20-08-2020, 02:07 PM
दोपहर को मेरी नींद फोन की घंटी से टूटी उठकर देखा तो रीता थी ।मेने वाई फाई से सिंगल्स का स्विच ऑफ किया ताकि अमित ऑनलाइन नही देख सके और फोन उठाया,
रीता ,--हेलो डार्लिंग।
मैं ,--बोलो तुम दोनों भाई बहन ने मुझे डार्लिंग बना लिया है क्या।
रीता ,--अरे यार तुम एकदम मस्त औरत हो मज़ा आता है बात करने में।
मैं ,--मस्त का क्या मतलब हुआ रात भर भैया परेशान कर और दिन में बहन ।
रीता ,--तो नही करना चाहिए क्या ,तेरे जैसी मस्त आइटम को तो दिन रात प्यार करना चाहिए।
मैं ,--बहुत सयानी हो गयी चार ही दिन में।
रीता ,--सयानी हुए तो 4 साल हो गए पर सयानापन तो तुमने सिखाया है।
मैं,--ठीक है अब दोस्ती खत्म ,नही तो तू मुझे बदनाम करवा देगी की भाभी ने बिगाड़ा है।
रीता ,--वो तो है ही पर ये ननद अपनी भाभी को बदनाम नही उसके गुण गायेगी की ननद को ट्रेंड करने के अलावा उसकी चिंता भी अपनी छोटी बहन जैसे करती है।
मैं ,--साली ये बोलो ना कि चुत में अंगुली करने के तरीके सिखाती है ।
रीता ,--तो कोई उपाय कर दो जिससे अंगुली नही करनी पड़े।
मैं ,--तो बोल दो अपने पापा को की जल्दी से लण्ड का इंतजाम करवा दे।
रीता ,- ये अगर बोल सकती तो तुमको फोन थोड़े ही करती सीधे जाके बोल देती।
मैं ,--क्या बोलती की पापा मेरी चुत अब चुदने लायक हो गयी किसी बड़े से लण्ड वाले से शादी करवा दो।
रीता ,--तुम भी कितना मज़ाक करती हो जिस काम के लिए फोन किया वो तो भुला ही दिया ।
मैं ,--किस काम के लिए किया था ।
रीता ,--मेने अभी मम्मी की आलमारी चेक की है ।
में ,--क्यों मम्मी कही गयी हुई है क्या ।
रीता ,--बाजार गयी है शायद ।
में ,--शायद क्यों।
रीता ,--बोल के नही गयी बस इतना बोली कि थॉडी देर में आ रही हूँ।
मैं ,--तो तुमको समझ में नही आया क्या पहन के गयी है और ऐसे ही पड़ोस में गयी है या फिर बेग लेकर गयी है समान लाने।
रीता ,--अरे गयी तो तैयार होकर ही है पर बेग नही लिया पर्स जरूर था हाथ मे, हां पर नई साड़ी पहनी थी और सुंदर लग रही थी।
में मन में सोचने लगी कि जरूर किसी से चुदवाने गयी होगी तभी लेट से नहाई होंगी जिससे झांट वगेरह साफ करके तैयार हुई होगी और फिर मैकअप करके गयी है जिससे उसका यार जाते ही घोडी बना ले और फिर इस ने पूछा नही होगा अगर पूछती तो सत्संग या बाजार का बहाना बना देती।
रीता ,--क्या हुआ ।
मैं ,--अब तुम बोलोगी तब ना, कि अलमारी में क्या मिला ।
रीता ,--अलमारी में बहुत सारी सी डी पड़ी है जिन पर नाम नही लिखा है कुछ कंडोम थे दो तीन तरह के और एक किताब पड़ी है जिसमे न्यूड पिक्चर्स है ।
में ,--इसके अलावा कुछ नही है।
रीता ,--और तो कुछ नही है बस ब्रा पेंटी बहुत सारी है अलग अलग डिजाइन की।
मे मन मे फिर से सोचने लगी कि ब्रा पेंटी बहुत सारी होने का मतलब है कि जिस से चुदवाती होगी वो बहुत रंगीन मिज़ाज़ आदमी होगा जो रोज नई डिजाइन की ब्रा पेंटी पहनकर आने को बोलता होगा और सी डी जरूर पोर्न की होगी तभी बिना नाम की है और वो जरूर बैंगन या खीरा चुत में डालती होगी इसलिए डिल्डो नही मिला ।
