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" Sunday को ही तुम्हारी कार ख़राब होनी थी ? आज बाहर घूमने का मन था यार अभि ! ". मेघना ने कहा.
ड्राइंग रूम में वो अभिषेक के साथ सोफे पर बैठी टीवी देख रही थी.
" Don't worry बेबी... शाम तक बन जाएगी... ". अभिषेक ने टीवी पर चल रहे फुटबॉल मैच से नज़र हटाए बगैर मेघना का कन्धा चूमते हुये कहा. " रात को चलो बाहर डिनर कर आते हैं और क्या ? ".
मेघना कुछ नहीं बोली.
" एक कॉफ़ी पिला दो बेबी... मैच जम रहा है अब ! ". अभिषेक कि आँखें अब भी टीवी पर ही गड़ी हुई थीं.
मेघना का जब कोई जवाब नहीं आया तो अभिषेक ने उसे मुड़कर देखा, मेघना उसे ही गुस्से से घूर रही थी. अभिषेक को पता था कि मेघना को फुटबॉल मैच वगैरह पसंद नहीं और उसकी वजह से वो अपने फेवरेट शो नहीं देख पा रही है तो बोर हो रही होगी. इससे पहले कि बोरियत के अलावा वो और नाराज़ हो जाये, अभिषेक ने झट से कहा.
" I'll get it... ".
अभिषेक सोफे पर से उठकर जाने को हुआ तो पीछे से मेघना ने धीरे से कहा.
" फिर मेरे लिए भी ले आना... ".
" Yeah yeah I know ! ". अभिषेक ने मुँह बनाकर कहा और अपने पीछे मेघना को हँसता हुआ छोड़कर कमरे से बाहर निकल आया.
किचन में आकर अभिषेक ने देखा कि कॉफ़ी पहले से ही बनी पड़ी थी, बस गर्म करनी थी. गैस चूल्हे पर कॉफी गर्म होने के लिए चढ़ाकर वो अपनी मोबाइल देखते हुये गुनगुनाने लगा. करीब दस बाद कॉफ़ी खौलने लगी तो उसने अपने और मेघना के लिए एक एक कप में कॉफ़ी ढाल ली, मोबाइल वापस से अपने बारमुडा पैंट में रखी, और ट्रे में दोनों कप लेकर धीरे धीरे गुनगुनाते हुये किचन से बाहर आ गया.
दो कमरों को पार करके अभिषेक ड्राइंग रूम में घुसने ही वाला था कि बस ठिठककर रुक गया.
" अनिकेत जाओ... प्लीज् ! ".
ड्राइंग रूम में मेघना सोफे के पास घबराई हुई सी खड़ी थी और उसके सामने खड़ा अनिकेत उसकी बांहें पकड़कर उसे अपनी ओर खींच रहा था !!!
मेघना कि दिक्कत ये थी कि उसे पता था कि अभिषेक किसी भी वक़्त वहाँ कॉफ़ी लेकर आने वाला है, और इसी वजह से वो अनिकेत को इतना भी बोल नहीं पा रही थी कि " वो घर पर हैं ". ये अगर अभिषेक सुन लेता तो उसे लगता कि वो भला ऐसा क्यूँ बोल रही है. इनफैक्ट, मेघना के लिए अनिकेत को कुछ भी कहना संभव नहीं था, सिवाय इशारे में बताने का कि अभिषेक वहीँ हैं, लेकिन अल्हड़ अनाड़ी बेवकूफ़ प्रेमी पागल अनिकेत उसका इशारा भी तो नहीं समझ पा रहा था. मेघना को पता था कि अनिकेत इस तरह से धड़ल्ले से अंदर घुसकर इसलिए उससे छेड़खानी कर रहा है क्यूंकि उसने देख लिया है कि Garage में अभिषेक कि कार नहीं है. पर उस नौसिखिये को कौन बताये समझाये कि कार ख़राब हो गई थी, इसलिए अभिषेक उसे रिपेयर कराने दे आया था.
