12-10-2020, 09:16 PM
(This post was last modified: 12-10-2020, 09:24 PM by sanskari_shikha. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
और फिर मैंने कनिष्का को फोन किया.
कनिष्का: हाय...स्लीपि हेड...उठ गए..
मैं: मुझे उठे हुए तो एक घंटा हो गया..
कनिष्का: है...एक घंटा और मैंने सोचा की तुम देर से उठोगे, इसलिए मैंने तुम्हे फोन नहीं किया...पता है, सुबह से तुम्हे फोन करने के लिए बेचैन थी मैं.
मैं: तो कर लेती न...या फिर सीधा आ जाती घर पर ही..
कनिष्का: नहीं बाबा...सीधा तो मैं अब कभी नहीं आउंगी. तुमने पता नहीं किसी और को इनवाईट कर रखा हो..
मैं: हा हा...तुम भी न...चलो आ जाओ अब, आज तुम्हारे अलावा कोई और इनवाईट नहीं है. तुम्हारी दीदी भी नहीं. उसे आज कोई काम है.
कनिष्का: उनसे मुझे कोई प्रोब्लम नहीं है...वैसे प्रोब्लम तो किसी से भी नहीं है. चलो ठीक है मैं आती हूँ, आधे घंटे मैं: ओके..बाय..
और फिर उसने भी फोन रख दिया. मैंने जल्दी से घर को साफ़ करना शुरू कर दिया, बेड शीट बदली, कमरे में स्प्रे किया, और फिर नहाने चल दिया, नहाकर निकला ही था की बेल बजने लगी, अभी तो सिर्फ बीस मिनट ही हुए थे, इतनी जल्दी कैसे आ गयी कनिष्का. मैंने टोवल में ही जाकर दरवाजा खोल दिया.
सामने पारुल खड़ी थी.
पारुल: हाय...विशाल...
मैं: हाय पारुल...तुम इतनी सुबह...
पारुल: क्यों?? मेरा आना अच्छा नहीं लगा तुम्हे..
वो आगे आई और टावल के ऊपर से ही मेरे लंड को हाथ में लेकर मसल दिया. उसने टी-शर्ट और जींस पहनी हुई थी. अपने मोटापे की वजह से वो जींस काफी कम ही पहनती थी. पर आज वो जींस में ज्यादा मोटी नहीं लग रही थी.
पारुल: क्या हुआ?? मुझे देखकर ख़ुशी नहीं हुई तुम्हे क्या?? अन्दर कोई और भी है क्या?? उस दिन की तरह...हूँ...
मैं: नहीं पारुल...कोई नहीं है...पर आने वाली है..
पारुल: अच्छा...वोही तुम्हारी गर्लफ्रेंड. उस दिन वाली. क्या मारी थी तुमने उसकी...यार...मजा आ गया था तुम्हे उसको फक करते हुए देखकर. सच में. वो अपनी ब्रेस्ट के निप्पल को बड़ी बेशर्मी से मेरे सामने ही दबाने लगी. उस दिन की चुदाई के बारे में सोचकर..
मैं: नहीं पारुल...वो नहीं...कोई और है..
पारुल: शाबाश...मेरे शेर...शाबाश...पहले तो तुम्हे कोई मिलती नहीं थी और अब...लाईन लगाकर..सही है...
मैं: हंसकर रह गया.
पारुल: पर मेरा क्या होगा यार...कितने मन से आई थी मैं...सोचा था की कल तुमने पूरा दिन आराम किया है, तो आज जाकर तुम्हारे साथ फिर से. यु नो मी ना. आजकल मुझे अपने आप पर काबू नहीं रहता. मन करता है की बस कोई मुझे सारा दिन चोदता रहे...चोदता रहे...बस और कुछ नहीं.
मैं उसकी बात सुनकर समझ गया की अगर मैंने उसे जबरदस्ती वापिस भेजा तो उसे कितना बुरा लगेगा..
मैं: कोई बात नहीं पारुल...आज तुम भी रुको...थ्रीसम करेंगे...बोलो..
पारुल: थ्रीसम....वाव...मैंने आज तक नहीं किया...पर तुम्हारी वो फ्रेंड मानेगी क्या..
मैं: जिसे लंड चाहिए. वो मेरी हर बात मानेगी. हाहा
और हम दोनों एक दुसरे के हाथ के ऊपर हाथ मारकर हंसने लगे. तभी बाहर से कनिष्का अन्दर आ गयी. उसने जैसे ही मुझे पारुल के साथ केवल टावल में खड़ा हुए देखा वो सकपका गयी.
कनिष्का: ओह...लगता है... मैं गलत टाईम पर आ गयी.
