19-11-2020, 04:46 PM
सफ़ेद पारदर्शी टॉप और ब्लू जींस पहने वह बेहद संजीदा लग रही थी। टॉप के भीतर से स्पष्ट दिखाई देते नीले रंग के फ्लोरल ब्रा पर उसके शैम्पू किये खुले बाल बिखरे हैं। आज से पहले मैंने कभी उसके कपड़ों पर गौर नहीं किया था। न जाने क्यूं आज कर रहा था। उसने गहरा पिंक लिपस्टिक लगाया है। मैनिक्योर्ड उंगलियों के नेल भी पिंक रंग से रंगे हैं। बायीं अनामिका में छोटे-छोटे हीरे से घिरे बड़ी सी रूबी जड़ित अंगूठी, गले में पतली सी चेन से लटकता मैचिंग पेंडेंट और दांई कलाई में स्लीक घड़ी। लड़की ज़्यादातर हलके रंग के कपड़े पहनती है। मैं उसे किसी अन्य रंग के कपड़ों में नहीं सोचता। वह जो पहनती है, मुझे वही मुग्ध करता है।
हंसिनी मेरे समक्ष है और मैं बेहद मुग्ध भाव से उसे निहार रहा हूं।
“तुमको देखा तो ये खयाल आया …” मेरे जेहन के आत्ममंथन को भाषा और भंगिमा देता यह गीत कैफ़े के पुराने रिकॉर्ड में धीमे धीमे गुनगुना रहा था। मेरी दशा गीत के आख्यायक सरीखे ही है, यह जानते हुए भी कि मेरी बेसकूं रातों का सवेरा एक नायिका ही है, मैं तमाम सुबहों से महरूम हूं।
“कैसे आना हुआ?” बेखुदी में एक ग़ैरज़रूरी सवाल पूछता हूं।
“लाइब्रेरी से किताबें लेनी थी और कुछ अन्य ज़रूरी काम थे।”
हंसिनी मेरे समक्ष है और मैं बेहद मुग्ध भाव से उसे निहार रहा हूं।
“तुमको देखा तो ये खयाल आया …” मेरे जेहन के आत्ममंथन को भाषा और भंगिमा देता यह गीत कैफ़े के पुराने रिकॉर्ड में धीमे धीमे गुनगुना रहा था। मेरी दशा गीत के आख्यायक सरीखे ही है, यह जानते हुए भी कि मेरी बेसकूं रातों का सवेरा एक नायिका ही है, मैं तमाम सुबहों से महरूम हूं।
“कैसे आना हुआ?” बेखुदी में एक ग़ैरज़रूरी सवाल पूछता हूं।
“लाइब्रेरी से किताबें लेनी थी और कुछ अन्य ज़रूरी काम थे।”
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
