06-06-2021, 06:18 PM
UPDATE 09
सन्नाटा था, सभी गहरी नींद में से सो रहे थे एर्कोंडिसन की ठंढक में , मैं और कोमल आग में झुलस रहे थे, हम सोफे पर एक दुसरे को चूम चाट रहे थे बेखबर, कोमल नंगी मेरे आगोश में थी, मैंने भी पैंट उतार दिया था, हम दोनों एक सोफे पर ऊपर नीचे पड़े महसूस कर रहे थे एक दुसरे के निजी अंगों से खेलते हुए प्यार करते हुए उत्तेजना के शिखर पर थे, कोमल की सांसें तेज थीं,
उसके स्तन सांसों के साथ हिलते हुए एक समां बना रहे थे, हल्की रोशनी में कोमल का शरीर गज़ब का सेक्सी लग रहा था, कोमल को लिंग से खेलना बहुत अच्छा लगता था, वो बार बार मेरे लिंग को पकड़ उसे खींचती, मोड़ती और मुहं में लेकर चूस लेती, कोमल के स्पर्श और मस्तियों से लिंग से जैसे पानी फूट पड़ने को तैयार था, हम 69 की अवस्था में हो गए, वो मुझे चूस रही थी, मैंने उसके नितम्बों को हाथों से घेर अपनी जीभ को उसकी योनी में पूरा घुसेड दिया, योनी की दीवार को चूसने और काटने का मज़ा ही बेमिसाल था, मुझे कोमल की कराहने की धीमी आवाज़ सुन रही थी,
"आह आह्ह... और करो और करो..." वो मुझसे फुसफुसाते हुए सी आवाज़ में कह रही थी और साथ ही मेरे लंड और अन्डकोशों को सहलाते हुए अपनी जीभ से गीला करने लगी, कभी उन्हें चूसती, कभी खींचती , कभी दांतों से काट लेती, धीरे धीरे वो आपे से बाहर हो रही थी, उसने मुझे नाखून से नोचना शुरू कर दिया, मेरे जांघों को काट लिया और अपने नितम्बों को हिला हिला कर अपनी योनी को मेरे मुहं पर जोर से दबाने लगी, योनी को मेरे मुहं पर मारने लगी और अब गालियाँ भी दे रही थी, बार बार मुझे गुंडा और कुत्ता कह रही थी,
"तुमने मुझे क्या समझा... मैं तुमसे कुछ करवाऊंगी ? ...." कोमल के मुहं से पहली बार इस तरह की बात सुन मैं हैरान था,
"तुम घूमना मेरे पीछे..तुम्हें रुलाऊंगी .. मुझे क्या कर सकते हो देखती हूँ.... " वो बकने लगी आवेश में, जैसे मुझे कुछ करने के लिए जोश दिला रही हो,
उसके शब्द मुझे गर्म कर रहे थे और सम्भोग के लिए उत्तेजित भी कर रहे थे, मन कर रहा था उसके बदन को रगड़ कर ठंडा कर दूं,
"क्या करूंगा ? तुम बताओ.. ? " मैंने छेड़ते हुए पुछा जान कर,
"वही..जो तुम सोच रहे हो... इसको अन्दर घुसाना चाहते हो न ..सच बताओ. .? कोमल ने लंड को सहलाते हुए कहा, अब वो खुल कर बोलने लगी थी, उसकी झिझक कम हो गयी थी,
" हाँ.. घुसाना है... देखता हूँ कैसे बचती हो...? " मैंने भी उसी अंदाज़ में जवाब दिया,
" मुझे डर लगता है..... " कोमल के लिए अब बर्दास्त करना मुश्किल था, वो मेरे लंड से खेलते हुए अपने नितम्बो को जोर जोर से आगे पीछे कर रही थे, उसकी योनी रस से सरोबर चिकनी हो गयी और वो कराह रही थी जैसे दर्द हो रहा हो...कोमल ने अपनी पोजीसन बदली और पलट कर मेरी ओर मुहं कर मुझे चूमने लगी, वो तैयार थी पूरी तरह अपने आपको न्योछावर करने, मेरा लंड उसके योनी को दबा रहा था,
" मैं तुझे चोदना चाहता हूँ, तू तैयार है देने को..." मैंने अब उसे प्यार करते हुए खुल कर पुछा
".. कुछ हो जायेगा तो........." कोमल ने कुछ चिंता से कहा , हम दोनों के बीच में जैसे कोई दीवार थी शर्म की वो खत्म हो गयी, कोमल को मजा आ रहा था, हम दोनों उत्तेजित हो रहे थे, मैंने तो सोचा भी नहीं था लेकिन कोमल तो जैसे खुल कर बातें करने के लिए बेताब ही थी,
" कुछ नहीं होगा... तुम कुछ मत सोचो ...हम तो प्यार कर रहे हैं और क्या.." मैंने कोमल को समझाते हुए उसके डर को मिटाने की कोशिश की...