मैं: अरे नहीं कनिष्का...आओ, इससे मिलो, ये है मेरे कॉलेज टाईम की फ्रेंड पारुल और पारुल ये है कनिष्का, जिसके बारे में मैंने अभी तुमसे कहा.
पारुल: हाय कनिष्का..बड़ा प्यारा नाम है और उतनी ही प्यारी तुम भी हो..
कनिष्का: थेंक्स..
कनिष्का को काफी अनकम्फर्टेबल महसूस हो रहा था, उसने शायद सोचा भी नहीं था की मेरे घर पर कोई और भी लड़की हो सकती है.
मैं: क्या हुआ?? कन्नू, तुम तो कह रही थी की तुम्हे कोई प्रोब्लम नहीं है. अगर कोई और भी साथ हो तो.
वो मेरी तरफ आँखे फाड़ कर देखे जा रही थी..उसे लगा था की मेरी फ्रेंड आई है मिलने, पर मेरी बातो से उसे विशवास होने लगा था की आज मैं उन दोनों की एक साथ लेने के मूड में हूँ, जैसे कल ली थी उसकी, अंशिका के सामने ही. पर अपनी बहन के सामने करने में और किसी दुसरे के सामने करने में फर्क है. पर पारुल को किसी बात से परेशानी नहीं थी, वो नोर्मल सी बैठी थी सोफे पर. शायद कन्नू के चेहरे पर आये हुए भाव को पड़ने की कोशिश कर रही थी वो..
मैंने कनिष्का के कंधे पर हाथ रखा और उसे पकड़कर पारुल के साथ ही सोफे पर बिठा दिया, और मैं उसके सामने उसके घुटने पर हाथ रखकर अपने पंजो के बल बैठ गया.
मैं: देखो कनिष्का, मैं तुमसे कुछ छिपाना नहीं चाहता..ये मेरी कॉलेज फ्रेंड है और अभी कुछ दिनों पहले ही इसका ब्रेकअप हुआ है, और ये अपने बॉय फ्रेंड के साथ हुए सेक्स को काफी मिस कर रही थी, इसलिए अब इसे मैं वो सेटिस्फेक्शन दे रहा हूँ जो ये चाहती है... और अभी मैं इससे थ्रीसम की बात ही कर रहा था, और ये तैयार भी है. अगर तुम नहीं चाहती ये करना तो तुम्हे मैं फ़ोर्स नहीं करूँगा. पर करोगी तो बड़ा मजा आएगा. जैसा कल मिला था. उससे भी ज्यादा क्योंकि ये पारुल है न..ये सेक्स की प्यासी है. खुद भी मजे लेती है और दुसरो को उससे ज्यादा देती है..
मेरी बात कनिष्का बड़े ध्यान से सुन रही थी. उसके चेहरे की रंगत देखकर तो मैं समझ ही गया था की वो आगे की बाते सोचकर उत्तेजित हो रही है. पर फिर भी मैं उसके मुंह से सुनना चाहता था.
मैं: बोलो...कन्नू.
कन्नू : ठीक है...जैसा तुम चाहो.
हाथ मे आया इतना सुनेहरा अवसर शायद ही कोई छोड़ना चाहेगा और वैसे भी वो चुदने के परपस से ही आई थी. बिना लंड लिए तो वो वापिस जाने से रही. उसकी बात सुनते ही मैं खुश हो गया और बोला : ठीक है. तुम दोनों यहीं बैठो. मैं कपडे पहन कर आता हूँ..
मेरी बात सुनते ही पारुल तपाक से बोली: ये कपडे उतारने का टाईम है विशाल...न की पहनने का. उसकी बात सुनकर मेरे साथ-साथ कनिष्का भी हंसने लगी .
मेरा लंड तो पहले से ही खड़ा था. अब उसके शो दिखाने का टाईम आ गया था. मैं उन दोनों के बीच खड़ा हो गया..मेरी बन्दूक सामने की तरफ तनी हुई थी. पारुल ने मेरे टावल को धीरे से खोला और मेरे जिस्म से गीला टावल हटा दिया..जैसे ही टावल हटा, मेरा लंड स्प्रिंग की तरह से हवा में झूलने लगा. जिसे देखकर पारुल ने बिना कोई देर किये उसे पकड़ा और सीधा अपने मुंह के हवाले कर दिया और उसे तेजी से चूसने लगी.
उसकी हरकत देखकर कनिष्का के होंठ लरज रहे थे. वो शायद सोच रही थी की उसने क्यों पहल नहीं की. ये सोचते हुए वो अपनी ब्रेस्ट को हाथ में लेकर होले से दबाने लगी. अपने सुख चुके होंठो पर जीभ फिराने लगी और थोडा आगे होकर ध्यान से पारुल को मेरा लंड चूसते हुए देखने लगी.
