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Adultery लवली फ़ोन सेक्स चैट
#46
कनिष्का: अरे, तुम हम लडकियों के फिफ्थ सेन्स को नहीं जानते, हमें सब पता चल जाता है, तुम्हारी बॉडी लेंगुएज , स्टाईल, फिसिक. सब कुछ यही बता रहे है की यु विल रोक द बेड ..है न..
मैं: पता नहीं..वैसे क्या तुमने पहले कभी ..मेरा मतलब है..किसी के..
कनिष्का: अरे साफ़-साफ़ पूछो न..सेक्स किया है... तुम तो लडकियों की तरह से शर्माते हो..हां..किया है..अपने उसी बॉय फ्रेंड के साथ और एक टीचर के साथ भी..और कुछ.

यार..ये तो हम सबकी माँ निकली...है तो इतनी छोटी और तेवर देखो..सबसे आगे निकल चुकी है ये तो और अंशिका इसे अभी भी बच्ची ही समझती है.

कनिष्का: क्या हुआ...क्या सोचने लगे..
मैं: कुछ नहीं..
कनिष्का: तो बात पक्की..
मैं: हाँ..पक्की..
कनिष्का: तो इसी बात पर एक और किस्स तो दे दो..
मैं: ये लो..पुच..पुच..
कनिष्का: अब ये भी तो बता दो की कहाँ दी है ये दोनों किस्स.

मेरा लंड तन कर खड़ा होने लगा..रात के 1:30 बज रहे थे..और ये लड़की मुझे उठाने के बाद अब मेरे लंड को भी उठाने में लगी हुई थी.

मैं: ये..एक तो तुम्हारे..गालो पर..और दूसरी तुम्हारे लिप्स पर..
कनिष्का: वैसे सच बताना...वो हॉल में तुम्हे मुझे किस्स करते हुए कैसा लगा..
मैं: बहूँत अच्छा..तुम्हारे लिप्स इतने स्वीट है..जैसे तुमने इन पर लिपस्टिक की जगह शहद लगा रखा हो..
कनिष्का: ओह्ह...विशाल..यु आर ..मेकिंग मी वेट, आई वांट मोर... मोर किस्सेस..
मैं: ये लो फिर...पुच पुच पुच पुच....
कनिष्का (गहरी साँसे लेते हूँए): अब ये कहाँ दी है..बोलो..बोलो न..

मैंने अपना लंड पायजामे से बाहर निकाल लिया और उसे हिलाने लगा.

मैं: ये पहली है तुम्हारी पतली गर्दन पर...
कनिष्का: ओह्ह्ह्ह....विशाल....मम्म
मैं: और दूसरी है तुम्हारी सोफ्ट सी..पिंक सी...ब्रेस्ट पर...
कनिष्का: उम्म्मम्म......और.....
मैं: और तीसरी है...तुम्हारी दूसरी ब्रेस्ट के निप्पल पर...
कनिष्का: ओह्ह्हह्ह....विशाल्ल्ल...........एंड....
मैं: एंड लास्ट इस....इट्स ओन...यूर ..स्वीट..पुसी...
कनिष्का: ओह्ह्हह्ह.......आई एम् फीलिंग...ईट ...तुम अगर मेरे सामने होते न...तुम्हे तो मैं अब तक कच्चा चबा जाती..
मैं: तो समझ लो...की मैं: तुम्हारे सामने ही हूँ...और वो भी बिलकुल नंगा...
कनिष्का: उम्म्म......आई केन इमेजिन.....युवर पेनिस इस इरेक्ट....आई विल...सक यु ऑफ...ओफ्फ्फ...विशाल....ये क्या कर दिया...तुमने...पता है मेरी..मेरी चूत से कितना पानी निकल रहा है..
मैं: वो पानी तो मैं पी जाऊंगा...देख लेना..

कनिष्का शायद मेरी ही तरह मास्टरबेट कर रही थी...उसकी गहरी साँसों की आवाज के साथ साथ हाथ की चुडिया हिलने की भी आवाज आ रही थी..

