19-11-2020, 04:37 PM
लोगों के ताने …समाज का हर कदम पर तुलनात्मक अध्ययन बड़ी बहन ज्यादा सुंदर थी…दूसरी तो ऐसी ही आएगी।बच्चे पैदा करने की क्या जरूरत है पहली से दो पहले ही है…. जिंदगी गुजर जाएगी एक अच्छी माँ बनने और सिद्ध करने में…उसके बाद भी इसकी कोई गारण्टी नहीं कि वो ये सिद्ध कर भी पाएगी या नहीं। प्रवीण की निगाहें हर चीज़ में…हर रंग में..हर त्योहार में… हर स्वाद में दीदी को ढूढेंगी।
तिनका-तिनका जोड़कर अरमानों से सजाया हुए दीदी के उस घर में एक फूलदान सजाने में भी मेरे हाथ काँपेगें।हर पार्टी… हर उत्सव में लोगों की सवालिया निगाहें मुझे तार-तार करेंगी …देखने मे तो ठीक लगती है फिर ऐसी क्या गरज पड़ी थी दो बच्चे के बाप से शादी करने की…अकेली आई है या बच्चे भी।नेहा ने घबरा कर आँखे खोल दी और आसमान में तारों के बीच दीदी को ढूंढने लगी….”दीदी मुझे माफ़ कर देना …मैं इतनी मजबूत नहीं कि जीवनभर लोगों के सवालों का जवाब दे सकूँ… पर मैं आज तुमसे ये वायदा करती हूँ कि एक मासी के तौर पर हमेशा तुम्हारे बच्चों के साथ खड़ी हूँ”…हफ़्तों से घुमड़ते सवालों का मानो उसे जवाब मिल गया था…नेहा माँ को फोन करने के लिए छत से नीचे उतर गई।
तिनका-तिनका जोड़कर अरमानों से सजाया हुए दीदी के उस घर में एक फूलदान सजाने में भी मेरे हाथ काँपेगें।हर पार्टी… हर उत्सव में लोगों की सवालिया निगाहें मुझे तार-तार करेंगी …देखने मे तो ठीक लगती है फिर ऐसी क्या गरज पड़ी थी दो बच्चे के बाप से शादी करने की…अकेली आई है या बच्चे भी।नेहा ने घबरा कर आँखे खोल दी और आसमान में तारों के बीच दीदी को ढूंढने लगी….”दीदी मुझे माफ़ कर देना …मैं इतनी मजबूत नहीं कि जीवनभर लोगों के सवालों का जवाब दे सकूँ… पर मैं आज तुमसे ये वायदा करती हूँ कि एक मासी के तौर पर हमेशा तुम्हारे बच्चों के साथ खड़ी हूँ”…हफ़्तों से घुमड़ते सवालों का मानो उसे जवाब मिल गया था…नेहा माँ को फोन करने के लिए छत से नीचे उतर गई।
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
