19-11-2020, 04:36 PM
नेहा आश्चर्य से माँ को देखती रह गई। “तुमने जीजा से भी एक बार पूछा है”…. “पूछना क्या है उनके माता-पिता तो है नहीं चाचा-चाची से बात हो गई है… उन्हें भी ये रिश्ता मंजूर है।” रिश्ता…नेहा को सारा घटनाक्रम समझ में आ गया।”माँ…. मैं तुमसे इस बात की उम्मीद नहीं कर रही थी “…”तुम भी”…”छि”… “दीदी की चिता की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई और तुम ?”
माँ का चेहरा गम्भीर हो गया… “हो सकता है आज तुम्हें मेरी बातें अच्छी न लगे…पर तुम्हारी दीदी के जाने के बाद प्रवीण जी और उनके बच्चों की जिम्मेदारी भी मुझ पर है।तुम सोच-विचार कर जल्द मुझे जवाब दे दो…कहते हैं मरने वाले कि अंतिम इच्छा न पूरी की जाए तो उसकी आत्मा को कभी शांति नहीं मिलती।”
… अंतिम वाक्य कहते वक्त माँ ने मुझे अजीब सी निग़ाहों से देखा।पता नहीं …उन निगाहों में ऐसा क्या था…मैं उन आँखों मे तैर रहे हजारों सवाल के तीर झेल नहीं पाई और मुँह घुमा लिया।
माँ का चेहरा गम्भीर हो गया… “हो सकता है आज तुम्हें मेरी बातें अच्छी न लगे…पर तुम्हारी दीदी के जाने के बाद प्रवीण जी और उनके बच्चों की जिम्मेदारी भी मुझ पर है।तुम सोच-विचार कर जल्द मुझे जवाब दे दो…कहते हैं मरने वाले कि अंतिम इच्छा न पूरी की जाए तो उसकी आत्मा को कभी शांति नहीं मिलती।”
… अंतिम वाक्य कहते वक्त माँ ने मुझे अजीब सी निग़ाहों से देखा।पता नहीं …उन निगाहों में ऐसा क्या था…मैं उन आँखों मे तैर रहे हजारों सवाल के तीर झेल नहीं पाई और मुँह घुमा लिया।
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