ज़्यादा कुछ करने का ना ही मेघना के पास समय था और ना ही विकल्प !!!
" Come on भाभी जी... क्या हुआ ? ".
मेघना अभी हालात ठीक करने कि सोच ही रही थी कि अनिकेत ने उसे अपनी बांहों में दबोच लिया और उसे बेतहाशा चूमने लगा !
बिना कोई आवाज़ किया धीमे से अभिषेक दरवाज़े के पीछे हो लिया, और कॉफ़ी कप का ट्रे वहीँ पास पड़े एक कुर्सी पर रख दिया. वो बेवकूफ़ नहीं था, मेघना और अनिकेत के बीच हुए बस उन दो वाक्यों के आदान प्रदान से ही वो समझ गया कि अनिकेत उसकी पत्नि के साथ ज़बरदस्ती नहीं कर रहा था !!! यहाँ तो माज़रा कुछ और ही था...
एक तो सब कुछ इतनी जल्दी हुआ था, ऊपर से अब मेघना समझ चुकी थी कि वो कोई भी जतन कर ले, पर अभिषेक कि समझ अब बदल नहीं सकती, उसका पति बहुत ही शातिर दिमाग़ था. जब अनिकेत मेघना के गाल, गर्दन, कंधे चूमने में व्यस्त था तब मेघना ने अपनी नज़रें घुमाकर दरवाज़े कि ओट में खड़े अपने पति को देख लिया था. मेघना कि आँखों में घबराहट और डर साफ झलक रहा था, वहीँ अभिषेक का चेहरा गुस्से से तमतमाया हुआ, मगर शांत था !
अभिषेक बेवकूफ़ नहीं था और शातिर दिमाग़ था, ऐसा इसलिए कहना सही होगा, क्यूंकि इस परिस्थिति में अगर कोई दूसरा मर्द होता तो वो आगबबूला हुआ तुरंत अपनी पत्नि और उसके प्रेमी के बीच आ धमकता, और या तो दोनों कि खबर लेता, या फिर दोनों में से किसी एक कि. पर अभिषेक ने ऐसा नहीं किया ! अपनी पत्नि को रंगे हाथों पकड़ना ही उसके लिए काफ़ी नहीं था, वो पूरा का पूरा किस्सा और खेल देखना समझना चाहता था !
मेघना और अभिषेक एक दूसरे को खूब जानते समझते थें. मेघना ने साफ देखा कि अभिषेक उसे आँखों आँखों में संकेत दे रहा है कि जो कुछ भी चल रहा है, चलने दो, ना ही रोकने कि कोशिश करो और ना ही संभालने कि !
अपने पति से मेघना कि धोखाधड़ी कब और किस हालात में पकड़ी जाएगी, इसका जवाब तो मेघना को मिल चुका था. अब बचा प्रश्न कि उसका परिणाम क्या होगा !!!
दिल भर जाने पर जब अनिकेत ने मेघना को चूमना चाटना छोड़ा, तो मेघना उसे देखकर ज़बरदस्ती मुस्कुरा दी. उसके चेहरे पर घबराहट साफ झलक रही थी, ये तो अनिकेत को दिखा, पर उस घबराहट का कारण समझ पाने भर कि बुद्धि उसके गर्म खून में नहीं थी.
" रिलैक्स भाभी... आते वक़्त मैंने बाहर का दरवाज़ा बंद कर दिया था ! ". अनिकेत ने मेघना कि घबराहट कम करने के लिए उसे आश्वस्त किया.
Wow... बहुत ही समझदारी वाला काम किया है तुमने चुतये - मेघना मन ही मन बोली !!!
" एक चीज़ दिखाऊं भाभी जी ? ". अनिकेत ने आगे कहा और मेघना कि सहमति कि प्रतीक्षा किये बिना ही अपनी जीन्स कि जेब से कुछ निकालकर अपनी मुट्ठी उसके सामने कर दी.
