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Adultery लवली फ़ोन सेक्स चैट
#33
मैं रात को सोते समय शाम को हुई सारी बातों को सोचता रहा, एक एक करके सभी चीजे दोबारा से मेरी आँखों के सामने आने लगी, कैसे मैंने जाते हुए अंशिका को चूमा, उसने मेरा लंड चूसा, और फिर वापिस आते हुए भी उसने मेरा लंड चूसा और मैंने पहली बार उसकी चूत भी चाटी, कितने मजे आये, काश आज कोई अच्छी सी जगह होती तो मैं जरुर अंशिका की चूत मार लेता, अब मुझे जल्दी ही किसी जगह का इंतजाम करना होगा और आज किटी मेडम भी कितनी धांसू लग रही थी, और ख़ास कर उनका वो लाल निशान, वैसे निशान तो मैंने भी बनाया था अंशिका की ब्रेस्ट पर, कल उससे पूछुंगा की कैसा है वो निशान, और स्नेहा की बात को याद करके मेरे लंड ने एक-दो बार जोर से जर्क किया, कैसे वो सफ़ेद ड्रेस में किसी परी जैसी लग रही थी, और उसके छोटे-छोटे नागपुरी संतरे कितने मजेदार लग रहे थे, वैसे थी तो वो चालु ही, क्योंकि वो अपने दोस्त के साथ अपने ही टेरिस पर चुम्मा चाटी जो कर रही थी और कैसे उसने सबके सामने मेरा नंबर मांग लिया, काश मैं भी उसका नंबर ले पाता, उससे बात करके ये जानने की कोशिश करता की मेरा गिफ्ट उसे कैसा लगा, पर मुझे विशवास था की जल्दी ही उसका फ़ोन आएगा. मैं ये सब बातें सोचते हुए कब सो गया, मुझे पता ही नहीं चला..

सुबह सात बजे मेरा फ़ोन बजने लगा, मैं समझ गया की ये अंशिका का फ़ोन है, मैंने सोते-सोते फ़ोन उठाया और अपने कानो से लगाया

मैं: हेल्लो...जान...गुड मोर्निंग..
"जान...?? क्या बात है...किसी और के फ़ोन का इन्तजार कर रहे हो क्या...मैं स्नेहा बोल रही हूँ..."

धत्त तेरे की, मैंने बिना ये देखे की किसका फ़ोन है, उठा लिया, और "जान" भी बोल दिया, मैंने जल्दी से सिचुएशन को संभाला और कहा

मैं: ओह्ह...स्नेहा...मैं तुम्हारे फोन का ही इन्तजार कर रहा था..
स्नेहा: और ये "जान" कौन है... तुम्हारी?

उसकी आवाज में बचपना और शरारत साफ़ झलक रही थी..

मैं: ये तो मैंने तुम्हे ही कहा, तुम्हे बुरा लगा क्या..
स्नेहा: नहीं...बुरा तो नहीं..पर पहली बार में ही तुम मुझे ऐसे...
मैं: मैं तो अपने सभी फ्रेंड्स को जान कहता हूँ...
स्नेहा (हँसते हुए): फिर ठीक है...तुम्हे पता था की मेरा फोन होगा इतनी सुबह
मैं: हाँ, दरअसल मैं तो कल रात को घर आने के बाद ही तुम्हारे फ़ोन का इन्तजार कर रहा था, कल नहीं आया तो मुझे पूरा यकीन था की आज सुबह तो जरुर आएगा..
स्नेहा: ओके....वैसे मैंने तुम्हे थेंक्स कहने को फोन किया है, मुझे तुम्हारा गिफ्ट बहुत पसंद आया, थेंक्स अ लोट..
मैं: यु आर वेल्कम
स्नेहा : अच्छा, तुम ये मेरा नंबर सेव कर लो, बाद में बात करुँगी, अभी तो कॉलेज जा रही हूँ...तुमने भी तो कॉलेज जाना होगा न..
मैं: हाँ, मैं सेव कर लूँगा, पर मेरे अभी एक्साम्स ख़त्म हुए हैं, इसलिए छुट्टी है आजकल, अगले महीने से जाऊंगा..तुम किस समय फ्री हो जाओगी, तब फ़ोन करूँगा.
स्नेहा : मैं तो २ बजे वापिस आउंगी, कॉलेज से, वहां फ़ोन ले जाना मना है, इसलिए फ़ोन तो घर पर ही रहेगा... दोपहर को बात करुँगी..जैसे ही आउंगी, मैं ही कर लुंगी तुम्हे..
मैं: ठीक है...बाय जान...
स्नेहा (हँसते हुए): या..बाय..