मैं ,--चल ठीक है में सोचती हूँ।
रीता ,--जल्दी सोचना।
मैं ,--क्यों आज ही चुदने का मन है क्या।
रीता ,--नही इतनी भी जल्दी नही है ।
में ,--तेरी उम्र कितनी हो गयी ।
रीता ,--लगभग साढ़े बाइस साल।
में ,--तो अब क्या कुछ ही दिन में चुत में कांटे चुभने लग गए क्या जो एक आध महीना नही रुक सकती ।
रीता ,--अरे यार ये मेने कब कहा।
में ,--शादी शुदा से चुदवाएगी क्या।
रीता ,--कहीं तुम अमित भैया की बात तो नही कर रही हो।
में ,--तुमको अमित से चुदवाउंगी तो में क्या अंगुली डालूंगी क्या , अगर तुम चाहो तो मेरा एक दोस्त है ।
रीता ,--ठीक है कुछ समय दो सोचने का फिर बताती हूँ।
में ,--कोई जल्दी नही है आराम से बता देना ।
और फिर उसको बाय करके फोन काट दिया।
फोन काट कर मेने ड्रेस वाला बेग निकाला फिर देखने लगी कि क्या पहनूँ तभी मेने सोचा घर पर तो कोई है नही तो क्यों ना ये स्कर्ट और कमीज पहनूँ ।
इसलिए ब्रा पेंटी पहनने के बाद स्कर्ट और कमीज पहन लिया ।कमीज थॉडी टाइट थी बूब्स पर लेकिन ऊपर का एक बटन खोल कर देखा तो सही आ गयी ।लेकिन स्कर्ट के ऊपर ही खत्म हो जा रही थी और नीचे बटन नही होने से नाभि दिख रही थी, फिर स्कर्ट को देखा जो गाँड को कवर करने के साथ थॉडी सी झांघे कवर किये था ,।
जब ड्रेसिंग के सामने खड़ी हुई तो मुझे विस्वास नही हुआ कि ये में हूँ, ऐसा लग रहा था जैसे कोई कॉलेज गर्ल हूँ ।
फिर मेने सोचा कि क्यों ना बिना सिंदूर लगाए मैकअप करूं और अपना मंगल सूत्र निकाल कर बालों को खोल दिया फिर लिपस्टिक और काजल लगाया और खुद को देखा तो खुद को एक कॉलेज गर्ल जैसी फिलिंग मन में आई और फोन से कुछ सेल्फी लेकर सब को भेजी अमित के अलावा और कुछ खाने को किचन में आ गई ।
अपने लिए मैगी बनाई और सोफ़े पर बैठकर खाने लगी और जब मैगी खत्म हुई तो बेल बजी।
मेने सोचा इस ड्रेस में खोलू या नही तभी मन मे आया कि अपना घर है और अमित खुद चाहता है तो क्यों डरूं ।
और बाहर जाकर गेट खोला तो सामने सीमा खड़ी थी अपने बेटे को गोद मे लिए।
उसने देखते ही बोला ,--रेखा नही है क्या ।
मैं ,--कोन रेखा।
सीमा मुझे ऊपर से नीचे तक देखी और बोली ,--आवाज तो वही है पर लग नही रही तुम रेखा की छोटी बहन हो क्या।
मेने गेट बंद किया और जोर से हँसने लगी फिर बोली ,--क्यों में रेखा नही हो सकती क्या ।
सीमा ने सोफ़े पर अपने बेटे को सुलाया फिर एक बार फिर से युझे ऊपर से नीचे तक देखा और बोली ,--यार ना मांग में सिंदूर ,ना मंगलसूत्र और फिर स्कर्ट, में तो अभी भी कन्फ्यूज हूँ कि तुम ही रेखा हो जिसको साड़ी के सिवॉय किसी दुसरीं ड्रेस में देखा ही नही।
मैं ,--अब देख लिया ना।
सीमा ,--हम्म, पर विस्वास नही हो रहा ऐसा लग रहा है जैसे कोई कॉलेज गर्ल हो और फिर तुम्हारी कमर भी तो इतनी बडी नही है मस्त लग रही हो ।
में ,--यार वो संडे को अमित ने जबरदस्ती खरीद ली वो भी मेरे पीठ पीछे, तो सोचा अभी अकेली हूँ पहन का देखती हूँ ।
