें थें. और फिर एक पुरुष का अपने भाई के मरणोपरांत उसकी विधवा हुई पत्नि से विवाह करना उस समय के अनुसार कोई नवीन प्रचलन तो था नहीं. विजयवर्मन का अपनी भाभी के साथ शारीरिक सम्बन्ध तो हमेशा से ही था, वो तो बस अब मन का मिलन होने जा रहा था !!!


राजा ऋषभनंदन को ना तो विजयवर्मन और चित्रांगदा के सम्बन्धों के बारे में ज्ञात था, ना ही चित्रांगदा के पूर्व पति देववर्मन कि विकृत मानसिकता के बारे में. एक प्रकार से देखा जाये तो विजयवर्मन को एक अवसर मिल रहा था इस पाप में अपनी भागीदारी का शुद्धिकरण करने के लिए !

राजा ऋषभनंदन के प्रस्ताव के दो दिनों उपरांत विजयवर्मन ने काफ़ी सोच विचार करने के बाद और अवंतिका के समझाने स्वरुप उन्हें ख़ुशी ख़ुशी अपनी स्वीकृती दी !!!

विवाह के एक ही मंडप में विजयवर्मन का विवाह अवंतिका और चित्रांगदा से संपन्न हुआ. राजा ऋषभनंदन ने अपनी पुत्री के साथ साथ अवंतिका का भी विवाह इसलिए संपन्न करवाया, क्यूंकि विजयवर्मन और अवंतिका का विवाह इसके पूर्व केवल दोषनिवारण हेतु करवाया गया था. विधिपूर्वक विवाह होने से अब उन दोनों के प्रेम सम्बन्ध को सामाजिक मान्यता मिल गई !


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अनोखे मिलनरात्रि कि बेला आन पड़ी थी, अनोखा इसलिए क्यूंकि आज एक साथ तीन आत्माओ और शरीरों का संगम होने वाला था !

" चित्रांगदा भाभी के पास आपके लिए एक उपहार है भैया ! ". सुहागशयनकक्ष में अवंतिका ने अपनी अंगिया खोलते हुये कहा.



" अच्छा ??? वो क्या भला ? ". अपने सामने खड़ी अवंतिका और चित्रांगदा को मुस्कुराकर देखते हुये विजयवर्मन ने पूछा.



अपनी अंगिया खोल चुकी अवंतिका ने मुस्कुराते हुये चित्रांगदा को संकेत दिया, तो चित्रांगदा शर्माते हुये अपने घाघरे कि डोरी ढीली करने लगी.



कुछ ही क्षणों पश्चात् दोनों स्त्रीयां विजयवर्मन के सामने पूर्णतः नग्न अवस्था में खड़ी थीं !



परन्तु चित्रांगदा ने अपने दोनों हाथों से अपनी चूत छुपा रखी थी.



" भैया को उपहार दिखाइए ना भाभी... ". अवंतिका ने हँसकर कहा.



चित्रांगदा ने एक बार अवंतिका को देखा, फिर विजयवर्मन को, और लजाते लजाते अपनी जाँघों के बीच से अपनी हथेलीयां हटा ली.



चित्रांगदा कि नाभी से नीचे और टांगों के मध्य अवस्थित उसकी योनि देखते ही अचरज से विजयवर्मन कि आँखें बड़ी हो गईं ! उन्हें समझ आ गया कि वो उपहार क्या है...



चित्रांगदा कि योनि पर एक भी बाल ना था !!!



गदराई जाँघों के मध्य दबी पड़ी चिकनी गोरी तिकोनी बूर पर झांट ना होने कि वजह से वो और भी ज़्यादा फूली हुई लग रही थी और बाहर कि ओर निकल आई थी, और बूर का छेद मध्य में एक पतली गुलाबी लकीर कि भांति दिखता हुआ अत्यंत लुभावन प्रतीत हो रहा था !



(( उस समयकाल में स्त्रीयों के लिए चूत कि झांट काटने का प्रचलन नहीं था, प्रचलन तो क्या, ऐसा विचार कभी किसी के स्वप्न में भी ना आया था, ये एक अत्यंत अप्राकृतिक और अस्वाभाविक बात थी ! शायद योनिकेशमुंडन का प्रचलन इतिहास के इसी पृष्ठ से प्रारम्भ हुआ हो... किसे ज्ञात है !!! ))



" उपहार कैसा लगा भैया ??? ". अवंतिका ने हँसते हुये चित्रांगदा कि कमर में चिकोटी काटते हुये पूछा.



" अतिसुंदर... ". मंत्रमुग्ध से विजयवर्मन चित्रांगदा कि नग्न योनिका को निहारते हुये वहीँ ज़मीन पर अपने घुटनों के बल बैठ गएँ और उनके मुँह से अनायास ही निकला. " अतिसुंदर !!! ".



विजयवर्मन ने पहले हाथ जोड़कर दोनों स्त्रीयों कि चूत को सिर झुकाकर प्रणाम किया, तो अवंतिका और चित्रांगदा अपने पतिदेव का ये योनिपूजन देख खिलखिलाकर हँस पड़ी.



विजयवर्मन ने दोनों कि टांगों को छूकर कुछ इशारा किया, तो अवंतिका और चित्रांगदा ने एक दूसरे को देखा, और फिर अवंतिका ने अपनी बाई टांग और चित्रांगदा ने अपनी दाई टांग उठाकर ज़मीन पर बैठे विजयवर्मन के एक एक कंधे पर रख दिया. विजयवर्मन ने अपने हाथों में छुपा रखी सोने कि पायल बारी बारी से अपनी दोनों पत्नियों के दोनों पैरों में पहना दी.



ये अवंतिका और चित्रांगदा के लिए विजयवर्मन कि ओर से प्रथमसुहागरात्रि का मुँहदिखाई उपहार था !!!



" अब एक अत्यंत कठिन प्रश्न आपके लिए भैया... ". अवंतिका ने शरारत भरे लहजे में कहा. " हम दोनों में से किसकी योनि अधिक मनभवान है ??? ".



विजयवर्मन ने बोलने के लिए अपना मुँह खोला ही था कि चित्रांगदा तपाक से बोल पड़ी.



" और स्मरण रहे देवर जी... अगर आपने अपनी बहन कि योनि को चुना तो आज रात्रि आपको मेरी योनि नहीं मिलेगी, और अगर मेरी योनि आपको पसंद आई तो आपको अपनी बहन कि योनि से वंचित रहना पड़ेगा !!! "



विजयवर्मन ने मुस्कुराकर अवंतिका और चित्रांगदा के पुष्ट नितंबों पर हाथ फेरते हुये उन्हें अपनी ओर खींच लिया और दोनों स्त्रीयों कि चूत को बारी बारी से सूंघने के उपरांत चूमा, और फिर ऊपर गर्दन उठाकर दोनों को देखते हुये सोचने का स्वांग करने लगें.



" अब क्या कहूं ??? ". विजयवर्मन ने पहले अवंतिका को देखते हुये कहा. " आपकी योनि कि सुगंध कस्तूरी जैसी है... ". और फिर चित्रांगदा को देखकर बोलें. " और आपकी योनि केसर जैसी महक रही है !!! ".


अपने पति के चतुरता भरे उत्तर से प्रसन्न हो अवंतिका और चित्रांगदा हँस पड़ी, और उन्हें उठाकर स्वयं उनके पैरों में झुककर उनके पांव छूकर आशीर्वाद लिया.
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RE: मनमोहक गंदी कहानियाँ... RoccoSam - by usaiha2 - 24-07-2021, 06:51 PM



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