19-11-2020, 04:43 PM
हमदोनों को यहां आये काफी देर हो चुकी है, इतनी देर कि यहां मौजूद लगभग सभी चीज़ें उसे जानी-पहचानी लगने लगी हैं। जिसमें दीवार पर टंगी पेंडुलम वाली पुरानी घड़ी सबसे महत्वपूर्ण है। आते ही उसकी पहली नज़र घड़ी पर पड़ी थी और मेरे आ जाने तक वह इसे कई मर्तबा देख चुकी थी। वैसे तो वह अपनी कलाई में बंधी घड़ी या हाथ में पकड़े मोबाइल में समय देख सकती थी, लेकिन आंखों के ठीक सामने टंगी बड़ी सी पेंडुलम वाली घड़ी को देखना उसे भला लगता रहा !
वह ठीक समय पर आई थी। मैं देर से आया था। अमूमन लड़का जल्दी आता है और लड़की देर से आती है, लेकिन यह लड़की समय की पाबंद है। इसे समय से पहुंचना अच्छा लगता है और मुझे हमेशा ही देर करने की आदत है। हालांकि मैं लड़की से मिलने ठीक समय पर पहुंच जाना चाहता था इसलिये मोबाइल अलार्म की पहली पुकार पर उठ गया था, लेकिन उठने के देर बाद तक उसके ख्यालों से लिपटा बिस्तर पर ही पड़ा रहा। मुझे दुरुस्त याद रहा आज लड़की से मिलने जाना है लेकिन मैं लड़की के ख़यालों से दूर नही होना चाहता था। जबकि मेरा मन ठीक चल कर उस कैफ़े में अलसुबह पहुंच चुका था जहां मिलना तय है। तब जब उसके अधिपति ने दरवाज़ा भी नही खोला था, तब जब ख़िदमतगार ने बुहार भी नहीं लगाई थी और तब जब रात भर की सीली बदबू गदराये बादलों की भांति मोटे-मोटे गद्दों सी बिछी हुई थी।
इन सबसे बेफ़िक्र मैं अपनी सबसे पसंद की कोने वाली कुर्सी पर जा बैठा। मेरी तरह यह कुर्सी अकेली नहीं है। इसके साथ एक और कुर्सी है और यह दोनों कुर्सियां एक गोल मेज़ से लगी हैं। सिर्फ़ यही एक मेज़ दो कुर्सी वाली है, बाक़ी सारी तीन या चार वाली। ज़्यादातर मैं अकेला आता हूं इसलिये मुझे यह दो कुर्सी वाली जगह अधिक उपयुक्त लगती है। कभी भूले से कोई यार दोस्त मिल जाए तब भी मुझे यही जगह ठीक लगती है। बाज दफा दुनिया से गैरवाकिब हो एक तवील एकांत की चाह में शहर के भीड़भाड़ से दूर बसा यह कैफ़े मुझ जैसे दुश्चिंताओं के दोराहे पर खड़े आदमी के लिए बहिश्त मालूम पड़ती है। मैं यहाँ बारहा आता हूँ, बार-बार आने से यह जगह मुझे अपनी लगने लगी है। इतनी अपनी कि कभी कभी मेरा मन होता है कि यहां अपना नाम लिख दूं। कुर्सी पर, मेज़ पर और लड़की की हथेली पर भी।
वह लड़की जो आज मुझसे मिलने आने वाली है, वह आएगी और उसके आते ही मौसम ख़ुशनुमा हो जायेगा। रात भर की सीली बदबू कॉफ़ी और अदरक कुटी चाय की मिश्रित सोंधी खुशबू में बदल जायेगी। वर्षों पुराना ईरानी कैफ़े किसी अत्याधुनिक कैफ़े में तब्दील हो जायेगा। काठ निर्मित कुर्सी मेज़ प्लास्टिक की फ़ैन्सी चेयर टेबल में परिवर्तित हो जायेगी। दीवारों पर रंग बिरंगे फूल खिल उठेंगे और उनपर मँडराती तितलियाँ मुझे बेतरह याद दिलायेंगी कि इस वक़्त तितली जैसी ही एक लड़की मेरे सामने बैठी है। हां, लड़की तितली है, रंग बिरंगी पंखों वाली तितली ! कितने तो रंग हैं इस लड़की के, मुझे जब भी लगता है मैं इसे जानने लगा हूं,समझने लगा हूं, तब कुछ अलग कह मुझे चौंका देती है।