"ठीक है... पर दर्द मत करना.... " कोमल बोली....हम दोनों बेखबर मस्त थे, मैं उसके स्तनों को चूस रहा था और उसकी योनी में अंगुली सटा पुत्तियों को खींच रहा था जो गीली हो गयी और मेरे पुरी अंगुली को ही अन्दर लेने को तैयार थीं, कोमल मेरे होठों को काट रही थी, उसकी हालत जैसे किसी शराबी की सी हो गयी, बेसुध, बेखबर....
"तेरे इससे कितना रस निकल रहा है... .बहुत अजीब लग रहा है... मेरी सुसु को जोरों से अंगुली से रगड़.... ....." कोमल बोली,
"बुद्धू... अब इसको सुसु मत बोल... " अब मैंने को कोमल के साथ खुले शब्दों को प्रयोग करने का मन किया जिससे वो और ज्यादा उत्तेजित हो और मुझे भी अच्छा लग रहा था...
"तो क्या बोलूँ..." उसने धीमे से हँसते हुए पुछा.....
" अब ये सिर्फ सुसु करने के लिए नहीं है... इसमें मैं अभी कुछ करने वाला हूँ.... यह अब बड़ी हो गयी इसको बूर कहते है.... मालूम है.." मैंने उसे दबाते हुए और कान में फुसफुसा कर कहा,
" तुम गुंडे हो....मुझे मालूम है... पर नहीं बोलूंगी...." वो हंस रही थी...
"एक बार बोल तो....सिर्फ एक बार..." मैंने छेड़ते हुए कहा..
"अच्छा तुम्हारे वाले को क्या कहते है...... लंड ...है ना ? कोमल हँसने लगी, मैं हैरान... कितनी आसानी से उसने कह दिया...
"तुम्हें मालूम है....." मैंने आश्चर्य से कहा...
"तो क्या... नहीं मालूम होगा...इतनी भी अनजान नहीं हूँ जितना समझते हो ..."
"कहाँ से जाना ये सब..." मैंने उत्सुकता से पुछा तो बोली " पीछे बताऊंगी.. अभी तो मस्ती करने दे...." और मेरे ऊपर चढ़ बैठी.
हमारी प्यास बढ़ रही थी, कोमल मेरे ऊपर लेटी थी, मेरा लंड उसकी योनी से सटा अन्दर जाने को बेताब सा था, तभी कोमल ने अपने हाथ से लंड को पकड़ योनी के मुहं पर लगाया....
" इसको ..अन्दर... कर न...." वो बोली जैसे याचना कर रही थी, उसका गला सूखा था और आवाज़ उखड़ी हुए निकल रही थी...
"रुक.. एक मिनट...." मैंने कोहिनूर पाकेट हाथ में लेकर खोला और एक कोंडोम निकाला, कोमल ने मेरे हाथों से छीन लिया और बड़े गौर से उसे अँधेरे में ही देखने लगी...
" इसे कैसे यूज करोगे ..."
"बताता हूँ " कहकर मैंने उसे इशारो में समझाया , मैंने और कोमल ने मिलकर कोंडोम को लंड पर चढ़ाया और खोल दिया....कोमल को आश्चर्य हो रहा था.. उसने लंड को सहलाया...
"वाह... अब ये सेफ (safe) हो गया न...." उसने तसल्ली के लिए पुछा....
"हाँ अब जो चाहें करो... मैंने उसे पयर करते हुए कहा...वो निश्चिंत दिखी....
कोमल ने लंड को पकड योनी के पास लगाया, वो बेताब थी लंड को लेने के लिए .. हम दोनों अब रोक नहीं पा रहे थे... मैंने भी सोचा अब वो बिलकुल गर्म है...
"कोमल... एक बात बताऊँ ... जब लंड अन्दर जायेगा तो तुम्हें एक बार दर्द होगा लेकिन थोड़ी देर में दर्द ख़तम हो जायेगा और बहुत मज़ा आएगा.. तुम घबराना नहीं..." मैंने जान बूझ कर उसे खून निकलने की बात नहीं बताई...वो डर जाती...मुझे भी पूरी तरह मालूम नहीं था..ये सब सुना सुनाया था...और कुछ सेक्स की किताबों में पढ़ा था सो कह दिया... .
" मुझे कुछ कुछ मालूम है.. पर ज्यादा दर्द मत करना....अब अन्दर तो डाल " कोमल की सांसे तेज चल रही थी.. मेरी भी... हम दोनों पहली बार सम्भोग की दुनिया में जा रहे थे... .और दोनों ही अनाड़ी थे...सच पूछिए तो मुझे भी बहुत डर लग रहा था....
