27-06-2021, 12:11 PM
महारानी ने अपना सिर उठाकर देखा - क्यों ऐसा क्या हुआ.
दूसरी दासी - आप हमे कोई कार्य नहीं बता रही स्वयं ही सब कर रही हैं.
महारानी हलके से मुस्कुरा दीं - ओह. अच्छा - ठीक है ज़रा मुझे साबुन का लेप लगा दो
एक दासी - आज आप बहुत गंभीर हैं? आपको तो प्रसन्न होना चाहिए
महारानी - क्यों
एक दासी - आप अपने शत्रु टार्ज़न को दंड देने वाली हैं.
महारानी ने गहरी सांस ली - हाँ वह तो है.
दूसरी दासी- परन्तु आज आप अन्य दिनों की अपेक्षा जल्दी उठ गयीं. कोई विशेष कारण?
महारानी - हाँ आज मुझे महाकाल की पूजा में जाना है. बाकि सब कार्य उसके पश्चात किये जायेंगे. स्नान सम्पान करके महारानी अजंता स्नानागार से बाहर निकल आयीं और दासी को आदेश दिया- मेरे वस्त्र और आभूषण निकल दो और अब मैं शीघ्र तैयार होना चाहूंगी.
दूसरी दासी - आप हमे कोई कार्य नहीं बता रही स्वयं ही सब कर रही हैं.
महारानी हलके से मुस्कुरा दीं - ओह. अच्छा - ठीक है ज़रा मुझे साबुन का लेप लगा दो
एक दासी - आज आप बहुत गंभीर हैं? आपको तो प्रसन्न होना चाहिए
महारानी - क्यों
एक दासी - आप अपने शत्रु टार्ज़न को दंड देने वाली हैं.
महारानी ने गहरी सांस ली - हाँ वह तो है.
दूसरी दासी- परन्तु आज आप अन्य दिनों की अपेक्षा जल्दी उठ गयीं. कोई विशेष कारण?
महारानी - हाँ आज मुझे महाकाल की पूजा में जाना है. बाकि सब कार्य उसके पश्चात किये जायेंगे. स्नान सम्पान करके महारानी अजंता स्नानागार से बाहर निकल आयीं और दासी को आदेश दिया- मेरे वस्त्र और आभूषण निकल दो और अब मैं शीघ्र तैयार होना चाहूंगी.
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