17-07-2021, 05:13 PM
(This post was last modified: 17-07-2021, 05:16 PM by usaiha2. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
अल्का मुझे छेड़ रही थीं, यह बात मुझे समझ में आ गई। मैंने कुछ हिम्मत दिखाई।
“क्यों? अभी पहन लीजिए?”
“अभी? तुम्हारे सामने?” अल्का का नाटक जारी था।
“हाँ!”
“चिन्नू जी, क्या चल रहा है दिमाग में?”
“अल्का, आज इसी को पहन कर सो जाओ न!” अब मैं भी काफी हिम्मत दिखा रहा था।
“पहन का सो जाओ? मतलब नाईट ड्रेस?”
“हाँ! अगर इसको दिन में नहीं सकती, तो रात में ही पहनो!”
अल्का कुछ देर तक सोच में पड़ी रही, और फिर दोनों कपड़े ले कर कमरे से बाहर निकल गई। कोई दो तीन मिनट बाद ही वो कमरे में वापस आई। वो कमरे में आ कर दरवाज़े के सामने कुछ देर के लिए खड़ी हो गई - जैसे वो स्वयं को मुझे दिखा रही हो और पूछ रही हो, ‘बताओ, कैसी लग रही हूँ?’
मैंने यह दोनों ही कपड़े अपने अंदाजे से खरीदे थे - मेरे दिमाग में दो साल पुरानी अल्का की ही छवि थी। लेकिन अभी की अल्का शारीरिक तौर पर और परिपक्व हो गई थी। इस कारण से जो कपड़े मेरे ख्याल से अल्का के नाप के थे, अभी काफी कसे हुए लग रहे थे, और उसकी देहयष्टि साफ़ दिखा रहे थे। अल्का का शरीर गांधार प्रतिमाओं जैसा था - नपा तुला शरीर, सुडौल ग्रीवा, छाती पर शानदार स्तनों की जोड़ी जो सामने की तरफ अभिमान से उठे हुए थे, क्षीण बल-खाती कमर, और उसके नीचे सौम्य उभार लिए हुए परिपक्व नितम्ब!
अलका ने टी-शर्ट के अंदर किसी भी प्रकार का अधोवस्त्र (ब्रा) नहीं पहना हुआ था, और इस अनुभव से वह भी काफी रोमांचित दिख रही थी। उसके स्तनों के दोनों चूचक और उसके आसपास का करीब दो इंच का गोलाकार हिस्सा टी-शर्ट के होशरी कपड़े को सामने की तरफ ताने हुए थे। इस उम्र तक लड़के लड़कियों को एक दूसरे के शरीर के बारे में ज्ञान तो हो ही जाता है, और मैं भी कोई अपवाद नहीं था। एक नई नई मैगज़ीन आई थी मार्किट में। डेबोनेयर! कहीं से, किसी तरह पैसे जुगाड़ कर हमने एक दो मैगज़ीन खरीदी थीं। पहली बार हिंदुस्तानी लड़कियों को उनके नग्न रूप में देखा था। वैसे तो मैं नग्न लड़कियों की तस्वीरों का विदेशी मैगज़ीनों में कई बार आस्वादन कर चुका था, और मुझे यह तो अच्छे से पता था की लड़कियों के शरीर में कहाँ पर क्या क्या होता है, लेकिन हिंदुस्तानी लड़कियाँ पहली बार डेबोनेयर में ही दिखीं। लेकिन चित्र में देखना और वास्तविकता में देखना दो अलग बातें हैं।
अलका का पेट पूरी तरह सपाट तो नहीं था - उसमें एक सौम्य उभार था, जो कि नीचे की तरफ जाते जाते और जाँघों के जोड़ तक पहुँचते पहुँचते एक प्रकार की गहराई में परिवर्तित होता जा रहा था। इतना तो मुझे मालूम था कि यही हिस्सा अल्का की योनि है, लेकिन मैं उसके बारे में सिर्फ अंदाज़ा लगा सकता था। निक्कर से बाहर उसकी दोनों टाँगे शरीर के अन्य हिस्सों के मुकाबले गोरी थीं और काफी सुडौल थीं। जाँघों, घुटनों और पिण्डलियों की माँस-पेशियाँ काफ़ी उभरी हुई थीं। बाहुबली फिल्म की देवसेना याद है (हेरोइन का नाम है अनुष्का शैट्टी)?
अरे, याद कैसे नहीं होगी? बस ये समझ लीजिये कि बिलकुल वैसा का शरीर, नाक-नक्श और उम्र! बस, अल्का उसके मुकाबले सांवली थी।
आज पहली बार मैंने एक बला जैसी सुन्दर लड़की देखी थी!