कनिष्का: कैसे पीयोगे...तुम मेरा...सारा रसीला पानी...बोलो...
मैं: तुम्हे अपने ऊपर लिटा लूँगा...तुम मेरा लंड चुसना....और मैं तुम्हारी चूत..
कनिष्का:ओह्ह्हह्ह्ह्ह.....विशाल्ल्ल......सक मी...सक मी...येस..येस...येस...ओह्ह्ह.....माय.....गोड

वो शायद झड़ने लगी थी. मैंने भी अपने हाथो को लंड पर तेजी से मसला और जल्दी ही उसमे से भी सफ़ेद रंग का गाड़ा रस निकलने लगा. मैंने जल्दी से अपने पिल्लो के कवर को उतारा और उसमे सारा रस समेट लिया..वर्ना रात के समय, कौन सी पिचकारी कहाँ जा रही है, पता ही नहीं चलता. कुछ देर तक हम दोनों कुछ ना बोले...मैंने अंशिका के साथ भी कई बार फोन सेक्स किया था...पर कनिष्का के साथ करने में कुछ और ही मजा आया था..पता नहीं चुदाई के टाइम ये क्या हाल करेगी..

कनिष्का: विशाल....थेंक्स...
मैं: किसलिए..
कनिष्का: फॉर एवेरीथिंग...मेरी कॉलेज एडमिशन में हेल्प के लिए...कल वाली किस्स के लिए...एंड फॉर मेकिंग मी कम..इतना एरोटिक तो मैंने कभी फील नहीं किया...आई एम् लोविंग इट..
मैं: मी..आल्सो... चलो अब सो जाओ..
कनिष्का: उन्...नहीं न...प्लीस..थोड़ी और देर तक बाते करो न...
मैं: नहीं..कल मम्मी पापा ने एक हफ्ते के लिए बाहर जाना है...उन्हें स्टेशन पर छोड़ने भी जाना है..मुझे जल्दी उठाना है कल..समझा करो.
कनिष्का: वाव...एक हफ्ते के लिए..सुपर..यानी एक हफ्ते तक तुम घर पर अकेले..मैं तो सोच रही थी की कैसे और कहाँ तुमसे मिलूंगी..पर तुमने तो सारी मुश्किल आसान कर दी..मजा आएगा.

हे भगवान्...ये मैंने क्या कर दिया...मैंने बिना सोचे इसे बोल तो दिया..पर अंशिका के साथ तो पहले से ही मेरी प्लानिंग चल रही है..और कभी अगर ये दोनों बहने एक साथ ही पहुँच गयी मेरे घर तो गड़बड़ हो जाएगी...पर अब जो होना था सो हो गया..

मैं: हां..वो तो है...चलो कल बात करते हैं फिर...
कनिष्का: ठीक है, तुम सो जाओ..कल मिलते हैं फिर..बाय ..गुड नाईट.
मैं: ओके...बाय...गुड नाईट..

मैंने मोबाइल रखा और अपने मुरझाये हूँए लंड को देखा...और मेरे सामने एकदम से किसी पिक्चर की तरह , अंशिका और कनिष्का मेरे ही कमरे में पूरी नंगी दिखाई देने लगी...मैं जानता था की ये मुमकिन नहीं है, पर मेरी इच्छाशक्ति पर मेरा बस नहीं चल रहा था और ये सोचते हूँए मेरे लंड ने फिर से अंगडाई लेनी शुरू कर दी...और मैंने उसी पिल्लो कवर में दो बार और अपने लंड के रस को निकाल कर, उसे लगभग गीला सा कर दिया और फिर मुझे कब नींद आ गयी, मुझे पता ही नहीं चला.

सुबह मम्मी ने आकर मुझे उठाया, वो जल्दबाजी में थी, उन्हें जाने की काफी तय्यारी करनी थी, मुझे उठने को कहकर वो वापिस चली गयी. मैं नहा-धो कर नीचे आया, पापा ने मुझे हफ्ते भर के खर्चे के लिए पैसे दिए और ये करना और वो न करना जैसी कई बाते बताते हूँए पेकिंग करते रहे. उनकी ट्रेन 5 बजे की थी, नाश्ता करने के बाद मैंने भी उनकी पेकिंग में मदद की और लगभग २ बजे तक सब कुछ पेक हो चूका था. मम्मी-पापा ने हल्का-फुल्का लंच किया और बाकी साथ के लिए बाँध लिया, मैंने टेक्सी बुला ली और उनके साथ ही मैं भी स्टेशन की और चल दिया. चार बजे तक हम स्टेशन पहुँच गए, ट्रेन आधे घंटे बाद आई और फिर लगभग 5 बजे वो चल दी, मैंने उन्हें बाय कहा और वापिस चल दिया. जिन्दगी में आज पहली बार मुझे अजीब सी आजादी का एहसास हो रहा था. मन कर रहा था की सभी दोस्तों को बुलाऊ और घर पर पार्टी दू, खूब मौज मस्ती करू पर उस मौज मस्ती से पहले मुझे अपनी वर्जिनिटी की फिकर थी, जिसे अब मुझे हर हाल में खोना हो था. मैंने अंशिका को फोन मिलाया.