मुट्ठी खोली, तो मेघना ने देखा कि उसके हाथ में Condom का एक पैकेट था, वो भी फॅमिली पैक !
ये चल क्या रहा है यार ??? अभिषेक का सिर झन्ना उठा...
" Just go अनिकेत... आज नहीं ! ". मेघना ने दबी दबी सी आवाज़ में कहा और वापस से चोरी छुपे तीरछी नज़रों से अभिषेक को ऐसे देखा मानो ये सारा खेल खत्म करने कि इजाज़त मांग रही हो.
अभिषेक ने " ना " में सिर हिलाकर मेघना को नाटक जारी रखने का संकेत दिया !!!
मेघना कि सारी आशायें समाप्त हो चुकी थीं, अपने पति का विरोध करने का साहस नहीं था उसमें, उसे ना चाहते हुये भी खेल जारी रखना था, ऐसे जैसे कि वहाँ बस वो ही दोनों हों - वो और उसका प्रेमी अनिकेत !
" कितने दिन हो गएँ भाभी... आज बहुत मन हो रहा है ! ". अनिकेत ने मेघना को अपनी ओर खींचते हुये कहा. " प्लीज् अब ये मत कहियेगा कि आज आपको माहवारी हुई है... मुझे आपके Periods का डेट पता है !!! ".
तो इस हरामज़ादे को मेरी बीवी के मासिक का डेट भी मालूम है...Wow... अभिषेक ने सोचा... Interesting !!!
मेघना ने कुछ नहीं कहा, वो अब ज़्यादा कुछ बोलना नहीं चाहती थी, सारा कुछ गुड़ गोबर तो हो ही चुका था, अनाप शनाप बके जा रहा था ये बेवकूफ़ लड़का ! अब मेघना के बात करने से ना जाने अनिकेत कब क्या बोल दे. इज़्ज़त जब जा रही है तो जाये, पर जितनी बच सकती है उतनी बचाने में हर्ज़ क्या है ?
हालांकि आज तो पूरा दामन मैला होने ही वाला था, मेघना के क्या, किसी के भी रुके ना रुके, टाले ना टले ! बेवकूफ़ अनिकेत Condom ले आया था, इसका मतलब था आज वो उसे चोदने का मन बना कर ही आया था, पिछली बार तो मेघना ने Condom ना होने कि वजह से चुदाई बीच में ही रुकवा दी थी, पर आज पूरी चुदेगी वो, वो भी अपने ही पति के सामने उस लड़के से जिससे उसका पति दुनिया में शायद सबसे ज़्यादा नफ़रत करता है !
बेहयाई कि हद हो गई !!
" आज कोई बहाना नहीं चलेगा भाभी... ". अनिकेत अपने ही धुन में मग्न इन सबसे बेखबर मेघना को चूमते हुये बोला.
कसी हुई सलवार के ऊपर ऊपर मेघना कि गांड़ सहलाकर अनिकेत ने टोह लिया कि उसने अंदर पैंटी भी पहन रखी थी. मेघना ने फिर एक बार दरवाज़े कि ओर देखा - अभिषेक उन दोनों को ही एकटक देखे जा रहा था, एक पल के लिए भी उसने अपनी आँखें नहीं फेरी थीं !
मेघना कि गांड़ से सरकते हुये जब अनिकेत का हाथ सामने कि ओर मेघना कि कमर पर पहुँचा और वो उसकी सलवार खोलने के लिए सलवार का नाड़ा ढूंढने लगा, तब जाकर कहीं मेघना के लिए ये सब उसकी सहनशीलता से बाहर होने लगा. उसने अपने हाथ से अनिकेत का हाथ पकड़कर उसे रोका और अपनी परेशानी और गुस्सा दोनों दबाते हुये शांत स्वर में बोली.
" ठीक है वेट... मैं बाथरूम से आती हूँ ! ".