पारुल ने जब देखा की भूखी कन्नू उसे बड़ी ललचाई नजरो से देख रही है तो वो थोडा पीछे हुई , मेरे लंड को बाहर निकाला और उसे कन्नू के मुंह की तरफ करके बोली: चल शुरू हो जा... शर्मा मत...
उसे तो जैसे इसी मौके का इन्तजार था. उसने मेरे लंड को पारुल के हाथ से झपटा और सीधा अपने मुंह में धकेल दिया..मेरे लंड को वो किसी खिलोने की तरह ट्रीट कर रही थी. मेरे लंड पर उसके दांतों की रगड़ लगी..मैं कराह उठा.
मैं: धीरे...धीरे...करो कन्नू. ये तुम्हारा ही है...भागा नहीं जा रहा कहीं.
उसने अपनी नजरे मुझसे मिलायी, जिनमे हलकी हंसी मैंने साफ़ देखी और फिर मुझे देखते-देखते ही वो मेरे लंड को बुरी तरह से चूसने लगी. बिना अपने दांत लगाये..
इतनी देर में पारुल ने अपनी टी-शर्ट और जींस उतार दी. वो बिलकुल भी नहीं शर्मा रही थी. उसके मुम्मे ब्रा में कैद देखकर मेरे लंड का खून और तेजी से दोड़ने लगा. मुझे देखते हुए ही उसने अपनी ब्रा भी खोल दी और खड़े होकर मेरे पास आई और मेरे होंठो के ऊपर अपने होंठ रखकर उन्हें चूसने लगी. मेरा हाथ सीधा उसके दोनों मुम्मो पर जाकर चिपक गया और उन्हें मसलने लगा. कन्नू मेरा लंड और पारुल मेरे होंठ चूस रही थी. पारुल अपनी ब्रेस्ट को मेरी छाती से रगड़ने लगी..
पारुल को ना जाने क्या हुआ, उसने एकदम से अपनी एक टांग उठा कर लंड चूस रही कनिष्का के सर से घुमा कर दूसरी तरफ फेंक दी..अब पारुल का मुंह मेरी तरफ था और उसकी दोनों टाँगे मेरे लंड के दोनों तरफ थी और नीचे कन्नू मेरा लंड चूस रही थी. मुझसे कम हाईट होने की वजह से उसकी गांड नीचे लंड चूस रही कनिष्का के मुंह से टच हो रही थी. अब आलम ये था की उसे लंड के साथ-साथ पारुल की चूत की खुशबु भी लेनी पड़ रही थी. मैंने पारुल की गांड के नीचे हाथ लगा कर उसे ऊपर की तरफ उठा लिया और उसने भी अपनी बाहे मेरी गर्दन में लपेट कर मुझे चूमना और चाटना शुरू कर दिया..उसका वजन काफी था, पर मैंने फिर भी उसे उठा रखा था.
वो तो जैसे मुझमे समां जाने को आतुर थी, मुझे अपनी तरफ इतनी तेजी से भींच रही थी की उसकी मोटी ब्रेस्ट बीच में पीसकर ऊपर की तरफ आकर मेरी ठोडी से टकरा रही थी. मैंने थोडा नीचे होकर उसकी ब्रेस्ट के ऊपर अपनी जीभ रख दी और उसे फिराते हुए नीचे जाकर उसके निप्पल को मुंह में लेकर जोरो से चूसने लगा. वो जोर-जोर से चीखने लगी..
आआअह्ह्ह्ह विशाल्ल्ल्ल......काट डालो....इन्हें.....अह्ह्ह्ह....बड़ी खुजली होती है इनमे......साले बड़ा परेशान करते हैं ये....चुसो......जोर से चुसो....हरामियो को...
वो अपने चिर परिचित अंदाज में चीखे जा रही थी और अपने गुलाबी निप्पलस को गालियाँ दिए जा रही थी. और नीचे उस कनिष्का ने अति मचा रखी थी. .वो भी पारुल की चीखे सुनकर अपने असली रंग दिखाने लगी और मेरे लंड को मुंह में भरे-भरे ही वो भी आवाजे निकालने लगी.
उम्म्म्म......ओंगग्ग्ग्ग........ग्गग्ग्ग्ग.......म्मम्मम.....