मैं: हाय..
अंशिका: हाय..कहाँ हो..मम्मी पापा गए क्या??

मैं: हाँ...बस अभी उन्हें छोड़ कर आ रहा हूँ, तुम कहाँ हो.?
अंशिका: मैं: तो घर पर ही हूँ..

मैं: कब तक आओगी फिर..
अंशिका: आज नहीं आ पाऊँगी..अभी पांच बज गए हैं, ज्यादा देर तक नहीं रह पाऊँगी इसलिए आज आने का ओई फायेदा नहीं है..पर कल आउंगी, सोच रही हूँ की कल की छुट्टी ले लेती हूँ, घर पर तो कॉलेज के लिए ही निकलूंगी पर वहां जाउंगी नहीं.

मैं उसकी बात सुनकर थोडा मायूस हो गया, मुझे लगा था की आज ही हो जाएगा सब, पर वो भी अपनी जगह पर सही थी.

मैं: कोई बात नहीं, जहाँ इतने टाईम तक इन्तजार किया है, एक दिन और सही..

अंशिका मेरी बात सुनकर चुप सी हो गयी.

अंशिका: जानते हो..आई एम् डाईंग टू मीट यु... सुबह से तुम्हारे फ़ोन का वेट कर रही थी, पर चार बजे तक नहीं आया तो मैं समझ गयी की ट्रेन शायद शाम की है और इसलिए आज का तो सीन पोसिबल ही नहीं है..
मैं: मैं समझ सकता हूँ...पर कल ज्यादा इन्तजार मत कराना ..समझी न..

अंशिका: नहीं करवाउंगी ...रात को फोन करती हूँ अब..बाय..
मैं: घर चल दिया, रास्ते से मैंने बियर के केन की पेटी ले ली..क्योंकि अब मैं पूरा एक हफ्ता मस्ती से गुजारना चाहता था.

कल मुझे कनिष्का ने भी मिलने को कहा था..मुझे लग रहा था की कहीं वो न आ धमके आज शाम को. मैं घर पहुंचा और बेडरूम में बैठ कर मैंने कनिष्का को फोन मिलाया..

कनिष्का: हाय...कैसे हो..आज तो पूरा दिन तुमने फोन ही नहीं किया..मम्मी-पापा गए क्या..?
मैं: हाँ चले गए..बस अभी घर आया हूँ..तुम कहाँ हो..?
कनिष्का: ओहो..बड़ी जल्दी हो रही है मुझसे मिलने की..दरवाजा खोलो, अभी मिल लेती हूँ.

जिस बात का मुझे डर लग रहा था, वही हुआ, मैंने भाग कर दरवाजा खोला , वो बाहर ही खड़ी थी, उसके हाथ में काफी सामान था. मैंने उसे अन्दर बुलाया और दरवाजा बंद कर दिया.

मैं: अरे, बता तो देती, की आ रही हो, अगर मैं घर पर ना मिलता तो..
कनिष्का: नहीं मिलते तो मैं इन्तजार कर लेती...वैसे मैं पिछले एक घंटे से तुम्हारे घर के सामने वाली मार्केट में ही घूम रही थी..
मैं: एम् ब्लोक मार्केट में...क्यों..?
कनिष्का: मैं घर से 3 बजे निकली थी की अपनी फ्रेंड के साथ मार्केट जाना है, ताकि दीदी मेरे साथ ना चल दे, वैसे वो भी शायद सुबह से तुम्हारे फोन का वेट कर रही थी..उनका मूड थोडा खराब सा था..लगता है दीदी के साथ प्रोग्राम था आपका..है न..

मैं कुछ न बोला.