और उसने फोन रख दिया..

ओ तेरे की....ये तो खुद ही फंसने को तैयार है...वैसे मैंने उसी दिन, जब अंशिका के कॉलेज में जब फेस्ट था, देख लिया था की वो मुझे बड़ी अजीब से नजरों से देख रही है, पर तब मैंने सोचा की बच्ची है , इसलिए ज्यादा ध्यान नहीं दिया उस दिन, पर जब से उसे छत्त पर किस्स करते हुए देखा और अब मुझे सुबह-सुबह थेंक्स के बहाने से फ़ोन करा तो मैं समझ गया की उसके टीनएज दिल में मेरे लिए कुछ-कुछ होने लगा है. फ़ोन रखने के बाद मैंने देखा की मेरे मोबाइल पर दो मिस काल थी, अंशिका की, मैंने जल्दी से उसे नंबर मिलाया ही था की दोबारा उसका फ़ोन आ गया

अंशिका: हाय...गुड मोर्निंग...
मैं: हाय...

अंशिका: किससे बात कर रहे थे इतनी सुबह... (उसकी आवाज में थोड़ी जलन की भावना साफ़ झलक रही थी)
मैं: वो..मेरे एक फ्रेंड का फोन था, आज मूवी देखने का प्रोग्राम है, इसलिए इतनी सुबह फोने करके कन्फर्म कर रहा था..

अंशिका: और वो तुम्हारी दोस्त, पारुल भी जा रही है क्या ?

मैंने मजे लेने के लिए कहा हाँ...वो भी जा रही है, मैंने कहा था न की हमारे ग्रुप में ही है वो..

अंशिका: तुम नहीं जाओगे वहां..
मैं: क्यों भाई तुम तो मुझपर ऐसे हुक्म चला रही हो जैसे तुम मेरी बीबी हो...

अंशिका: बीबी नहीं हूँ तो क्या, उससे कम भी नहीं हूँ...

मुझे उसकी बात सुनकर काफी अच्छा लगा..

मैं: अरे बाबा, मैं तो मजाक कर रहा था, वो नहीं जा रही, सिर्फ मेरा दोस्त, निशांत और मैं ही जा रहे हैं..
अंशिका (रुआंसी सी होकर): तो तुम मुझे सुबह-सुबह सता रहे थे...हूँ..

वो शायद रो रही थी...मुझे बड़ा बुरा फील हुआ उसे सुबह-सुबह रुला कर..


मैं: सॉरी जान...मैं तो मजाक कर रहा था...अच्छा मुझे माफ़ कर दो, बोलो मैं क्या करूँ अपनी इस भूल को सुधारने के लिए..
अंशिका: मुझे किस्स करो.

मैं: मुआअह...ये लिप्स पर ....मुआः, ये तुम्हारी ब्रेस्ट पर. ठीक है..और वैसे ये तो बताओ, वो निशान अभी भी है क्या वहां...
अंशिका (हँसते हुए): हाँ है...और बड़ा क्यूट सा लग रहा है...आज नहाते हुए मैंने देखा शीशे में, व्हाईट कलर की ब्रेस्ट पर लाल सुर्ख निशान... है भगवान...मुझे तुमसे ये बाते करते हुए फिर से कुछ होने लगा है...ओके...बाय, मैं चलती हूँ, मुझे देर हो रही है..

