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Adultery शर्मिली भाभी
#36
कमरे के अंदर का दृष्य अब और भी उत्तेजक हो चुका था,मैने देखा कि रश्मी अब वापस पलंग की तरफ़ जा रही है अपने नाईट गाउन को पहनने के लिये और वो पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी,इतनी देर में उसने अपनी पेन्टी भी उतार फ़ेंकी थी। उसकी पूरी तरह से अनावृत निर्वस्त्र बड़ी बड़ी भरपूर गोलाईयों वाली मांसल गांड़ चलते समय बड़े मोहक अंदाज मे हील रही थी। मै कुछ क्षण के लिये उसकी उत्तेजक गांड़ की अंतहीन दरार में खो गया।अब मेंरा हाथ धीरे धीरे अपने लंड़ पर आगे पीछे सरकने लगा और मैं रश्मी के नंगे जिस्म को देखते हुए मुठ्ठ मारने लगा। तभी अचानक उसके कमरे में फ़ोन बज उठा, फ़ोन की घंटी सुन कर उसके बढते कदम रुक गए और वो वहीं ठिठक कर खड़ी हो गई। शायद वो ये अंदाज लगाने की कोशीश कर रही थी इस वक्त किस्का फ़ोन हो सकता है। कहीं गाउन पहनने के चक्कर में फ़ोन बंद न हो जाय ये सोच कर तुरंत पलटी और उसके पलटते ही मेरे पूरे शरीर में हजारों वाट का करंट दौड़ गया, कितनी खूबसूरत नंगी थी मेंरी रश्मी भाभी। वो उसी तरह नंगी ही दौड़ते हुए t.v. की तरफ़ दौड़ी,फ़ोन वहीं रखा था उसके उपर। भाभी जब नंगी दौड़ कर फ़ोन की तरफ़ आ रही थी तो उसके दोनो वक्ष बुरी तरह से उछल रहे थे और एक दूसरे से टकरा रहे थे,ऎसा दृष्य को देख कर मेंरे मन में हाहाकार मच गया और मैं उत्तेजना के अत्यधिक आवेश में कूलर को ही अपने आगोश में लेकर उसे चुमने लगा।अंदर नंगी भाभी और बाहर उसका नंगा देवर दिवाना। दोनों ही अपने अपने कारणॊ से अधूरे और प्यासे थे। देवर तो पहले से ही पागल हो चुका था और रश्मी की बुर चोदने के लिये तड़फ़ रहा था, और रश्मी उसे अभी और थोड़ी चिंगारी और वज्रपात की जरुरत थी अपने ही देवर के साथ अवैध संबंध बनाने के लिये।

औरत दो ही कारणों से अपनी लक्षमण रेखा को लांघती है पहला यदी पति इस लायक है तो वो उसे बचाने के लिये अपने घर की दहलीज लांघ कर यम के दरबार से भी अपने पति के प्राण वापस ले आती है और दूसरा यदि वो नालायक है और उसके मनोभावों को नहीं समझता तब वो इस दिवार को लांघ कर लाती है अपना यार और फ़िर शुरु होता है पति-पत्नी और "वो" का अंतहीन सिलसिला । रश्मी के लिये राज अभी तक दूसरे दर्जे वाला ही पति ही साबित हुआ था । उसकी शादी जरुर हुई थी और उसे एक बड़े घर की बहू होने का पूरा सम्मान भी मिला था अपने ससुराल से और समाज से लेकिन पति के जिस प्यार के लिये स्त्री यम से भी लड़ने का साहस जुटा लेती है उसका एक अंश भी राज उसे नहीं दे पाया था और न ही उसके पास इसके लिये समय था और न उसकी इतनी समझ थी। पति की इस बेरुखी से उपजे खालीपन ने रश्मी को शर्मिली से गूंगी भी बना दिया था। तुषार ने रश्मी के इस खालीपन को पकड़ लिया था और इसीलिये इस गदराइ हसीना की बुर चोदने के लिये पागल था।

रश्मी नंगी फ़ोन के पास आ कर खड़ी हो गई, मेंरी नजर उसकी चूत पर गई, आहहहह क्या रसीली चूत पाई थी मेंरी जान ने । पूरे जतन से रखती थी वो उसे, पूरी तरह से क्लीन शेव चूत थी उसकी । मुझे उसकी खुबसूरत चूत की दरार साफ़ दिखाई दे रही थी। उसकी चूत की दोनों फ़ांके उभार लिये हुए थी और उसके उपर का हिस्सा भी अपने उभार के के कारण दूर से ही साफ़ दिखई दे रहा था, उसे देखकर मैं अपने होठों पर जीभ घुमाने लगा और उसकी मादक चूत का स्वाद महसूस करने का प्रयास करने लगा। मेंरा बदन तो अब भट्टी की तरह तप चुका था, काम के आवेश में मैं अब तेजी से अपने लण्ड़ को हिलाने लगा। मेंरे अपने घर में ही मेंरे लण्ड़ के लिये इतना सुंदर खिलौना मौजूद था और फ़िर भी मै उससे खेल नहीं पा रहा था, मुझे अपने दुर्भाग्य पर बड़ा ही क्रोध आ रहा था।

उसने फ़ोन उठाया और बोला हेल्लो| सामने राज था
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी  हम अकेले हैं.



thanks
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RE: शर्मिली भाभी - by neerathemall - 13-08-2020, 02:22 PM



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