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घर के औरतों की कामुक वासना
#32
सब आदमी गंदे गंदे जोक्स सुना रहे थे। अनिल भी पीछे नहीं था। हर बार चुदायी की बात कहते हुये वह मेरी ओर देख कर ऑख मारता था। नीलम भाभी चुदायी की फागें खुले आम सुना रहीं थीं। मैं कह कुछ नहीं रही थी पर हर जोक पर खूब हॅसे जा रही थी। अनिल मुझे हैरानी से देख रहा था। जीजा जी चुदायी के लिये उताबले हो रहे थे। चोदना चाहते तो वह नीलम भाभी को थे। 



उनकी ऑखें उनको चोदे जा रहीं थी। पर सुनीता दीदी को ही वह पा सकते थे। दोनों में इशारे हो रहे थे। उन्होने जाने का कहा तो नीलम भाभी बोलीं “अभी तो हम लोग बेगमपुल घूमने चलेंगे”। पर सुनीता दीदी पर भी सैक्स हावी था बोली “नहीं हम लोग अब चलेंगे”। नीलम भाभी ने कहा “अच्छा तो शशि को रहने दीजिये हम लोग छोड़ देगें”। उनके जाने के बाद नीलम भाभी ने मुझसे कहा “तुम ऊपर बाले कमरे में फ्रैश होलो”। 



मुझे जरी की साड़ी और जेवर भारी लग रहे थे। मैने कमरे में आते ही उतार दिये। पेटीकोट और ब्लाउज में खिड़की के सामने हवा लेने के लिये खड़ी हो गयी। खिडकी के सामने लगे हुये मकान का किचिन दिखता था। एक थोड़ी भारी सी औरत नीचे बैठी स्टोव पर खाना बना रही थी। सामने से एक आदमी आया और सीधा औरत को लपक लिया। वह औरत हाथ के इशारे से स्टोव पर रखी हुयी पतीली की तरफ इशारा कर के कुछ कह रही थी। 




पर आदमी उसके भारी भारी जोवनों को चूमने लगा था साथ ही हाथ उसकी टॉगों के बीच में फेर रहा था। उस औरत ने कुछ कह कर आगे बढ कर स्टोव बंद कर दिया। आदमी ने वही स्टोव के सामने फर्स पर उसको चित कर के उसकी साड़ी पेटीकोट उलट दिया। औरत ने हाथ डालके अपनी कच्छी टॉगों से सरका ली। आदमी ने पैण्ट उतार कर अपना लण्ड बाहर निकाल लिया। अच्छा तगड़ा लण्ड था। औरत ने टॉगें चौड़ा ली थीं वह टॉगों के बीच में बैठ गया। औरत ने हाथ से उसका लण्ड पकड़ कर अपनी चूत में घुसा लिया। आदमी उसके ऊपर अपने चूतड़ उछालने लगा। मैं देखने में तल्लीन हो गयी थी। मेरा हाथ मेरे पेटी कोट के ऊपर से मेरी बुर को सहला रहा था। तभी किसी ने मुझे पीछे से जकड़ लिया.। मुड़ कर देखा तो अनिल थे। उन्होने पीछे से हाथ ला कर मेरी दोनों पहाड़ियों को दबोच लिया था और पीछे से चिपक गये थे। उनका हथियार में अपने दोनों चूतड़ों के बीच में महसूस कर रही थी। उन्होने सामने देखा तो उनकी सॉस खिंची रह गयी “ओ माई गॉड ये क्या हो रहा है और तुम कितने मगन हो कर देख रही हो”। सामने चुदायी जोरों से होने लगी थी। अनिल ने वही खिड़की पर मुझे दबा लिया था और सामने जो हो रहा था उसको देखते हुये कपड़ों के ऊपर से ही चोटै मारे जा रहे थे। सामने के औरत आदमी खलास हो गये थे। अनिल मुझे सीधा किया और चूमते हुये बैड की तरफ खीचा। मैने कहा “अनिल नीलम भाभी बेगमपुल जाने के लिये इंतजार कर रहे होगे”। अनिल हॅस पड़ा “उन्होने हम लोगों के मिलन के लिये ही यह बहाना बना कर तुम्हारी दीदी और जीजाजी को भेज दिया है”। 