मैंने एक ऊँगली पारुल की गांड में डाल दी. वो थोडा सा उछल कर ऊपर की तरफ हुई और फिर एकदम से मेरी ऊँगली के ऊपर बैठ गयी. मेरी ऊँगली उसकी गांड के अन्दर फिसलती चली गयी. पारुल के तो मजे हो गए. वो मेरी ऊँगली को अन्दर ले कर मजे से ऊपर नीचे होने लगी. उसकी चूत मेरे लंड के ऊपर वाले हिस्से पर घस्से लगा रही थी..जिसकी वजह से उसके अन्दर का पानी निकलकर नीचे की तरफ जाने लगा और जब उसकी चूत का पानी लंड से फिसलकर कनिष्का में मुंह में गया तो उसे भी ये डबल टेस्ट का बड़ा मजा आया, जो मुझे उसकी स्पीड देखकर पता चला..
पारुल ने अपने होंठ मुझसे हटा कर जोर से बोली: स्स्स्स....ओह्ह्ह्ह....विशाल...अब सहन नहीं होता....प्लीस....डाल दो अब....
मैंने नीचे हाथ करके अपने लंड को कन्नू के मुंह से छुड़ाया और उसकी गीली हो चुकी चूत के मुहाने पर रखकर अन्दर की तरफ धकेल दिया. बाकी का काम उसके मोटे जिस्म ने कर दिया..अपना सारा भार उसने मेरे लंड की तरफ करके अपनी चूत को मेरे लंड के चारो तरफ लपेट सा दिया.
अह्ह्हह्ह्ह्ह......विशाल.......मम्म......तुम्हारा लंड कितना शानदार है.....आआह्ह्ह्ह.... और वो ऊपर नीचे उछलने लगी मेरे शानदार लंड के ऊपर.
नीचे बैठी हुई कनिष्का ने अपना मुंह अभी भी ऊपर ही किया हुआ था. इसी आशा में की कभी तो मेरा लंड बाहर फिसलेगा और जैसे ही वो आएगा वो उसे लपक लेगी..अपने मुंह में. पर काफी देर तक कुछ आता न देखकर वो बेचैन सी हो गयी. उसने जल्दी से अपने कपडे उतारने शुरू कर दिए और एक ही मिनट में वो मादरजात नंगी होकर नीचे की तरफ वापिस बैठ गयी. उसने मेरी ऊँगली को पारुल की गांड से बाहर निकाला और उस जगह पर अपना मुंह लगा दिया. पारुल के लिए ये शायद पहला मौका था की किसी लड़की ने उसकी गांड के छेद को अपने मुंह से छुआ था.
वो अपने मुंह से उसकी गांड के छेद में सक करने लगी. उसकी सक्शन पावर इतनी ज्यादा थी की पारुल को चूत से ज्यादा उसे अपनी गांड में सन-सनाहत होने लगी. जिसकी वजह से वो जोरो से चीखते हुए मेरे लंड पर किसी करंट लगी कुतिया की तरह से कूदने लगी.
अह्ह्हह्ह.....अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह कन्नू....अह्ह्ह्ह म्मम्म.....चुसो......विशाल......चोदो और तेज....अह्ह्ह..... और चीखते-चीखते कब उसकी चूत का रसायन बाहर निकल कर नीचे की तरफ झरना बनकर गिरने लगा, उसे भी नहीं पता चला, उसने तो कूदना तब बंद किया जब उसकी चूत के अन्दर की दीवारे लंड को और बर्दाश्त कर पाने में असमर्थ थी. वो हांफती हुई मेरे लंड के ऊपर अपना पूरा भार डालकर लटक गयी और कनिष्क थी की वो उसकी गांड को चुसे जा रही थी और उसने भी चुसना तब बंद किया जब उसे अपनी तरफ एक-दो बूंदे रस की लुडक कर आती दिखाई दी, जैसे ही बुँदे उसके होंठो से टकराई उसे पता चल गया की पारुल का रस निकल चूका है.
मैंने पारुल को धीरे से अपने लंड से जुदा किया. कन्नू ने भी उसकी गांड को चुसना बंद कर दिया और वो थोडा आगे की तरफ होकर मेरे लंड और पारुल की चूत के बीच से निकलकर ऊपर की तरफ उठती चली गयी और एकाएक मेरे सामने आकर प्रकट हो गयी..पारुल तो निढाल हो चुकी थी, वो पीछे की तरफ होकर सोफे पर लुडक गयी और अब कनिष्का ने पारुल की जगह लेते हुए मेरे गले में बाहे लपेटी और उछल कर मेरी गोद में चढ़ गयी..कन्नू की चूत इतनी देर से गीली थी की मेरे लंड से टकराते ही वो मक्खन की तरह मेरे लंड को निगलती हुई अन्दर तक ले गयी. मेरा लंड सीधा उसके गर्भाश्याय से जा टकराया.
अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.....मरररर गयी........अह्ह्ह्हह्ह....विशाल्ल्ल.......फक्क्क्क मीईssssssssssssssssss.....हाआआआअर्द ........अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह.... और मैंने अपने लंड के पिस्टन को उसकी चूत की गुफा में धकेलना शुरू कर दिया. तभी नीचे से अपना होश संभाल चुकी पारुल उठी और उसने अपने होंठ ठीक उसी तरह कन्नू की गांड से चिपका दिए, जैसे कन्नू ने उसकी गांड से चिपकाये थे और उन्हें तेजी से चुसना शुरू कर दिया और तब कनिष्का को पता चला की चूत में लंड और गांड में जीभ अगर एक साथ आये तो क्या सेंसेशन होता है पुरे शरीर में और फिर शुरू हुआ उसके उछलने का सिलसिला. उसकी चीखे तो आप जानते ही हो. पूरा घर सर पर उठा लिया था उसने तेज आवाजो को निकाल कर. अह्ह्हह्ह्ह्ह अयीईई......म्मम्मम्म... और तेज चोदो.....अह्ह्ह्ह....हम्म्म्म ऐसे ही....अह्ह्ह .....म्मम्म.....चुसो मेरी गांड अह्ह्ह्ह........
उसकी ताजा चुदी गांड को पारुल ने अपनी जीभ से तर कर दिया था..मैंने एक दम से उसकी चूत से अपना लंड बाहर निकाल दिया और उसे नीचे उतार दिया. उसकी चूत का रस निकलने ही वाला था, इसलिए उसे मेरे ऊपर बड़ा ही गुस्सा आया.
कनिष्का: साले...बाहर क्यों निकाल दिया. इतना मजा आ रहा था.
मैं: तेरी गांड मारनी है कुतिया...इसलिए...
गांड मारने की बात सुनते ही उसके चेहरे की रोनक बढ गयी और वो घूमकर अपनी गांड को मेरे लंड की तरफ करके खड़ी हो गयी और अब उसका चेहरा पारुल की तरफ था जो सोफे पर बैठी हुई कन्नू की चूत की गीली सिलवटे देखकर अपने होंठो पर जीभ फेर रही थी.
कन्नू ने उसके चेहरे को अपने हाथो से पकड़कर अपनी चूत के ऊपर फिक्स कर दिया और मैंने उसकी गांड को पकड़कर अपने लंड के ऊपर. पारुल के चूसने की वजह से उसकी गांड काफी रसीली हो चुकी थी..इसलिए मेरे लंड को अन्दर दाखिल होने में ज्यादा मुशक्कत नहीं करनी पड़ी.
अह्ह्ह्हह्ह विशाल्ल्ल्ल......तुमसे अच्छा गांड मारने वाला तो कोई हो ही नहीं सकता......म्मम्मम......चल मेरे कुत्ते ...मार मेरी गांड....
पारुल सोफे से नीचे उतारकर ज़मीन पर अपनी गांड टीकाकार बैठ गयी और ऊपर मुंह करके कनिष्का की चूत का रस पीने लगी. कनिष्का ने भी अपनी एक टांग उठा कर पारुल के कंधे से ऊपर घुमा कर सोफे पर रख दी और मजे लेने लगी.
मेरे हर धक्के से वो आगे की तरफ जाती और सामने बैठी हुई कनिष्का के मुंह में उसकी चूत आती जिसे चूसकर वो अपनी प्यास बुझाने में लगी हुई थी. लगातार इतनी देर तक चूत और अब गांड मारने की वजह से मैं भी झड़ने के काफी करीब था...इसलिए मैंने आगे हाथ करके कन्नू के मोटे मुम्मो को पकड़ा और उसके निप्पल्स को मसलकर उसे ज्यादा उत्तेजित करते हुए झड़ने के करीब ले जाने लगा और मेरी मेहनत रंग लायी, निप्पल के दाने मेरे मसले जाने से फटने वाली हालत में हो गए और उसकी गांड में मेरा लंड जो दंगल मचा रहा था उसकी वजह से और पारुल के चूत चाटने की वजह से कन्नू की चूत का झरना जब फूटा तो सामने बैठी हुई पारुल को पूरा नहलाता चला गया. इतना तेज फव्वारा मैंने आज तक चलता हुआ नहीं देखा था, किसी की चूत से.
उसकी एक तेज चीख निकल गयी...अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ......विशाल्लल्ल्ल्ल..........आई एम् कमिंग..........अह्ह्हह्ह.....
