19-11-2020, 04:52 PM
प्रीत के दीप राहों में जलते रहें
अभी इतना ही पढ़ा था, कि ऐकदम ममता ने अनुरोध किया, अंकल जी प्लीज़ एक बार फिर से पढ़िए । मैंने उसकी तरफ़ सवालिया नज़रों से देखा । उसका चेहरा एकदम गम्भीर हो गया था । मैंने वह दो पंक्तियाँ फिर से पढ़ीं । वह जल्दी से उठी और मेरे पाओं के पास, ज़मीन पर आ कर बैठ गई । कहने लगी, अंकल जी, मेरे मन के भाव आप ने कैसे पढ़ लिए । मैं थोड़ा अचंभित हो गया ।
वह तस्वीर हमारी सालगिरह की थी और मैंने ही FB पर डाली थी । मैंने वह चार पंक्तियाँ, जो कॉमेंट बॉक्स में थीं, पढ़ीं । मैं असमंजस में पड़ गई थी कि यह कौन है जिस ने मेरे भावों को इस ख़ूबसूरती से इन पंक्तियों में ढाल दिया है ? उसके बाद आपको FB पर ढूँढने की कोशिश की, मगर असफल रही । तो वह चार पंक्तियाँ आप ने हि लिखी थीं । हाँ बेटा, फिर बाद में यह एक पूरा गीत बन गया ।शीग्र ही वातावरण में सन्नाटा छा गया और सबकी दृष्टि ममता पर टिक गई ।ममता ने कहा अंकल जी पूरा गीत पढ़ें । उस ने मेरी टांगो को इस तरह से कस के पकड़ लिया, जैसे कि एक छोटा बचा सुरक्षा के लिए अपनी माँ की टांगों से लिपट जाता है ।फिर उसने अपना सर मेरे घुटने पर टिका दिया । मैं बहुत भावुक हो गया और उसके सर को सहलाते हुए कहा
“मेरी बेटी“
फिर पूरा गीत तरन्नुम में पढ़ा । वह गीत वाला काग़ज़ उसको सोंप्ते हुए कहा, धन्यवाद बेटा आप ने इस प्यारे से गीत को जन्म दिया । मैंने देखा कि सब की आँखें नम थीं, ख़ास कर तोशी की । उनके अनुरोध पर कुछ और गीत सुनाए । मैंने नोटिस किया , कि ममता कुछ लिख रही थी । मेरे हाथ में एक काग़ज़ थमाते हुए बोली, अंकल जी यह कुछ पंक्तियाँ मैंने आप के लिए लिखी हैं । अच्छा बेटा, तुम ही पढ़ कर सुनाओ । क्या भाव थे इस निमन लिखित लेखन में जिन्हें मैंने बहुत सराहा ।
दुआ करते हैं ऐसी बहार फिर से हो
उनसे अपनी मुलाक़ात फिर से हो
उनसे मिल कर हमारा मन हरशाया
उनके आशीर्वाद में अपनापन पाया ।
थोड़ी देर में खाना परोसा गया । इतने में ममता मेरी साथ वाली कुर्सी पर आ कर बैठ गई। उस ने मेरी प्लेट में सारी चीज़ें थोड़ी थोड़ी भर दीं। मैंने खाना शुरू किया और तोशी से कहा कि वाह, खाना तो बहुत स्वादिष्ट बनाया है। वह कहने लगी भाई साब इस का श्रेय ममता को जाता है । सब कुछ इसी ने बनाया है । ममता की तारीफ़ सुन कर मुझे अंदर से बहुत ख़ुशी हुई । ज्यों ही गर्म गर्म रोटी आती, ममता मेरी पलटे में डाल देती और पहले वाली उठा लेती । मेरे अनुरोध करने पर, कि मेरा पेट बहुत भर गया है, वह कहती, थोड़ी सी और, मेरे लिए ।और फिर अंत में सूजी का हलवा परोसा गया। वाह वाह तोशी तू ने कमाल कर दिया । तो तुझे याद रहा कि मुझे यह बहुत पसंद है । तेरे जैसा हलवा तो कोई बना ही नहीं सकता। जो भी खाए, उँगलीयाँ चाटता रह जाए । याद है, लंदन में दो प्लेट से कम मैं खाता ही नहीं था । तो आज भी पेट भर के खाईऐ । मैंने ख़ास तोर पर आप के लिए ही बनाया है ।
थोड़ी देर में दीवार पर लगी घड़ी ने टन टन कर के ११ बजने का संकेत दिया । अरे जग्गी, यार बड़ी देर हो गई । अब जाने का वक़्त आ गया है । उसने कहा आज की रात यहीं रुक जा । नहीं यार, मेरा जाना बहुत ज़रूरी है । ममता ने मेरी तरफ़ इस तरह देखा, जैसे कह रही हो ‘पापा मत जाओ’ । फिर सब से मिले, और अंत में ममता से । वह मुझे से बड़े प्यार से गले मिली । मैंने उसके सर पे हाथ रखकर बहुत प्यार किया और दुआऐं दीं । इतना प्यार देख कर मुझे यक़ीन हो गया कि मेरा और ममता का पुनर जन्म का सम्बंध है । फिर मैंने अपने आप को बड़ी मुश्किल से ममता से अलग किया ।मुझे उस से अलग होते हुए ऐसा लगा कि जैसे मैं अपने जिगर के टुकड़े से बिछड़ रहा हूँ । इस पर हम दोनो की आँखें भर आईं । मैं बड़ी मुश्किल से अपना हाथ छुड़ा कर गेट से बाहर निकल आया । कुछ क़दम चल कर मैं ठिटका और मैंने मुड़ कर देखा । सब लोग अंदर जा चुके थे, मगर ममता वहीं खड़ी थी बाहें फैलाए ………..।