सन्नाटा था, सभी गहरी नींद में से सो रहे थे एर्कोंडिसन की ठंढक में , मैं और कोमल आग में झुलस रहे थे, हम सोफे पर एक दुसरे को चूम चाट रहे थे बेखबर, कोमल नंगी मेरे आगोश में थी, मैंने भी पैंट उतार दिया था, हम दोनों एक सोफे पर ऊपर नीचे पड़े महसूस कर रहे थे एक दुसरे के निजी अंगों से खेलते हुए प्यार करते हुए उत्तेजना के शिखर पर थे, कोमल की सांसें तेज थीं,
उसके स्तन सांसों के साथ हिलते हुए एक समां बना रहे थे, हल्की रोशनी में कोमल का शरीर गज़ब का सेक्सी लग रहा था, कोमल को लिंग से खेलना बहुत अच्छा लगता था, वो बार बार मेरे लिंग को पकड़ उसे खींचती, मोड़ती और मुहं में लेकर चूस लेती, कोमल के स्पर्श और मस्तियों से लिंग से जैसे पानी फूट पड़ने को तैयार था, हम 69 की अवस्था में हो गए, वो मुझे चूस रही थी, मैंने उसके नितम्बों को हाथों से घेर अपनी जीभ को उसकी योनी में पूरा घुसेड दिया, योनी की दीवार को चूसने और काटने का मज़ा ही बेमिसाल था, मुझे कोमल की कराहने की धीमी आवाज़ सुन रही थी,
"आह आह्ह... और करो और करो..." वो मुझसे फुसफुसाते हुए सी आवाज़ में कह रही थी और साथ ही मेरे लंड और अन्डकोशों को सहलाते हुए अपनी जीभ से गीला करने लगी, कभी उन्हें चूसती, कभी खींचती , कभी दांतों से काट लेती, धीरे धीरे वो आपे से बाहर हो रही थी, उसने मुझे नाखून से नोचना शुरू कर दिया, मेरे जांघों को काट लिया और अपने नितम्बों को हिला हिला कर अपनी योनी को मेरे मुहं पर जोर से दबाने लगी, योनी को मेरे मुहं पर मारने लगी और अब गालियाँ भी दे रही थी, बार बार मुझे गुंडा और कुत्ता कह रही थी,
"तुमने मुझे क्या समझा... मैं तुमसे कुछ करवाऊंगी ? ...." कोमल के मुहं से पहली बार इस तरह की बात सुन मैं हैरान था,
"तुम घूमना मेरे पीछे..तुम्हें रुलाऊंगी .. मुझे क्या कर सकते हो देखती हूँ.... " वो बकने लगी आवेश में, जैसे मुझे कुछ करने के लिए जोश दिला रही हो,
उसके शब्द मुझे गर्म कर रहे थे और सम्भोग के लिए उत्तेजित भी कर रहे थे, मन कर रहा था उसके बदन को रगड़ कर ठंडा कर दूं,
"क्या करूंगा ? तुम बताओ.. ? " मैंने छेड़ते हुए पुछा जान कर,
"वही..जो तुम सोच रहे हो... इसको अन्दर घुसाना चाहते हो न ..सच बताओ. .? कोमल ने लंड को सहलाते हुए कहा, अब वो खुल कर बोलने लगी थी, उसकी झिझक कम हो गयी थी,
" हाँ.. घुसाना है... देखता हूँ कैसे बचती हो...? " मैंने भी उसी अंदाज़ में जवाब दिया,
" मुझे डर लगता है..... " कोमल के लिए अब बर्दास्त करना मुश्किल था, वो मेरे लंड से खेलते हुए अपने नितम्बो को जोर जोर से आगे पीछे कर रही थे, उसकी योनी रस से सरोबर चिकनी हो गयी और वो कराह रही थी जैसे दर्द हो रहा हो...कोमल ने अपनी पोजीसन बदली और पलट कर मेरी ओर मुहं कर मुझे चूमने लगी, वो तैयार थी पूरी तरह अपने आपको न्योछावर करने, मेरा लंड उसके योनी को दबा रहा था,
" मैं तुझे चोदना चाहता हूँ, तू तैयार है देने को..." मैंने अब उसे प्यार करते हुए खुल कर पुछा
".. कुछ हो जायेगा तो........." कोमल ने कुछ चिंता से कहा , हम दोनों के बीच में जैसे कोई दीवार थी शर्म की वो खत्म हो गयी, कोमल को मजा आ रहा था, हम दोनों उत्तेजित हो रहे थे, मैंने तो सोचा भी नहीं था लेकिन कोमल तो जैसे खुल कर बातें करने के लिए बेताब ही थी,
" कुछ नहीं होगा... तुम कुछ मत सोचो ...हम तो प्यार कर रहे हैं और क्या.." मैंने कोमल को समझाते हुए उसके डर को मिटाने की कोशिश की...