सीमा ,--देख ले और एक कॉलेज बैग टांग ले फिर उसने मेरे कमीज का एक ऊपर का बटन खोला और बोली ऐसे चली जा किसी कॉलेज में सारे लड़के तुमको देख कर सिटीयां बजाने लगेंगे और टीचर तो तुमको फ्री कोचिंग दे देंगे ।
मैं ,--बस बहुत मक्खन लगा लिया अब बैठ भी जा कितनी देर खड़ी रहेगी।
सीमा ,--रुक एक फोटो ले लूं इस लड़की की।
मैं ,--रूक मेरे फोन से लो में भी देखूं कैसी लग रही हूँ।
सीमा ,--ठीक है ला दे।
फिर उसने मेरी फोटो ली और बोली कि कुर्सी पर बैठ और जब कुर्सी पर बैठी तो फोटो लेकर बोली मस्त साइज लिया है स्कर्ट का अगर एक इंच कम होता तो तेरी पेंटी दिखने लगती ।
में उठने लगी तो बोली रूक कोई बुक हाथ मे पकड़ फिर जो देखेगा वो बोलेगा की कोई मेट्रिक की छात्रा होगी ।फिर पास में पड़ी अमित की डायरी मुझे पकड़ाई और फोटो लेने लगी ।
जब उसने मुझे फोन दिया तो में खुद हैरान हो गयी कि में हर एंगल से एक कॉलेजी छात्रा की तरह लग रही थी और में अपने आप को खोज रही थी जो शादीशुदा है और पिछले तीन साल से ज्यादा टाइम से चार लण्ड इस चुत और गाँड में ले चुकी बस बूब्स थोड़े से बड़े थे जो किसी किसी के बिना मसलवाये भी होते है ।
मेने उसमे से दो फोटो अमित को भेजे और फिर सोफ़े पर सीमा के पास बैठ गयी।
मैं ,--तुम क्या पियोगी चाय या कॉफी।
सीमा ,--देखो आज के बाद दुबारा ये मत पूछना में कोई दूर से चलकर आयी हूँ क्या, जो फॉरमैलिटी पूरा कर रही हो अपना घर है जब जरूरत होगी बोल दूँगी, नही तो खुद ले लुंगी अभी कमला होती तो बात अलग थी लेकिन तुम किचन में जाओगी और में अकेली बैठी रहूंगी ।
मैं ,-ठीक है आज कैसे आना हुआ वो भी तनु को लेकर पहली बार।
सीमा ,--तुम्हारी वजह से ही आयी हूँ।
मैं ,--मेरी वजह से क्यों ।
सीमा ,--पता नही कमला तुमको क्या ट्रेनिंग दे रही है पूरी गरम थी मेरे को रिकवेस्ट करने लगी कि मुझे दीनू काका से चुदवा दो ।
मैं ,--तो वो खुद ही चली जाती उनके पास।
सीमा,--अरे वो पूरी चुड़कड है और दिनु काका भाव खाता है इसलिये मुझे बुलाना पड़ा दीनू काका को।
मैं ,--तो तुमको क्या जरूरत थी ऊपर आने की।
सीमा ,--दोनों ने पूरा घर सर पर उठा रखा होगा फिर मेरी भी इच्छा हो जाती ।
में ,--तो तुम भी लग जाती।
सीमा ,--पर वो कुछ बाकी छोड़ती तब ना वो अकेली ही दिनु काका को चूस लेती तो में क्या खाती इसलिये सोचा कि दोनों को छोड़कर चलती हूँ ऊपर और फिर तनु भी रोने लगता तो बीच मे डिस्टर्ब होता इसलिए साथ ले आयी कि यहां सो जाएगा।
मै ,--चलो अच्छा किया में भी अकेली बोर हो जाती हूं ।
तभी सीमा की नजर मेरे स्कर्ट पर गयी और बोली ,--यार मानना पड़ेगा अमित की पसंद को क्या स्कर्ट खरीदा है थोड़ा। सा हिलते ही पेंटी दिखने लगती है ।
मेंने झुक कर देखा तो पेंटी में से चुत का पूरा सेप दिख रहा था इसलिए स्कर्ट ठीक करने लगी तो सीमा बोली ,--क्या यार मुझे तो पूरा चुदवाते देख लिया और खुद शरमा रही हो ,बी कूल।