बस यही बहुत था मेरे लंड की पिचकारी निकालने के लिए. मैंने भी अपना रस निकाल कर उसकी गांड में फिक्स डिपोसिट करना शुरू कर दिया. मेरे पैर कांप रहे थे, मैंने अपना लंड बाहर निकाला और सोफे पर लुडक गया और मेरे पीछे-पीछे कनिष्का भी.
पारुल सामने की तरफ घूमकर आई और कनिष्का की गांड में अपना मुंह लगाकर वहां से आईसक्रीम खाने लगी
और फिर वो भी कनिष्का की बगल में लेट कर गहरी साँसे लेने लगी...हमारी तरह.
पर असली शो तो अभी बाकी था.
पिछले कई दिनों से मैंने ये बात नोट की थी की मेरा स्टेमिना बढता चला जा रहा है. हर बार मैं पिछली बार से ज्यादा देर तक चूत मारता हूँ और अगली ठुकाई के लिए भी जल्दी तैयार हो जाता हूँ. पता नहीं इतनी जल्दी-जल्दी मेरे लंड के अन्दर माल कैसे बनता है..
मैं उठा और किचन में जाकर कुछ खाने को धुंडने लगा. मैंने अपनी फेवरेट गाजर उठाई और धो कर खाने लगा. मैंने सोचा की बाहर से कुछ मँगा लेना चाहिए, पिज्जा खा-खाकर तो बोर हो चूका था. पर जैसे ही मैं उन दोनों से पूछने के लिए बाहर निकला तो मैं देखकर चकरा गया की दोनों एक दुसरे को बुरी तरह से चूम रही हैं.
मैंने आज तक किसी भी लड़की को दूसरी के साथ करते हुए नहीं देखा था, इसलिए मैं एक चेयर लेकर वहीँ उनके सामने बैठ गया और उनका शो देखने लगा. पारुल ही ज्यादा उत्तेजना के साथ कनिष्का को चूस रही थी. कनिष्का भी अपने हाथ बड़ी ही तेजी से पारुल की मोटी ब्रेस्ट के ऊपर चला रही थी.
मैंने अपना गला साफ़ के पूछा : सुनो...तुम दोनों को भूख नहीं लगी क्या..?
पारुल: लगी तो है...मँगा लो कुछ भी तुम..
और फिर से वो दोनों एक दुसरे में गुम हो गयी.
मैंने अपने ड्रो में से एक-दो रेस्टोरेंट के पम्फलेट निकाले और देखने लगा, और फिर मैंने पास ही के एक रेस्टोरेंट से प्रोपर खाना मंगवा लिया, वो बोले की आधा घंटा लगेगा.
मैं फोन रखकर फिर से उनका शो देखने लगा.
पारुल ने कनिष्का के होंठ चूसते-चूसते अपना सर नीचे किया और उसकी दांयी ब्रेस्ट के ऊपर अपना मुंह लगाकर उसे किसी बच्चे की तरह चूसने लगी..मानो अभी उसमे से दूध निकल पड़ेगा...कनिष्का भी अपनी ब्रेस्ट का सिरा पकड़कर बड़े प्यार से पारुल के मुंह के अन्दर डाल रही थी और तभी पारुल ने अपनी एक ऊँगली कनिष्का की चूत में डाल दी और जैसे ही ये हुआ, कनिष्का ने अपना सर नीचे करके, ब्रेस्ट को निकाल कर, अपने होंठ पारुल के मुंह में डाल दिए और पारुल उन होंठो को भी उतनी ही बेदर्दी से चूसने लगी, जिस बेदर्दी से वो उसके निप्पल चूस रही थी. और फिर कनिष्का ने उसका सर पकड़ा और उसे नीचे की और धकेलने लगी. पारुल समझ गयी की कन्नू को अब ऊँगली नहीं उसकी जीभ चाहिए अपनी चूत के अन्दर और वो भी अपनी जीभ को उसके नर्म मुलायम जिस्म से रगडती हुई , उसे लार से नेहलाती हुई, नीचे तक जा पहुंची और कन्नू की आँखों में देखते-देखते ही पारुल ने उसकी चूत के परों को फेलाया और उनमे कूद गयी..
अह्ह्हह्ह्ह्ह......पारुल......म्मम्म.......सच में......तुम बड़ा मजा देती हो.......
पारुल ने अपना सर उठाया और बोली.... " लो...तुम भी मजा दो फिर मुझे और ये कहते हुए वो पलटकर 69 की पोसिशन में आ गयी और अपनी मोटी चूत को उसके पतले होंठो के सामने परोस दिया. कन्नू ने बिना देर किये उसे चाटना शुरू कर दिया.
