19-11-2020, 04:51 PM
इतने वर्षों की शादी में यह तो सीख ही लिया था, कि पत्नी की हाँ में हाँ मिलाने में ही भलाई है । इसके बाद मैं टैक्सी ले कर जग्गी के घर कि तरफ़ चल दिया । उसके घर पहुँचते पहुँचते काफ़ी समय लग गया । सड़कें कुछ ऐसी ही थीं कि बस सारा इंजर-पिंजर ढीला हो गया । मैंने कोठी की घंटी बजाई तो ऐक युआ महिला ने दरवाज़ा खोला । आईऐ अंकल जी, हम आपकी ही राह देख रहे थे । इतनी देर में जग्गी भी आ गया । बड़े प्यार से गले मिला । यार, घर ढूँढने में तकलीफ़ तो नहीं हुई ? नहीं तो, मगर सड़कें और ट्रैफ़िक कुछ ऐसा था कि बस – -। फिर पीछे से आवाज़ आई, भाई साहब कैसे हो ? मुड़ कर देखा तो तोशी थी । जिस तरह वह प्यार से मिली, ऐसा लगा कि ४० वर्षों में कुछ भी तो नहीं बदला । वो दोनो वैसे ही थे जैसे कि लंदन में ।
जग्गी ने फिर अपने बेटे सोनू और उसकी पत्नी ममता से परिचय करवाया । उन दोनो नें, और उन के दोनो ब्च्चों ने मेरे पाँव छुए । भारतिए सभ्यता देख कर मैं गद गद हो गया और उन्हें बहुत दुआऐं दीं ।
जब हम सब अंदर जा कर बैठ गए, तो तोशी ने अपनी बहुरानी से कहा, बेटा अंकल जी के लिए कुछ चाए का इंतज़ाम करो । ममता चाए का इंतज़ाम करने में व्यस्त हो गई और मैं सोनू से बातें करने लगा । उसने बताया कि वह एक multinational कम्पनी में काम करता है । उसका ओफ़िस काफ़ी दूर है, इसलिए तक़रीबन चार घंटे आने जाने में लग जाते हैं । इतनी देर में चाये भी आ गई । कुछ देर उनके दोनो बच्चों से भी बातें कीं । फिर लंदन की पुरानी यादें ताज़ा करने लगे । तोशी ने कहा, भाई साब, आपको याद है जब Queen ने बीनू को बच्चों की पार्टी में Buckingham Palace बुलाया था । वो दिन हमारी ज़िंदगी का बहुत महत्वपूर्ण दिन था । हाँ हाँ, अछी तरह से याद है । और यह भी याद है कि उन्हों ने बीनू के लिए कार भी भेजी थी । उस दिन बीनू कितनी उत्तेजित थी । इतनी देर में ममता ने पूछा अंकल जी चीनी कितनी लेंगे ? बेटा हम चाय बग़ैर चीनी के पीते हैं । तोशी बोली, भाई साब आपको भी शूगर की बीमारी है क्या ? नहीं, ऐसी तो कोई बात नहीं है । शादी से पहले, मेरी पत्नी की यह शरत थी, कि शादी के बाद चाय बग़ैर शक्कर के पीनी पड़े गी तभी शादी करेगी । बस मैंने फ़ोरन हाँ कर दी । अब ग़लती तो इन्सान से हि होती है ना । सब हंस पड़े। जग्गी ने कहा यार तेरी मज़ाक़ करने की आदत अभी तक नहीं गई । ममता ने मुझे चाए का कप दिया, और अपना कप ले कर सोनू के पास जा कर बैठ गई । मैंने ममता से पूछा बेटे, आप क्या करती हैं ? उस ने कहा अंकल जी मैं डेप्युटी हेड टीचर हूँ, गणित और इंग्लिश पढ़ाती हूँ । और आप की होबी क्या है ? अंकल जी उस के लिए समय हि नहीं मिलता । हाँ, कभी अगर अवसर मिले, तो कुछ गीत ग़ज़ल पढ़ लेती हूँ । तो आपको पोयट्री में रुचि है । यह तो बहुत अच्छी बात है । हमें भी पोयट्री में काफ़ी रुचि है। सोनू ने कहा, तो आज की शाम, पोयट्री के नाम हो जाए । जग्गी और तोशी ने कहा यह तो बहुत अच्छा विचार है । ममता, आप ही कुछ सुनाएँ । अंकल जी ऐसे तो कुछ याद नहीं, आप ही शुरू करें । जब मुझे कुछ याद आ गया, तो सुना दूँगी । तो सुनिए । कुछ समय पहले एक गीत लिखा था, एक फ़ोटो से प्रभावित हो कर, जो मैंने FB पर देखी थी । जग्गी ने कहा, यार तूने कभी बताया ही नहीं कि तू लिखता भी है ।तोशी ने कहा तो सुनाईऐ ना । सुनाने से पहले इसके पीछे की कहानी संक्षिप्त में बता दूँ ताकि हर बात स्पष्ट हो जाए । एक दिन मैंने एक तस्वीर FB पर देखी । यह तस्वीर एक युवा कपल की थी जो अपनी शादी की सालगिरह मना रहे थे । वह एक दूसरे का हाथ पकड़े एक दूसरे के प्यार में पूरी तरह मगन थे । मुझे ऐसे महसूस हुआ कि उस के प्यार में इक जुनून था और वह अपने पप्रियतम से कह रही थी :