कनिष्का: वैसे एक बात बताओ...कितनी बार फक कर चुके हो अभी तक तुम दीदी को..
मैं: एक बार भी नहीं..दुसरे सभी मजे लिए है , पर फकिंग नहीं..

कनिष्का मेरी बात सुनकर हेरान रह गयी..पर फिर मैंने उसे बताया की किस तरह से वो और मैं मिले और कभी टाईम की तो कभी सही जगह की कमी की वजह से हम दोनों कुछ न कर पाए..मैंने उसे अपने वर्जिन होने वाली बात भी बता दी और ये भी की मैं अपनी वर्जिनिटी अंशिका के साथ ही खोना चाहता हूँ और हमने आज घर पर प्रोग्राम भी बनाया था..

कनिष्का: ओहो..तभी शायद वो आज इतना अपसेट थी...पर कोई बात नहीं, अब तो पूरा हफ्ता है, कभी भी मस्ती कर सकते हो तुम दोनों..पर उनके चक्कर में मुझे मत भूल जाना..दीदी को तुम अपनी वर्जिनिटी दे दो, फिर तुम्हे भी मैं अपनी एक दूसरी वर्जिनिटी दूंगी...जिसे मैंने आज तक किसी और को नहीं दिया..

उसने अपनी कमर पर हाथ रखकर बड़े कामुक अंदाज में मुझसे कहा. उसका इशारा अपनी गांड की तरफ था..मेरा तो लंड उसकी बात सुनकर फुफकारने सा लगा. मैंने उसे अपनी तरफ खींचा, वो सीधा मेरी गोद में आ बैठी और अपनी बाहे मेरी गर्दन से लपेट दी..

मैं: तुम्हे कैसे भूल जायेंगे. पर मेरी एक रेकुएस्ट है तुमसे, मैंने तुम्हारी दीदी से वायदा किया है की पहले मैं उसके साथ और फिर किसी और के साथ करूँगा..सो...प्लीस...तुम समझ रही हो न ...की मैं क्या कहना चाहता हूँ.
कनिष्का (मुस्कुराते हूँए): समझ गयी मेरे भोंदू राजा..एक बात बताओ..क्या तुम मेरी दीदी से प्यार करते हो..
मैं: नहीं तो..बस ऐसे ही मयूचुअल अट्रेक्शन है बस...और कुछ नहीं..क्यों तुम्हे ऐसा क्यों लगा..
कनिष्का: नहीं बस ऐसे ही...वर्ना इस तरह की बाते तो कोई भोंदू ही करेगा, जब उसकी गोद में एक गर्म और जवान लड़की बैठी हो...हूँ...

और मेरी आँखों में देखते हूँए उसने मेरे होंठो पर अपने गर्म होंठ रख दिए. मेरा हाथ अपने आप उसकी ब्रेस्ट पर जा पहुंचा और उसके निप्पल्स को ढूंडने लगा..जो जल्दी ही मेरी उँगलियों के बीच आ गया..जिसके दबाते ही उसने अपनी रसीली गांड को मेरे उठते हूँए लंड के ऊपर रगड़ना शुरू कर दिया. तभी मेरे दिमाग में फिर से अंशिका की तस्वीर कोंध गयी और मैंने उसके होंठो और ब्रेस्ट से अपनी पकड़ हटा ली.

मैं: ओह्ह...कनिष्का...तुम इतनी हॉट हो यार, पर तुम तो मेरी सिचुएशन जानती हो...मैं इससे आगे गया तो मैं शायद अपने आप पर कण्ट्रोल नहीं कर पाउँगा..
कनिष्का (मेरे चेहरे को पकड़कर): मैं जानती हूँ....मुझसे पहले दीदी का हक है तुमपर...चलो कोई बात नहीं..आज नहीं तो कल सही..जब तुम कहोगे अब तभी आउंगी तुम्हारे पास..

और ये कहते हूँए वो उठ गयी..और अपना सामान लेकर, मुझे एक और बार गुड बाय किस करके, घर चली गयी..

रात को मैं बीयर पीकर, अंशिका से देर तक बाते करता रहा और रात को लगभग एक बजे मैं सो गया.
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RE: लवली फ़ोन सेक्स चैट - by playboy131 - 19-03-2020, 10:40 PM
RE: लवली फ़ोन सेक्स चैट - by sanskari_shikha - 01-10-2020, 10:22 PM



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