पारुल अब नीचे आ गयी और कनिष्का उसके मुंह के ऊपर अपनी चूत को विराजमान करके उसकी फेली हुई चूत के लिप्स को चबाने में लगी हुई थी. दोनों की चूत के अन्दर अभी तक मेरे लंड की गंध बरकरार थी, जिसकी वजह से उन्हें ज्यादा ही मजा आ रहा था.
दोनों की इस रासलीला को देखकर मेरे लंड ने भी अपना सर उठाना फिर से शुरू कर दिया. मैं उनका शो देखते-देखते, 5 गाजर भी खा चूका था और मुझमे अगली चुदाई की थोड़ी बहुत ताकत भी आ चुकी थी.
मुझे अपने हाथो से लंड मसलता देखकर नीचे लेती हुई पारुल बोली: हम दोनों के होते हुए तुम अपने हाथो को क्यों तकलीफ देते हो विशाल.....कम हेयर....नीचे आओ...
और फिर दोनों एक दुसरे से अलग होकर मुझे और मेरे लंड को ललचाई हुई नजरो से देखने लगी. पारुल ने मुस्कुराते हुए मेरा हाथ लकड़ा और मुझे नीचे जमीन पर घुटनों के बल बिठा दिया और फिर उसने मेरे हाथ पकड़कर मुझे आगे किया और मेरे हाथो को भी जमीन पर रख कर मुझे डोगी स्टाईल में करवा दिया. मेरी समझ में नहीं आया की ये करना क्या चाहती है और फिर खुद वो मेरे लंड के नीचे आकर लेट गयी और कनिष्का से बोली: चल कन्नू...इसका दूध निकाल....इसके लंड से सांड की तरह दूध निकलेगा...देखना...
वो अपना मुंह खोलकर नीचे लेती हुई थी. साईड से कन्नू आई और मेरे लंड को पकड़कर ऊपर नीचे करते हुए उसे मसलने लगी. जैसे दूध चो रही हो. मेरे पुरे शरीर में झनझनाहट सी होने लगी. ऐसा मैंने कभी सोचा भी नहीं था की ऐसी अवस्था में अपने लंड का मैथुन करवाने में इस तरह के मजे मिलेंगे.
कनिष्का अपनी ब्रेस्ट को मेरी पीठ से रगड़ रही थी और उसके तीखे निप्पल वहां चुभ से रहे थे. उसके हाथो की हरकत से मेरा लंड मेरे पेट की तरफ मुंह करके अपना कड़कपन दिखा रहा था. पर कन्नू उसे अपनी ताकत से नीचे की और करके पारुल के मुंह की तरफ कर रही थी. पारुल भी अपने मोटे मुम्मो को मसलते हुए, अपनी जीभ निकाल कर, मेरे लंड को छूने का प्रयास कर रही थी और जब-२ मेरा लंड उसकी जीभ की पकड़ में आता, वो उसपर अपनी जीभ से पूरी लार लगाकर, गीला कर देती, जिसकी वजह से कन्नू को मैथुन करने में ज्यादा आसानी होती और तभी नीचे लेती हुई पारुल ने अपना एक हाथ मेरे पीछे लेजाकर, अपनी एक ऊँगली को मेरी गांड के छेद में डाल दिया.
मेरे अन्दर बन रहे ओर्गास्म के लिए ये बहुत था, जैसे ही उसकी ऊँगली मेरी गांड के अन्दर सरकी, मेरे लंड ने दनादन रस के शोट मारने शुरू कर दिए. जो सीधा नीचे लेटी हुई पारुल के मुंह में जाने लगी. और जैसे ही पहला शोट निकला, कन्नू भी आधी लेटकर नीचे हुई और अपने मुंह पारुल की बगल में लेजाकर लंड का रुख अपनी तरफ करके उसकी बोछारो का वो भी आनंद लेने लगी.
मेरे लंड की एक पिचकारी वो पारुल के मुंह पर मारती और दूसरी वो अपने मुंह पर और ऐसा करते-करते कब मेरे लंड की टंकी खाली हो गयी, पता ही नहीं चला और जब सब ख़त्म हुआ तो मैं एक तरफ लुडक कर उनसे दूर होकर जा बैठा. उन दोनों के चेहरे देखने लायक थे, वैसे तो दोनों ने कोशिश की थी की पिचकारी वो अपने मुंह के अन्दर मारे, ताकि उसे सीधा पी जाए, पर ज्यादातर माल उनके मुंह के चारो तरफ लगा हुआ था, और ऐसा लग रहा था की उनके चेहरे को सफ़ेद गाड़े पानी से पोत दिया गया है. फिर जो मैंने देखा, वो मेरे मरे हुए लंड के अन्दर फिर से जिन्दगी डालने के लिए बहुत था. वो दोनों भूखी कुतियों की तरह से एक दुसरे के मुंह से मेरे लंड से निकला रस चाटकर पीने लगी और जल्दी ही कन्नू के चेहरे का माल पारुल ने खा लिया और उसके चेहरे का माल कन्नू ने.
