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Adultery लवली फ़ोन सेक्स चैट
#25
आंशिका:  तुम? अंदर कैसे आ गये? शरम नहीं आती तुम्हे? बाहर जाओ अभी के अभी.
मैं: क्यूँ तुम्हे क्या प्राब्लम है, तुम्हे जो करना है तुम करो, तुम्हारा कुछ ले रहा हूँ क्या मैं.

आंशिका:  यार प्लीज़ चले जाओ, कोई आ गया तो मेरी वाट लग जाएगी बुरी तरह.
मैं: चिंता मत करो मैं कुछ नहीं कर रहा, बस देखूँगा.

आंशिका:  तुम बड़े ज़िद्दी हो यार, आई डोंट लाईक इट.

ये बोलकर वो वापिस मिरर के सामने खड़ी होकर अपना मेकअप सही करने लगी. मैं: उसके पास मिरर की तरफ बेक करके स्लेब से सपोर्ट लेकर खड़ा हो गया और उसको निहारने लगा. उसने पल्लू हटाया हुआ था, उसके ब्लाउस में से उसकी क्लीवेज दिख रही थी, मैं उसे ही घूर रहा था. वो टेडी निगाहें करते हुए मेर्को देख कर मुस्करा रही थी.

आंशिका: तुम जैसा पागल इंसान कहीं नहीं देखा.
मैं: एक पागल और है मेरी टांगो के बीच.

आंशिका:  उसे तो मैं जानती हूँ.
मैं: अछा वो हू तुम्हे पूरी अच्छी तरह नहीं जानता.

आंशिका:  कोई नहीं, जान जाएगा एक दिन.
मैं: देखते हैं.

आंशिका:  बड़े गट्स हैं तुममे जो लॅडीस टाय्लेट में आ गये, आई एम् इंप्रेस्ड.
मैं: तुम्हारे लिए कहीं भी घुस सकता हूँ, जिससे तुम मे घुसा सकूँ.

आंशिका:  अछा, कोई ज़रूरा नहीं है ऐसी वैसी जगहों पर जाने की, ऐसे ही घुसा लेना, वैसे भी तुमने आज मेरा दिल जीत लिया इतना बड़ा काम करके.
मैं: दिल का क्या करूँ मुझे चूत चाहिए.

आंशिका:  हाँ , मिल जाएगी वो भी. वैसे तुमने इतना डेरिंग काम करा मेरे लिए, तुम्हारा इनाम तो बनता है.
मैं: क्या चूत दे रही हो?

आंशिका:  नहीं.

उसने मेरी तरफ फेस करा और अपना ब्लाउस ओपन करने लगी,

आंशिका:  सिर्फ़ दूर से ही देख लो, नो टचिंग नो सकिंग. तुम्हे नेट वाली ब्रा पसंद है ना? वही पहनकर आई हूँ.

उसने अपना ब्लाउस खोला और उसकी नेट वाली ब्रा में से झांकते उसके सफ़ेद मोटे मुम्मे देखकर मैं तो दांग रह गया.

मैं: माय गोड , उस रात तो अंधेरे में ढंग से देख नहीं पाया था, आज तो मस्त लग रही है यार तू एकदम, मस्त ब्रा है तेरी और चुचियाँ तो बस… यार प्लीस ब्रा ओपन कर, उस रात देख नहीं पाया था ब्रेस्ट ढंग से .

आंशिका:  नो, तुम फिर शुरू हो जाओगे,
मैं: पक्का नहीं, बस देखूँगा. प्लीज़

आंशिका:  ओक,

वो अपनी ब्रा भी ओपन करने लगी, मेरी साँसें तेज़ हो रही थी, दिल घोड़े से भी तेज़ दौड़ रहा था और लंड पूरा चूत की तरफ मुँह करे हुए था..उसने अपनी ब्रा ओपन करी और लेफ्ट चुचि बाहर निकाली ब्रा और ब्लाउस की साइड से.