" Sunday को ही तुम्हारी कार ख़राब होनी थी ? आज बाहर घूमने का मन था यार अभि ! ". मेघना ने कहा.
ड्राइंग रूम में वो अभिषेक के साथ सोफे पर बैठी टीवी देख रही थी.
" Don't worry बेबी... शाम तक बन जाएगी... ". अभिषेक ने टीवी पर चल रहे फुटबॉल मैच से नज़र हटाए बगैर मेघना का कन्धा चूमते हुये कहा. " रात को चलो बाहर डिनर कर आते हैं और क्या ? ".
मेघना कुछ नहीं बोली.
" एक कॉफ़ी पिला दो बेबी... मैच जम रहा है अब ! ". अभिषेक कि आँखें अब भी टीवी पर ही गड़ी हुई थीं.
मेघना का जब कोई जवाब नहीं आया तो अभिषेक ने उसे मुड़कर देखा, मेघना उसे ही गुस्से से घूर रही थी. अभिषेक को पता था कि मेघना को फुटबॉल मैच वगैरह पसंद नहीं और उसकी वजह से वो अपने फेवरेट शो नहीं देख पा रही है तो बोर हो रही होगी. इससे पहले कि बोरियत के अलावा वो और नाराज़ हो जाये, अभिषेक ने झट से कहा.
" I'll get it... ".
अभिषेक सोफे पर से उठकर जाने को हुआ तो पीछे से मेघना ने धीरे से कहा.
" फिर मेरे लिए भी ले आना... ".
" Yeah yeah I know ! ". अभिषेक ने मुँह बनाकर कहा और अपने पीछे मेघना को हँसता हुआ छोड़कर कमरे से बाहर निकल आया.
किचन में आकर अभिषेक ने देखा कि कॉफ़ी पहले से ही बनी पड़ी थी, बस गर्म करनी थी. गैस चूल्हे पर कॉफी गर्म होने के लिए चढ़ाकर वो अपनी मोबाइल देखते हुये गुनगुनाने लगा. करीब दस बाद कॉफ़ी खौलने लगी तो उसने अपने और मेघना के लिए एक एक कप में कॉफ़ी ढाल ली, मोबाइल वापस से अपने बारमुडा पैंट में रखी, और ट्रे में दोनों कप लेकर धीरे धीरे गुनगुनाते हुये किचन से बाहर आ गया.
दो कमरों को पार करके अभिषेक ड्राइंग रूम में घुसने ही वाला था कि बस ठिठककर रुक गया.
" अनिकेत जाओ... प्लीज् ! ".
ड्राइंग रूम में मेघना सोफे के पास घबराई हुई सी खड़ी थी और उसके सामने खड़ा अनिकेत उसकी बांहें पकड़कर उसे अपनी ओर खींच रहा था !!!
मेघना कि दिक्कत ये थी कि उसे पता था कि अभिषेक किसी भी वक़्त वहाँ कॉफ़ी लेकर आने वाला है, और इसी वजह से वो अनिकेत को इतना भी बोल नहीं पा रही थी कि " वो घर पर हैं ". ये अगर अभिषेक सुन लेता तो उसे लगता कि वो भला ऐसा क्यूँ बोल रही है. इनफैक्ट, मेघना के लिए अनिकेत को कुछ भी कहना संभव नहीं था, सिवाय इशारे में बताने का कि अभिषेक वहीँ हैं, लेकिन अल्हड़ अनाड़ी बेवकूफ़ प्रेमी पागल अनिकेत उसका इशारा भी तो नहीं समझ पा रहा था. मेघना को पता था कि अनिकेत इस तरह से धड़ल्ले से अंदर घुसकर इसलिए उससे छेड़खानी कर रहा है क्यूंकि उसने देख लिया है कि Garage में अभिषेक कि कार नहीं है. पर उस नौसिखिये को कौन बताये समझाये कि कार ख़राब हो गई थी, इसलिए अभिषेक उसे रिपेयर कराने दे आया था.