"ठीक है... पर दर्द मत करना.... " कोमल बोली....हम दोनों बेखबर मस्त थे, मैं उसके स्तनों को चूस रहा था और उसकी योनी में अंगुली सटा पुत्तियों को खींच रहा था जो गीली हो गयी और मेरे पुरी अंगुली को ही अन्दर लेने को तैयार थीं, कोमल मेरे होठों को काट रही थी, उसकी हालत जैसे किसी शराबी की सी हो गयी, बेसुध, बेखबर....
"तेरे इससे कितना रस निकल रहा है... .बहुत अजीब लग रहा है... मेरी सुसु को जोरों से अंगुली से रगड़.... ....." कोमल बोली,
"बुद्धू... अब इसको सुसु मत बोल... " अब मैंने को कोमल के साथ खुले शब्दों को प्रयोग करने का मन किया जिससे वो और ज्यादा उत्तेजित हो और मुझे भी अच्छा लग रहा था...
"तो क्या बोलूँ..." उसने धीमे से हँसते हुए पुछा.....
" अब ये सिर्फ सुसु करने के लिए नहीं है... इसमें मैं अभी कुछ करने वाला हूँ.... यह अब बड़ी हो गयी इसको बूर कहते है.... मालूम है.." मैंने उसे दबाते हुए और कान में फुसफुसा कर कहा,
" तुम गुंडे हो....मुझे मालूम है... पर नहीं बोलूंगी...." वो हंस रही थी...
"एक बार बोल तो....सिर्फ एक बार..." मैंने छेड़ते हुए कहा..
"अच्छा तुम्हारे वाले को क्या कहते है...... लंड ...है ना ? कोमल हँसने लगी, मैं हैरान... कितनी आसानी से उसने कह दिया...
"तुम्हें मालूम है....." मैंने आश्चर्य से कहा...
"तो क्या... नहीं मालूम होगा...इतनी भी अनजान नहीं हूँ जितना समझते हो ..."
"कहाँ से जाना ये सब..." मैंने उत्सुकता से पुछा तो बोली " पीछे बताऊंगी.. अभी तो मस्ती करने दे...." और मेरे ऊपर चढ़ बैठी.
हमारी प्यास बढ़ रही थी, कोमल मेरे ऊपर लेटी थी, मेरा लंड उसकी योनी से सटा अन्दर जाने को बेताब सा था, तभी कोमल ने अपने हाथ से लंड को पकड़ योनी के मुहं पर लगाया....
" इसको ..अन्दर... कर न...." वो बोली जैसे याचना कर रही थी, उसका गला सूखा था और आवाज़ उखड़ी हुए निकल रही थी...
"रुक.. एक मिनट...." मैंने कोहिनूर पाकेट हाथ में लेकर खोला और एक कोंडोम निकाला, कोमल ने मेरे हाथों से छीन लिया और बड़े गौर से उसे अँधेरे में ही देखने लगी...
" इसे कैसे यूज करोगे ..."
"बताता हूँ " कहकर मैंने उसे इशारो में समझाया , मैंने और कोमल ने मिलकर कोंडोम को लंड पर चढ़ाया और खोल दिया....कोमल को आश्चर्य हो रहा था.. उसने लंड को सहलाया...
"वाह... अब ये सेफ (safe) हो गया न...." उसने तसल्ली के लिए पुछा....
"हाँ अब जो चाहें करो... मैंने उसे पयर करते हुए कहा...वो निश्चिंत दिखी....
कोमल ने लंड को पकड योनी के पास लगाया, वो बेताब थी लंड को लेने के लिए .. हम दोनों अब रोक नहीं पा रहे थे... मैंने भी सोचा अब वो बिलकुल गर्म है...
"कोमल... एक बात बताऊँ ... जब लंड अन्दर जायेगा तो तुम्हें एक बार दर्द होगा लेकिन थोड़ी देर में दर्द ख़तम हो जायेगा और बहुत मज़ा आएगा.. तुम घबराना नहीं..." मैंने जान बूझ कर उसे खून निकलने की बात नहीं बताई...वो डर जाती...मुझे भी पूरी तरह मालूम नहीं था..ये सब सुना सुनाया था...और कुछ सेक्स की किताबों में पढ़ा था सो कह दिया... .
" मुझे कुछ कुछ मालूम है.. पर ज्यादा दर्द मत करना....अब अन्दर तो डाल " कोमल की सांसे तेज चल रही थी.. मेरी भी... हम दोनों पहली बार सम्भोग की दुनिया में जा रहे थे... .और दोनों ही अनाड़ी थे...सच पूछिए तो मुझे भी बहुत डर लग रहा था....