मैं: देख कर दंग रह गया, इतनी सॉफ्ट ब्रेस्ट, इतने बड़े निप्पल , और ब्रेस्ट के उपर तिल. मेरे से रुका नहीं गया और मैने आगे बढ़कर उसकी ब्रेस्ट को ज़ोर से पकड़ लिया….

आंशिका:  हाआआअ , आराम से नहीं कर सकते... जंगल कहीं के. जल्दी सक करो नीचे जाना है फिर.
मैं: क्या बता है मेरी जान बड़ी जल्दी मान गयी .

आंशिका:  तुमसे रिक्वेस्ट करना तो बेकार है, करनी अपने मन की है तुम्हे, जल्दी करो अब.

मैने उसकी ब्रेस्ट दबाई ज़ोर से, उसकी निप्पल को मसला अपने अंगूठो से, मैं तो ऐसे में ही झड़ने वाला था, मैं जल्दी से उसकी निप्पल को मुँह में भरा और सक करने लगा, निपल मुँह से निकल गया, मैने फिर से उसे मुँह में भरा और चूसने लगा, फिर निकल गया, मैने इस बार निपल को दाँतों से पकड़ लिया और काट दिया.

आंशिका:  आ , पागल हो क्या, जानवर कहीं के, आराम से करो .
मैं: बार बार तंग कर रहा था भोसड़ी का. सो काट लिया.

आंशिका : अछा अब बस करो.
मैं: दूसरी चुचि भी एक बार सिर्फ़.

मैने साइड उसका ब्लाउस साइड करके उसकी राईट चुचि को भी बाहर निकाला ओर उस पर किस करने लगा.

आंशिका:  जल्दी करो, ये मज़े लेने का टाइम नहीं है इतना, जल्दी सक करो यार.

मैने उसका निपल मुँह में भरा और सक करने लगा, सच में इतना मज़ा लाइफ में कभी नहीं आया, जितना अभी रोशनी में चूसने करने में मज़ा आ रहा था उतना उस रात नहीं आया था, मैने उसके निपल को पूरा मुँह में भरा हुआ था और उसने अपनी आँखें बंद कर रखी थी, तभी उसने अपनी चुचि पकड़ कर खींची जिससे की उसका निपल मेरे मुँह से बाहर आ गया और पक की आवाज़ आई…

आंशिका:  बस बहुत हो गया अभी के लिए, मुझे जाना है, चल बाहर जाओ मुझे कपड़े ठीक करने दो.
मैं: अछा सिर्फ़ एक किस तो देदे.

आंशिका:  नहीं, लिपस्टिक खराब हो जाएगी, चलो बाहर जाओ अब
मैं: कुछ नहीं बोला और बाहर चला गया और उसका बाहर आने का इंतेज़ार करने लगा.

वो 5 मीं में बाहर आई और मुझे देख कर मुस्कुराने लगी.

मैं: बड़ा मुस्कुरा रही हो.
आंशिका:  तुम्हारे अन्दर के जानवर को शांत देख कर हँसी आ रही है.

मैं: अभी शांत कहाँ हुआ है, सिर्फ़ चूसने से शांति थोड़ी ना मिलती है. बल्कि और आग लग गयी है अब तो.
आंशिका:  फिर भी कुछ तो प्यास बुझी ना.

मैं: मेरी छोड़ो, अपनी बताओ, बड़े मज़े से चुस्वा रही थी. पहले तो बड़े ड्रामे कर रही थी की टच तक नहीं करना, ये वो..
अंशिका : तुम बातें ही ऐसी करते हो, सीधा टाय्लेट में ही आ गये, अब कोई मेरा इतना दीवाना हो उसे मैं कैसे खाली हाथ जाने दूं. तुम वैसे खुश तो हो ना? मज़ा आया ना?

