19-11-2020, 04:45 PM
मैं उसकी बेचैनी अपने भीतर महसूस करता हूं। उस वक़्त मैं पसीने से लस्त उसकी ठंडी हथेलियों के मध्य अपनी ऊंगली रख उससे कहता हूं “ प्रेम बेचैनियों भरा कुंड है और प्रेमिल चाहनायें समूह नृत्य में लिप्त अनगिनत मतस्य“
“नहीं, ओक्टोपस, आठों भुजाओं से जकड़ रखने वाली” लड़की ने मुस्कुराते हुए यूं कहा जैसे उसके भीतर कुछ छटपटा रहा हो। उसके होंठ सूख गए थे, आंखें तरल हो गई थी। उंगलियां कॉफ़ी के कप पर कस गई थी।
“नहीं, ओक्टोपस, आठों भुजाओं से जकड़ रखने वाली” लड़की ने मुस्कुराते हुए यूं कहा जैसे उसके भीतर कुछ छटपटा रहा हो। उसके होंठ सूख गए थे, आंखें तरल हो गई थी। उंगलियां कॉफ़ी के कप पर कस गई थी।
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