तभी फोन बजने लगा जिसपर जानू डिसप्ले हो रहा था जिसे देखकर सीमा बोली,-- ले लो पर जल्दी से निपटा देना।
रीता ,--हेलो डार्लिंग।
मैं ,--बोलो तुम दोनों भाई बहन ने मुझे डार्लिंग बना लिया है क्या।
रीता ,--अरे यार तुम एकदम मस्त औरत हो मज़ा आता है बात करने में।
मैं ,--मस्त का क्या मतलब हुआ रात भर भैया परेशान कर और दिन में बहन ।
रीता ,--तो नही करना चाहिए क्या ,तेरे जैसी मस्त आइटम को तो दिन रात प्यार करना चाहिए।
मैं ,--बहुत सयानी हो गयी चार ही दिन में।
रीता ,--सयानी हुए तो 4 साल हो गए पर सयानापन तो तुमने सिखाया है।
मैं,--ठीक है अब दोस्ती खत्म ,नही तो तू मुझे बदनाम करवा देगी की भाभी ने बिगाड़ा है।
रीता ,--वो तो है ही पर ये ननद अपनी भाभी को बदनाम नही उसके गुण गायेगी की ननद को ट्रेंड करने के अलावा उसकी चिंता भी अपनी छोटी बहन जैसे करती है।
मैं ,--साली ये बोलो ना कि चुत में अंगुली करने के तरीके सिखाती है ।
रीता ,--तो कोई उपाय कर दो जिससे अंगुली नही करनी पड़े।
मैं ,--तो बोल दो अपने पापा को की जल्दी से लण्ड का इंतजाम करवा दे।
रीता ,- ये अगर बोल सकती तो तुमको फोन थोड़े ही करती सीधे जाके बोल देती।
मैं ,--क्या बोलती की पापा मेरी चुत अब चुदने लायक हो गयी किसी बड़े से लण्ड वाले से शादी करवा दो।
रीता ,--तुम भी कितना मज़ाक करती हो जिस काम के लिए फोन किया वो तो भुला ही दिया ।
मैं ,--किस काम के लिए किया था ।
रीता ,--मेने अभी मम्मी की आलमारी चेक की है ।
में ,--क्यों मम्मी कही गयी हुई है क्या ।
रीता ,--बाजार गयी है शायद ।
में ,--शायद क्यों।
रीता ,--बोल के नही गयी बस इतना बोली कि थॉडी देर में आ रही हूँ।
मैं ,--तो तुमको समझ में नही आया क्या पहन के गयी है और ऐसे ही पड़ोस में गयी है या फिर बेग लेकर गयी है समान लाने।
रीता ,--अरे गयी तो तैयार होकर ही है पर बेग नही लिया पर्स जरूर था हाथ मे, हां पर नई साड़ी पहनी थी और सुंदर लग रही थी।
में मन में सोचने लगी कि जरूर किसी से चुदवाने गयी होगी तभी लेट से नहाई होंगी जिससे झांट वगेरह साफ करके तैयार हुई होगी और फिर मैकअप करके गयी है जिससे उसका यार जाते ही घोडी बना ले और फिर इस ने पूछा नही होगा अगर पूछती तो सत्संग या बाजार का बहाना बना देती।
रीता ,--क्या हुआ ।
मैं ,--अब तुम बोलोगी तब ना, कि अलमारी में क्या मिला ।
रीता ,--अलमारी में बहुत सारी सी डी पड़ी है जिन पर नाम नही लिखा है कुछ कंडोम थे दो तीन तरह के और एक किताब पड़ी है जिसमे न्यूड पिक्चर्स है ।
में ,--इसके अलावा कुछ नही है।
रीता ,--और तो कुछ नही है बस ब्रा पेंटी बहुत सारी है अलग अलग डिजाइन की।
मे मन मे फिर से सोचने लगी कि ब्रा पेंटी बहुत सारी होने का मतलब है कि जिस से चुदवाती होगी वो बहुत रंगीन मिज़ाज़ आदमी होगा जो रोज नई डिजाइन की ब्रा पेंटी पहनकर आने को बोलता होगा और सी डी जरूर पोर्न की होगी तभी बिना नाम की है और वो जरूर बैंगन या खीरा चुत में डालती होगी इसलिए डिल्डो नही मिला ।