ज़्यादा कुछ करने का ना ही मेघना के पास समय था और ना ही विकल्प !!!
" Come on भाभी जी... क्या हुआ ? ".
मेघना अभी हालात ठीक करने कि सोच ही रही थी कि अनिकेत ने उसे अपनी बांहों में दबोच लिया और उसे बेतहाशा चूमने लगा !
बिना कोई आवाज़ किया धीमे से अभिषेक दरवाज़े के पीछे हो लिया, और कॉफ़ी कप का ट्रे वहीँ पास पड़े एक कुर्सी पर रख दिया. वो बेवकूफ़ नहीं था, मेघना और अनिकेत के बीच हुए बस उन दो वाक्यों के आदान प्रदान से ही वो समझ गया कि अनिकेत उसकी पत्नि के साथ ज़बरदस्ती नहीं कर रहा था !!! यहाँ तो माज़रा कुछ और ही था...
एक तो सब कुछ इतनी जल्दी हुआ था, ऊपर से अब मेघना समझ चुकी थी कि वो कोई भी जतन कर ले, पर अभिषेक कि समझ अब बदल नहीं सकती, उसका पति बहुत ही शातिर दिमाग़ था. जब अनिकेत मेघना के गाल, गर्दन, कंधे चूमने में व्यस्त था तब मेघना ने अपनी नज़रें घुमाकर दरवाज़े कि ओट में खड़े अपने पति को देख लिया था. मेघना कि आँखों में घबराहट और डर साफ झलक रहा था, वहीँ अभिषेक का चेहरा गुस्से से तमतमाया हुआ, मगर शांत था !
अभिषेक बेवकूफ़ नहीं था और शातिर दिमाग़ था, ऐसा इसलिए कहना सही होगा, क्यूंकि इस परिस्थिति में अगर कोई दूसरा मर्द होता तो वो आगबबूला हुआ तुरंत अपनी पत्नि और उसके प्रेमी के बीच आ धमकता, और या तो दोनों कि खबर लेता, या फिर दोनों में से किसी एक कि. पर अभिषेक ने ऐसा नहीं किया ! अपनी पत्नि को रंगे हाथों पकड़ना ही उसके लिए काफ़ी नहीं था, वो पूरा का पूरा किस्सा और खेल देखना समझना चाहता था !
मेघना और अभिषेक एक दूसरे को खूब जानते समझते थें. मेघना ने साफ देखा कि अभिषेक उसे आँखों आँखों में संकेत दे रहा है कि जो कुछ भी चल रहा है, चलने दो, ना ही रोकने कि कोशिश करो और ना ही संभालने कि !
अपने पति से मेघना कि धोखाधड़ी कब और किस हालात में पकड़ी जाएगी, इसका जवाब तो मेघना को मिल चुका था. अब बचा प्रश्न कि उसका परिणाम क्या होगा !!!
दिल भर जाने पर जब अनिकेत ने मेघना को चूमना चाटना छोड़ा, तो मेघना उसे देखकर ज़बरदस्ती मुस्कुरा दी. उसके चेहरे पर घबराहट साफ झलक रही थी, ये तो अनिकेत को दिखा, पर उस घबराहट का कारण समझ पाने भर कि बुद्धि उसके गर्म खून में नहीं थी.
" रिलैक्स भाभी... आते वक़्त मैंने बाहर का दरवाज़ा बंद कर दिया था ! ". अनिकेत ने मेघना कि घबराहट कम करने के लिए उसे आश्वस्त किया.
Wow... बहुत ही समझदारी वाला काम किया है तुमने चुतये - मेघना मन ही मन बोली !!!
" एक चीज़ दिखाऊं भाभी जी ? ". अनिकेत ने आगे कहा और मेघना कि सहमति कि प्रतीक्षा किये बिना ही अपनी जीन्स कि जेब से कुछ निकालकर अपनी मुट्ठी उसके सामने कर दी.