मैं: बहुत आया मेरी जान, पर तूने करवा केसे लिया कॉलेज में.
आंशिका:  मन था देखने का कैसा फील होता है ऐसी जगह पर ये सब करने से.

मैं: तो दुबारा अंदर चलें, और फील कर लेना.
आंशिका:  तुम नीचे चलो अब, बदमाश लड़के.

हम नीचे ग्राउंड फ्लोर पर आ गये.

आंशिका:  अछा सुनो , मैं अब स्टेज के पीछे जा रही हूँ, काफ़ी कुछ मेनेज करना है, तुम अब अपने आप घूम लो, और हाँ मेरी स्पीच के टाइम हॉल में रहना ज़रूर, सुनना पूरी स्पीच मेरी.
मैं: यार मैं अकेला क्या करूँगा इतनी देर?

आंशिका:  हाँ , ये भी है, अछा रूको मेरी साथ आओ.

वो मुझे स्टाफ रूम की तरफ ले जाने लगी.

धीरे धीरे कॉलेज के स्टूडेंट्स आने स्टार्ट हुए, सेक्सी सेक्सी गर्ल्स आई, कोई मिनी ड्रेस में, कोई सूट में, कोई साडी में, तो कोई लो वेस्ट जीन्स में, कोई मोटे चुचियों के साथ, कोई फ्लॅट चेस्ट के साथ, कोई लंबी टाँगों के साथ तो कोई लंबी चोटी के साथ, किसी की थाइस बड़ी मस्त तो किसी की गांड, कोई सेक्सी आवाज़ में बोलती तो कोई रंडी की तरह हंसती, कोई घुरती तो कोई शर्मा के नज़रे ही नहीं मिला पाती. इतनी सारी लड़कियों को देख कर तो मेरी आँखें ठरक से भर गयी, पर साथ में ये दो बच्चे भी थे जिनकी वजह से किसी पर चान्स भी नहीं मार सकता था.

फिर हम सब ने हॉल में एंटर करा जहाँ फंक्शन होना था, हॉल काफ़ी बड़ा था हम सब सीट्स पर बैठ गये, अभी स्टूडेंट्स की स्ट्रेंथ थोड़ी कम थी तो अभी हॉल थोडा खाली था. हम तीनो मैं, स्नेहा और सचिन सीट्स पर बैठ गये आगे से तीसरी रो में जहाँ मोस्ट्ली टीचर्स और स्टाफ की फेमेलीस बैठी थी तो वहाँ तो ज़्यादातर भाभियाँ ही बैठी थी पर अनलकिली अभी तक कोई ढंग की नहीं बैठी थी और मैं वैसे भी स्नेहा और सचिन के बीच में बैठा था. थोड़ी देर में फंक्षन स्टार्ट हुआ, एक सेक्सी सी टीचर पिंक कलर की सारी में स्टेज पर आई हाथ में लंड जैसा माईक लेकर और उस लंड मतलब माईक को अपने मुंह के पास रख कर
बोली –

“स्टूडेंस प्लीज़ मेनटेन साइलेन्स, वी आर अबौट टू बिगिन ”

जैसे अभी साली की लाईव चुदाई होनी हो. फिर उस टीचर के जाने के बाद एक लड़का और लड़की स्टेज पर आए एंकरिंग के लिए, 5 मीं बोलने के बाद उन्होने आंशिका को बुलाया स्पीच केलिए, बस आंशिका का तो नाम सुनते ही मेरा लंड खड़ा हो गया. आंशिका स्टेज पर आई ब्लॅक सारी में बूब्स बाहर निकाल कर, हाथ में लंड जेसा माईक लेकर और अपनी छाती निकाल कर स्टेज पर खड़ी हो गयी और बोलना स्टार्ट करने लगी. सब लड़कों की वहाँ हॉल में उसकी छाती देख कर क्या हालत हो रही होगी हू बस मुझे ही पता है. फिर उसके बाद धीरे धीरे प्रोग्रॅम्स स्टार्ट होने लगे, लड़कियाँ आती अपनी मस्त मस्त गांद और चुचियाँ मटका के एक एक करके जाती. जैसे तैसे मेरा सब्र ख़तम हुआ, 5 घंटे उस फेस्ट में पकना पड़ा सिर्फ़ अंशिका के लिए, सब बाहर जाने लगे. सब के जाने के बाद, कॉलेज का स्टाफ भी घर जाने लगा और फिर सामने ने से मेरी जान आंशिका नज़र आई मुस्कुराते हुए आ रही थी वो मेरी तरफ और उसके पीछे किटी मेम भी आ रही थी मटक मटक के. आंशिका मेरे पास आते ही एक दम से बोली –