अभी इतना ही पढ़ा था, कि ऐकदम ममता ने अनुरोध किया, अंकल जी प्लीज़ एक बार फिर से पढ़िए । मैंने उसकी तरफ़ सवालिया नज़रों से देखा । उसका चेहरा एकदम गम्भीर हो गया था । मैंने वह दो पंक्तियाँ फिर से पढ़ीं । वह जल्दी से उठी और मेरे पाओं के पास, ज़मीन पर आ कर बैठ गई । कहने लगी, अंकल जी, मेरे मन के भाव आप ने कैसे पढ़ लिए । मैं थोड़ा अचंभित हो गया ।
वह तस्वीर हमारी सालगिरह की थी और मैंने ही FB पर डाली थी । मैंने वह चार पंक्तियाँ, जो कॉमेंट बॉक्स में थीं, पढ़ीं । मैं असमंजस में पड़ गई थी कि यह कौन है जिस ने मेरे भावों को इस ख़ूबसूरती से इन पंक्तियों में ढाल दिया है ? उसके बाद आपको FB पर ढूँढने की कोशिश की, मगर असफल रही । तो वह चार पंक्तियाँ आप ने हि लिखी थीं । हाँ बेटा, फिर बाद में यह एक पूरा गीत बन गया ।शीग्र ही वातावरण में सन्नाटा छा गया और सबकी दृष्टि ममता पर टिक गई ।ममता ने कहा अंकल जी पूरा गीत पढ़ें । उस ने मेरी टांगो को इस तरह से कस के पकड़ लिया, जैसे कि एक छोटा बचा सुरक्षा के लिए अपनी माँ की टांगों से लिपट जाता है ।फिर उसने अपना सर मेरे घुटने पर टिका दिया । मैं बहुत भावुक हो गया और उसके सर को सहलाते हुए कहा
“मेरी बेटी“
फिर पूरा गीत तरन्नुम में पढ़ा । वह गीत वाला काग़ज़ उसको सोंप्ते हुए कहा, धन्यवाद बेटा आप ने इस प्यारे से गीत को जन्म दिया । मैंने देखा कि सब की आँखें नम थीं, ख़ास कर तोशी की । उनके अनुरोध पर कुछ और गीत सुनाए । मैंने नोटिस किया , कि ममता कुछ लिख रही थी । मेरे हाथ में एक काग़ज़ थमाते हुए बोली, अंकल जी यह कुछ पंक्तियाँ मैंने आप के लिए लिखी हैं । अच्छा बेटा, तुम ही पढ़ कर सुनाओ । क्या भाव थे इस निमन लिखित लेखन में जिन्हें मैंने बहुत सराहा ।
दुआ करते हैं ऐसी बहार फिर से हो
उनसे अपनी मुलाक़ात फिर से हो
उनसे मिल कर हमारा मन हरशाया
उनके आशीर्वाद में अपनापन पाया ।
थोड़ी देर में खाना परोसा गया । इतने में ममता मेरी साथ वाली कुर्सी पर आ कर बैठ गई। उस ने मेरी प्लेट में सारी चीज़ें थोड़ी थोड़ी भर दीं। मैंने खाना शुरू किया और तोशी से कहा कि वाह, खाना तो बहुत स्वादिष्ट बनाया है। वह कहने लगी भाई साब इस का श्रेय ममता को जाता है । सब कुछ इसी ने बनाया है । ममता की तारीफ़ सुन कर मुझे अंदर से बहुत ख़ुशी हुई । ज्यों ही गर्म गर्म रोटी आती, ममता मेरी पलटे में डाल देती और पहले वाली उठा लेती । मेरे अनुरोध करने पर, कि मेरा पेट बहुत भर गया है, वह कहती, थोड़ी सी और, मेरे लिए ।और फिर अंत में सूजी का हलवा परोसा गया। वाह वाह तोशी तू ने कमाल कर दिया । तो तुझे याद रहा कि मुझे यह बहुत पसंद है । तेरे जैसा हलवा तो कोई बना ही नहीं सकता। जो भी खाए, उँगलीयाँ चाटता रह जाए । याद है, लंदन में दो प्लेट से कम मैं खाता ही नहीं था । तो आज भी पेट भर के खाईऐ । मैंने ख़ास तोर पर आप के लिए ही बनाया है ।
थोड़ी देर में दीवार पर लगी घड़ी ने टन टन कर के ११ बजने का संकेत दिया । अरे जग्गी, यार बड़ी देर हो गई । अब जाने का वक़्त आ गया है । उसने कहा आज की रात यहीं रुक जा । नहीं यार, मेरा जाना बहुत ज़रूरी है । ममता ने मेरी तरफ़ इस तरह देखा, जैसे कह रही हो ‘पापा मत जाओ’ । फिर सब से मिले, और अंत में ममता से । वह मुझे से बड़े प्यार से गले मिली । मैंने उसके सर पे हाथ रखकर बहुत प्यार किया और दुआऐं दीं । इतना प्यार देख कर मुझे यक़ीन हो गया कि मेरा और ममता का पुनर जन्म का सम्बंध है । फिर मैंने अपने आप को बड़ी मुश्किल से ममता से अलग किया ।मुझे उस से अलग होते हुए ऐसा लगा कि जैसे मैं अपने जिगर के टुकड़े से बिछड़ रहा हूँ । इस पर हम दोनो की आँखें भर आईं । मैं बड़ी मुश्किल से अपना हाथ छुड़ा कर गेट से बाहर निकल आया । कुछ क़दम चल कर मैं ठिटका और मैंने मुड़ कर देखा । सब लोग अंदर जा चुके थे, मगर ममता वहीं खड़ी थी बाहें फैलाए ………..।
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