वह ठीक समय पर आई थी। मैं देर से आया था। अमूमन लड़का जल्दी आता है और लड़की देर से आती है, लेकिन यह लड़की समय की पाबंद है। इसे समय से पहुंचना अच्छा लगता है और मुझे हमेशा ही देर करने की आदत है। हालांकि मैं लड़की से मिलने ठीक समय पर पहुंच जाना चाहता था इसलिये मोबाइल अलार्म की पहली पुकार पर उठ गया था, लेकिन उठने के देर बाद तक उसके ख्यालों से लिपटा बिस्तर पर ही पड़ा रहा। मुझे दुरुस्त याद रहा आज लड़की से मिलने जाना है लेकिन मैं लड़की के ख़यालों से दूर नही होना चाहता था। जबकि मेरा मन ठीक चल कर उस कैफ़े में अलसुबह पहुंच चुका था जहां मिलना तय है। तब जब उसके अधिपति ने दरवाज़ा भी नही खोला था, तब जब ख़िदमतगार ने बुहार भी नहीं लगाई थी और तब जब रात भर की सीली बदबू गदराये बादलों की भांति मोटे-मोटे गद्दों सी बिछी हुई थी।
इन सबसे बेफ़िक्र मैं अपनी सबसे पसंद की कोने वाली कुर्सी पर जा बैठा। मेरी तरह यह कुर्सी अकेली नहीं है। इसके साथ एक और कुर्सी है और यह दोनों कुर्सियां एक गोल मेज़ से लगी हैं। सिर्फ़ यही एक मेज़ दो कुर्सी वाली है, बाक़ी सारी तीन या चार वाली। ज़्यादातर मैं अकेला आता हूं इसलिये मुझे यह दो कुर्सी वाली जगह अधिक उपयुक्त लगती है। कभी भूले से कोई यार दोस्त मिल जाए तब भी मुझे यही जगह ठीक लगती है। बाज दफा दुनिया से गैरवाकिब हो एक तवील एकांत की चाह में शहर के भीड़भाड़ से दूर बसा यह कैफ़े मुझ जैसे दुश्चिंताओं के दोराहे पर खड़े आदमी के लिए बहिश्त मालूम पड़ती है। मैं यहाँ बारहा आता हूँ, बार-बार आने से यह जगह मुझे अपनी लगने लगी है। इतनी अपनी कि कभी कभी मेरा मन होता है कि यहां अपना नाम लिख दूं। कुर्सी पर, मेज़ पर और लड़की की हथेली पर भी।
वह लड़की जो आज मुझसे मिलने आने वाली है, वह आएगी और उसके आते ही मौसम ख़ुशनुमा हो जायेगा। रात भर की सीली बदबू कॉफ़ी और अदरक कुटी चाय की मिश्रित सोंधी खुशबू में बदल जायेगी। वर्षों पुराना ईरानी कैफ़े किसी अत्याधुनिक कैफ़े में तब्दील हो जायेगा। काठ निर्मित कुर्सी मेज़ प्लास्टिक की फ़ैन्सी चेयर टेबल में परिवर्तित हो जायेगी। दीवारों पर रंग बिरंगे फूल खिल उठेंगे और उनपर मँडराती तितलियाँ मुझे बेतरह याद दिलायेंगी कि इस वक़्त तितली जैसी ही एक लड़की मेरे सामने बैठी है। हां, लड़की तितली है, रंग बिरंगी पंखों वाली तितली ! कितने तो रंग हैं इस लड़की के, मुझे जब भी लगता है मैं इसे जानने लगा हूं,समझने लगा हूं, तब कुछ अलग कह मुझे चौंका देती है।
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