और फिर उसने फ़ोन रख दिया..

ओ गोड...आज तो बाल बाल बचा...वो कितनी पोसेसिव है मेरे लिए, अगर उसे पता भी चल गया की मैं स्नेहा के साथ बात कर रहा हूँ तो मेरा उसकी चूत मारने का सपना सिर्फ सपना ही रह जाएगा, मैंने जल्दी से स्नेहा के नंबर को निकाला और उसे "संजय" के नाम से सेव कर दिया, जो की मेरा एक और दोस्त है, अगर कभी उसके सामने ही स्नेहा का फ़ोन आ गया तो कम से कम मैं बच तो जाऊंगा. मैं फिर सो गया, नो बजे मम्मी ने आकर उठाया और मैं नहाने गया, फिर अपने दोस्त निशांत को फ़ोन किया, उसे मूवी चलने को कहा पर उसने मना कर दिया.. वो अपने पापा के साथ कहीं जा रहा था.. मैं फिर घर के एक - दो काम करने के बाद कंप्यूटर पर बैठा और फेसबुक खोला, थोडा अपडेट किया और फिर एक दो पोर्न साईट देखी, स्टोरी पड़ी और फिर टीवी चला कर मूवी देखने लगा. तब तक दो बज गए, मैंने लंच किया ही था की मेरा फ़ोन बज उठा, देखा तो उसपर "संजय" लिखा था..यानी स्नेहा का फ़ोन था, मैं उसी का इन्तजार कर रहा था.

मैं: हाय..जान...कैसी हो..
स्नेहा (मंद ही मंद मुस्कुराते हुए): ठीक हूँ...डिस्टर्ब तो नहीं किया न मैंने..
मैं: नहीं रे..मैं तो वैसे ही बोर हो रहा था...
स्नेहा: तब ठीक है, जानते हो, आज मेरी सारी सहेलियां मुझसे कल के मिले गिफ्ट्स के बारे में पूछ रही थी, और जब मैंने उन्हें तुम्हारे बारे में और तुम्हारे दिए गिफ्ट के बारे में बताया तो वो मुझे टीस करने लगी और ना जाने क्या क्या कहने लगी..
मैं: अच्छा, क्या बोल रही थी वो..मेरे बारे में..बोलो न..
स्नेहा: नहीं...वो तो वैसे ही, उन्हें तो कोई टोपिक मिलना चाहिए...छोड़ो उसे..
मैं: नहीं मैं सुनना चाहता हूँ...क्या कह रही थी वो मेरे बारे में
स्नेहा (शर्माते हुए): वो...वो...कह रही थी...की...पूछ रही थी...की...तुम कैसे दिखते हो...क्या करते हो...वगेरह-वगेरह 
मैं: तो तुमने क्या कहा..?
स्नेहा :मैंने कह दिया, स्मार्ट है..गुड लूकिंग..कॉलेज में है...वोही सब जो मैं जानती हूँ तुम्हारे बारे में..
मैं: बस इतना ही...
स्नेहा :और क्या..तुमने मुझे अपने बारे में और कुछ बताया ही कहाँ है..
मैं: तुमने कभी मौका ही नहीं दिया..
स्नेहा :ठीक है, अब बता दो..
मैं: ऐसे नहीं...फ़ोन पर ये सब नहीं बताया जाता...
स्नेहा : पर मैं बाहर नहीं मिल सकती तुमसे..शाम तक मम्मी पापा आ जाते हैं, उसके बाद मेरे एक सर हैं, उनके घर जाना होता है, टूशन के लिए..पापा ही मुझे लेने और छोड़ने आते हैं, और फिर खाना वगेरह, बाद में होमवर्क और फिर सोना..बस इसी में सारा दिन निकल जाता है,
मैं: टूशन के लिए तुम बाहर क्यों जाती हो, घर पर ही किसी को बुला लिया करो..
स्नेहा : अरे..बहुत ट्राई किया...पर सभी बहुत पैसे मांगते हैं...
मैं: अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हे पड़ा सकता हूँ, घर आकर...
स्नेहा (खुश होते हुए) :क्या सच...वाव...तुम क्या प्रायवेट टूशन देते हो..
मैं: हाँ (मैंने झूठ बोला)
स्नेहा : फिर तो बड़ा अच्छा होगा...हम रोज मिल भी सकते हैं और खूब बातें भी कर सकते हैं..
मैं (शरारती लहजे में): सिर्फ बातें ही करोगी क्या? 
स्नेहा (सहमते हुए):क्या मतलब...?
मैं: मतलब, तुम इतनी नासमझ भी नहीं हो की मुझे तुम्हे हर बात बतानी पड़े..तुम क्या-क्या करती हो, वो तो मैंने उस दिन छत्त पर देख ही लिया था...
स्नेहा : वो....वो तो बस ऐसे ही...अंकित मेरा अच्छा फ्रेंड है, मेरी क्लास में ही है वो, हमारी क्लास में सभी ने कोई न कोई बॉय फ्रेंड बना रखा है, जिसका नहीं है, उसे सब चिड़ाते हैं...तुम समझ रहे हो न...पर मैंने उसे कभी भी किस्स के आलावा कुछ और नहीं करने दिया..अगर तुम्हे ये सब पसंद नहीं है तो मैं उसे छोड़ दूंगी...ठीक है..

