13-11-2020, 12:33 PM
भाभी चुप हो गयी, मैंने कहा क्या बात है भाभी बुरा लग गया क्या, तो भाभी बोली नहीं नहीं बस यूं ही, मैंने भी यही चाहती थी अपने ज़िंदगी में की कोई मुझे खुश रखे, मेरा पति मुझे प्यार नहीं करता मुझे किसी चीज की कमी नहीं है बस प्यार की है मेरा पति किसी और औरत के चक्कर में है, वो उसी के साथ पर्व में रहता है, आज वो किसी होटल में रंगरेलियां मना रहा होगा. और रोने लगी, मैंने उनके नजदीक जाके कहा, रोने से काम नहीं चलेगा, खुश रहो भाभी जी, आप इसके लिए सोचो क्या करना है, ऐसे काम नहीं चलेगा ज़िंदगी बहुत छोटी है, इसलिए इंसान को ख्सः रखना चाहिए, और मैंने उनका सर अपने कंधे पे टिका लिया, और पीठ को सहलाते हुए सांत्वना देने लगा, फिर वो भी मुझे पकड़ ली.
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
