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Non-erotic अंतिम इच्छा
#3
माँ का गला भर आया… “तुम अभी माँ नहीं हो बनी हो न… जब माँ बनोगी तब औलाद का दर्द समझोगी। फूल से बच्चे माँ के बिना कलप रहे हैं और तुम हो कि सब दरवाजे बंद करके बैठी हो ।”
नेहा का मन खराब हो चुका था… क्या इतना आसान था यह सब।चार भाई-बहनों में सबसे छोटी थी वो…. सबसे छोटी.. सबसे लाडली।…पर जिंदगी उसे इतने कड़वे और कठिन मोड़ पर आकर खड़ा कर देगी उसने कभी नहीं सोचा था। दीदी की शादी के वक्त महज 17 साल की नाजुक उम्र थी उसकी।
पहली बार साड़ी पहनी थी… कितना उत्साह था… जीजा जी का जूते चुराऊंगी …दस हजार से एक रुपये कम न लूंगी… उन्हें खूब तंग करूँगी। जीजाजी उसकी हर शरारत पर मुस्कुरा कर रह जाते…वह सिर्फ उसकी बहन के पति ही नहीं…नेहा की हर बात के हमराज़, समझदार और सुलझे हुए व्यक्ति थे ।
बहुत सारी ऐसी बातें… जो दीदी को भी पता नहीं चल पाती थी और वह जीजा जी से डिस्कस करती थी। जीजा जी के उत्साहित करने पर ही उसने सिविल सर्विसेज की तैयारी करना शुरू की थी।…वरना माँ के आगे तो वह भी दीदी की तरह मजबूर हो जाती और आज वो भी दीदी की तरह और किसी की घर -गृहस्थी देख रही होती।
दीदी पढ़ने में बहुत अच्छी थी… पर बाबा की अंतिम इच्छा का मान रखने के लिए… दीदी बलि का बकरा बन कर रह गई और अचार मुरब्बे और नये-नये पकवानों के अलावा… आगे कुछ भी ना सोच सकी।
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी  हम अकेले हैं.



thanks
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Messages In This Thread
अंतिम इच्छा - by neerathemall - 19-11-2020, 04:34 PM
RE: अंतिम इच्छा - by neerathemall - 19-11-2020, 04:34 PM
RE: अंतिम इच्छा - by bhavna - 19-11-2020, 11:46 PM



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