मुट्ठी खोली, तो मेघना ने देखा कि उसके हाथ में Condom का एक पैकेट था, वो भी फॅमिली पैक !
ये चल क्या रहा है यार ??? अभिषेक का सिर झन्ना उठा...
" Just go अनिकेत... आज नहीं ! ". मेघना ने दबी दबी सी आवाज़ में कहा और वापस से चोरी छुपे तीरछी नज़रों से अभिषेक को ऐसे देखा मानो ये सारा खेल खत्म करने कि इजाज़त मांग रही हो.
अभिषेक ने " ना " में सिर हिलाकर मेघना को नाटक जारी रखने का संकेत दिया !!!
मेघना कि सारी आशायें समाप्त हो चुकी थीं, अपने पति का विरोध करने का साहस नहीं था उसमें, उसे ना चाहते हुये भी खेल जारी रखना था, ऐसे जैसे कि वहाँ बस वो ही दोनों हों - वो और उसका प्रेमी अनिकेत !
" कितने दिन हो गएँ भाभी... आज बहुत मन हो रहा है ! ". अनिकेत ने मेघना को अपनी ओर खींचते हुये कहा. " प्लीज् अब ये मत कहियेगा कि आज आपको माहवारी हुई है... मुझे आपके Periods का डेट पता है !!! ".
तो इस हरामज़ादे को मेरी बीवी के मासिक का डेट भी मालूम है...Wow... अभिषेक ने सोचा... Interesting !!!
मेघना ने कुछ नहीं कहा, वो अब ज़्यादा कुछ बोलना नहीं चाहती थी, सारा कुछ गुड़ गोबर तो हो ही चुका था, अनाप शनाप बके जा रहा था ये बेवकूफ़ लड़का ! अब मेघना के बात करने से ना जाने अनिकेत कब क्या बोल दे. इज़्ज़त जब जा रही है तो जाये, पर जितनी बच सकती है उतनी बचाने में हर्ज़ क्या है ?
हालांकि आज तो पूरा दामन मैला होने ही वाला था, मेघना के क्या, किसी के भी रुके ना रुके, टाले ना टले ! बेवकूफ़ अनिकेत Condom ले आया था, इसका मतलब था आज वो उसे चोदने का मन बना कर ही आया था, पिछली बार तो मेघना ने Condom ना होने कि वजह से चुदाई बीच में ही रुकवा दी थी, पर आज पूरी चुदेगी वो, वो भी अपने ही पति के सामने उस लड़के से जिससे उसका पति दुनिया में शायद सबसे ज़्यादा नफ़रत करता है !
बेहयाई कि हद हो गई !!
" आज कोई बहाना नहीं चलेगा भाभी... ". अनिकेत अपने ही धुन में मग्न इन सबसे बेखबर मेघना को चूमते हुये बोला.
कसी हुई सलवार के ऊपर ऊपर मेघना कि गांड़ सहलाकर अनिकेत ने टोह लिया कि उसने अंदर पैंटी भी पहन रखी थी. मेघना ने फिर एक बार दरवाज़े कि ओर देखा - अभिषेक उन दोनों को ही एकटक देखे जा रहा था, एक पल के लिए भी उसने अपनी आँखें नहीं फेरी थीं !
मेघना कि गांड़ से सरकते हुये जब अनिकेत का हाथ सामने कि ओर मेघना कि कमर पर पहुँचा और वो उसकी सलवार खोलने के लिए सलवार का नाड़ा ढूंढने लगा, तब जाकर कहीं मेघना के लिए ये सब उसकी सहनशीलता से बाहर होने लगा. उसने अपने हाथ से अनिकेत का हाथ पकड़कर उसे रोका और अपनी परेशानी और गुस्सा दोनों दबाते हुये शांत स्वर में बोली.
" ठीक है वेट... मैं बाथरूम से आती हूँ ! ".