आंशिका:  तो बताओ कैसी थी मेरी स्पीच
मैं: (मैं बोलने वाला था गांड फाडू पर रुक गया) गेया… ग.ग.ग. गुड.

आंशिका:  इतना सोच कर क्यूँ बोल रहे हो? अच्छी नहीं थी ना?
मैं: अरे नहीं बाबा बहुत अच्छी थी, चाहे इन दोनों से पूछ लो (स्नेहा और सचिन)

स्नेहा & सचिन : हम मेम आपकी स्पीच बहुत अच्छी थी, आप बहुत अच्छी लग रही थी स्टेज पर.
मैं: देखा मैने कहा था ना.
आंशिका: (मुस्कुराने लगी)

किटी मेम : सो विशाल, कैसा लगा हुमारा फेस्ट? मज़े आए?
मैं: हाँ मेम , बहुत अछा था, हमने खूब एन्जॉय करा.
आंशिका:  किटी मेम मुझे पता है इसने क्या एंजाय्मेंट करी होगी

किटी मेम : हहेही, क्या मतलब तुम्हारा.
आंशिका:  लड़कियों को ही देखे जा रहा होगा बस हर टाइम
मैं: लो अब जो स्टेज पर पर्फॉर्म करने आएं तो उन्हे भी ना देखूं?

किटी मेम: हहेहहे, आंशिका तो क्या हुआ, यही तो उमर है बाद में तो एक से ही काम चलना पड़ेगा हमारी तरह…हहेहहे
आंशिका:  मेम आपको पता नहीं है, ये उनमें से नहीं है.
मैं: मैं कुछ बोल नहीं रहा हूँ इसका मतलब ये नहीं की तुम कुछ भी बोलती जाओगी.

किटी मेम: हे भगवान, तुम दोनो की लड़ाई फिर शुरू हो गयी, चलो बंद करो, अछा विशाल इन दोनो ने परेशान तो नहीं करा?
मैं: मेम इन दोनो ने तो बिल्कुल नहीं करा, आप इनसे पूछ लीजिए की कहीं मैने इन्हे परेशान तो नहीं करा?

किटी मेम: अरे नहीं नहीं, तुम थे तो इन्होने तुम्हारे साथ अटेंड भी कर लिया, वरना ये बोर ही हो जाते हैं… थॅंक्स यु वेरी मच इनका ध्यान रखने के लिए
आंशिका:  मेम इस के साथ कोई बोर नहीं हो सकता, इसकी तो पूरी गॅरेंटी है.
मैं: ओह थॅंक्स, तारीफ़ के लिए.

किटी: सो गाइस, अब चला जाए?
आंशिका:  हाँ मेर्को तो भूख भी लगी है बड़े ज़ोरो से मैं तो घर जा रही हूँ.
मैं: हाँ चलते हैं.

फिर हम एक दूसरे को बाइ करके वहाँ से निकल गये.
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RE: लवली फ़ोन सेक्स चैट - by playboy131 - 19-03-2020, 10:40 PM
RE: लवली फ़ोन सेक्स चैट - by sanskari_shikha - 27-08-2020, 09:57 PM



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