“क्यों? अभी पहन लीजिए?”
“अभी? तुम्हारे सामने?” अल्का का नाटक जारी था।
“हाँ!”
“चिन्नू जी, क्या चल रहा है दिमाग में?”
“अल्का, आज इसी को पहन कर सो जाओ न!” अब मैं भी काफी हिम्मत दिखा रहा था।
“पहन का सो जाओ? मतलब नाईट ड्रेस?”
“हाँ! अगर इसको दिन में नहीं सकती, तो रात में ही पहनो!”
अल्का कुछ देर तक सोच में पड़ी रही, और फिर दोनों कपड़े ले कर कमरे से बाहर निकल गई। कोई दो तीन मिनट बाद ही वो कमरे में वापस आई। वो कमरे में आ कर दरवाज़े के सामने कुछ देर के लिए खड़ी हो गई - जैसे वो स्वयं को मुझे दिखा रही हो और पूछ रही हो, ‘बताओ, कैसी लग रही हूँ?’
मैंने यह दोनों ही कपड़े अपने अंदाजे से खरीदे थे - मेरे दिमाग में दो साल पुरानी अल्का की ही छवि थी। लेकिन अभी की अल्का शारीरिक तौर पर और परिपक्व हो गई थी। इस कारण से जो कपड़े मेरे ख्याल से अल्का के नाप के थे, अभी काफी कसे हुए लग रहे थे, और उसकी देहयष्टि साफ़ दिखा रहे थे। अल्का का शरीर गांधार प्रतिमाओं जैसा था - नपा तुला शरीर, सुडौल ग्रीवा, छाती पर शानदार स्तनों की जोड़ी जो सामने की तरफ अभिमान से उठे हुए थे, क्षीण बल-खाती कमर, और उसके नीचे सौम्य उभार लिए हुए परिपक्व नितम्ब!
अलका ने टी-शर्ट के अंदर किसी भी प्रकार का अधोवस्त्र (ब्रा) नहीं पहना हुआ था, और इस अनुभव से वह भी काफी रोमांचित दिख रही थी। उसके स्तनों के दोनों चूचक और उसके आसपास का करीब दो इंच का गोलाकार हिस्सा टी-शर्ट के होशरी कपड़े को सामने की तरफ ताने हुए थे। इस उम्र तक लड़के लड़कियों को एक दूसरे के शरीर के बारे में ज्ञान तो हो ही जाता है, और मैं भी कोई अपवाद नहीं था। एक नई नई मैगज़ीन आई थी मार्किट में। डेबोनेयर! कहीं से, किसी तरह पैसे जुगाड़ कर हमने एक दो मैगज़ीन खरीदी थीं। पहली बार हिंदुस्तानी लड़कियों को उनके नग्न रूप में देखा था। वैसे तो मैं नग्न लड़कियों की तस्वीरों का विदेशी मैगज़ीनों में कई बार आस्वादन कर चुका था, और मुझे यह तो अच्छे से पता था की लड़कियों के शरीर में कहाँ पर क्या क्या होता है, लेकिन हिंदुस्तानी लड़कियाँ पहली बार डेबोनेयर में ही दिखीं। लेकिन चित्र में देखना और वास्तविकता में देखना दो अलग बातें हैं।
अलका का पेट पूरी तरह सपाट तो नहीं था - उसमें एक सौम्य उभार था, जो कि नीचे की तरफ जाते जाते और जाँघों के जोड़ तक पहुँचते पहुँचते एक प्रकार की गहराई में परिवर्तित होता जा रहा था। इतना तो मुझे मालूम था कि यही हिस्सा अल्का की योनि है, लेकिन मैं उसके बारे में सिर्फ अंदाज़ा लगा सकता था। निक्कर से बाहर उसकी दोनों टाँगे शरीर के अन्य हिस्सों के मुकाबले गोरी थीं और काफी सुडौल थीं। जाँघों, घुटनों और पिण्डलियों की माँस-पेशियाँ काफ़ी उभरी हुई थीं। बाहुबली फिल्म की देवसेना याद है (हेरोइन का नाम है अनुष्का शैट्टी)?
अरे, याद कैसे नहीं होगी? बस ये समझ लीजिये कि बिलकुल वैसा का शरीर, नाक-नक्श और उम्र! बस, अल्का उसके मुकाबले सांवली थी।
आज पहली बार मैंने एक बला जैसी सुन्दर लड़की देखी थी!