अब तक अनिल मुझे बैड पर ला कर लिटा चुका था। मैने कहा “नीलम भाभी कितनी अच्छी हैं जो हम लोगों के लिये ये किया”। अनिल ने सॉस खीची “इस के लिये मुझे कीमत चुकानी पड़ेगी। बड़ी खुशामद की तो एक शर्त पर मानी कि इसके बाद मुझे उनको भी यही सुख देना पड़ेगा”। मुझ्ो ताज्जुब हुआ “क्यााा पर उनके तो अपने पति हैंं। अनिल बोला “वह उससे ज्यादा चाहती हैं जो उनके पति उनको देते हैं”। अब तक अनिल मेरे ब्लाउज के बटन खोल चुका था। जैसे ही उसने ब्रजियर पर हाथ डाला मैने हाथ पकड़ लिया। अभी तक मैने ब्रा मैने किसी आदमी के सामने नहीं खोली थी। उसने बैसा ही छोड़ दिया। वह मेरे ऊपर लेट गया। अपना मुॅह मेरे उभारों पर रख दिया और अपनी टॉगों में मेरी टॉगें बॉध ली। उसने धीरे धीरे ब्रा के ऊपर से ही निपिल्स होठों में भरी और लण्ड पेटीकोट के ऊपर से ही रगड़ने लगा। मैं पहले से ही गरम हो चुकी थी। अब काबू पाना मुश्किल था। 




मैं अनिल को बुरी तरह से चूम कर बुदबुदाने लगी। साथ ही उसका पैण्ट अण्डरवियर पैरो से सरका कर उसका लण्ड टटोलने लगी थी। उसने कहा “कुछ एक्सपीरियेंस है तुमको? कैसे करोगी?” मैने गुस्से से लाल होते हुये कहा “मुझ से ऐसी बात करोगे तो मैं अभी उठ जाउॅगी”। उसने मुझे चूमते हुये कहा “नाराज क्यों होती हो रानी मैं तो यो ही पूछ रहा था”। फिर उसने पूछा “मैं लगाऊॅ तो तुम्हें इतराज तो नहीं है”। मुझे लगा मैं ज्यादा गुस्सा कर बैठी हूॅ। हॅस कर बोली “मैं तो तुम्हारी ही हूॅ अनिल”। उसने डेर सारी क्रीम अपने लण्ड पर मली। तकिये के नीचे से एक छोटी सी शीशी निकाल कर थोड़ा सा इत्र फाहे से मेरी बुर पर मल दिया। मैं हॅसी “ये क्या थोड़ा सा लगा रहे हो”। वह बोला “बड़ा मॅहगा है। ये शीशी पॉच सौ रूपये की है”। मैने ताना मारा “कंजूस मरी इसके ऊपर भी पाॉच सौ रूपल्ली देख रहे हो”। 



उसने सारी की सारी शीशी मेरी बुर पर उलट दी “मेरी जान इससे बढ कर कोई चीज नहीं हो सकती”। मेरी बुर महक उठी। अनिल ने मेरी दोनों टॉगें खोली। हाथों से दोनों जॉघें जकड़ ली। लण्ड आगे कर के मेरी बुर से सटाया और चूतड़ आगे कर जोर लगाया। नही घ्ुासा तो और जोर लगाया। मुझे बहुत तकलीफ महसूस हुयी और मैं पीछे खिसक गयी। उसका लण्ड पेट पर से निकल गया। अब अनिल ने मेरे कंधे जकड़ कर बैड पर जमा दिया। चूतड़ के नीचे तकिये रखे जिससे बुर का मुॅह ऊपर उठ गया। वह पैर सीधे करके दण्ड लगाने जैसी स्थिति में हो गया और लण्ड बुर में बैठा कर नीचे हो गया जैसे दण्ड पेल रहा हो। बुर में सुपाड़ा भर घुसा होगा। मुझे बेहद तकलीफ हुयी। कम्धे दबे होने के बावजूद भी मैने अपनी बुर का हिस्सा खिसका लिया। मैने अनिल से कहा “सच मानो अनिल मैं चाहती हूॅ। पर मुझे बेहद तकलीफ होती है”। अनिल ने साँॅत्वना देते हुये कहा “कोई बात नहीं रानी। एक बात तो साफ है तुम्हें एक्सपीरियेंस नहीं। तुम्हारी हरकतों से तो लग रहा था कि तुम पकड़ के ही मुझे खा जाओगी”। अनिल ने मेरे दोनों पैर अपने कंधों पर रखे। सुपाड़ा खोल कर क्रीम मली। दोनों हथेलियों में मेरी चोटियॉ दबोचीं। सुपडा ब्ुर के छेद पर फिट किया और चुतड़ दबा के घुसेड़ा। मुझ्ो ऐसा लगा जैसे चाकू मुझे चीर रहा हो। पर कहीं भी मैं नहीं हिल सकती थी। मैने चीखते हुये कहा ‘औ अनिल मुझे छोड़ दो। मैं मर जाउॅगी”। लेकिन वह रूका नहीं। 




उसल लण्ड मेरी बुर को फाडता गया और पूरा समा गया। मेरी ऑखौं में ऑसू भर आये थे। उसने मुझे खूब चूमा “सब ठीक हो जायेगा अब तकलीफ नहीं होगी”। पर जैसे ही उसका लण्ड थोडा. सा सरका मुझे ऐसा लगा कि जैसे चीरे पर किसी ने रगड़ दिया हा। मैं चिल्ला उठी।
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RE: घर के औरतों की कामुक वासना - by Dani Daniels - 05-02-2021, 01:29 PM



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