हाथ में हाथ हो साथ चलते रहें
जग्गी ने फिर अपने बेटे सोनू और उसकी पत्नी ममता से परिचय करवाया । उन दोनो नें, और उन के दोनो ब्च्चों ने मेरे पाँव छुए । भारतिए सभ्यता देख कर मैं गद गद हो गया और उन्हें बहुत दुआऐं दीं ।
जब हम सब अंदर जा कर बैठ गए, तो तोशी ने अपनी बहुरानी से कहा, बेटा अंकल जी के लिए कुछ चाए का इंतज़ाम करो । ममता चाए का इंतज़ाम करने में व्यस्त हो गई और मैं सोनू से बातें करने लगा । उसने बताया कि वह एक multinational कम्पनी में काम करता है । उसका ओफ़िस काफ़ी दूर है, इसलिए तक़रीबन चार घंटे आने जाने में लग जाते हैं । इतनी देर में चाये भी आ गई । कुछ देर उनके दोनो बच्चों से भी बातें कीं । फिर लंदन की पुरानी यादें ताज़ा करने लगे । तोशी ने कहा, भाई साब, आपको याद है जब Queen ने बीनू को बच्चों की पार्टी में Buckingham Palace बुलाया था । वो दिन हमारी ज़िंदगी का बहुत महत्वपूर्ण दिन था । हाँ हाँ, अछी तरह से याद है । और यह भी याद है कि उन्हों ने बीनू के लिए कार भी भेजी थी । उस दिन बीनू कितनी उत्तेजित थी । इतनी देर में ममता ने पूछा अंकल जी चीनी कितनी लेंगे ? बेटा हम चाय बग़ैर चीनी के पीते हैं । तोशी बोली, भाई साब आपको भी शूगर की बीमारी है क्या ? नहीं, ऐसी तो कोई बात नहीं है । शादी से पहले, मेरी पत्नी की यह शरत थी, कि शादी के बाद चाय बग़ैर शक्कर के पीनी पड़े गी तभी शादी करेगी । बस मैंने फ़ोरन हाँ कर दी । अब ग़लती तो इन्सान से हि होती है ना । सब हंस पड़े। जग्गी ने कहा यार तेरी मज़ाक़ करने की आदत अभी तक नहीं गई । ममता ने मुझे चाए का कप दिया, और अपना कप ले कर सोनू के पास जा कर बैठ गई । मैंने ममता से पूछा बेटे, आप क्या करती हैं ? उस ने कहा अंकल जी मैं डेप्युटी हेड टीचर हूँ, गणित और इंग्लिश पढ़ाती हूँ । और आप की होबी क्या है ? अंकल जी उस के लिए समय हि नहीं मिलता । हाँ, कभी अगर अवसर मिले, तो कुछ गीत ग़ज़ल पढ़ लेती हूँ । तो आपको पोयट्री में रुचि है । यह तो बहुत अच्छी बात है । हमें भी पोयट्री में काफ़ी रुचि है। सोनू ने कहा, तो आज की शाम, पोयट्री के नाम हो जाए । जग्गी और तोशी ने कहा यह तो बहुत अच्छा विचार है । ममता, आप ही कुछ सुनाएँ । अंकल जी ऐसे तो कुछ याद नहीं, आप ही शुरू करें । जब मुझे कुछ याद आ गया, तो सुना दूँगी । तो सुनिए । कुछ समय पहले एक गीत लिखा था, एक फ़ोटो से प्रभावित हो कर, जो मैंने FB पर देखी थी । जग्गी ने कहा, यार तूने कभी बताया ही नहीं कि तू लिखता भी है ।तोशी ने कहा तो सुनाईऐ ना । सुनाने से पहले इसके पीछे की कहानी संक्षिप्त में बता दूँ ताकि हर बात स्पष्ट हो जाए । एक दिन मैंने एक तस्वीर FB पर देखी । यह तस्वीर एक युवा कपल की थी जो अपनी शादी की सालगिरह मना रहे थे । वह एक दूसरे का हाथ पकड़े एक दूसरे के प्यार में पूरी तरह मगन थे । मुझे ऐसे महसूस हुआ कि उस के प्यार में इक जुनून था और वह अपने पप्रियतम से कह रही थी :
हाथ में हाथ हो साथ चलते रहें
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
