19-11-2020, 04:43 PM
लड़की को चौंकाने की आदत है। कल रात बीप की आवाज़ के साथ चौंका दिया था “एक कॉफ़ी पीने जितना वक़्त होगा तुम्हारे पास ?”।
मैंने जवाब में बहुत सारे फूल भेजे। मुझे फूल भेजने की आदत है। हालांकि मुझे लड़की की पसंद का ज़रा भी अंदाज़ा नहीं, वह कौन सा फूल हो जो लड़की के मिजाज़ को सुहाये। और रिझाये।
लड़की फूल चुनकर अपनी मुस्कान रख देती है, मैं उसकी मुस्कान ओढ़ सो जाता हूं। सपने में लड़की श्रीदेवी है, पीले रंग की सिफ़्फ़ोन साड़ी पहन बारिश में नाचती-गाती है और मैं विनोद खन्ना की तरह दूर खिड़की पर खड़ा उसे देखता हूं। एक ज़ाहिर सा जुदा ख़याल ये है कि मुझे बारिश नहीं, लड़की पसंद है।
आज बहुत बारिश हो रही है, पिछले कई दिनों में ऐसी बारिश नहीं हुई थी। मौसम बारिश का है भी नहीं। दरअसल ये गर्मी और ठण्ड के बीच का मौसम है। इस मौसम का मिजाज़ बचकाना है। धूप और बारिश आपस में आंख मिचौली खेलते हैं। कभी तो आसमान में काले बादल घिर आते हैं और झमाझम बारिश। फिर पता नहीं, अचानक कहां ग़ायब हो जाते हैं और धूप खिल आता है। उसके कैफ़े आने के उपलक्ष्य में मैंने मन ही मन मौसम के देवता से बरसने की विनती की थी।
लड़की को बरसते मौसम में किताब पढ़ते हुए कॉफ़ी पीना बेहद रूमानी लगता है और मुझे अदरक वाली चाय के साथ पकोड़े खाते हुए लड़की से बातें करना। लड़की गूढ़ बातें करती है। एक बार उसने कहा “अगले जन्म में मैं कैबरे डांसर होना चाहती हूं। जोशीले संगीत की धुन पर भड़कीले कपड़ो में नाचते गाते हुए कामुक पुरुषों का मन बहलाना चाहती हूं“ तो एक दफा कहा “ताजमहल काले रंग में नाहद खूबसूरत होता” अक्सर उसकी बातों के अर्थ मुझे बेचैन करते हैं।
मैंने जवाब में बहुत सारे फूल भेजे। मुझे फूल भेजने की आदत है। हालांकि मुझे लड़की की पसंद का ज़रा भी अंदाज़ा नहीं, वह कौन सा फूल हो जो लड़की के मिजाज़ को सुहाये। और रिझाये।
लड़की फूल चुनकर अपनी मुस्कान रख देती है, मैं उसकी मुस्कान ओढ़ सो जाता हूं। सपने में लड़की श्रीदेवी है, पीले रंग की सिफ़्फ़ोन साड़ी पहन बारिश में नाचती-गाती है और मैं विनोद खन्ना की तरह दूर खिड़की पर खड़ा उसे देखता हूं। एक ज़ाहिर सा जुदा ख़याल ये है कि मुझे बारिश नहीं, लड़की पसंद है।
आज बहुत बारिश हो रही है, पिछले कई दिनों में ऐसी बारिश नहीं हुई थी। मौसम बारिश का है भी नहीं। दरअसल ये गर्मी और ठण्ड के बीच का मौसम है। इस मौसम का मिजाज़ बचकाना है। धूप और बारिश आपस में आंख मिचौली खेलते हैं। कभी तो आसमान में काले बादल घिर आते हैं और झमाझम बारिश। फिर पता नहीं, अचानक कहां ग़ायब हो जाते हैं और धूप खिल आता है। उसके कैफ़े आने के उपलक्ष्य में मैंने मन ही मन मौसम के देवता से बरसने की विनती की थी।
लड़की को बरसते मौसम में किताब पढ़ते हुए कॉफ़ी पीना बेहद रूमानी लगता है और मुझे अदरक वाली चाय के साथ पकोड़े खाते हुए लड़की से बातें करना। लड़की गूढ़ बातें करती है। एक बार उसने कहा “अगले जन्म में मैं कैबरे डांसर होना चाहती हूं। जोशीले संगीत की धुन पर भड़कीले कपड़ो में नाचते गाते हुए कामुक पुरुषों का मन बहलाना चाहती हूं“ तो एक दफा कहा “ताजमहल काले रंग में नाहद खूबसूरत होता” अक्सर उसकी बातों के अर्थ मुझे बेचैन करते हैं।
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