मैं उसकी सिचुएशन समझ रहा था...और मुझे उसके बचपने पर हंसी भी आ रही थी..मैं तो बस उससे मजे ले रहा था..

मैं: वो तुम जानो...मुझे कोनसा तुम्हारा बॉय फ्रेंड बनना है...और तुम्हे किस्स करना है..

वो मेरी बात सुनकर कुछ न बोली

मैं: पर सच बोलू तो अभी तुम्हारी उम्र नहीं है ये सब करने की...
स्नेहा :तुम मेरे पापा की तरह ना बात करो, यु नो...वो मैंने जब अपने बर्थडे पर फ़ोन माँगा तो उन्होंने साफ़ मना कर दिया, और कहा की अभी मेरी फ़ोन रखने की उम्र नहीं है, वो तो मम्मी, जो मेरी सारी बात मानती है और मुझे सबसे ज्यादा प्यार करती है, उन्होंने ही पापा की बात ना मानते हुए, मुझे फ़ोन लाकर दिया..
मैं: यानी, तुम मम्मा'स बेबी हो...
हाँ :और मेरी मोम सबसे ज्यादा प्यारी है, इस दुनिया की बेस्ट मोम है वो...
मैं: तो तुम अपनी बेस्ट मोम से कहो की तुम्हे टूशन जाने में परेशानी होती है, घर पर ही टीचर का इंतजाम करो..
स्नेहा :वो तो मैं रोज कहती हूँ...पर मैं अब अपने मुंह से तो तुम्हारे बारे में उनसे नहीं कह सकती न..
मैं: उसकी फ़िक्र तुम ना करो...मैं कुछ करता हूँ...
स्नेहा :ठीक है...अच्छा अब मैं रखती हूँ...मुझे कपडे भी चेंज करने हैं...
मैं: ओह...अभी तक कपडे भी नहीं बदले...बड़ी जल्दी थी तुम्हे मुझसे बात करने की...हूँ...वैसे क्या पहना हुआ है तुमने...जिसे उतारने की इतनी जल्दी है..
स्नेहा :बदमाश...चुप करो...ऐसी बाते नहीं करते...ओके..बाय...मैं रखती हूँ..

और उसने हँसते हुए फोन रख दिया...
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RE: लवली फ़ोन सेक्स चैट - by playboy131 - 19-03-2020, 10:40 PM
RE: लवली फ़ोन सेक्स चैट - by sanskari_shikha - 14-09-2020, 09:16 PM



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