मैं ,--चल ठीक है में सोचती हूँ।
रीता ,--जल्दी सोचना।
मैं ,--क्यों आज ही चुदने का मन है क्या।
रीता ,--नही इतनी भी जल्दी नही है ।
में ,--तेरी उम्र कितनी हो गयी ।
रीता ,--लगभग साढ़े बाइस साल।
में ,--तो अब क्या कुछ ही दिन में चुत में कांटे चुभने लग गए क्या जो एक आध महीना नही रुक सकती ।
रीता ,--अरे यार ये मेने कब कहा।
में ,--शादी शुदा से चुदवाएगी क्या।
रीता ,--कहीं तुम अमित भैया की बात तो नही कर रही हो।
में ,--तुमको अमित से चुदवाउंगी तो में क्या अंगुली डालूंगी क्या , अगर तुम चाहो तो मेरा एक दोस्त है ।
रीता ,--ठीक है कुछ समय दो सोचने का फिर बताती हूँ।
में ,--कोई जल्दी नही है आराम से बता देना ।
और फिर उसको बाय करके फोन काट दिया।
फोन काट कर मेने ड्रेस वाला बेग निकाला फिर देखने लगी कि क्या पहनूँ तभी मेने सोचा घर पर तो कोई है नही तो क्यों ना ये स्कर्ट और कमीज पहनूँ ।
इसलिए ब्रा पेंटी पहनने के बाद स्कर्ट और कमीज पहन लिया ।कमीज थॉडी टाइट थी बूब्स पर लेकिन ऊपर का एक बटन खोल कर देखा तो सही आ गयी ।लेकिन स्कर्ट के ऊपर ही खत्म हो जा रही थी और नीचे बटन नही होने से नाभि दिख रही थी, फिर स्कर्ट को देखा जो गाँड को कवर करने के साथ थॉडी सी झांघे कवर किये था ,।
जब ड्रेसिंग के सामने खड़ी हुई तो मुझे विस्वास नही हुआ कि ये में हूँ, ऐसा लग रहा था जैसे कोई कॉलेज गर्ल हूँ ।
फिर मेने सोचा कि क्यों ना बिना सिंदूर लगाए मैकअप करूं और अपना मंगल सूत्र निकाल कर बालों को खोल दिया फिर लिपस्टिक और काजल लगाया और खुद को देखा तो खुद को एक कॉलेज गर्ल जैसी फिलिंग मन में आई और फोन से कुछ सेल्फी लेकर सब को भेजी अमित के अलावा और कुछ खाने को किचन में आ गई ।
अपने लिए मैगी बनाई और सोफ़े पर बैठकर खाने लगी और जब मैगी खत्म हुई तो बेल बजी।
मेने सोचा इस ड्रेस में खोलू या नही तभी मन मे आया कि अपना घर है और अमित खुद चाहता है तो क्यों डरूं ।
और बाहर जाकर गेट खोला तो सामने सीमा खड़ी थी अपने बेटे को गोद मे लिए।
उसने देखते ही बोला ,--रेखा नही है क्या ।
मैं ,--कोन रेखा।
सीमा मुझे ऊपर से नीचे तक देखी और बोली ,--आवाज तो वही है पर लग नही रही तुम रेखा की छोटी बहन हो क्या।
मेने गेट बंद किया और जोर से हँसने लगी फिर बोली ,--क्यों में रेखा नही हो सकती क्या ।
सीमा ने सोफ़े पर अपने बेटे को सुलाया फिर एक बार फिर से युझे ऊपर से नीचे तक देखा और बोली ,--यार ना मांग में सिंदूर ,ना मंगलसूत्र और फिर स्कर्ट, में तो अभी भी कन्फ्यूज हूँ कि तुम ही रेखा हो जिसको साड़ी के सिवॉय किसी दुसरीं ड्रेस में देखा ही नही।
मैं ,--अब देख लिया ना।
सीमा ,--हम्म, पर विस्वास नही हो रहा ऐसा लग रहा है जैसे कोई कॉलेज गर्ल हो और फिर तुम्हारी कमर भी तो इतनी बडी नही है मस्त लग रही हो ।
में ,--यार वो संडे को अमित ने जबरदस्ती खरीद ली वो भी मेरे पीठ पीछे, तो सोचा अभी अकेली हूँ पहन का देखती हूँ ।
