19-11-2020, 04:47 PM
मैं उसके मुताल्लिक और नहीं सोचना चाहता “और भी गम हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा” और जो मोहब्बत ही गम हो तो क्या कीजे? भीतर से एक आवाज़ आई और मैं मुस्कुराया!
आधी रात की नीरवता में बीप की आवाज़ के साथ पत्नी ने करवट बदली।
उसका नाम मेरे मोबाइल पर कौंध रहा था, जैसे सफ़ेद शर्ट के बीच रखी पीले रंग की साड़ी “आई होप यू अंडरस्टैंड “।
“यस आई डू”
उसने मुस्कान भेजी, मैं ओढ़ कर सो गया।
वह कभी मेरी कल्पनाओं में निर्बाध विचरन करने वाली प्रेमिका नहीं हो सकी, बल्कि हमेशा ही अमत्त नायिका बनी रही और यक़ीनन उसकी उत्कृष्टता उसके रुढ़ीगत होने में ही समाहित रहा। जैसे हरशिंगार के टूट कर गिरने की परंपरा में ही उसकी विशिष्टता निहित होती है !
आधी रात की नीरवता में बीप की आवाज़ के साथ पत्नी ने करवट बदली।
उसका नाम मेरे मोबाइल पर कौंध रहा था, जैसे सफ़ेद शर्ट के बीच रखी पीले रंग की साड़ी “आई होप यू अंडरस्टैंड “।
“यस आई डू”
उसने मुस्कान भेजी, मैं ओढ़ कर सो गया।
वह कभी मेरी कल्पनाओं में निर्बाध विचरन करने वाली प्रेमिका नहीं हो सकी, बल्कि हमेशा ही अमत्त नायिका बनी रही और यक़ीनन उसकी उत्कृष्टता उसके रुढ़ीगत होने में ही समाहित रहा। जैसे हरशिंगार के टूट कर गिरने की परंपरा में ही उसकी विशिष्टता निहित होती है !
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