पर अभी भी उनकी चूत में हो रही खुजली मिटी नहीं थी. उन्होंने नया खेल खेलकर मेरे लंड को तो मजा दे दिया, पर अपनी चूत से खिलवाड़ करके उसकी प्यास को अधुरा छोड़ दिया.
पारुल रेंगती हुई मेरी तरफ आई और मेरे लंड को मुंह में भरकर उसे उठाने की कोशिश करने लगी. पर मुझे मालुम था की इसे उठने में अभी कम से कम एक घंटा तो लगेगा.
मैंने उसे पीछे किया और कहा : यार...थोडा तो वेट करो न...अभी तो निकला है मेरा रस.. इतनी जल्दी नहीं कर पाउँगा दोबारा.
पारुल: उनहू....पर यहाँ तो आग लगी है न....इसका क्या करू..इसे तो अब लंड ही बुझा सकता है.
तभी बाहर की बेल बजी.
मैं: खाना आ गया है. चलो तुम अन्दर जाओ जल्दी से. मैं बाहर देखता हूँ.
तभी पारुल ने एक झटके से कहा...: रुको विशाल...एक मिनट...अगर तुम कहो तो...क्या डिलीवरी बॉय के साथ हम कुछ मजे ले सकते हैं क्या...??
मैं उसकी बात सुनकर भोचक्का रह गया.
मैं: क्या...ये तुम क्या कह रही हो....पागल हो क्या.
पारुल: प्लीस...यार....कुछ तो हमारी भी फ़िक्र करो...मजा आएगा. तुम चाहो तो छुप कर देख लेना. पर हमें तो करने दो न...प्लीस....
और ये कहते हुए उसने कन्नू की तरफ देखा. जो ये आईडिया सुनकर अजीब तरीके से मुझे देख रही थी और साथ ही साथ अपनी चूत के ऊपर उंगलिया भी चला रही थी. मैं जानता था की ये रिस्की मामला है. पर कभी-कभी इस तरह के रिस्क भी लेने चाहिए.
मैं: ठीक है...पर अगर बाहर आया हुआ बुड्ढा हुआ तो.
कनिष्का: अरे तुम्हे क्या पता....बुड्ढ़े तुम जैसे जवानों से ज्यादा मजे देते हैं.
यानी वो भी मजे लेने के लिए तैयार थी.
मैं: अच्छा जी...कितने अंकल लोगो का लंड ले चुकी हो....
कनिष्का: सिर्फ दो का....वो भी अपने टीचर्स में से...पर वो बाते फिर कभी.
और फिर वो पारुल से बोली: पारुल, तुम देखकर आओ की किस तरह का है, अगर सही हुआ तभी तो मजा आएगा न.
पारुल नंगी ही भागती हुई बाहर की और गयी, और दरवाजे से लगी मेजिक आई से बाहर की तरफ देखने लगी और फिर भागकर अन्दर आई, उसके चेहरे से साफ़ पता चल रहा था की वो बाहर आये हुए "लंड" को देखकर काफी खुश है.
पारुल: यार...क्या लड़का है....एकदम चिकना...टाई पहनी हुई है. और उसकी एज भी लगभग 35 के आस पास है. यानी...ना जवान है और ना ही बुढ़ा..
पर ये डिलीवरी वाले टाई कब से पहनने लगे.
मैंने कहा: ठीक है....मैं फिर अन्दर वाले कमरे में छुप जाता हूँ. पर उसे कांफिडेंस में लेकर ही सब करना. वर्ना कहीं उसने बाहर जाकर बाते फेला दी की इस घर में रहने वाली लडकिया चालू है तो कल से ही घर के बाहर ठरकी लोगो की लाईन लग जायेगी...समझे..
पारुल: तुम उसकी फिकर मत करो.
और फिर उसने जल्दी से अपनी टी-शर्ट उठा कर पहन ली...पर नीचे कुछ नहीं पहना..
उसकी टी-शर्ट उसकी गांड से थोडा ही नीचे आ रही थी और उसके मोटे निप्पल बिना ब्रा के साफ़ चमक रहे थे. उसने कनिष्का के कान में कुछ कहा और फिर वो खुद बाहर की और चल दी.
मैं भी भागकर अपने कमरे की तरफ चल दिया. पारुल ने गहरी सांस ली और फिर धीरे से दरवाजा खोल दिया.