सीमा ,--देख ले और एक कॉलेज बैग टांग ले फिर उसने मेरे कमीज का एक ऊपर का बटन खोला और बोली ऐसे चली जा किसी कॉलेज में सारे लड़के तुमको देख कर सिटीयां बजाने लगेंगे और टीचर तो तुमको फ्री कोचिंग दे देंगे ।
मैं ,--बस बहुत मक्खन लगा लिया अब बैठ भी जा कितनी देर खड़ी रहेगी।
सीमा ,--रुक एक फोटो ले लूं इस लड़की की।
मैं ,--रूक मेरे फोन से लो में भी देखूं कैसी लग रही हूँ।
सीमा ,--ठीक है ला दे।
फिर उसने मेरी फोटो ली और बोली कि कुर्सी पर बैठ और जब कुर्सी पर बैठी तो फोटो लेकर बोली मस्त साइज लिया है स्कर्ट का अगर एक इंच कम होता तो तेरी पेंटी दिखने लगती ।
में उठने लगी तो बोली रूक कोई बुक हाथ मे पकड़ फिर जो देखेगा वो बोलेगा की कोई मेट्रिक की छात्रा होगी ।फिर पास में पड़ी अमित की डायरी मुझे पकड़ाई और फोटो लेने लगी ।
जब उसने मुझे फोन दिया तो में खुद हैरान हो गयी कि में हर एंगल से एक कॉलेजी छात्रा की तरह लग रही थी और में अपने आप को खोज रही थी जो शादीशुदा है और पिछले तीन साल से ज्यादा टाइम से चार लण्ड इस चुत और गाँड में ले चुकी बस बूब्स थोड़े से बड़े थे जो किसी किसी के बिना मसलवाये भी होते है ।
मेने उसमे से दो फोटो अमित को भेजे और फिर सोफ़े पर सीमा के पास बैठ गयी।
मैं ,--तुम क्या पियोगी चाय या कॉफी।
सीमा ,--देखो आज के बाद दुबारा ये मत पूछना में कोई दूर से चलकर आयी हूँ क्या, जो फॉरमैलिटी पूरा कर रही हो अपना घर है जब जरूरत होगी बोल दूँगी, नही तो खुद ले लुंगी अभी कमला होती तो बात अलग थी लेकिन तुम किचन में जाओगी और में अकेली बैठी रहूंगी ।
मैं ,-ठीक है आज कैसे आना हुआ वो भी तनु को लेकर पहली बार।
सीमा ,--तुम्हारी वजह से ही आयी हूँ।
मैं ,--मेरी वजह से क्यों ।
सीमा ,--पता नही कमला तुमको क्या ट्रेनिंग दे रही है पूरी गरम थी मेरे को रिकवेस्ट करने लगी कि मुझे दीनू काका से चुदवा दो ।
मैं ,--तो वो खुद ही चली जाती उनके पास।
सीमा,--अरे वो पूरी चुड़कड है और दिनु काका भाव खाता है इसलिये मुझे बुलाना पड़ा दीनू काका को।
मैं ,--तो तुमको क्या जरूरत थी ऊपर आने की।
सीमा ,--दोनों ने पूरा घर सर पर उठा रखा होगा फिर मेरी भी इच्छा हो जाती ।
में ,--तो तुम भी लग जाती।
सीमा ,--पर वो कुछ बाकी छोड़ती तब ना वो अकेली ही दिनु काका को चूस लेती तो में क्या खाती इसलिये सोचा कि दोनों को छोड़कर चलती हूँ ऊपर और फिर तनु भी रोने लगता तो बीच मे डिस्टर्ब होता इसलिए साथ ले आयी कि यहां सो जाएगा।
मै ,--चलो अच्छा किया में भी अकेली बोर हो जाती हूं ।
तभी सीमा की नजर मेरे स्कर्ट पर गयी और बोली ,--यार मानना पड़ेगा अमित की पसंद को क्या स्कर्ट खरीदा है थोड़ा। सा हिलते ही पेंटी दिखने लगती है ।
मेंने झुक कर देखा तो पेंटी में से चुत का पूरा सेप दिख रहा था इसलिए स्कर्ट ठीक करने लगी तो सीमा बोली ,--क्या यार मुझे तो पूरा चुदवाते देख लिया और खुद शरमा रही हो ,बी कूल।
तभी फोन बजने लगा जिसपर जानू डिसप्ले हो रहा था जिसे देखकर सीमा बोली,-- ले लो पर जल्दी से निपटा देना।